चीर हरण

खाण्डव वन के दहन के समय अर्जुन ने मय दानव को अभय दान दे दिया था। इससे कृतज्ञ हो कर मय दानव ने अर्जुन से कहा, "हे कुन्तीनन्दन! आपने मेरे प्राणों की रक्षा की है अतः आप आज्ञा दें, मैं आपकी क्या सेवा करूँ?" अर्जुन ने उत्तर दिया, "मैं किसी बदले की भावना से उपकार नहीं करता, किन्तु यदि तुम्हारे अन्दर सेवा भावना है तो तुम श्रीकृष्ण की सेवा करो।" मयासुर के द्वारा किसी प्रकार की सेवा की आज्ञा माँगने पर श्री कृष्ण ने उससे कहा, "हे दैत्यश्रेष्ठ! तुम युधिष्ठिर की सभा हेतु ऐसे भवन का निर्माण करो जैसा कि इस पृथ्वी पर अभी तक न निर्मित हुआ हो।" मयासुर ने श्री कृष्ण की आज्ञा का पालन करके एक अद्वितीय भवन का निर्माण कर दिया। इसके साथ ही उसने पाण्डवों को देवदत्त शंख, एक वज्र से भी कठोर रत्नजटित गदा तथा मणिमय पात्र भी भेंट किया।
कुछ काल पश्चात् धर्मराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यज्ञ के आयोजन के पहले भीम के द्वारा जरासंध का वध हुआ एवं यज्ञ के दौरान शिशुपाल का वध हुआ। यज्ञ के समाप्त हो जाने के बाद भी कौरव राजा दुर्योधन अपने भाइयों के साथ युधिष्ठिर के अतिथि बने रहे। एक दिन दुर्योधन ने मय दानव के द्वारा निर्मित राजसभा को देखने की इच्छा प्रदर्शित की जिसे युधिष्ठिर ने सहर्ष स्वीकार किया। दुर्योधन उस सभा भवन के शिल्पकला को देख कर आश्चर्यचकित रह गया। मय दानव ने उस सभा भवन का निर्माण इस प्रकार से किया था कि वहाँ पर अनेक प्रकार के भ्रम उत्पन्न हो जाते थे जैसे कि स्थल के स्थान पर जल, जल के स्थान पर स्थल, द्वार के स्थान दीवार तथा दीवार के स्थान पर द्वार दृष्टिगत होता था। दुर्योधन को भी उस भवन के अनेक स्थानों में भ्रम हुआ तथा उपहास का पात्र बनना पड़ा, यहाँ तक कि उसका उपहास करते हुये द्रौपदी ने कह दिया कि अन्धों के अन्धे ही होते हैं। दुर्योधन अपने उपहास से पहले से ही जला-भुना किन्तु द्रौपदी के कहे गये वचन उसे चुभ गये।

1. द्यूत-क्रीड़ा
हस्तिनापुर लौटते समय शकुनि ने दुर्योधन से कहा, "भाँजे! इन्द्रप्रस्थ के सभा भवन में तुम्हारा जो अपमान हुआ है उससे मुझे अत्यन्त दुःख हुआ है। तुम यदि अपने इस अपमान का प्रतिशोध लेना चाहते हो तो अपने पिता धृतराष्ट्र से अनुमति ले कर युधिष्ठिर को द्यूत-क्रीड़ा जुआ खेलने के लिये आमन्त्रित कर लो। युधिष्ठिर द्यूत-क्रीड़ा का प्रेमी है, अतएव वह तुम्हारे निमन्त्रण पर वह अवश्य ही आयेगा और तुम तो जानते ही हो कि पासे के खेल में मुझ पर विजय पाने वाला त्रिलोक में भी कोई नहीं है। पासे के दाँव में हम पाण्डवों का सब कुछ जीत कर उन्हें पुनः दरिद्र बना देंगे।"
हस्तिनापुर पहुँच कर दुर्योधन सीधे अपने पिता धृतराष्ट्र के पास गया और उन्हें अपने अपमानों के विषय में विस्तारपूर्वक बताकर अपनी तथा मामा शकुनि की योजना के विषय में भी बताया और युधिष्ठिर को द्यूत-क्रीड़ा के लिये आमन्त्रित करने की अनुमति माँगी। थोड़ा-बहुत आनाकनी करने के पश्चात् धृतराष्ट्र ने दुर्योधन को अपनी अनुमति दे दी। युधिष्ठिर को उनके भाइयों तथा द्रौपदी के साथ हस्तिनापुर बुलवा लिया गया। अवसर पाकर दुर्योधन ने युधिष्ठिर के साथ द्यूत-क्रीड़ा का प्रस्ताव रखा जिसे युधिष्ठिर ने स्वीकाकर लिया।
पासे का खेल आरम्भ हुआ। दुर्योधन की ओर से मामा शकुनि पासे फेंकने लगे। युधिष्ठिर जो कुछ भी दाँव पर लगाते थे उसे हार जाते थे। अपना समस्त राज्य तक को हार जाने के बाद युधिष्ठिर ने अपने भाइयों को भी दाँव पर लगा दिया और शकुनि धूर्तता करके इस दाँव को भी जीत गया। यह देख कर भीष्म, द्रोण, विदुर आदि ने इस जुए का बन्द कराने का प्रयास किया किन्तु असफल रहे। अब युधिष्ठिर ने स्वयं अपने आप को दाँव पर लगा दिया और शकुनि की धूर्तता से फिर हार गये।
राज-पाट तथा भाइयों सहित स्वयं को भी हार जाने पर युधिष्ठिर कान्तिहीन होकर उठने लगे तो शकुनि ने कहा, "युधिष्ठिर! अभी भी तुम अपना सब कुछ वापस जीत सकते हो। अभी द्रौपदी तुम्हारे पास दाँव में लगाने के लिये शेष है। यदि तुम द्रौपदी को दाँव में लगा कर जीत गये तो मैं तुम्हारा हारा हुआ सब कुछ तुम्हें लौटा दूँगा।" सभी तरह से निराश युधिष्ठिर ने अब द्रौपदी को भी दाँव में लगा दिया और हमेशा की तरह हार गये।

2. चीर हरण
अपनी इस विजय को देख कर दुर्योधन उन्मत्त हो उठा और विदुर से बोला, "द्रौपदी अब हमारी दासी है, आप उसे तत्काल यहाँ ले आइये।"
नीच दुर्योधन के वचन सुन कर विदुर तिलमिला कर बोले, "दुष्ट! धर्मराज युधिष्ठिर की पत्नी दासी बने, ऐसा कभी सम्भव नहीं हो सकता। ऐसा प्रतीत होता है कि तेरा काल निकट है इसीलिये तेरे मुख से ऐसे वचन निकल रहे हैं।" परन्तु दुष्ट दुर्योधन ने विदुर की बातों की ओर कुछ भी ध्यान नहीं दिया और द्रौपदी को सभा में लाने के लिये अपने एक सेवक को भेजा। वह सेवक द्रौपदी के महल में जाकर बोला, "महारानी! धर्मराज युधिष्ठिर कौरवों से जुआ खेलते हुये सब कुछ हार गये हैं। वे अपने भाइयों को भी आपके सहित हार चुके हैं, इस कारण दुर्योधन ने तत्काल आपको सभा भवन में बुलवाया है।" द्रौपदी ने कहा, "सेवक! तुम जाकर सभा भवन में उपस्थित गुरुजनों से पूछो कि ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना चाहिये?" सेवक ने लौट कर सभा में द्रौपदी के प्रश्न को रख दिया। उस प्रश्न को सुन कर भीष्म, द्रोण आदि वृद्ध एवं गुरुजन सिर झुकाये मौन बैठे रहे।
यह देख कर दुर्योधन ने दुःशासन को आज्ञा दी, "दुःशासन! तुम जाकर द्रौपदी को यहाँ ले आओ।" दुर्योधन की आज्ञा पाकर दुःशासन द्रौपदी के पास पहुँचा और बोला, "द्रौपदी! तुम्हें हमारे महाराज दुर्योधन ने जुए में जीत लिया है। मैं उनकी आज्ञा से तुम्हें बुलाने आया हूँ।" यह सुन कर द्रौपदी ने धीरे से कहा, "दुःशासन! मैं रजस्वला हूँ, सभा में जाने योग्य नहीं हूँ क्योंकि इस समय मेरे शरीपर एक ही वस्त्र है।" दुःशासन बोला, "तुम रजस्वला हो या वस्त्रहीन, मुझे इससे कोई प्रयोजन नहीं है। तुम्हें महाराज दुर्योधन की आज्ञा का पालन करना ही होगा।" उसके वचनों को सुन कर द्रौपदी स्वयं को वचाने के लिये गांधारी के महल की ओर भागने लगी, किन्तु दुःशासन ने झपट कर उसके घुँघराले केशों को पकड़ लिया और सभा भवन की ओर घसीटने लगा। सभा भवन तक पहुँचते-पहुँचते द्रौपदी के सारे केश बिखर गये और उसके आधे शरीर से वस्त्र भी हट गये। अपनी यह दुर्दशा देख कर द्रौपदी ने क्रोध में भर कर उच्च स्वरों में कहा, "रे दुष्ट! सभा में बैठे हुये इन प्रतिष्ठित गुरुजनों की लज्जा तो कर। एक अबला नारी के ऊपर यह अत्याचार करते हुये तुझे तनिक भी लज्जा नहीं आती? धिक्कार है तुझ पर और तेरे भरतवंश पर!"
यह सब सुन कर भी दुर्योधन ने द्रौपदी को दासी कह कर सम्बोधित किया। द्रौपदी पुनः बोली, "क्या वयोवृद्ध भीष्म, द्रोण, धृतराष्ट्र, विदुर इस अत्याचार को देख नहीं रहे हैं? कहाँ हैं मेरे बलवान पति? उनके समक्ष एक गीदड़ मुझे अपमानित कर रहा है।" द्रौपदी के वचनों से पाण्डवों को अत्यन्त क्लेश हुआ किन्तु वे मौन भाव से सिर नीचा किये हुये बैठे रहे। द्रौपदी फिर बोली, "सभासदों! मैं आपसे पूछना चाहती हूँ कि धर्मराज को मुझे दाँव पर लगाने का क्या अधिकार था?" द्रौपदी की बात सुन कर विकर्ण उठ कर कहने लगा, "देवी द्रौपदी का कथन सत्य है।" युधिष्ठिर को अपने भाई और स्वयं के हार जाने के पश्चात् द्रौपदी को दाँव पर लगाने का कोई अधिकार नहीं था क्योंकि वह पाँचों भाई की पत्नी है अकेले युधिष्ठिर की नहीं। और फिर युधिष्ठिर ने शकुनि के उकसाने पर द्रौपदी को दाँव पर लगाया था, स्वेच्छा से नहीं। अतएव कौरवों को द्रौपदी को दासी कहने का कोई अधिकार नहीं है।"
विकर्ण के नीतियुक्त वचनों को सुनकर दुर्योधन के परम मित्र कर्ण ने कहा, "विकर्ण! तुम अभी कल के बालक हो। यहाँ उपस्थित भीष्म, द्रोण, विदुर, धृतराष्ट्र जैसे गुरुजन भी कुछ नहीं कह पाये, क्योंकि उन्हें ज्ञात है कि द्रौपदी को हमने दाँव में जीता है। क्या तुम इन सब से भी अधिक ज्ञानी हो? स्मरण रखो कि गुरुजनों के समक्ष तुम्हें कुछ भी कहने का अधिकार नहीं है।" कर्ण की बातों से उत्साहित होकर दुर्योधन ने दुःशासन से कहा, "दुःशासन! तुम द्रौपदी के वस्त्र उताकर उसे निर्वसना करो।" इतना सुनते ही दुःशासन ने द्रौपदी की साड़ी को खींचना आरम्भ कर दिया। द्रौपदी अपनी पूरी शक्ति से अपनी साड़ी को खिंचने से बचाती हुई वहाँ पर उपस्थित जनों से विनती करने लगी, "आप लोगों के समक्ष मुझे निर्वसन किया जा रहा है किन्तु मुझे इस संकट से उबारने वाला कोई नहीं है। धिक्कार है आप लोगों के कुल और आत्मबल को। मेरे पति जो मेरी इस दुर्दशा को देख कर भी चुप हैं उन्हें भी धिक्कार है।"
द्रौपदी की दुर्दशा देख कर विदुर से रहा न गया, वे बोल उठे, "दादा भीष्म! एक निरीह अबला पर इस तरह अत्याचार हो रहा है और आप उसे देख कर भी चुप हैं। क्या हुआ आपके तपोबल को? इस समय दुरात्मा धृतराष्ट्र भी चुप है। वह जानता नहीं कि इस अबला पर होने वाला अत्याचार उसके कुल का नाश कर देगा। एक सीता के अपमान से रावण का समस्त कुल नष्ट हो गया था।"
विदुर ने जब देखा कि उनके नीतियुक्त वचनों का किसी पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है तो वे सबको धिक्कारते हुये वहाँ से उठ कर चले गये।
दुःशासन द्रौपदी के वस्त्र को खींचने के अपने प्रयास में लगा ही हुआ था। द्रौपदी ने जब वहाँ उपस्थित सभासदों को मौन देखा तो वह द्वारिकावासी श्री कृष्ण को टेरती हुई बोली, "हे गोविन्द! हे मुरारे! हे कृष्ण! मुझे इस संसार में अब तुम्हारे अतिरिक्त और कोई मेरी लाज बचाने वाला दृष्टिगत नहीं हो रहा है। अब तुम्हीं इस कृष्णा की लाज रखो।"
भक्तवत्सल श्री कृष्ण ने द्रौपदी की पुकार सुन ली। वे समस्त कार्य त्याग कर तत्काल अदृश्यरूप में वहाँ पधारे और आकाश में स्थिर होकर द्रौपदी की साड़ी को बढ़ाने लगे। दुःशासन द्रौपदी की साड़ी को खींचते जाता था और साड़ी थी कि समाप्त होने का नाम ही नहीं लेती थी। साड़ी को खींचते-खीचते दुःशासन शिथिल होकर पसीने-पसीने हो गया किन्तु अपने कार्य में सफल न हो सका। अन्त में लज्जित होकर उस चुपचाप बैठ जाना पड़ा। अब साड़ी के उस पर्वत के समान ऊँचे ढेर को देख कर वहाँ बैठे समस्त सभाजन द्रौपदी के पातिव्रत की मुक्त कण्ठ से प्रशंसा करने लगे और दुःशासन को धिक्कारने लगे। द्रौपदी के इस अपमान को देख कर भीमसेन का सारा शरीर क्रोध से जला जा रहा था। उन्होंने घोषणा की, "जिस दुष्ट के हाथों ने द्रौपदी के केश खींचे हैं, यदि मैं उन हाथों को अपनी गदा से नष्ट न कर दूँ तो मुझे सद्गति ही न मिले। यदि मैं उसकी छाती को चीकर उसका रक्तपान कर सकूँ तो मैं कोटि जन्मों तक नरक की वेदना भुगतता रहूँ। मैं अपने भ्राता धर्मराज युधिष्ठिर के वश में हूँ अन्यथा इस समस्त कौरवों को मच्छर की भाँति मसल कर नष्ट कर दूँ। यदि आज मै स्वामी होता तो द्रौपदी को स्पर्श करने वाले को तत्काल यमलोक पहुँचा देता।"
भीमसेन के वचनों को सुन कर भी अन्य पाण्डवों तथा सभासदों को मौन देख कर दुर्योधन और अधिक उत्साहित होकर बोला, "द्रौपदी! मैं तुम्हें अपनी महारानी बना रहा हूँ। आओ, तुम मेरी बाँयीं जंघा पर बैठ जाओ। इन पुंसत्वहीन पाण्डवों का साथ छोड़ दो।" यह सुनते ही भीम अपनी दुर्योधन के साथ युद्ध करने के लिये उठ खड़े हुये, किन्तु अर्जुन ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें रोक लिया। इस पर भीम पुनः दुर्योधन से बोले, "दुरात्मा! मैं भरी सभा में शपथ ले कर कहता हूँ कि युद्ध में तेरी जाँघ को चीकर न रख दूँ तो मेरा नाम भीम नहीं।"
इसी समय सभा में भयंकर अपशकुन होता दिखाई पड़ा। गीदड़-कुत्तों के रुदन से पूरा वातावरण भर उठा। इस उत्पात को देखकर धृतराष्ट्और अधिक मौन रह सके और बोले उठे, "दुर्योधन! तू दुर्बुद्धि हो गया है। आखिर कुछ भी हो, द्रौपदी मेरी पुत्र वधू है। उसे तू भरी सभा में निर्वसना कर रहा है।" इसके पश्चात् उन्होंने द्रौपदी से कहा, "पुत्री! तुम सचमुच पतिव्रता हो। तुम इस समय मुझसे जो वर चाहो माँग सकती हो।" द्रौपदी बोलीं, "यदि आप प्रसन्न हैं तो मुझे यह वर दें कि मेरे पति दासता से मुक्ति पा जायें।" धृतराष्ट्र ने कहा, "देवि! मैं तुम्हें यह वर दे रहा हूँ। पाण्डवगण अब दासता मुक्त हैं। पुत्री! तुम कुछ और माँगना चाहो तो वह भी माँग लो।" इस पर द्रौपदी ने कहा, "हे तात! आप मेरे पतियों के दिव्य रथ एवं शस्त्रास्त्र लौटा दें।" धृतराष्ट्र ने कहा, "तथास्तु"। पाण्डवों के दिव्य रथ तथा अस्त्र-शस्त्र लौटा दिये गये। धृतराष्ट्र ने कहा, "पुत्री! कुछ और माँगो।" इस पर द्रौपदी बोली, "बस तात्! क्षत्राणी केवल दो वर ही माँग सकती है। इससे अधिक माँगना लोभ माना जायेगा।"

  • ध तर ष ट र क प त र थ इस न ज ए क उपर त द र य धन क कहन पर द र पद क च र हरण क य थ यह द र य धन क 100 भ इय म स द र य धन स छ ट थ द श सन क
  • व श वकर म द व र न र म त इन द रप रस थ नगर क द खत ह ए द य तक र ड तथ द र पद च र हरण व द - प र ण - यह च र व द एव दस स अध क प र ण ह न द अर थ सह त उपलब ध
  • भर सभ म द र य धन क अ ध क प त र अ ध कहन द र पद क भर सभ म च र हरण क प रय स द र य धन क अपन ब ज र ग क प रत गलत व यवह र क त क अपम न
  • द र पद न शरसय य पर ल ट ह ए भ ष म प त मह स प छ क उनक आ ख क स मन च र हरण ह रह थ और व च प रह तब भ ष म प त मह न जव ब द य क उस समय म क रव
  • ह स य स पद द श य ह चरम त कर ष द श य एक स ट ज पर चल रह मह भ रत क द र पद च र हरण प रकरण न टक पर दर श य गय ह ज सम यह द न और इनक प छ कर रह ल ग न टक
  • कर ण स पश च त प व यक त करव कर इस कल क क ध न क क श श क ह द र पद च र हरण क प रस ग क छ ड द य ज य त कर ण क चर त र सर वथ न ष कल क ह कर ण
  • द व र ग - वत स - हरण र ध - प रथम - म लन, र ध - न दघर - आगमन, क ष ण क र ध क घर ज न ग च रण, ध न कवध, क ल यदमन, प रल ब स रवध, म रल - च र - हरण पनघट र कन ग वर धन
  • थ च सर म छल स क रव न प ण डव क र ज क ज छ न ल य तथ द र पद क च र हरण ह आ प ण डव क वनव स द य गय मह भ रत क य द ध र ज य क ल कर ह आ यह
  • आज प र य: सभ प रक र क शर र एव र ग स थ त तथ शल यकर म क अन र प स ज ञ हरण एव स व दन हरण उपकरण, द रव य एव स धन उपलब ध ह इनक क रण ह न व ल उपद रव
  • ह भ ष म न वह आय समस त र ज ओ क पर स त कर द य और त न कन य ओ क हरण कर क हस त न प र ल आय बड कन य अम ब न भ ष म क बत य क वह अपन तन - मन
  • अन र द ध पर म ह त ह कर उष न ह उसक अपहरण कर ल य थ इस घटन क यह क म र हरण क न म स ज न ज त ह प र च न असम, कमर प क र प म ज न ज त ह यह शक त श ल
  • द ष ट ग चर ह न लग उन ह न अपन क श ख ल द य र जस वस त र भ षण त य ग कर च र वस त र ध रण कर क और अन न जल क पर त य ग करक म नव रत ध रण कर ल य इतन
  • भ न कल र श कल ग द भल स रस ह र म भजत त प भजत, श त लहत म नस ह श क हरण पद म चरण, ह य शरण भक त सज र म भज र म भज र म भज र म भज ग त छ द क
  • स ज ञ हरण क दव इय ल कप र य ह एप ड य रल स ज ञ हरण आम त र पर प रसव म प ड हरण क ल ए एक प रभ व तर क ह ल क न स थ ह यह प रसव क ल ब कर द त ह इसस
  • न य क त व श षज ञ नद सह यक क द खर ख म गर जन करत ह ए नद क म ख य ध र क च र कर न कल सकत ह एक द न य उसस अध क र फ ट ग क द य ज सकत ह अब तक
  • न मज ज त धर मर ज, स चत कह ग क य मन म ज न यह श र क सम ज ? प र ण ह हरण करक रहन क य नह हम र म न द य ? आमरण ग ल न सहन क ह प प न ज वन - द न

चीर हरण एक समै जमुना जल मैं सब मज्जन हेत धसी ब्रज.

महाभारत के चीर हरण का यह द्रष्टांत महाभारत ग्रंथ का एक बहुत आवश्यक अध्याय है जिसमे कुछ आसुरीक प्रवृत्ति के कौरवों ने द्रोपदी को अपमानित किया वहीं एक कौरव विकर्ण ने इसका विरोध किया इस वृतांत मे जहाँ पांडव तथा भीष्म इत्यादि शांत रहे. मुलायम भाई आपके सामने द्रोपदी का चीर हरण हो रहा. जयपुर घराने की बंदिशों में किया द्रोपदी चीर हरण प्रसंग का वर्णन ग्वालियर। नईदुनिया रिपोर्टर राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के कथक विभाग ने गुरुवार को साधना महोत्सव आयोजित किया। जिसमें छात्रों ने कथक की. द्रौपदी चीर हरण BookStruck. लखनऊ। रामपुर में सपा प्रत्याशी आजम खान द्वारा भाजपा प्रत्याशी जया प्रदा पर दिगए विवादित बयान को लेकर उठा सियासी तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि आजम खान ने इस मामले में अपनी सफाई भी पेश की है।.

Hindi social story Cheer Haran चीर हरण प्रतिलिपि Pratilipi.

Draupadi ka cheer haran ke kahani, द्रौपदी चीर हरण की असली कहानी महाभारत की कहनी कौरवों और पांडवों के बीच हुए युद्ध पर आधारित है। कौरवों का अपने चचेरे भाइयों के प्रति ईर्ष्या रखना, धन संपत्ति का लालच, मानसिक भटकाव, प्रतिशोध की. महाभारत का मुर्शिदाबाद वर्जन: जब द्रौपदी के. उदाहरण महाभारत काल से आज तक द्रोपदी का चीर हरण अनवरत जारी है किन्तु राजनेतिक ओर सामाजिक पृष्ठभूमि से कोई कृष्ण देश की नारियो की लाज बचाने को तत्पर दिखाई नही दे रहा है! Usage there was a cleavage between the liberal and conservative members. 73.

विपक्षी पार्टियों ने जनता का चीर हरण किया: योगी.

सुषमा का ट्वीट– रामपुर में हो रहा द्रौपदी का चीर हरण, भीष्म की तरह मौन ना साधें मुलायम. By Jhuggi Jhopadi, 15 April, 2019, 9:28. लोकसभा चुनाव के प्रचार में राजनीतिक जंग तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के दिग्गज और रामपुर से उम्मीदवार. दुष्शासन ने किया द्रौपदी का चीर हरण, फिर क्या हुआ. बरेली। श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल बरेली द्वारा श्रीहरि मन्दिर मॉडल टाउन में आयोजित रास लीला में शुक्रवार को सांयकालीन सत्र में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पूज्य स्वामी डा0 देवकी नन्दन जी महाराज द्वारा द्रोपदी चीर हरण लीला का. द्रोपदी का चीर हरण sushil yadav द्वारा पत्रिका में. परिभाषा श्रीकृष्ण की एक प्रसिद्ध लीला जो इस अनुश्रुति के आधापर है कि एक बार यमुना में नहाती हुई गोपियों के चीर या वस्त्र लेकर वे वृक्ष के ऊपर जा बैठे थे वाक्य में प्रयोग गोपियों ने कृष्ण के चीरहरण की शिकायत माँ यशोदा से की । लिंग. चीर हरण के 30 बेस्ट फ़ोटो और वीडियो mymandir. कृष्ण ने चीर हरण से द्रौपदी को नहीं बचाया था या धर्म कर्तव्य ने उनको इसके लिए विवश कर दिया था। हालांकि, जब आप इस कहानी में कुछ तथ्यों को पढ़ते हैं, तो आपको पता चल जाएगा कि द्रौपदी को उस शर्मनाक दिन पर कैसे बचाया गया था जब.

रामपुर में द्रौपदी चीर हरण पर भीष्म की तरह मौन.

बिजनौर। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बसपा, सपा और कांग्रेस ने राजनीति का अपराधीकरण और अपराधियों का राजनीतिकरण किया है। गरीबों का हक मारना भी चीर हरण होता है। इन विपक्षी दलों ने आज तक जनता का चीर हरण Следующая Войти Настройки. द्रौपदी का चीर हरण हो रहा है, मौन साधने की गलती न. नई दिल्‍ली: रामपुर से बीजेपी प्रत्‍याशी जया प्रदा पर आजम खान के आपत्‍तिजनक बयान के बाद सियासत गरमा गई है. आजम खान को जहां सफाई देनी पड़ रही है, वहीं बीजेपी की दिग्‍गज नेता और विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने इसे चीर हरण करार दिया.

ऐसे हुई थी महाभारत के चीर हरण सीन की शूटिंग, आधे.

चीरहरण Hindi News, चीरहरण Breaking News, Find all चीरहरण से जुड़ी खबरें at Live Hindustan, page3. द्रौपदी चीरहरण महाभारत. पाषाण कर दो फिर मुझे तुम हे! प्रभु । मुझ से सहा जाता नही अब हे! प्रभु । अस्मिता लुट गयी निर्वस्त्र रो रही हूँ । चीर तार तार हुआ अब वीरान हो गयी हूँ॥ सत्य प्रकाश शर्मा सत्य मेरी नयी रचना से चार पंक्ति. paassaann kr do phir mujhe tum prbhu mujh. चीर हरण HinKhoj Dictionary. आपका क्वेश्चन से तिरुपति का चीर हरण कहां हुआ था तो इस सवाल का जवाब है द्रोपदी का चीर हरण म और पढ़ें. Likes 6 Dislikes views 145. WhatsApp icon. fb icon. अपने सवाल पूछें और एक्स्पर्ट्स के जवाब सुने. qIcon ask. ऐसे और सवाल. द्रौपदी चीर हरण कैसे बचाया कृष्ण ने? ड्रूपल. महाराष्ट्र में जिस तरह रातों रात राष्ट्रपति शासन हटाकर 23 नवंबर 2019 की सुबह देवेंद्र फड़नवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई, वह लोकतंत्र की हत्या और हर तरह की राजनीतिक मर्यादा का चीर हरण है।.

चीरहरण news in hindi, चीरहरण से जुड़ी खबरें Hindustan.

Meaning of चीर हरण in Hindi. श्रीकृष्ण की एक प्रसिद्ध लीला जो इस अनुश्रुति के आधापर है कि एक बार यमुना में नहाती हुई गोपियों के चीर या वस्त्र लेकर वे वृक्ष के ऊपर जा बैठे थे चीर या वस्त्र को हरने की क्रिया. द्रौपदी का चीरहरण मिथक से सत्यता की ओर. द्रौपदी का चीर हरण इस शो के सबसे पॉपुलर सीन्स में से एक था। लेकिन इसे फिल्माना आसान नहीं था। शूटिंग के दौरान रो पड़ी थीं रूपा गांगुली महाभारत के मेकिंग वीडियो में रवि ने चीर हरण वाले सीन के बारे में विस्तार से बताया है।. Best चीरहरण Quotes, Status, Shayari, Poetry & Thoughts YourQuote. हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकास पर चंडीगढ़ में आईएएस अधिकारी की बेटी वर्निका कुंडु का पीछा करने और छेड़खानी का लगा आरोप के बाद देश के राजनेताओं के चेहरे से शर्म सम्मान के पर्दे की खीचतान जारी है. घटना 4 अगस्त की है.

Hindi suspense story cheer haran चीर हरण प्रतिलिपि.

खाण्डव वन के दहन के समय अर्जुन ने मय दानव को अभय दान दे दिया था। इससे कृतज्ञ हो कर मय दानव ने अर्जुन से कहा, हे कुन्तीनन्दन! आपने मेरे प्राणों की रक्षा की है अतः आप आज्ञा दें, मैं आपकी क्या सेवा करूँ?. महाभारत के द्रौपदी चीर हरण एपिसोड के AajTak. महाभारत में चीर हरण सीन में एक्ट्रेस के साथ हुआ था कुछ ऐसा, आधे घंटे तक रोती रही थी द्रोपदी. Amit Kumar Singh. Updated: 23 Apr 2019,:13 PM IST. महाभारत में चीर हरण सीन में एक्ट्रेस के साथ हुआ था कुछ ऐसा,.

चीर हरण बुराई चित्र डाउनलोड ग्राफिक्सPRFचित्र.

जयाप्रदा पर अपमानजनक टिप्पणी द्रौपदी के चीर हरण पर भीष्म की तरह मौन साधें, सुषमा ने मुलायम से कहा. समाजवादी पार्टी के नेता और रामपुर से सपा उम्मीदवार आजम खान द्वारा भाजपा प्रत्‍़याशी जयाप्रदा के खिलाफ की गयी अपमानजनक. Know Why Deepika Padukone Not Want To Be Draupadi In Aamir. दीपिका नहीं चाहतीं कि महाभारत हो और उन्हें चीर हरण करवाना पडे़, जानें बी टाउन में अकसर ही आमिर खान के ड्रीम प्रोजेक्ट महाभारत की बात होती रहती है। अपने प्रोजेक्ट के लिए रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने द्रौपती के किरदार के. महाभारत में द्रौपदी के चीर हरण के समय उनकी किसने. द्रौपदी चीर हरण. जैसे हम सब जानते हैं युद्धिष्ठिर ने द्रौपदी को दुर्योधन के साथ शतरंज में हार दिया था दुर्योधन ने फिर दुशासन को द्रौपदी को पकड़ खींच कर लाने को कहा वहां आने पर दुर्योधन ने उसे द्रौपदी को निर्वस्त्र करने को कहा द्रौपदी ने. Sushma swaraj angry with azam khan remark on jaya prada and. राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया है। होली खेलने के हुड़दंग में आधा दर्जन से अधिक युवकों ने एक महिला के साथ न सिर्फ छेड़छाड़ की, बल्कि उसके कपड़े भी फाड़ दिए। जब महिला ने इसका विरोध किया तो उसने. चीरहरण हिंदी शब्दमित्र. चीर हरण बुराई मुफ्त छवि विवरण इस प्रकार हैं:छवि आईडी401490388,चित्र प्रारूपPNG,छवि का आकार20 M,छवि रिलीज का समय04 07 2019,PRF चित्र व्यावसायिक उपयोग का समर्थन करते हैं.

द्रोपदी चीर हरण है CAA का विरोध, बर्दास्त नहीं.

महाभारत सीरियल का हर एक किरदार आज भी लोगों की यादों में ताजा है। इस सीरियल का चीर हरण का सीन को बेहतरीन ढंग से फिल्माया गया था। महाभारत के डायरेक्टर रवि चोपड़ा ने बताया कि ये सीन कैसे शूट किया गया था।. How Mahabharat Draupadi Cheer Haran Scene Was Shot चीर. दुर्योधन ने चीरहरण का आदेश दिया। युधिष्ठिर ने बिना कौरवों का नाम लिए घोर आपत्ति जताई और बोले ऐसे भी कुछ लोग हैं जो परस्त्रियों को निर्वस्त्र करना चाहते हैं। विश्व समुदाय को इनका संज्ञान लेना होगा। अमेरिका को भी अवश्य. शर्म और सम्मान का चीर हरण – The Arya Samaj Blog. मेरे सभी हिन्दू भाइयो और बहिनो –. जो जो भी व्यक्ति – महाभारत में ऐसा सोचते और समझते हैं की द्रौपदी के चीर हरण जैसा कुत्सित और भ्रष्ट आचरण हुआ था –. तो ऐसी विसंगति को दिमाग से पूरी तरह हटा देवे – और जो इस पोस्ट में लिखा जा. चीरहरण के शर्मनाक तथ्य सब के सामने ही द्रौपदी को. रामपुर में द्रौपदी चीर हरण पर भीष्म की तरह मौन साधने की गलती मत करिये मुलायम भाई. सुषमा स्वराज ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, पार्टी नेता जया बहादुरी और डिंपल यादव को टैग भी किया, ताकि आजम खान के इस विवादित बयान पर पार्टी. द्रोपदी चीर हरण की कथा सुन श्रोता हुए मंत्र मुग्ध. समाजवादी पार्टी सपा के दिग्गज नेता और रामपुर से उम्मीदवार आजम खां ने बीजेपी प्रत्याशी और गुजरे जमाने की जानी मानी एक्ट्रेस जया प्रदा पर कथित रूप से अमर्यादित टिप्पणी की है. जिसके बाद ये मामला और भी विवादित हो गया है. द्रौपदी का चीर हरण कहाँ हुआ था? Draupadi Ka Vokal. टीवी सीरियल महाभारत में द्रौपदी के चीर हरण के लिए भूमिका करीब दो हफ्ते से बनाई जा रही, 2 हफ्ते से प्रोमो में भी सिर्फ यही दिखाया जा रहा है लेकिन दर्शकों को अभी तक वो एपिसोड देखने को नहीं मिला है.

चीर हरण अंग्रेजी हिंदी शब्दकोश रफ़्तार.

Опубликовано: 30 июл. 2019 г. Dropadi Cheer Haran द्रोपदी चीर हरण प्रसंग Amar Ujala. बिजनौर। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बसपा, सपा और कांग्रेस ने राजनीति का अपराधीकरण और अपराधियों का राजनीतिकरण किया है। गरीबों का हक मारना भी चीर हरण होता है। इन विपक्षी दलों ने आज तक जनता का चीर हरण Следующая Войти Настройки Конфиденциальность Условия. चीरहरण कविता Dr Archana Gupta Sahityapedia. द्रोपदी चीर हरण प्रसंग अग्निकुंड से थी वो जन्मी, सुंदरता की मूरत थी द्रुपद सुता वो ज्ञान मान में, माँ वाणी की सूरत थी आज भूमि पर गिरी पड़ी वो,आभा से भी. Read more hindi poetry, hindi shayari, hindi kavita on amar ujala kavya. एक ऋषि के वरदान ने की थी द्रौपदी की चीरहरण से. Univarta: वाराणसी, 18 जनवरी वार्ता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकता संशोधन कानून ​सीएए विरोधियों की तुलना महाभारत के चर्चित द्रौपदी चीर हरण प्रसंग की तथा कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत अन्य. महाभारत में चीर हरण Patrika. 1. श्रीकृष्ण की एक प्रसिद्ध लीला जो इस अनुश्रुति के आधापर है कि एक बार यमुना में नहाती हुई गोपियों के चीर या वस्त्र लेकर वे वृक्ष के ऊपर जा बैठे थे Usage. 1. महाभारत के अनुसार दुश्शासन ने द्रौपदी का चीरहरण भरी सभा में किया था ।.

महाभारत में द्रोपदी का चीर हरण Catch Hindi.

जिसने उसका चीर हरण किया,उसी को मित्र बनाया है डूब मरो चुल्लू भर पानी में,उसको जरा शर्म न हाया है जो अपना सम्मान बचा सकी,औरो का क्या बचायेगी सत्ता की. संविधान का चीर हरण hastakshep हस्तक्षेप. ‌आज फिर उसी अंधेरी गली से होकर गुजरना था शिवानी, शुभांगी और वीणा को, दिल ज़ोरों से धड़क रहा था उनका की आज न जाने क्या होगा उनके साथ।एक बार तो ये मान हुआ उनका की जाने दो आज गली के बाहर ही रात गुज़ार.

द्रौपदी का चीर हरण, आखिर कृष्ण क्यों नहीं बचा पाए.

भारतीय होकर जिसने रामायण और महाभारत नहीं पढ़ी है उसका जीवन व्यर्थ ही गया समझो क्योंकि दोनों ही हमारी आत्मा है! जाने ऐसे तथ्य जो साबित करते है आपका अज्ञान चीरहरण. रामपुर में द्रौपदी के चीर हरण पर माैन रहे मुलायम. द्रोपदी का चीरहरण चुपचाप देखते रहना, क्या भीष्मपितामह जैसे महान व्यक्ति की कमजोरी नहीं दर्शाता? कहते है, कि कौरवों का अन्न खाने से उनकी बु ि मलीन हो गई थी। हम भी इतना दूषित भोजन खाते हैं, तो क्या हमारी बु ि भी मलीन हो गई है। फिर योग. होली खेलने के बहाने छेड़छाड़ सहित किया चीर हरण. मेरे ही खून से रंग गई मेरी ज़िन्दगी काश ज़िंदा रहती दिखाती जख्मी तन ही नहीं लहूलुहान रुह भी शब्दों को ढूंढती जो बता सकते उसके दर्द आँसुओं में भीगी आँखों के डर काश आ जाते माधव रोक लेते चीर हरण छेड़ देते युद्ध और कर देते इन.