• टेलॉन कस्प

    टेलॉन कस्प एक दुर्लभ दंत विसंगति है। टेलॉन कस्प एक पूर्वकाल दांत पर एक अतिरिक्त कस्प है। टेलॉन टेलॉन कस्प पहले मिशेल द्वारा वर्णित किया गया १९८२ में और जे कि...

  • ज्वर

    जब शरीर का ताप सामान्य से अधिक हो जाये तो उस दशा को ज्वर या बुख़ार कहते है। यह रोग नहीं बल्कि एक लक्षण है जो बताता है कि शरीर का ताप नियंत्रित करने वाली प्रण...

  • जलवृषण

    शरीर गुहा में विकृतिजन्य सीरमी द्रव का जमा होना जलसंग्रह कहलाता है। जब सीरमी द्रव वृषण के आसपास जमा होता है तो इसे जलवृषण कहते हैं।

  • जर्मन रोमान्तिका

    जर्मन रोमान्तिका या जर्मन मसूरिका अत्यंत सूक्ष्म विषाणु द्वारा होता है जिसका नाम रुबेला है। वर्ष के पूर्वार्ध में प्रकोप अधिक होता है। दाने निकलने के पूर्व अ...

  • छींक

    छींक वह क्रिया है जिसमें फेफड़ों से हवा नाक और मुह के रास्ते अत्यधिक तेजी से बाहर निकाली जाती है। यह एक अर्ध-स्वायत्त क्रिया है। छींक आमतौपर तब आती है जब हमा...

  • चेचक

    चेचक एक विषाणु जनित रोग है। श्वासशोथ एक संक्रामक बीमारी थी, जो दो वायरस प्रकारों, व्हेरोला प्रमुख और व्हेरोला नाबालिग के कारण होती है। इस रोग को लैटिन नाम व्...

  • चर्म रोग

    त्वचा के किसी भाग के असामान्य अवस्था को चर्मरोग कहते हैं। त्वचा शरीर का सनसे बड़ा तंत्र है। यह सीधे बाहरी वातावरण के सम्पर्क में होता है। इसके अतिरिक्त बहुत ...

  • घ्राणहानि

    गंध का अनुभव मनुष्य नाक के द्वारा करता है। मस्तिष्क से आरंभ होकर नासास्नायु का जोड़ा नाक की श्लेष्मिक कला तथा घ्राणकोशिका में जाकर समाप्त होता है। यह स्नायु ...

  • घेंघा रोग

    घेंघा एक रोग है जिसमे गला फूल जाता है। यह शरीर में आयोडीन के की कमी के कारण होता है। आयोडीन की कमी के कारण थायरायड ग्रन्थि में सूजन आ जाती है। यह रोग बहुधा उ...

  • घाव

    शरीर मे किसी हथियार या किसी कारण से चोट लग जाये, या शरीर के अन्दर किसी बाहरी वस्तु का प्रवेश कर दिया जाये या फ़िर अपने आप ही करा दिया जाये तो शरीर मे होने वा...

  • गैस्ट्रोस्काइसिस

    गैस्ट्रोस्काइसिस एक जन्म दोष है जिसमें बच्चे की आंत पेट के बगल में एक छेद के माध्यम से शरीर के बाहर फैली हुई है। छेद का आकार परिवर्तनीय है, और पेट और यकृत सह...

  • गैर संचारी रोग

    गैर-संचारी रोग, के अंतर्गत वह रोग आते है, जोकि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे प्रसारित नहीं होते है। गैर-संचारी रोगों में पार्किंसन रोग, स्वप्रतिरक्षित...

  • गुर्दे का कैंसर

    किडनी कैंसर, जिसे गुर्दे के कैंसर के रूप में भी जाना जाता है, एक प्रकार का कैंसर है जो कि गुर्दा में कोशिकाओं में शुरू होता है। गुर्दे के कैंसर के दो सबसे आम...

  • गलगुटिकाशोथ

    मनुष्य के तालु के दोनों ओर बादाम के आकार की दो ग्रंथियाँ होती है, जिन्हें हम गलगुटिका, तुंडिका या टॉन्सिल कहते हैं। इन ग्रंथियों के रोग को गलगुटिकाशोथ कहते ह...

  • गंडमाला

    गंडमाला रोग में मनुष्य के शरीर की लसीका ग्रंथियों, विशेषत: ग्रीवा की लसीका ग्रंथियों में दोष उत्पन्न हो जाता है। यक्ष्मा प्रकृति के बच्चों में यह रोग प्राय: ...

  • गंजापन

    गंजापन की स्थिति में सिर के बाल बहुत कम रह जाते हैं। गंजापन की मात्रा कम या अधिक हो सकती है। गंजापन को एलोपेसिया भी कहते हैं। जब असामान्य रूप से बहुत तेजी से...

  • खर्राटे

    जब सोते हुए व्यक्ति के नाक से अपेक्षाकृत तेज आवाज निकलती है तो इसे खर्राटे लेना कहते हैं। इसे ओब्स्टृक्टिव स्लीप अप्निया कहा जाता है; अर्थात नींद में आपकी सा...

  • क्षोभी आंत्र विकार

    क्षोभी आंत्र विकार या इरीटेबल बाउल सिंड्रोम आँतों का रोग है जिसमें पेट में दर्द, बेचैनी व मल-निकास में परेशानी आदि होते हैं। इसे स्पैस्टिक कोलन, इरिटेबल कोलन...

  • कोथ

    जब किसी भी कारण से शरीर के किसी भाग अथवा बड़े ऊतक-समूह की मृत्यु हो जाती है तब उस व्याधि को कोथ कहते हैं। कोथ जानलेवा स्थिति का संकेत है। कोथ शब्द प्राय: उन ...

  • कुष्ठरोग

    हिब्रू बाइबिल शब्दावली और इसके विभिन्न अर्थों के लिये, ज़ार्थ Tzaraath देखें. अन्य उपयोगों के लिये कुष्ठरोग स्पष्टीकरण देखें. कुष्ठरोग या हैन्सेन का रोग, चिक...

  • कुपोषण

    शरीर के लिए आवश्यक सन्तुलित आहार लम्बे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है। कुपोषण के कारण बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी...

  • कालमेह ज्वर

    मलेरिया मच्छरों के नियन्त्रण में हवाई जहाज ठोकरें कालमेह ज्वर Black water fever अथवा मलेरियल हीमोग्लोबिन्युरिया malarial hemoglobinuria घातक तृतीयक मलेरिया क...

  • कान बजना

    बाहर कोई ध्वनि न हो तब भी कान में कुछ सुनाई पड़ना कान बजना या कर्णक्ष्वेण कहलाता है। टिनिटस शरीर के बाहर से नहीं, बल्कि सिर में अनुभूत/सुनाई देने वाले शोर को...

  • कर्णनासाकंठ विज्ञान

    कर्णनासाकंठ विज्ञान कान, नाक और गले से सम्बन्धित चिकित्साविज्ञान की एक शाखा है। यह शल्यचिकित्सा की एक विशिष्टता है। इस विशेषज्ञता वाले चिकित्सकों को कर्णनासा...

  • ऑंकोसर्कॉय्सिस

    आंकोसर्कायसिस जिसे रिवर ब्लाइंडनेस और रॉब्लेस व्याधि, के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रकार के परजीवी कृमि परजीवी कृमि आंकोसेरा वाल्वलस के संक्रमण से होने वाल...

  • एसिडिटी (रोग)

    एसिडिटी को चिकित्सकीय भाषा में गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स डिजीज के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे अम्ल पित्त कहते हैं। आमाशय के भित्ति में उपस्थित जठर ...

  • एंथ्राक्स

    एन्थ्राक्स एक खतरनाक एवं जानलेवा रोग है। यह मानव एवं पशु दोंनो को संक्रमित करता है। इसका कारण बेसिलस ऐन्थ्रैक्स नामक जीवाणु है। इस रोग के खिलाफ कार्य करने वा...

  • ऊर्ध्वहनु वायुविवर

    मैक्सिलरी साइनस या ऊर्ध्वहनु वायुविवर मानव शरीर की खोपड़ी में हवा भरी हुई गुहा होती हैं जो हमारे सिर को हल्कापन व सांस वाली हवा का नमी युक्त करते हैं। जब कभी...

  • उपदंश

    उपदंश एक प्रकार का गुह्य रोग है जो मुख्यतः लैंगिक संपर्क के द्वारा फैलता है। इसका कारक रोगाणु एक जीवाणु, ट्रीपोनीमा पैलिडम है। इसके लक्षण अनेक हैं एंव बिना स...

  • उच्च रक्तचाप

    हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप, जिसे कभी कभी धमनी उच्च रक्तचाप भी कहते हैं, एक पुरानी चिकित्सीय स्थिति है जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव की इस...

  • इनफ़्लुएंज़ा

    इनफ्लुएंजा एक विशेष समूह के वायरस के कारण मानव समुदाय में होनेवाला एक संक्रामक रोग है। इसमें ज्वर और अति दुर्बलता विशेष लक्षण हैं। फुफ्फुसों के उपद्रव की इसम...

  • आमवातीय संधिशोथ

    आमवातीय संधिशोथ या आमवातीय संध्यार्ति के आरंभिक अवस्था में जोड़ों में जलन होती है। आरंभिक अवस्था में यह काफी कम होती है। यह जलन एक समय में एक से अधिक संधियों...

  • आनुवंशिक रोगों की सूची

    यहाँ पर आनुवंशिक रोगों की सूची दी गयी है। इसके साथ ही उस रोग से सम्बन्धित उत्परिवर्तन तथा सम्बन्धित गुणसूत्र का नाम भी दिया गया है, यदि वे ज्ञात हैं। वर्णान्...

  • आनुवंशिक रोग

    आनुवंशिकी और रोग में बहुधा कोई न कोई संबंध रहता है। अनेक रोग दूषित वातावरण तथा परिस्थतियों से उत्पन्न होते हैं, किन्तु अनेक रोग ऐसे भी होते हैं जिनका कारण मा...

  • अफ्रीकी ट्रिपेनोसोमयासिस

    अफ्रीकी ट्रिपेनोसोमयासिस अथवा स्लीपिंग सिकनेस मनुष्यों तथा अन्य पशुओं में होने वाली एक परजीवीजन्य बीमारी है। यह परजीवियों की एक प्रजाति ट्रिपैनोसोमा ब्रुसे क...

  • अन्धता

    अंधता या अंधापन, देख न सकने की दशा का नाम है। जो बालक अपनी पुस्तक के अक्षर नहीं देख सकता, वह इस दशा से ग्रस्त कहा जा सकता है। दृष्टिहीनता भी इसी का नाम है। प...

  • अनिद्रा

    अनिद्रा या उन्निद्र रोग में रोगी को पर्याप्त और अटूट नींद नहीं आती, जिससे रोगी को आवश्यकतानुसार विश्राम नहीं मिल पाता और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ब...

  • अधोमधुरक्तता

    रक्त में जब ग्लूकोज़ का स्तर सामान्य से कम हो जाता है, तो उस अवस्था को अधोमधुरक्तता कहते हैं। यह चिकित्साशास्त्र का शब्द है। भोजन करने के 8 घंटे पश्चात या खा...

  • अतिवृद्धि

    अतिवृद्धि का मतलब अपने घटक कोशिकाओं के बढ़ने के कारण एक अंग या ऊतक के आयतन में वृद्धि हो जाती है। यह अतिवर्धन से अलग है, इस में कोशिकाओं लगभग एक ही आकार रहते...

  • अतिताप

    साँचा:Infobox symptom अतिताप, तापमान नियंत्रण की विफलता के कारण शरीर का बढ़ा हुआ तापमान होता है। अतिताप तब होता है जब शरीर ताप को अपव्यय करने की अपनी क्षमता ...

  • अंतर्राष्ट्रीय रोग वर्गीकरण

    रोग और संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकी वर्गीकरण ने 10 वा संसोधन प्रस्तुत किया जिसमें रोगो के लक्षण, सिकायत, सामाजिक परिस्थितियों तथा ब...

  • अंजनहारी

    अंजनहारी या बिलनी या गुहेरी रोग आंखों की ऊपरी या निचली परत पर दाने के रूप में हल्के लाल रंग में उभरता है। वैसे तो यह कोई रोग नहीं है किन्तु इस रोग के होने पर...

  • एचआइवी

    ह्युमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस एक लेंटिवायरस है, जो अक्वायर्ड इम्युनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम का कारण बनता है, जो कि मनुष्यों में एक अवस्था है, जिसमें प्रतिरक्षा ...

  • अचलताकारक कशेरूकाशोथ

    अचलताकारक कशेरूकाशोथ, जिसे पहले बेक्ट्रू के रोग, बेक्ट्रू रोगसमूह, और एक प्रकार के कशेरूकासंधिशोथ, मारी-स्ट्रम्पेल रोग के नाम से जाना जाता था, एक दीर्घकालिक ...

रोग

अर्बुद दमनकारी पित्रैक

अर्बुद दमनकारी पीआरसी एक पीआरसी या जीन है जो कोशिका कर्कट रोग के किसी भी प्रकार सुरक्षित करता है. जब इस पीआरसी उत्परिवर्तन होता है, सेल कर्कट रोग हो सकता है ।

रात्रि बहुमूत्री (नॉक्चूरिया)

रात हास्य है, जो एक बीमारी का कारण बनता है, रात में अधिक पेशाब आता है तो नींद बाधित है. अक्सर यह बड़े-बूढ़ों में अधिक है. सोते समय बार-बार पेशाब आने की शिकायत है कि स्थिति में भी हो सकती है यदि कोई सोने से पहले अधिक पानी खिलाया झूठ बोल रही है । या यह किसी भी अधिक खतरनाक बीमारी का लक्षण भी हो सकती है ।

व्रणीय बृहदान्त्रशोथ

थे बोलीदाताओं एक पुरानी बीमारी है जिसमें पेट और अल्सर हो जाता है । इस रोग के प्रमुख लक्षण पेट का दर्द और क्रेते डायरिया पैदा कर रहा है लोड घटना, बुखार, एनीमिया आदि । यह भी हो सकता है.

२०१५ भारतीय स्वाइन फ्लू का प्रकोप

२०१५ भारतीय स्वाइन फ्लू का प्रकोप यह २००९ महामारी H1N1 वायरस से संदर्भित हैं, यह भारत में मार्च 2015 में आया था, जिसमें गुजरात,राजस्थान और अब दिल्ली में भी चपेट में पिछले एक साल में भारत में स्वाइन फ्लू के 933 के मामले में आया था, जो वहाँ थे 218 लोगों को जानने के लिए किया गया था

अलक्षणी

आयुर्विज्ञान के सन्दर्भ में, उस रोग को अलक्षणी रोग कहा जाता है जिससे ग्रसित रोगी कोई लक्षण नहीं प्रदर्शित करता। उदाहरण के लिए कोरोनावाइरस से संक्रमित कुछ व्यक्ति ऐसे पागए हैं जिनमें वे लक्षण बिल्कुल नहीं देखने को मिले जो कोरोनावाइरस के अधिकांश संक्रमितों में देखने को मिलते है ।

रोगों की सूची

रोगों की इस सूची में रोगों के मुख्य वर्ग शामिल हैं। आनुवांशिक रोगों की सूची भग एवं योनि रोगों की सूची list of vulvovaginal disorders संक्रामक रोगों की सूची त...

अचलताकारक कशेरूकाशोथ

अचलताकारक कशेरूकाशोथ, जिसे पहले बेक्ट्रू के रोग, बेक्ट्रू रोगसमूह, और एक प्रकार के कशेरूकासंधिशोथ, मारी-स्ट्रम्पेल रोग के नाम से जाना जाता था, एक दीर्घकालिक ...

एचआइवी

ह्युमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस एक लेंटिवायरस है, जो अक्वायर्ड इम्युनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम का कारण बनता है, जो कि मनुष्यों में एक अवस्था है, जिसमें प्रतिरक्षा ...

अंजनहारी

अंजनहारी या बिलनी या गुहेरी रोग आंखों की ऊपरी या निचली परत पर दाने के रूप में हल्के लाल रंग में उभरता है। वैसे तो यह कोई रोग नहीं है किन्तु इस रोग के होने पर...

अंडाशय में गांठ

अंडाशय में गांठ, महिलाओं में, अंडाशय के भीतर एक द्रव भरे हुए थैले होते हैं। अक्सर वे कोई लक्षण नहीं पैदा करते हैं। कभी-कभी वे सूजन, निचले पेट दर्द, या पीठ के...

अंतर्राष्ट्रीय रोग वर्गीकरण

रोग और संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकी वर्गीकरण ने 10 वा संसोधन प्रस्तुत किया जिसमें रोगो के लक्षण, सिकायत, सामाजिक परिस्थितियों तथा ब...

अग्न्याशय के रोग

अन्य अंगों की भाँति अग्न्याशय में भी दो प्रकार के रोग होते हैं। एक बीजाणुओं के प्रवेश या संक्रमण से उत्पन्न होने वाले और दूसरे स्वयं ग्रंथि में बाह्य कारणों ...

अतिताप

साँचा:Infobox symptom अतिताप, तापमान नियंत्रण की विफलता के कारण शरीर का बढ़ा हुआ तापमान होता है। अतिताप तब होता है जब शरीर ताप को अपव्यय करने की अपनी क्षमता ...

अतिवृद्धि

अतिवृद्धि का मतलब अपने घटक कोशिकाओं के बढ़ने के कारण एक अंग या ऊतक के आयतन में वृद्धि हो जाती है। यह अतिवर्धन से अलग है, इस में कोशिकाओं लगभग एक ही आकार रहते...

अधोमधुरक्तता

रक्त में जब ग्लूकोज़ का स्तर सामान्य से कम हो जाता है, तो उस अवस्था को अधोमधुरक्तता कहते हैं। यह चिकित्साशास्त्र का शब्द है। भोजन करने के 8 घंटे पश्चात या खा...

अनिद्रा

अनिद्रा या उन्निद्र रोग में रोगी को पर्याप्त और अटूट नींद नहीं आती, जिससे रोगी को आवश्यकतानुसार विश्राम नहीं मिल पाता और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ब...

अन्धता

अंधता या अंधापन, देख न सकने की दशा का नाम है। जो बालक अपनी पुस्तक के अक्षर नहीं देख सकता, वह इस दशा से ग्रस्त कहा जा सकता है। दृष्टिहीनता भी इसी का नाम है। प...

अफ्रीकी ट्रिपेनोसोमयासिस

अफ्रीकी ट्रिपेनोसोमयासिस अथवा स्लीपिंग सिकनेस मनुष्यों तथा अन्य पशुओं में होने वाली एक परजीवीजन्य बीमारी है। यह परजीवियों की एक प्रजाति ट्रिपैनोसोमा ब्रुसे क...

अल्पबुद्धिता

अल्पबुद्धिता की अल्पबुद्धिता संबंधी कानून ने यह परिभाषा दी है - अल्पबुद्धिता मस्तिष्क का वह अवरुद्ध अथव अपूर्ण विकास है जो 18 वर्ष की आयु के पूर्व पाया जाए, ...

आनुवंशिक रोग

आनुवंशिकी और रोग में बहुधा कोई न कोई संबंध रहता है। अनेक रोग दूषित वातावरण तथा परिस्थतियों से उत्पन्न होते हैं, किन्तु अनेक रोग ऐसे भी होते हैं जिनका कारण मा...

आनुवंशिक रोगों की सूची

यहाँ पर आनुवंशिक रोगों की सूची दी गयी है। इसके साथ ही उस रोग से सम्बन्धित उत्परिवर्तन तथा सम्बन्धित गुणसूत्र का नाम भी दिया गया है, यदि वे ज्ञात हैं। वर्णान्...

आमवातीय संधिशोथ

आमवातीय संधिशोथ या आमवातीय संध्यार्ति के आरंभिक अवस्था में जोड़ों में जलन होती है। आरंभिक अवस्था में यह काफी कम होती है। यह जलन एक समय में एक से अधिक संधियों...

आर्थेल्जिया

आर्थ्राल्जिया का शाब्दिक अर्थ है जोड़ों का दर्द। यह चोट, संक्रमण, बीमारियों या चिकित्सा उपचार के कारण होने वाली असहनीय प्रतिक्रिया का लक्षण है। MESH के अनुसा...

इनफ़्लुएंज़ा

इनफ्लुएंजा एक विशेष समूह के वायरस के कारण मानव समुदाय में होनेवाला एक संक्रामक रोग है। इसमें ज्वर और अति दुर्बलता विशेष लक्षण हैं। फुफ्फुसों के उपद्रव की इसम...

उच्च रक्तचाप

हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप, जिसे कभी कभी धमनी उच्च रक्तचाप भी कहते हैं, एक पुरानी चिकित्सीय स्थिति है जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव की इस...

उपदंश

उपदंश एक प्रकार का गुह्य रोग है जो मुख्यतः लैंगिक संपर्क के द्वारा फैलता है। इसका कारक रोगाणु एक जीवाणु, ट्रीपोनीमा पैलिडम है। इसके लक्षण अनेक हैं एंव बिना स...

उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग

उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में होने वाले संक्रमणों के उस समूह को उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग कहते हैं अफ्रीका और एशिया के विकासशील क्षेत्रों के कम आयवर्ग की आबादी...

ऊर्ध्वहनु वायुविवर

मैक्सिलरी साइनस या ऊर्ध्वहनु वायुविवर मानव शरीर की खोपड़ी में हवा भरी हुई गुहा होती हैं जो हमारे सिर को हल्कापन व सांस वाली हवा का नमी युक्त करते हैं। जब कभी...

एंथ्राक्स

एन्थ्राक्स एक खतरनाक एवं जानलेवा रोग है। यह मानव एवं पशु दोंनो को संक्रमित करता है। इसका कारण बेसिलस ऐन्थ्रैक्स नामक जीवाणु है। इस रोग के खिलाफ कार्य करने वा...

एसिडिटी (रोग)

एसिडिटी को चिकित्सकीय भाषा में गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स डिजीज के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे अम्ल पित्त कहते हैं। आमाशय के भित्ति में उपस्थित जठर ...

ऐल्ब्युमिनमेह

ऐल्ब्युमिनमेह एक रोग है, जिसके होने पर मूत्र में असामान्य मात्रा में ऐलब्युमिन पाया जाता है। यह एक प्रकार का प्रोटीनमेह है। सामान्य अवस्था में सभी के मूत्र म...

ऑंकोसर्कॉय्सिस

आंकोसर्कायसिस जिसे रिवर ब्लाइंडनेस और रॉब्लेस व्याधि, के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रकार के परजीवी कृमि परजीवी कृमि आंकोसेरा वाल्वलस के संक्रमण से होने वाल...

कंठमाला

कंठमाला लसीका ग्रंथियों का एक चिरकारी रोग है। इसमें गले की ग्रंथियाँ बढ़ जाती हैं और उनकी माला सी बन जाती है इसलिए उसे कंठमाला कहते हैं। आयुर्वेद में इसका वर...

कर्णकवकता

कणकवकता या कर्णमक्षिकता यह बाह्यकर्ण का एक छूत का रोग है जो प्राय: श्रवणछिद्पर होता है। ऐसा माना जाता है कि ये रोग बाह्य जीवाणुनाशक औषधियों के प्रयोग का कुपर...

कर्णनासाकंठ विज्ञान

कर्णनासाकंठ विज्ञान कान, नाक और गले से सम्बन्धित चिकित्साविज्ञान की एक शाखा है। यह शल्यचिकित्सा की एक विशिष्टता है। इस विशेषज्ञता वाले चिकित्सकों को कर्णनासा...

कान बजना

बाहर कोई ध्वनि न हो तब भी कान में कुछ सुनाई पड़ना कान बजना या कर्णक्ष्वेण कहलाता है। टिनिटस शरीर के बाहर से नहीं, बल्कि सिर में अनुभूत/सुनाई देने वाले शोर को...

कालमेह ज्वर

मलेरिया मच्छरों के नियन्त्रण में हवाई जहाज ठोकरें कालमेह ज्वर Black water fever अथवा मलेरियल हीमोग्लोबिन्युरिया malarial hemoglobinuria घातक तृतीयक मलेरिया क...

कुपोषण

शरीर के लिए आवश्यक सन्तुलित आहार लम्बे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है। कुपोषण के कारण बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी...

कुपोषणजन्य रोग

कुपोषणजन्य रोग वे रोग हैं जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शरीर में आवश्यक पोषक पदार्थों की कमी के कारण उत्पन्न होते हैं। बेरीबेरी रोग इसका एक उदाहरण है। ये रोग...

कुष्ठरोग

हिब्रू बाइबिल शब्दावली और इसके विभिन्न अर्थों के लिये, ज़ार्थ Tzaraath देखें. अन्य उपयोगों के लिये कुष्ठरोग स्पष्टीकरण देखें. कुष्ठरोग या हैन्सेन का रोग, चिक...

कृमिरोग

कृमिरोग मनुष्य अथवा अन्य जानवरों के उदर में अथवा पेट में केंचुए जिसे कृमि भी कहते है से उत्पन्न रोग है। सामान्य हिन्दीभाषी लोग पेट में कीड़ी भी बोलते हैं। यह...

कोथ

जब किसी भी कारण से शरीर के किसी भाग अथवा बड़े ऊतक-समूह की मृत्यु हो जाती है तब उस व्याधि को कोथ कहते हैं। कोथ जानलेवा स्थिति का संकेत है। कोथ शब्द प्राय: उन ...

क्षोभी आंत्र विकार

क्षोभी आंत्र विकार या इरीटेबल बाउल सिंड्रोम आँतों का रोग है जिसमें पेट में दर्द, बेचैनी व मल-निकास में परेशानी आदि होते हैं। इसे स्पैस्टिक कोलन, इरिटेबल कोलन...

खर्राटे

जब सोते हुए व्यक्ति के नाक से अपेक्षाकृत तेज आवाज निकलती है तो इसे खर्राटे लेना कहते हैं। इसे ओब्स्टृक्टिव स्लीप अप्निया कहा जाता है; अर्थात नींद में आपकी सा...

गंजापन

गंजापन की स्थिति में सिर के बाल बहुत कम रह जाते हैं। गंजापन की मात्रा कम या अधिक हो सकती है। गंजापन को एलोपेसिया भी कहते हैं। जब असामान्य रूप से बहुत तेजी से...

गंडमाला

गंडमाला रोग में मनुष्य के शरीर की लसीका ग्रंथियों, विशेषत: ग्रीवा की लसीका ग्रंथियों में दोष उत्पन्न हो जाता है। यक्ष्मा प्रकृति के बच्चों में यह रोग प्राय: ...

गलगुटिकाशोथ

मनुष्य के तालु के दोनों ओर बादाम के आकार की दो ग्रंथियाँ होती है, जिन्हें हम गलगुटिका, तुंडिका या टॉन्सिल कहते हैं। इन ग्रंथियों के रोग को गलगुटिकाशोथ कहते ह...

गुर्दे का कैंसर

किडनी कैंसर, जिसे गुर्दे के कैंसर के रूप में भी जाना जाता है, एक प्रकार का कैंसर है जो कि गुर्दा में कोशिकाओं में शुरू होता है। गुर्दे के कैंसर के दो सबसे आम...

गैर संचारी रोग

गैर-संचारी रोग, के अंतर्गत वह रोग आते है, जोकि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे प्रसारित नहीं होते है। गैर-संचारी रोगों में पार्किंसन रोग, स्वप्रतिरक्षित...

गैस्ट्रोस्काइसिस

गैस्ट्रोस्काइसिस एक जन्म दोष है जिसमें बच्चे की आंत पेट के बगल में एक छेद के माध्यम से शरीर के बाहर फैली हुई है। छेद का आकार परिवर्तनीय है, और पेट और यकृत सह...

ग्रसनी शोथ

यह रोग प्राय: शीत लग जाने के कारण उत्पन्न होता है। कभी-कभी उत्तेजक पदार्थों के वाष्प से, या गरम उत्तेजक पदार्थ के प्रयोग से भी, रोग की अवस्था उत्पन्न हो जाती...

ग्रासनाल के रोग

जिसके अंतस्थ intrinsic और बहिरस्थ extrinsic दो प्रकार के कारण होते हैं। अंतस्थ में जन्मजात रचनात्रुटि, शोथ, व्रण, संकट Stenosis अर्बुद तथा तंत्रिकाजन्य दशाएँ...

घाव

शरीर मे किसी हथियार या किसी कारण से चोट लग जाये, या शरीर के अन्दर किसी बाहरी वस्तु का प्रवेश कर दिया जाये या फ़िर अपने आप ही करा दिया जाये तो शरीर मे होने वा...

घुटनों का दर्द

मानव शरीर में पैर जितने ही महत्त्वपूर्ण हैं, उतने ही उनके बीच में बने घुटने। उन्हीं से पैरों को मुड़ने की क्षमता मिलती है। इन्हीं घुटनों में कई कारणों से दर्...

घेंघा रोग

घेंघा एक रोग है जिसमे गला फूल जाता है। यह शरीर में आयोडीन के की कमी के कारण होता है। आयोडीन की कमी के कारण थायरायड ग्रन्थि में सूजन आ जाती है। यह रोग बहुधा उ...

घ्राणहानि

गंध का अनुभव मनुष्य नाक के द्वारा करता है। मस्तिष्क से आरंभ होकर नासास्नायु का जोड़ा नाक की श्लेष्मिक कला तथा घ्राणकोशिका में जाकर समाप्त होता है। यह स्नायु ...

चर्म रोग

त्वचा के किसी भाग के असामान्य अवस्था को चर्मरोग कहते हैं। त्वचा शरीर का सनसे बड़ा तंत्र है। यह सीधे बाहरी वातावरण के सम्पर्क में होता है। इसके अतिरिक्त बहुत ...

चिकनगुनिया

चिकनगुनिया लम्बें समय तक चलने वाला जोडों का रोग है जिसमें जोडों मे भारी दर्द होता है। इस रोग का उग्र चरण तो मात्र २ से ५ दिन के लिये चलता है किंतु जोडों का द...

चेचक

चेचक एक विषाणु जनित रोग है। श्वासशोथ एक संक्रामक बीमारी थी, जो दो वायरस प्रकारों, व्हेरोला प्रमुख और व्हेरोला नाबालिग के कारण होती है। इस रोग को लैटिन नाम व्...

छींक

छींक वह क्रिया है जिसमें फेफड़ों से हवा नाक और मुह के रास्ते अत्यधिक तेजी से बाहर निकाली जाती है। यह एक अर्ध-स्वायत्त क्रिया है। छींक आमतौपर तब आती है जब हमा...

जर्मन रोमान्तिका

जर्मन रोमान्तिका या जर्मन मसूरिका अत्यंत सूक्ष्म विषाणु द्वारा होता है जिसका नाम रुबेला है। वर्ष के पूर्वार्ध में प्रकोप अधिक होता है। दाने निकलने के पूर्व अ...

जलवृषण

शरीर गुहा में विकृतिजन्य सीरमी द्रव का जमा होना जलसंग्रह कहलाता है। जब सीरमी द्रव वृषण के आसपास जमा होता है तो इसे जलवृषण कहते हैं।

ज्वर

जब शरीर का ताप सामान्य से अधिक हो जाये तो उस दशा को ज्वर या बुख़ार कहते है। यह रोग नहीं बल्कि एक लक्षण है जो बताता है कि शरीर का ताप नियंत्रित करने वाली प्रण...

टाइफस ज्वर

टाइफस ज्वर एक प्रकार का रोग है, जिसका आरंभ अचानक होता है। इसमें सिरदर्द, सर्दी लगना, ज्वर, शरीर में पीड़ा और तीसरे से पाँचवें दिन के बीच दाने निकलने और विषाक...

टेलॉन कस्प

टेलॉन कस्प एक दुर्लभ दंत विसंगति है। टेलॉन कस्प एक पूर्वकाल दांत पर एक अतिरिक्त कस्प है। टेलॉन टेलॉन कस्प पहले मिशेल द्वारा वर्णित किया गया १९८२ में और जे कि...

ट्रयकोमोइसीस

ट्रयकोमोइसीस संक्रामक बीमारी है जो की परजीवी ट्रयकोमोनस योनिनालिस के कारण होती हैं। इस रोग के लक्षण आमतौपर संक्रमण के ५ से २८ दिनों के बीच शुरू होते हैं। यह ...

डिम्बग्रंथि पुटी

डिम्बग्रंथि पुटी अंडाशय के भीतर तरल पदार्थ से भरी हुई थैली होते हैं। अक्सर वे कोई लक्षण नहीं पैदा होते परन्तु कभी-कभी सूजन, निचले पेट के हिस्से में दर्द, या ...