अस्तित्ववाद

अस्तित्ववाद अस्तित्ववाद मानव केंद्रित दृष्टिकोण हैं अर्थात् वह सम्पूर्ण जगत में मानव को सबसे अधिक प्रदान करता हैं उसकी दृष्टि में मानव एकमात्र साध्य है । प्रकृति के शेष उपादान "वस्तु" है
मानव का महत्व उसकी "आत्‍मनिष्‍ठता" मे हैं न कि उसकी "वस्‍तुनिष्‍ठता" में। विज्ञान,तकनीक के विकास और बुद्‍धिवादी दार्शनिकों ने मानव को एक "वस्तु" बना दिया है जबकि मानव की पहचान उसके अनूठे व्यक्तित्व के आधापर होनी चाहिए ।
स्वतंत्रता का अर्थ है- चयन की स्वतंत्रता। मनुष्य के सामने विभिन्न स्थितियों में कई विकल्प उपस्थित होते हैं। स्वतंत्र व्यक्ति वह है जो उपयुक्त विकल्प का चयन अपनी अंतरात्मा के अनुसार करता है, न कि किसी बाहरी दबाव में। कीर्केगार्द ने कहा भी है कि महान से महान व्यक्ति की महानता भी संदिग्ध रह जाती है, यदि वह अपने निर्णय को अपनी अंतरात्मा के सामने स्पष्ट नहीं कर लेता।
सार्त्र के अनुसार मनुष्य स्वतंत्र प्राणी हैं। यदि ईश्वर का अस्तित्व होता तो वह संभवतः मनुष्य को अपनी योजना के अनुसार बनाता। किंतु सार्त्र का दावा है कि ईश्वर नहीं है अतः मनुष्य स्वतंत्र है
1940 व 1950 के दशक में अस्तित्ववाद पूरे यूरोप में एक विचारक्रांति के रूप में उभरा। यूरोप भर के दार्शनिक व विचारकों ने इस आंदोलन में अपना योगदान दिया है। इनमें ज्यां-पाल सार्त्र, अल्बर्ट कामू व इंगमार बर्गमन प्रमुख हैं।
कालांतर में अस्तित्ववाद की दो धाराएं हो गई।
१ ईश्वरवादी अस्तित्ववाद और
२ अनीश्वरवादी अस्तित्ववाद

1. परिचय
अस्तित्ववादी विचार या प्रत्यय की अपेक्षा व्यक्ति के अस्तित्व को अधिक महत्त्व देते हैं। इनके अनुसार सारे विचार या सिद्धांत व्यक्ति की चिंतना के ही परिणाम हैं। पहले चिंतन करने वाला मानव या व्यक्ति अस्तित्व में आया, अतः व्यक्ति अस्तित्व ही प्रमुख है, जबकि विचार या सिद्धांत गौण। उनके विचार से हर व्यक्ति को अपना सिद्धांत स्वयं खोजना या बनाना चाहिए, दूसरों के द्वारा प्रतिपादित या निर्मित सिद्धांतों को स्वीकार करना उसके लिए आवश्यक नहीं। इसी दृष्टिकोण के कारण इनके लिए सभी परंपरागत, सामाजिक, नैतिक, शास्त्रीय एवं वैज्ञानिक सिद्धांत अमान्य या अव्यावहारिक सिद्ध हो जाते हैं। उनका मानना है कि यदि हम दुख एवं मृत्यु की अनिवार्यता को स्वीकाकर लें तो भय कहाँ रह जाता है।
अस्तित्वादी के अनुसार दुख और अवसाद को जीवन के अनिवार्य एवं काम्य तत्त्वों के रूप में स्वीकार करना चाहिए। परिस्थितियों को स्वीकार करना या न करना व्यक्ति की ही इच्छा पर निर्भर है। इनके अनुसार व्यक्ति को अपनी स्थिति का बोध दु:ख या त्रास की स्थिति में ही होता है, अतः उस स्थिति का स्वागत करने के लिए प्रस्तुत रहना चाहिए। दास्ताएवस्की ने कहा था- ‘‘यदि ईश्वर के अस्तित्व को मिटा दें तो फिर सब कुछ करना संभव है।’’

2. विक्टर इ फ्रान्कल द्वारा अस्तित्ववाद का अनुकरण
विक्टर इ फ्रान्कल एक लेखक और मनोचिकित्सक भी हैंI वह विएन्ना चिकित्सा विद्यालय के विश्वविद्यालय में मनोरोग और न्यूरोलॉजी के प्राध्यापक रहेI उनकी मृत्यु सन १९७७ में हुईI उनके करीब बतीस किताबे चबीस भाषाओँ में अनुवादित किए जा चुके हैंI विश्व युद्ध II के समय उन्होंने अपने तीन साल ऑस्च्वित्ज़, दचाऊ और कई अलग एकाग्रता शिविरConcentration Camps में बितायेI
उन्होंने अपने पुस्तक" मैनस सर्च फॉर मीनिंग”, में लोगोथेरेपी नाम के चिकित्सा के बारें में विस्तार में बताया हैं और यही नही इसी पुस्तक में उन्होंने मृत्यु शिविर से अस्तित्ववाद तक के यात्रा के विषय में अपने अनुभव के बहुत सी झलकियाँ दी हैI लोगोथेरेपी को अपना मूल विषय समझकर ही उन्होंने अस्तित्ववाद को परिभाषित करना चाहा और वे कही हद तक इस में सफल भी रहेI लोगोस एक ग्रीक शब्द हैं जिसका शुद्ध रूप हैं ‘अर्थI लोगोथेरेपी एक मनुष्य के अस्तित्व व् मनुष्य के अर्थ की खोज पर धारित हैंI लोगोथेरेपी के आधापर जीवन में अर्थ के खोज का प्रयास एक मनुष्य का सबसे प्रथम प्रेरक बल हैंI इसी कारण फ्रान्कल ने उच्च महत्त्व जीवन के अर्थ को दिया हैं ना कि आनंद कोI

2.1. विक्टर इ फ्रान्कल द्वारा अस्तित्ववाद का अनुकरण अस्तित्व कुंठा The Existential frustration
मनुष्य के अर्थ के खोज की धारा में हताशा या निराशा का भी बहुत बड़ा भाग होता हैंI लोगोथेरेपी ने इसे अस्तित्व कुंठा का नाम दिया हैंI ‘अस्तित्व’ शब्द को तीन तरीके से उपयोग में डाला जा सकता हैंI १ अस्तित्व जो अपने आप में अर्थ हैं यानि मनुष्य के जीवन का आधारI २ अस्तित्व का अर्थ, ३ व्यक्तिगत अस्तित्व में ठोस अर्थ के खोज का प्रयासI इस हताशा का परिणाम न्युरोसिस भी हो सकता हैंI विक्टर इ फ्रान्कल अपने मरीजों के तकलीफ द्वारा एक बहुत बड़े प्रश्न को उठाते हैं जो आज के जीवन में सबकी दुर्बलता का कारण बन चुकी हैं, वह हैं ज़िन्दगी में अर्थहीनता का प्रवासI ऐसी तकलीफ अधिकतर उन लोगो में देखी गयी जो मृत्यु शिविर से बच निकलेI इन लोगो में ज़िन्दगी को जीने कि उत्सुकता ही नहीं रहीI उनके ज़ेहन में खोखलापन ही रहा क्यूंकि वे आतंरिक अकेलेपन से गुज़रते हैंI इस खोक्लेपन याह अकेलेपन को जिससे हर इंसान झूझता हैं उसे विक्टर इ फ्रान्कल ने अस्तित्व वाक्युम का नाम दियाI

2.2. विक्टर इ फ्रान्कल द्वारा अस्तित्ववाद का अनुकरण अस्तित्व शून्यता The Existential Vacuum
अस्तित्व वाक्यूम एक ऐसी घटना हैं जो बीसवी सदी में बहुत ही विख्यात हुई हैंI अस्तित्व वक्युम कि शुरुवात उदासी से होती हैंI इसी अवसर पर फ्रान्कल ‘रविवार न्युरोसिस’ के बारें में स्पष्ट करते हैंI यह एक तरीके का अवसाद हैं जिसमे व्यक्ति अपने जीवन में संतोष की कमी को महसूस करता हैं और इसका एहसास उसे तब होता हैं जब वह हफ्ते भर के भाग-दोड़ के बाद अपने जीवन के अकेलेपन को महसूस करता हैंI फ्रान्कल के हिसाब से शराबीपन और बाल अपराध के कारणों को तब तक समझा नहीं जा सकता जब तक उससे दबे हुए अस्तित्व वक्युम को मान्यता नहीं मिलतीI यही कारण वृद्ध लोगो और पेंशनर के स्तिथियों में भी लागू होती हैंI यह अस्तित्व वक्युम अलग भेष धारण करते हैं और जीवन के भिन्न भिन्न पहलूओं में मनुष्य के समक्ष प्रस्तुत होती हैंI इनमें से कुछ शक्ति की इच्छा या धन की इच्छा हो सकती हैं जो अर्थ के खोज में मनुष्य के राह को धुंधला कर देती हैंI यह अस्तित्व कुंठा का ही परिणाम हैं जिससे यौन लिबिडो Sexual libido भी अनियंत्रत हो जाती हैंI

2.3. विक्टर इ फ्रान्कल द्वारा अस्तित्ववाद का अनुकरण अस्तित्ववाद का सार The Essence of Existence
लोगोथेरेपी की कोशिश हमेशा यही रहती हैं कि मरीजों को पूरी तरह से अपने कर्तव्य के तरफ मोड़ा जाएI ताकि वह यह समझ सके कि वे किसके लिए, किस लिए और क्यों कर्तव्य से बंधे हुए हैंI फ्रान्कल का यह कहना हैं कि जीवन का वास्तविक अर्थ स्वयं के मानस में नहीं बल्कि संसार में हैंI उसी तरह मानव के अस्तित्त्व का असली उद्देश्य आत्म परिचय से नहीं होताI उसका सार आत्म श्रेष्टता से प्राप्त होती हैंI फ्रान्कल इस बात को न्याय सिद्ध करने के लिए तर्क यह लाते हैं कि आत्म परिचय कभी भी जीवन का आधार नहीं बन सकता क्यूंकि मानव जितना उसे पाने का प्रयत्न करेगा वह उतना उसको खोएगाI
संसार को स्वयं कि अभिव्यक्ति कभी नहीं समझना चाहिए, ना ही संसार को एक मात्र साधन याह आत्म परिचय को प्राप्त करने का उपायI इससे यही आशय स्पष्ट होता हैं कि जीवन का अर्थ स्थिर नहीं है, पर इसका कोई छोर भी नहीं हैंI लोगोथेरेपी के अंतर्गत हम जीवन के अर्थ तीन तरीके से ढूंढ सकते हैं: १ कर्म के माध्यम से; २ किसी के याह किसी वास्तु के मूल्य को अनुभव करके; ३ पीड़ा सेI पहले तरीके को पूर्ण करना अत्यंत लाभदायक हैI दुसरे और तीसरे तरीको में पुनः विस्तार कि आवश्यकता हैंI दूसरा तरीका जिससे जीवन में अर्थ का प्रवेश होता हैं वो अनुभवों से ही प्राप्त होता हैं, यह शिक्षा हमें प्रकृति से हो सकती हैं या फिर संस्कृति से या फिर किसी को अनुभव करके भी यानि प्रेम के द्वाराI प्रेम ही वह एक ढाल हैं जिससे मनुष्य के अंतरात्मिक व्यक्तित्व को सींचा जा सकता हैंI कोई भी किसी मनुष्य को तब तक नहीं जान सकता या समझ सकता जब तक प्रेम भाव कि उत्पत्ति नहीं होतीI प्रेम को अध्यात्मिक रूप के अनुसार अगर डाला जाए तो उससे वह दुसरे मनुष्य के महत्वपूर्ण लक्षण को देख सकता हैं, वही मनुष्य जिससे वह प्रेम करता होI इससे भी अधिक वह अपने सामर्थ्य कि पुष्टि हो जाती है जो आत्म परिचय के राह पर बहुत बड़ा कदम हैI इससे दोनों व्यक्ति अपने सामर्थ्य को पहचान जाते हैंI
तीसरा तरीका जो मनुष्य को अपने जीवन के अर्थ को खोजने में सहायता करता हैं वह है पीढ़ाI मनुष्य जब भी असहाय या ऐसी परिस्थिति से गुज़रता है जिसका परिणाम उनके हाथ में न हो जैसे: कोई लाइलाज बीमारी, उसी वक्त एक इंसान को अपनी पहचान को बोध करना का भरपूर मौका मिलता है, अर्थात कष्ट को झेलकर जीवन का सबसे बड़ा अर्थ पाने का अवसर मिलता हैंI इसमें कष्ट कि तरफ व्यक्ति का नज़रिया भी पीढ़ा को झेलने कि ताकत देता हैI

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हिंदी साहित्य में अस्तित्ववाद.

श्रीकांत वर्मा: क्या कहूं आज जो नहीं कही, दुख ही. सार्त्र का अस्तित्ववाद प्रभा खेतान ने कलकत्ता विश्वविद्यालय, कलकत्ता से इस विषय पर दर्शनशास्त्र में पी एच​.डी. की उपाधि ली थीं। वही शोध प्रबंध पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया है। सन् १९८४ में सरस्वती विहार, दिल्ली से​. अस्तित्ववाद की विशेषताएं. पंजाबी साहित्य में नया द्वार खोल रहा सीरत का. अस्तित्ववाद के प्रमुख विचारक Astitvavad Ke Pramukh Vicharak. Share this Link: Year, 2002. READING URL, Login to Read. Language, Hindi. Editor Author s, Dr. Lakshmi Saxena, Dr. Sabhajeet Mishra. Book Type, Philosophy. Content Partner, Madhya Pradesh Hindi Granth Academy. Publisher.

अस्तित्ववाद के प्रवर्तक कौन थे.

कृष्ण किशोर ज्यां पाल सार्त्र का आत्म और. Marathi व्यवसाय व्यवस्थापन. पु. अस्तित्ववाद. Marathi रसायनशास्त्र. पु. अस्तित्ववाद. Marathi शासन व्यवहार. पु. अस्तित्ववाद. Marathi भौतिकशास्त्र. अस्तित्ववाद. Marathi परिभाषा. पु. अस्तित्ववाद. प्रोम नाइट पर अस्तित्ववाद रिंगटोन PHONEKY. डॉ. रामविलास शर्मा ने इस महत्त्वपूर्ण कृति में यह स्पष्ट किया है कि नयी कविता के विकास की क्या प्रक्रिया रही तथा अस्तित्ववादी भावबोध ने इसे किस प्रकाऔर किस हद तक प्रभावित किया है। तार सप्तक के पहले और बाद की नयी कविता की विषयवस्तु. अस्तित्ववाद மொழிபெயர்ப்பு இந்தி. गैब्रील मार्सेल द्वारा पुस्तक.

Journal of Social Sciences & Humanities Research.

अस्तित्ववाद पक्ष और विपक्ष पॅाल रुबिचेक अनु., प्रभाकर माचवे. By: रुबिचेक, पॅाल. Contributor s माचवे, प्रभाकर. Material type: materialTypeLabel BookPublisher: भोपाल मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी 1973Description: 182p. 24cm.Uniform titles: Existentialism - For & against. डिटेल्स Details: Vani Prakashan. कहीं भी मानव विश्वासपूर्वक जी सके। ऐसी ही शिक्षा को मानवीय शिक्षा अथवा. चेतना विकास मूल्य शिक्षा कहा गया है। यह मध्यस्थ दर्शन सह अस्तित्ववाद से. निःसृत है। मध्यस्थ दर्शन सह अस्तित्ववाद की परिचयात्मक प्रस्तुति जीवन विद्या. शिविर है. नई कविता और अस्तित्ववाद Sol. मूल्य Rs. 0 पृष्ठ 160 साइज 2 MB लेखक रचियता महावीर Mahaveer अस्तित्ववाद पुस्तक पीडीऍफ़ डाउनलोड करें, ऑनलाइन पढ़ें, Reviews पढ़ें Astitvavad Free PDF Download, Read Online, Review.

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Meaning of Astitvavadi अस्तित्ववादी in Hindi अस्तित्ववादी का हिंदी में मतलब: अस्तित्ववाद संबंधी अस्तित्ववाद का वह जो अस्तित्ववाद का अनुयायी या समर्थक हो। Examples of Astitvavadi ​अस्तित्ववादी अस्तित्ववादी के उदाहरण: अकारण नहीं उसने इस कृति. हिंदी काव्य में अस्तित्ववाद का प्रभाव अज्ञेय एवं. Previous Next आत्मकथा की संस्कृति अधूरे साक्षात्कार अंधायुग पाठ और प्रदर्शन अस्तित्ववाद से गांधीवाद तक भक्ति का संदर्भ भक्ति काव्य और लोक जीवन भारतीय प्राणधारा का स्वाभाविक विकास हिन्दी कविता. अस्तित्ववादी Meaning in Hindi GyanApp. शीर्षक Declaration Certificate प्राक्कथन अनुक्रम 1 अस्तित्ववाद और अलगावबोध 2 हिन्दी में अस्तित्ववाद का प्रवेश 3 निर्मल वर्मा – व्यक्तित्व और कृतित्व कहानियाँ– कथ्य– अलगावबोध की अभिव्यक्ति 4 कमलेश्वर– व्यक्तित्व और कृतित्व कहानियाँ–.

अनटाइटल्ड Shodhganga.

शर्मा, नरेन्द्रनाथ, 801.9 अ51श.अ. 29009 H. 3, Book, HIN, अस्तित्ववाद के प्रमुख विचारक। सक्सेना, लक्ष्मी, 111.1 स66अ2, 635640. 4, Book, HIN, अस्तित्ववाद: पक्ष और विपक्ष। रूबिचेक, पौल, 111.1 रू521अ.प्र. 44528 H. 5, Book, HIN, आचार्य भरत। शर्मा, शिवशरण, 808.2 भ64श.आ. VTLS Chameleon iPortal Browse Results. प्रकार युगदर्शन के रूप में भी वे तत्त्व समाहित हो जाते हैं यानी वही युगदर्शन का रूप ग्रहण. करते हैं । युग विशेष के साथ दर्शन का निकटवर्ती संबंध होता है । इसलिए अस्तित्ववाद के. उदयकाल की सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों पर. Meaning of अस्तित्ववाद in Hindi meaning डिक्शनरी. उपराष्ट्रपति ने यह बात तब कही है, जब दुनिया वसुधैव कटुंबकम की धारणा से विमुख होकर अस्तित्ववाद की ओर बढ़ रही है। यह अस्तित्ववाद अमेरिका और ब्रिटेन से लेकर भारत तक में प्रखर राष्ट्रवाद के रूप में सामने आ रहा है। जबकि आर्थिक. IGNCA Central Library catalog. अस्तित्ववाद. संज्ञा. पिछला अगला. परिभाषा वह वाद जिसके अनुसार अस्तित्व तत्व से ऊपर है वाक्य में प्रयोग अस्तित्ववाद में मानव को अपने पर्यावरण में तत्वज्ञान की अपेक्षा नहीं होती है । लिंग पुल्लिंग एक तरह का सिद्धांत. अस्तित्ववाद. अस्तित्ववाद Owl. प्रोम नाइट पर अस्तित्ववाद रिंगटोन IOS और Android के लिए PHONEKY ऐप के साथ अपने Android, Android, Apple iPhone, Samsung, HTC, LG.

अस्तित्ववाद संबंधी meaning in English.

Vi ईश्वरवादी अस्तित्ववाद विचारधारा का जनक किसे कहा जाता है? vii हिन्दी साहित्य का अदिकाल नामक आलोचनात्मक ग्रन्थ के रचनाकार. कौन हैं? viii द्विवेदी युग में कृष्णबिहारी मिश्र द्वारा रचित आलोचनात्मक ग्रन्थ का. नाम लिखिए। खण्ड ब. Et. अस्तित्ववाद Ugc net education. 4 अस्तित्ववाद. According to Ryle, to think of team spirit as something existing independent of players is to commit a. 1 Factual Mistake. 2 Breach of Rules. 3 Category mistake. 4 Fallacy of composition. राईल के अनुसार यह मानना कि टीमस्पिरिट खिलाडियों से स्वतन्त्र को कोई सत्ता.

General Knowledge: यदि आप अस्तित्ववाद के चेहरे के रूप.

इस खण्ड की अन्तिम इकाई 8 में यथार्थवाद एवं अस्तित्ववाद की संकल्पना. आधार, सिद्धान्तों एवं विशेषताओं की विवेचना की गयी है और साथ ही यथार्थवाद एवं. अस्तित्ववाद के अनुसार शिक्षा के उद्देश्यों, पाठ्यक्रम शिक्षक, शिक्षार्थी एवं शिक्षण. अस्तित्ववाद Astitvavad महावीर Mahaveer E Pustakalaya. भारत में भी अधिकतर इन्हीं विचारधाराओं को अपनाया गया अतः यहाँ भी विचारों का संकट उपस्थित हुआ है। 19 वीं और 20 वीं सदी में पश्चिमी सभ्यता को चुनौती देनेवाले अस्तित्ववादी दार्शनिकों तथा गांधी लोहिया के विचारों के परिप्रेक्ष्य में.

2 पाठ्यक्रम चेतना विकास मूल्य शिक्षा CG,Scert.

150 W836H Handbook of general psychology, 150 W836H Handbook of general psychology, 150 Z65P10 Psychology and life, 150 खे658सा सार्त्र का अस्तित्ववाद, 150 त155ज जैन कर्मविज्ञान और मनोविज्ञान, 150 नी358ज ज़रथुष्टृ ने कहा, 150 भ147स सामान्य मनोविज्ञान. सार्त्र का अस्तित्ववाद प्रभा खेतान पृष्ठ 1. फ्रांस के महान लेखक और अस्तित्ववादी दर्शन के जनक ज्यां पॉल सार्त्र ने 1964 में नोबेल पुरस्कार लेने से इंकाकर दिया था। यह वह समय था जब लेखक की नैतिक सत्ता का सम्मान समाज और राष्ट्र किया करते थे। सार्त्र लेखक के जोखिम भरे उद्यम के पक्ष. Page 1 अस्तित्ववाद मानव के व्यक्तित्व और उसकी. This page shows answers for question: अस्तित्ववाद के ‌ प्रवर्तक कौन है. Find right answer with solution and explaination of asked question. Rate and follow the Answer key for asked tion for astitvavad ke 8204 pravartak kaun hai.

अस्तित्ववाद HinKhoj Dictionary.

अन्य काल में क्यों नहीं हुआ? वह कौन सी शक्ति है, जिसने मुझे. यहां लाकर पटक दिया है? इस प्रकार पास्कल मनष्य के अस्तित्व को अपने भीतर समझने. का प्रयत्न करता है. डेनमार्क के कीर्केगार्द 1813–1855 ई. कीर्केगार्द को अस्तित्ववाद का प्रवर्तक. अस्तित्ववाद में गांधीवाद तक Astitvavad E Pustakalaya. अस्तित्ववाद मानव के व्यक्तित्व और उसकी स्वतंत्रता. गोविंदभाई के. मुंधवा. अस्तित्वाद पाश्चात्य अवधारणा है जिसके प्रभाव से ज्ञान का प्रत्येक क्षेत्रा प्रभावित है। दर्शनशास्त्रा भी इसके प्रभाव से अछूता नहीं है। यूँ तो प्राचीलनकाल.

Indic Book Club.

1.3.3 आधुनिकता संबंधी अवधारणा के आधार विचार. 1.3.3.1 अस्तित्ववाद. 1.3.3.2 मनोविश्लेषणवाद. 1.3.3.3 मार्क्सवाद. 1.4 आधुनिकता और राष्ट्रीयता. 1.5 आधुनिकता और साहित्य. 1.6 सारांश. 1.7 शब्दावली. 1.8 अभ्यास प्रश्नों के उत्तर. 1.9 सन्दर्भ ग्रन्थ सूची. BBC Hindi भारत अज्ञेय के तीन अहम उपन्यास. अस्तित्ववाद एक दृष्टि. 12 19. मालवा में प्रागैतिहासिक चित्रकला. 20 22. उच्च शिक्षा में महिलाओं की सहभागिता एवं सम्भावना. 23 26. भारत में व्यापार प्रबंधन में ई कामर्स की भूमिका. 27 30. जनजातियों की सामाजिक, आर्थिक स्थिति एवं विकास. CTET level 1 hindi quiz questions MockTime. Bharat, Rajdhani, Rajya, Bihar, Maharashtra, Delhi, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, Full Forms, General Knowledge, Current Gk find all your answers on. Page 1 प्रथम अध्याय अस्तित्ववाद अर्थ एवं स्वरूप. Meaning of अस्तित्ववाद in Hindi. एक धार्मिक मत जिसके अनुसार वेद, ईश्वर, परलोक आदि पर विश्वास किया जाता है वह वाद जिसके अनुसार अस्तित्व तत्व से ऊपर है पाश्चात्य दर्शन की एक आधुनिक शाखा, जिसका उपयोग साहित्यिक चिंतन पद्धति में भी होने लगा.

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अस्तित्ववाद आधुनिक युग का सशक्त दर्शन है । यद्यपि इसका. बीज डानिष चिन्तक कीगार्ड के दर्शन में उपलब्ध था, फिर भी आधुनिक. युग में कामू, काफ्का, सात्र जैसे दार्शनिकों व साहित्यकारों की वजह से. ही यह पनपकर पुष्कल हो गया तथा इसे दार्शनिक. नयी कविता और अस्तित्ववाद Azim Premji University Library. चूंकि इन भावों ने मानव मन को इस प्रकार जकड़ लिया था कि वह समाज में अपने. होने के सन्दर्भ में विचार करने को बाध्य हो गया। पुनः विचार की प्रक्रिया से कुछ ऐसे. चिन्तन बिन्दु उभरकर सामने आए, जो अस्तित्ववादी दर्शन के चिन्तन तत्त्व माने जा. अस्तित्ववाद से गांधीवाद तक Central Library, CUTN. Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is. Existentialism English Dictionary Definition TransLiteral Foundation. Search Keywords अस्तित्ववाद. Mock Test Online. हिन्दी सामान्यज्ञान प्रश्नोत्तरी Science gk in Hindi Polytical gk in Hindi Computer.