नाग पंचमी

नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह की शुक्ल पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है। लेकिन कहीं-कहीं दूध पिलाने की परम्परा चल पड़ी है। नाग को दूध पिलाने से पाचन नहीं हो पाने या प्रत्यूर्जता से उनकी मृत्यु हो जाती है। शास्त्रों में नागों को दूध पिलाने को नहीं बल्कि दूध से स्नान कराने को कहा गया है।
नागपंचमी के ही दिन अनेकों गांव कस्बों में कुश्ती का आयोजन होता है जिसमें आसपास के पहलवान भाग लेते हैं। गाय, बैल आदि पशुओं को इस दिन नदी, तालाब में ले जाकर नहलाया जाता है। इस दिन अष्टनागों की पूजा की जाती है।-
वासुकिः तक्षकश्चैव कालियो मणिभद्रकः। ऐरावतो धृतराष्ट्रः कार्कोटकधनंजयौ ॥ एतेऽभयं प्रयच्छन्ति प्राणिनां प्राणजीविनाम् ॥ भविष्योत्तरपुराण – ३२-२-७ आज के पावन पर्व पर वाराणसी काशी में नाग कुआँ नामक स्थान पर बहुत बड़ा मेला लगता है, किंवदन्ति है कि इस स्थान पर तक्षक गरूड़ जी के भय से बालक रूप में काशी संस्कृत की शिक्षा लेने हेतु आये,परन्तु गरूड़ जी को इसकी जानकारी हो गयी,और उन्होंने तक्षक पर हमला कर दिया, परन्तु अपने गुरू जी के प्रभाव से गरूड़ जी ने तक्षक नाग को अभय दान कर दिया, उसी समय से यहाँ नाग पंचमी के दिन से यहाँ नाग पूजा की जाती है,यह मान्यता है, कि जो भी नाग पंचमी के दिन यहाँ पूजा अर्चना कर नाग कुआँ का दर्शन करता है, उसकी जन्मकुन्डली के सर्प दोष का निवारण हो जाता है।

1. संस्कृति
हिन्दू संस्कृति ने पशु-पक्षी, वृक्ष-वनस्पति सबके साथ आत्मीय संबंध जोड़ने का प्रयत्न किया है। हमारे यहां गाय की पूजा होती है। कई बहनें कोकिला-व्रत करती हैं। कोयल के दर्शन हो अथवा उसका स्वर कान पर पड़े तब ही भोजन लेना, ऐसा यह व्रत है। हमारे यहाँ वृषभोत्सव के दिन बैल का पूजन किया जाता है। वट-सावित्री जैसे व्रत में बरगद की पूजा होती है, परन्तु नाग पंचमी जैसे दिन नाग का पूजन जब हम करते हैं, तब तो हमारी संस्कृति की विशिष्टता पराकाष्टा पर पहुंच जाती है।
गाय, बैल, कोयल इत्यादि का पूजन करके उनके साथ आत्मीयता साधने का हम प्रयत्न करते हैं, क्योंकि वे उपयोगी हैं। लेकिन नाग हमारे किस उपयोग में आता है, उल्टे यदि काटे तो जान लिए बिना न रहे। हम सब उससे डरते हैं। नाग के इस डर से नागपूजा शुरू हुई होगी, ऐसा कई लोग मानते हैं, परन्तु यह मान्यता हमारी संस्कृति से सुसंगत नहीं लगती।
नाग को देव के रूप में स्वीकार करने में आर्यों के हृदय की विशालता का हमें दर्शन होता है। कृण्वन्तो विश्वमार्यम्‌ इस गर्जना के साथ आगे बढ़ते हुए आर्यों को भिन्न-भिन्न उपासना करते हुए अनेक समूहों के संपर्क में आना पड़ा। वेदों के प्रभावी विचार उनके पास पहुँचाने के लिए आर्यों को अत्यधिक परिश्रम करना पड़ा।
विभिन्न समूहों को उपासना विधि में रहे फर्क के कारण होने वाले विवाद को यदि निकाल दिया जाए तो मानव मात्र वेदों के तेजस्वी और भव्य विचारों को स्वीकार करेगा, इस पर आर्यों की अखण्ड श्रद्धा थी। इसको सफल बनाने के लिए आर्यों ने अलग-अलग पुंजों में चलती विभिन्न देवताओं की पूजा को स्वीकार किया और अलग-अलग पुंजों को उन्होंने आत्मसात करके अपने में मिला लिया। इन विभिन्न पूजाओं को स्वीकार करने के कारण ही हमें नागपूजा प्राप्त हुई होगी, ऐसा लगता है।

2. भारत वर्ष में सर्प पूजन
भारत देश कृषिप्रधान देश था और है। सांप खेतों का रक्षण करता है, इसलिए उसे क्षेत्रपाल कहते हैं। जीव-जंतु, चूहे आदि जो फसल को नुकसान करने वाले तत्व हैं, उनका नाश करके सांप हमारे खेतों को हराभरा रखता है।
साँप हमें कई मूक संदेश भी देता है। साँप के गुण देखने की हमारे पास गुणग्राही और शुभग्राही दृष्टि होनी चाहिए। भगवान दत्तात्रय की ऐसी शुभ दृष्टि थी, इसलिए ही उन्हें प्रत्येक वस्तु से कुछ न कुछ सीख मिली।
साँप सामान्यतया किसी को अकारण नहीं काटता। उसे परेशान करने वाले को या छेड़ने वालों को ही वह डंसता है। साँप भी प्रभु का सर्जन है, वह यदि नुकसान किए बिना सरलता से जाता हो, या निरुपद्रवी बनकर जीता हो तो उसे मारने का हमें कोई अधिकार नहीं है। जब हम उसके प्राण लेने का प्रयत्न करते हैं, तब अपने प्राण बचाने के लिए या अपना जीवन टिकाने के लिए यदि वह हमें डँस दे तो उसे दुष्ट कैसे कहा जा सकता है? हमारे प्राण लेने वालों के प्राण लेने का प्रयत्न क्या हम नहीं करते?
साँप को सुगंध बहुत ही भाती है। चंपा के पौधे को लिपटकर वह रहता है या तो चंदन के वृक्ष पर वह निवास करता है। केवड़े के वन में भी वह फिरता रहता है। उसे सुगंध प्रिय लगती है, इसलिए भारतीय संस्कृति को वह प्रिय है। प्रत्येक मानव को जीवन में सद्गुणों की सुगंध आती है, सुविचारों की सुवास आती है, वह सुवास हमें प्रिय होनी चाहिए।
हम जानते हैं कि साँप बिना कारण किसी को नहीं काटता। वर्षों परिश्रम संचित शक्ति यानी जहर वह किसी को यों ही काटकर व्यर्थ खो देना नहीं चाहता। हम भी जीवन में कुछ तप करेंगे तो उससे हमें भी शक्ति पैदा होगी। यह शक्ति किसी पर गुस्सा करने में, निर्बलों को हैरान करने में या अशक्तों को दुःख देने में व्यर्थ न कर उस शक्ति को हमारा विकास करने में, दूसरे असमर्थों को समर्थ बनाने में, निर्बलों को सबल बनाने में खर्च करें, यही अपेक्षित है।

3. सर्प मणि
कुछ दैवी साँपों के मस्तिष्क पर मणि होती है। मणि अमूल्य होती है। हमें भी जीवन में अमूल्य वस्तुओं को बातों को मस्तिष्क पर चढ़ाना चाहिए। समाज के मुकुटमणि जैसे महापुरुषों का स्थान हमारे मस्तिष्क पर होना चाहिए। हमें प्रेम से उनकी पालकी उठानी चाहिए और उनके विचारों के अनुसार हमारे जीवन का निर्माण करने का अहर्निश प्रयत्न करना चाहिए। सर्व विद्याओं में मणिरूप जो अध्यात्म विद्या है, उसके लिए हमारे जीवन में अनोखा आकर्षण होना चाहिए। आत्मविकास में सहायक न हो, उस ज्ञान को ज्ञान कैसे कहा जा सकता है?
साँप बिल में रहता है और अधिकांशतः एकान्त का सेवन करता है। इसलिए मुमुक्षु को जनसमूह को टालना चाहिए। इस बारे में साँप का उदाहरण दिया जाता है।
देव-दानवों द्वारा किगए समुद्र मंथन में साधन रूप बनकर वासुकी नाग ने दुर्जनों के लिए भी प्रभु कार्य में निमित्त बनने का मार्ग खुला कर दिया है। दुर्जन मानव भी यदि सच्चे मार्ग पर आए तो वह सांस्कृतिक कार्य में अपना बहुत बड़ा योग दे सकता है और दुर्बलता सतत खटकती रहने पर ऐसे मानव को अपने किए हुए सत्कार्य के लिए ज्यादा घमंड भी निर्माण नहीं होगा।
दुर्जन भी यदि भगवद् कार्य में जुड़ जाए तो प्रभु भी उसको स्वीकार करते हैं, इस बात का समर्थन शिव ने साँप को अपने गले में रखकर और विष्णु ने शेष-शयन करके किया है।
समग्र सृष्टि के हित के लिए बरसते बरसात के कारण निर्वासित हुआ साँप जब हमारे घर में अतिथि बनकर आता है तब उसे आश्रय देकर कृतज्ञ बुद्धि से उसका पूजन करना हमारा कर्त्तव्य हो जाता है। इस तरह नाग पंचमी का उत्सव श्रावण महीने में ही रखकर हमारे ऋषियों ने बहुत ही औचित्य दिखाया है।

4. विधि
इसके बाद दीवाल पर गेरू पोतकर पूजन का स्थान बनाया जाता है। फिर कच्चे दूध में कोयला घिसकर उससे गेरू पुती दीवाल पर घर जैसा बनाते हैं और उसमें अनेक नागदेवों की आकृति बनाते हैं।
पूजन के लिए सेंवई-चावल आदि ताजा भोजन बनाएँ। कुछ भागों में नागपंचमी से एक दिन भोजन बना कर रख लिया जाता है और नागपंचमी के दिन बासी खाना खाया जाता है।
और फिर दीवाल पर बनागए नागदेवता की दधि, दूर्वा, कुशा, गंध, अक्षत, पुष्प, जल, कच्चा दूध, रोली और चावल आदि से पूजन कर सेंवई व मिष्ठान से उनका भोग लगाते हैं।
कुछ जगहों पर सोने, चांदी, काठ व मिट्टी की कलम तथा हल्दी व चंदन की स्याही से अथवा गोबर से घर के मुख्य दरवाजे के दोनों बगलों में पाँच फन वाले नागदेव अंकित कर पूजते हैं।
सर्वप्रथम नागों की बांबी में एक कटोरी दूध चढ़ा आते हैं।
प्रातः उठकर घर की सफाई कर नित्यकर्म से निवृत्त हो जाएँ।
पश्चात स्नान कर साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पश्चात आरती कर कथा श्रवण करना चाहिए।
पूरे श्रावण माह विशेष कर नागपंचमी को धरती खोदना निषिद्ध है। इस दिन व्रत करके सांपों को खीर खिलाई व दूध पिलाया जाता है। कहीं-कहीं सावन माह की कृष्ण पक्ष की पंचमी को भी नाग पंचमी मनाई जाती है। इस दिन सफेद कमल पूजा में रखा जाता है।

5. नागपंचमी के दिन
इस दिन नागदेव का दर्शन अवश्य करना चाहिए।
बांबी नागदेव का निवास स्थान की पूजा करना चाहिए।
ॐ कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा का जाप करने से सर्पविष दूर होता है।
नागदेव की सुगंधित पुष्प व चंदन से ही पूजा करनी चाहिए क्योंकि नागदेव को सुगंध प्रिय है।

6. कथा
प्राचीन काल में एक सेठजी के सात पुत्र थे। सातों के विवाह हो चुके थे। सबसे छोटे पुत्र की पत्नी श्रेष्ठ चरित्र की विदूषी और सुशील थी, परंतु उसके भाई नहीं था।
एक दिन बड़ी बहू ने घर लीपने को पीली मिट्टी लाने के लिए सभी बहुओं को साथ चलने को कहा तो सभी डलिया खर और मूज की बनी छोटी आकार की टोकरी और खुरपी लेकर मिट्टी खोदने लगी। तभी वहां एक सर्प निकला, जिसे बड़ी बहू खुरपी से मारने लगी। यह देखकर छोटी बहू ने उसे रोकते हुए कहा- मत मारो इसे? यह बेचारा निरपराध है।
यह सुनकर बड़ी बहू ने उसे नहीं मारा तब सर्प एक ओर जा बैठा। तब छोटी बहू ने उससे कहा-हम अभी लौट कर आती हैं तुम यहां से जाना मत। यह कहकर वह सबके साथ मिट्टी लेकर घर चली गई और वहाँ कामकाज में फँसकर सर्प से जो वादा किया था उसे भूल गई।
उसे दूसरे दिन वह बात याद आई तो सब को साथ लेकर वहाँ पहुँची और सर्प को उस स्थान पर बैठा देखकर बोली- सर्प भैया नमस्कार! सर्प ने कहा- तू भैया कह चुकी है, इसलिए तुझे छोड़ देता हूं, नहीं तो झूठी बात कहने के कारण तुझे अभी डस लेता। वह बोली- भैया मुझसे भूल हो गई, उसकी क्षमा माँगती हूं, तब सर्प बोला- अच्छा, तू आज से मेरी बहिन हुई और मैं तेरा भाई हुआ। तुझे जो मांगना हो, माँग ले। वह बोली- भैया! मेरा कोई नहीं है, अच्छा हुआ जो तू मेरा भाई बन गया।
कुछ दिन व्यतीत होने पर वह सर्प मनुष्य का रूप रखकर उसके घर आया और बोला कि मेरी बहिन को भेज दो। सबने कहा कि इसके तो कोई भाई नहीं था, तो वह बोला- मैं दूर के रिश्ते में इसका भाई हूँ, बचपन में ही बाहर चला गया था। उसके विश्वास दिलाने पर घर के लोगों ने छोटी को उसके साथ भेज दिया। उसने मार्ग में बताया कि मैं वहीं सर्प हूँ, इसलिए तू डरना नहीं और जहां चलने में कठिनाई हो वहां मेरी पूछ पकड़ लेना। उसने कहे अनुसार ही किया और इस प्रकार वह उसके घर पहुंच गई। वहाँ के धन-ऐश्वर्य को देखकर वह चकित हो गई।
एक दिन सर्प की माता ने उससे कहा- मैं एक काम से बाहर जा रही हूँ, तू अपने भाई को ठंडा दूध पिला देना। उसे यह बात ध्यान रही और उससे गर्म दूध पिला दिया, जिसमें उसका मुख बेतरह जल गया। यह देखकर सर्प की माता बहुत क्रोधित हुई। परंतु सर्प के समझाने पर चुप हो गई। तब सर्प ने कहा कि बहिन को अब उसके घर भेज देना चाहिए। तब सर्प और उसके पिता ने उसे बहुत सा सोना, चाँदी, जवाहरात, वस्त्र-भूषण आदि देकर उसके घर पहुँचा दिया।
इतना ढेर सारा धन देखकर बड़ी बहू ने ईर्षा से कहा- भाई तो बड़ा धनवान है, तुझे तो उससे और भी धन लाना चाहिए। सर्प ने यह वचन सुना तो सब वस्तुएँ सोने की लाकर दे दीं। यह देखकर बड़ी बहू ने कहा- इन्हें झाड़ने की झाड़ू भी सोने की होनी चाहिए। तब सर्प ने झाडू भी सोने की लाकर रख दी।
सर्प ने छोटी बहू को हीरा-मणियों का एक अद्भुत हार दिया था। उसकी प्रशंसा उस देश की रानी ने भी सुनी और वह राजा से बोली कि- सेठ की छोटी बहू का हार यहाँ आना चाहिए। राजा ने मंत्री को हुक्म दिया कि उससे वह हार लेकर शीघ्र उपस्थित हो मंत्री ने सेठजी से जाकर कहा कि महारानीजी छोटी बहू का हार पहनेंगी, वह उससे लेकर मुझे दे दो। सेठजी ने डर के कारण छोटी बहू से हार मंगाकर दे दिया।
छोटी बहू को यह बात बहुत बुरी लगी, उसने अपने सर्प भाई को याद किया और आने पर प्रार्थना की- भैया! रानी ने हार छीन लिया है, तुम कुछ ऐसा करो कि जब वह हार उसके गले में रहे, तब तक के लिए सर्प बन जाए और जब वह मुझे लौटा दे तब हीरों और मणियों का हो जाए। सर्प ने ठीक वैसा ही किया। जैसे ही रानी ने हार पहना, वैसे ही वह सर्प बन गया। यह देखकर रानी चीख पड़ी और रोने लगी।
यह देख कर राजा ने सेठ के पास खबर भेजी कि छोटी बहू को तुरंत भेजो। सेठजी डर गए कि राजा न जाने क्या करेगा? वे स्वयं छोटी बहू को साथ लेकर उपस्थित हुए। राजा ने छोटी बहू से पूछा- तुने क्या जादू किया है, मैं तुझे दण्ड दूंगा। छोटी बहू बोली- राजन! धृष्टता क्षमा कीजिए, यह हार ही ऐसा है कि मेरे गले में हीरों और मणियों का रहता है और दूसरे के गले में सर्प बन जाता है। यह सुनकर राजा ने वह सर्प बना हार उसे देकर कहा- अभी पहिनकर दिखाओ। छोटी बहू ने जैसे ही उसे पहना वैसे ही हीरों-मणियों का हो गया।
यह देखकर राजा को उसकी बात का विश्वास हो गया और उसने प्रसन्न होकर उसे बहुत सी मुद्राएं भी पुरस्कार में दीं। छोटी वह अपने हाऔर इन सहित घर लौट आई। उसके धन को देखकर बड़ी बहू ने ईर्षा के कारण उसके पति को सिखाया कि छोटी बहू के पास कहीं से धन आया है। यह सुनकर उसके पति ने अपनी पत्नी को बुलाकर कहा- ठीक-ठीक बता कि यह धन तुझे कौन देता है? तब वह सर्प को याद करने लगी।
तब उसी समय सर्प ने प्रकट होकर कहा- यदि मेरी धर्म बहिन के आचरण पर संदेह प्रकट करेगा तो मैं उसे खा लूँगा। यह सुनकर छोटी बहू का पति बहुत प्रसन्न हुआ और उसने सर्प देवता का बड़ा सत्कार किया। उसी दिन से नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है और स्त्रियाँ सर्प को भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं।

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नाग पंचमी हिस्ट्री.

नागपंचमी पर पूजे गए नाग देवता Inext Live. Temples News in Hindi: Nag Panchami 2019 सावन शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन नागदेव की पूजा की जाती है।. नाग पंचमी कब है. नागपंचमी 2019 वरशिप ऑफ़ शिवा हास् स्पेशल. Bhopal News नगर में सोमवार को नाग पंचमी का पर्व परंपरा अनुसार मनाया जाएगा भगवान शिव के प्रिय दिवस सोमवार को ही नाग पंचमी होने से सिद्घ योग बन रहा है. नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है. नाग पंचमी कब और कैसे मनाएं How To Boldsky Hindi. नाग पंचमी Nag panachami meaning in English इंग्लिश मे मीनिंग is HIUNDU FESTIVAL IN WHICH SNAKE IS WORSHIPPED AS A DEITY नाग पंचमी ka matlab english me HIUNDU FESTIVAL IN WHICH SNAKE IS WORSHIPPED AS A DEITY hai. Get meaning and translation of Nag panachami in English.

नाग पंचमी फोटोज.

UNITED NEWS OF INDIA. नागपंचमी पर्व के इस दिन स्नान करके गोबर से नाग बनाए जाते हैं​। मुख्य द्वार के दोनों ओर दूध, दूब, कुशा, चंदन, अक्षत, पुष्प आदि से नागदेव का पूजन किया जाता है। पुराणों के अनुसार दूध से सर्प को स्नान कराने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है। देश के​. नाग पंचमी का वीडियो. BBC Hindi नागपंचमी का पर्व. आज देश भर में नाग पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है. ये पर्व सावन के महीने में मनाया जाता है और हिंदू धर्म में इसका बहुत महत्व है. नाग पंचमी वाले दिन सांपों को दूध पिलाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है. माना जाता है कि ऐसा.

बिहार में नाग पंचमी कब है.

नाग पंचमी पर्व 2019 कृपया नागदेव को दूध नहीं. बता दें इस बार नाग पंचमी 5 अगस्त 2019 को पड़ रही है। जिस दिन श्रावण माह का तीसरा सोमवार पड़ रहा है। बताया जा रहा है 125 साल बाद ऐसे संयोग बनें हैं जब सोमवार के दिन नाग पंचमी मनाई जाएगी। आइए अब जानते हैं इससे जुड़ी खास बातें. वर्षों बाद बन रहा हैं इस नाग पंचमी पर यह खास संयोग. ज्‍योतिष शास्‍त्र के अनुसार कुंडली में अगर काल सर्प दोष हो तो नाग पंचमी के दिन नाग देव की पूजा और रुद्राभिषेक करने से दोष से मुक्ति मिल जाती है lifestyle News in Hindi हिंदी न्यूज़, समाचार, लेटेस्ट ब्रेकिंग न्यूज़ इन हिंदी.

क्यों मनाते हैं नाग पंचमी? Why Do We Celebrate Nag.

Продолжительность: 1:23. नाग पंचमी Nag Panchami Dates, Schedule Bh. Nag Panchami: नाग पंचमी के दिन भूलकर भी नहीं करें ये 5 काम, इन्हें माना जाता है अशुभ. Nag Panchami Date Importance, Puja Vidhi, Dos & Dont: नाग पंचमी के दिन अपने घर के बाहर द्वापर दोनों ओर गोबर से सर्प की आकृति बनाकर उनका दही, अक्षत, पुष्म,. नागपंचमी कथा, nag panchami katha Speaking Tree. नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा होती हैं। लेकिन इस बार इस नागपंचमी को श्रावण सोमवार होने की वजह से भगवान शिव की भी पूजा होंगी। श्रावण सोमवार एवं नाग पंचमी का एक ही दिन होने का संयोग लगभग 100 वर्ष से भी ज्यादा का बन रहा हैं।.

नागपंचमी में यहां दिखता है अजब नजारा, सांपों को.

यात्रा NAGDWAR MELA PACHMARHI Bhopal Samachar August 02, 2019. सौरभ सिंह राजपूत। ये यात्रा हर साल अगस्त माह नागपंचमी के 11 दिन पहले शुरु की जाती… मप्र में स्थापित है विश्व का सबसे बड़ा स्फटिक शिवलिंग WORLDS LARGEST RHINESTONE SHIVLING. Celebrating Festivals across the World. Nag Panchami 2019: नाग पंचमी का त्योहार नागों को समर्पित है। यह हर वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। देशभर में आज नाग पंचमी मनाई जा रही है। इस दिन व्रत पूर्वक नागों का पूजन अर्चन होता है। इस बार नाग. नाग पंचमी की ताज़ा ख़बर, नाग पंचमी ब्रेकिंग. Intro:समस्तीपुर जिले में नाग पंचमी का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है ।यहां भगत नदी में जाकर तंत्र मंत्र के द्वारा विषैले से विषैले सांप को निकलता है। और इस सांप को छोटे बड़े सभी लोग इस कदर खेलते हैं ।लगता है कि जैसे. नागपंचमी 28 को Hindi News इंडिया टीवी हिंदी India. Nag Panchami 2019 whatsApp wishes and Hindi English Messages Photos Status: नाग पंचमी का त्योहार 05 जुलाई, सोमवार को देश में मनाया जा रहा है। यह त्योहार खास तौपर उत्तर मध्य भारत के कई हिस्सों में मनाया जाता है। इस दिन सर्प देवता की पूजा.

Bhopal News: नाग पंचमी पर बना ऐसा अद्भुत संयोग शिव.

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Nag Panchami 2019 Know The Mythological Stories नागपंचमी.

नागपंचमी कथा, nag panchami katha नाग पंचमी हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। हिन्दू पंचांग में सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें. नाग पंचमी न्यूज्ड Newsd. नागपंचमी पूजन का है विशेष महत्व. नाग पंचमी Nag Panchami ऐसा पर्व है जिसमें सांप या नाग को देवता Nag Devta मानकर उसकी पूजा की जाती है। नाग पंचमी के दिन लोग दिन भर व्रत करते हैं और सांपों को दूध पिलाते हैं।. नाग पंचमी सांप दुश्मन नहीं, पूजनीय हैं ड्रूपल. Опубликовано: 17 апр. 2019 г.

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नागपंचमी की तिथि Nag panchami Tithi, शुभ मुहूर्त Subh Muhurat, महत्व Importance, पूजा विधि Puja Vidhi, कथा Katha और मंत्र ​Mantra को जानने से नागपंचमी का पूरा लाभ लिया जा सकता है। नागपंचमी साल 2019 Nag panchami 2019 में 5 अगस्त 2019. नाग पंचमी पर भेजें ये WhatsApp Times Now Hindi. नाग पंचमी का त्योहार Hindi News, नाग पंचमी का त्योहार Breaking News, Find all नाग पंचमी का त्योहार से जुड़ी खबरें at Live Hindustan, page1.

नागपंचमी पर दुर्लभ संयोग, सावन के सोमवार में नाग.

नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह की शुक्ल पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है। लेकिन कहीं कहीं दूध पिलाने. नाग पंचमी हिंदी शब्दकोश. Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life​, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts. Navabharat जानें हनुमान जी के नारी रूप के बारे में. नाग पंचमी. श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग व्रत याने कि नाग पंचमी का व्रत किया जाता है। इस दिन नाग देवता का पूजन किया जाता है। सर्पों का प्रकृति के साथ गहरा सम्बन्ध रहा है। हमारे कृषि प्रधान देश में कहा जाता है.

नागपंचमी 2019 अमर उजाला.

भारत और नेपाल में नागपंचगी का पर्व मनाया गया. जानिए, आखिर क्यों मनाते हैं नागपंचमी पर्व Patrika. इटावा सफारी का दीदार अब सुबह दस से शाम पांच बजे तक दो दुल्हनों ने निकाला घोड़ी पर बैठकर बनवारा मथुरा में वसंत पंचमी पर राधा श्यामसुंदर मंदिर बनता है गवाह आज का इतिहास भारत और विश्व इतिहास में 06 फरवरी की प्रमुख घटनाएं भारत और विश्व. नाग पंचमी Navodaya Times. GORAKHPUR नागपंचमी के मौके पर गोरखपुराइट्स ने सिटी के शिवालयों में पूजा अर्चना की। सुबह से ही सिटी के डिफरेंट एरियाज में भक्तों की भीड़ मंदिरों में उमड़ पड़ी। एक तरफ जहां शिव मंदिरों में नाग देवता को लोगों ने दूध पिलाकर. नाग पंचमी का त्योहार news in hindi, नाग पंचमी का. Продолжительность: 0:09.

Nag Panchami 2019: नाग पंचमी पर बन रहा शुभ योग, जानें.

नाग पंचमी का महापर्व पांच अगस्त को मनाया जाएगा। सनातन परंपरा में पूजे जाने वाले नागों का संबंध सिर्फ देवी ​देवताओं से ही नहीं बल्कि मनुष्य के कल्याण से भी जुड़ा हुआ है। नाग देवता की पूजा का हमारे शास्त्रों में विशेष. Why Lord Shiva Like Dhatura Bhang And Water Mahashivratri. कानपुर देहात. हिंदू धर्म में नागपंचमी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व को पूर्वांचल क्षेत्रों में बड़े पर्व के रूप में मनाते है। यह पर्व सावन महीने की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। जिसमें घरों में पकवान, सिंवई सहित गेंहू. नाग पंचमी 2020 Naag Panchmi 2020 Voidcan. नाग पंचमी Нагапанчами.

नागपंचमी पर क्या क्या बनता है, किन पकवानगली.

नाग पंचमी के दिन सर्प और शेष नाग की पूजा की जाती है। इस कुछ कामों को नहीं किया जाता है। मान्यता है कि इन कामों को करने से नाग देवता नाराज हो जाते हैं Read latest hindi news ​ताजा हिन्दी समाचार on nagpanchami, nag panchami 2019,. हिंदू धर्म में नाग पंचमी मनाने का Punjab Kesari. Nag panchami 2019 ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार की नाग पंचमी सोमवार व सिद्धयोग में मनाई जाएगी जो बेहद खास है। ऐसा योग वर्षो के बाद देखने को मिलता है।. नागपंचमी सनातन संस्था. गले में लिपटा नाग, मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा, जटा में गंगा, हाथ में त्रिशूल और डमरू कुछ ऐसा स्वरूप… Vasant Panchami 2020 Know Puja Vidhi Muhurat And Significance Vasant Panchami 2020: वसंत पंचमी पर इस पूजा विधि से घर आएंगी विद्या की देवी.