पंचकल्याणक

पंचकल्याणक जैन ग्रन्थों के अनुसार सभी तीर्थंकरों के जीवन में घटित होते है। यह पाँच कल्याणक हैं –
जन्म कल्याणक: जब तीर्थंकर बालक का जन्म होता है।
गर्भ कल्याणक: जब तीर्थंकर प्रभु की आत्मा माता के गर्भ में आती है।
दीक्षा कल्याणक: जब तीर्थंकर सब कुछ त्यागकर वन में जाकर मुनि दीक्षा ग्रहण करते है।
मोक्ष कल्याणक: जब भगवान शरीर का त्यागकर अर्थात सभी कर्म नष्ट करके निर्वाण/ मोक्ष को प्राप्त करते है।
केवल ज्ञान कल्याणक: जब तीर्थंकर को केवल ज्ञान की प्राप्ति होती है।
इन पाँच कल्याणकों को पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में दिखाई जाने वाली घटनाएँ काल्पनिक नहीं, प्रतीकात्मक हैं। हमारी आँख कितनी भी शक्तिशाली हो जाए, लेकिन वह काल की पर्तों को लांघकर ऋषभ काल में नहीं देख सकतीं। आचार्यों ने 2500 साल से तो कम से कम हमारे लिए तथ्यों को संग्रहित किया है। जिसमें पूर्व परंपरा से चले आ रहे घटनाक्रम का परीक्षण करें किंतु तब तक अविश्वास न करें जब तक अन्यथा सिद्ध न हो जाए। ता है।
तीर्थंकर एक सत्य, एक प्रकाश है जो मानव की भावभूमि प्रकाशित करता रहा है। तीर्थंकर की वाणी को एक क्षण मात्र के लिए भूल कर देखिए- जीवन शून्य हो जाएगा- सभ्यता के सारे ताने-बाने नष्ट हो जाएँगे।
हे तीर्थंकर वाणी! हमारे हृदय में प्रवेश कर हमें अपने अज्ञान और पूर्वाग्रहों से मुक्त होने में सहायक हो।
पंच कल्याण महोत्सव में कई रूपक बताए जाते हैं, जैसे गर्भ के नाटकीय दृश्य, 16 स्वप्न, तीर्थंकर का जन्मोत्सव, सुमेरु पर्वत पर अभिषेक, तीर्थंकर बालक को पालना झुलाना, तीर्थंकर बालक की बालक्रीड़ा, वैराग्य, दीक्षा संस्कार, तीर्थंकर महामुनि की आहारचर्या, केवल ज्ञान संस्कार, समवशरण, दिव्यध्वनि का गुंजन, मोक्षगमन, नाटकीय वेशभूषा में भगवान के माता-पिता बनाना, सौधर्म इंद्र बनाना, यज्ञ नायक बनाना, धनपति कुबेर बनाना आदि। ऐसा लगता है जैसे कोई नाटक के पात्र हों। किन्तु सचेत रहें ये नाटक के पात्र नहीं हैं। तीर्थंकर के पूर्वभव व उनके जीवनकाल में जो महत्वपूर्ण घटनाएँ हुईं, उन्हें स्मरण करने का यह तरीका है। उन घटनाओं को रोचक ढंग से जनसमूह में फैलाने का तरीका है। हमारी मुख्य दृष्टि तो उस महामानव की आत्मा के विकास क्रम पर रहना चाहिए जो तीर्थंकरत्व में बदल जाती है।
जैनागमों में प्रत्येक तीर्थंकर के जीवनकाल में पाँच प्रसिद्ध घटनाओं-अवसरों का उल्लेख मिलता है- वे अवसर जगत के लिए अत्यंत कल्याणकारी होते हैं। अतः उनका स्मरण दर्शन भावों को जागृत करता है व सही दिशा में उन्हें मोड़ सकता है। वास्तव में देखा जाए तो प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में ऐसा ही घटनाक्रम घटित होता है किंतु साधारण व्यक्ति गर्भ और जन्म और तप कल्याण के पूर्व बाल क्रीड़ा, राज्याभिषेक जीवन में सांसारिक सफलता पाना आदि क्रियाओं से गुजर जाता है किंतु वैराग्य उसके जीवन में फलित नहीं होता। उसका कारण पूर्व जनित कर्म तो होते ही हैं किंतु उसके संस्काऔर संगति अध्यात्म परक न हो पाने के कारण वैराग्य फलित नहीं होता। जैन धर्म भावना प्रधान है। भावनाओं को कड़ियों में पिरोकर जैन धर्म के दर्शन व इतिहास की रचना हुई है। यदि हम भावनाओं को एक तरफ उठाकर रख दें तो जैन धर्म के ताने-बाने को हम नहीं समझ पाएँगे। पंच कल्याणक महोत्सव इसी ताने-बाने का एक भाग है।
जिन घटनाओं ने - परिवर्तनों ने मानव को महामानव बना दिया, उसे भगवान बना दिया- लोग उसे नहीं भूले, उनके सामने उसे बार-बार दोहराया जाए ताकि वे सदैव स्मरण करते रहें कि आत्मा को परमात्मा बनने के लिए कई पड़ावों से होकर गुजरना पड़ता है। कोई आत्मा तब तक परमात्मा नहीं बन सकती जब तक उसे संसार से विरक्ति न हो, वह तप न करे, केवल ज्ञान उत्पन्न हो तब तक वह परमात्मा बनने का अधिकारी नहीं है।
पहले लिखित रिकार्ड तो नहीं थे- जो पुरानी घटनाओं को याद रखने का सहारा बनते। पहले तो मनुष्य की विचार जनित वाणी और कुछ दृश्य दिखाना ही- घटनाओं को याद रखने का तरीका था। तीर्थंकर प्रकृति का बंध होने के बावजूद, तीर्थंकर की आत्मा को त्याग-तपस्या का मार्ग अपनाना ही पड़ता है। सांसारिक प्राणी के सामने इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराया जाए ताकि, जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों को वह सफलता से समझ जाए।
जंबूदीवपण्णत्ति संग हो अधिकार संख्या 13/गाथा सं. 93 में लिखा है- जिसका अर्थ इस प्रकार है- जो जिनदेव, गर्भावतार काल, जन्मकाल, निष्क्रमणकाल, केवल ज्ञानोत्पत्तिकाल और निर्वाण समय, इन पाँचों स्थानों कालों से पाँच महाकल्याण को प्राप्त होकर महाऋधी युक्त सुरेन्द्र इंद्रों से पूजित हैं।
पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव जैन समाज का सर्वाधिक महत्वपूर्ण नैमित्तिक महोत्सव है। यह आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया का महोत्सव है। पौराणिक पुरुषों के जीवन का संदेश घर-घर पहुँचाने के लिए इन महोत्सवों में पात्रों का अवलम्बन लेकर सक्षम जीवन यात्रा को रेखांकित किया जाता है। थोड़ा इसे विस्तार से समझने का प्रयत्न करते हैं।

1. गर्भ कल्याणक
भगवान के गर्भ में आने से छह माह पूर्व से लेकर जन्म पर्यन्त 15 मास तक उनके जन्म स्थान में कुबेर द्वारा प्रतिदिन तीन बार साढ़े तीन करोड़ रत्नों की वर्षा होती है। यह भगवान के पूर्व अर्जित कर्मों का शुभ परिणाम है।
दिक्ककुमारी देवियाँ माता की परिचर्या व गर्भशोधन करती हैं। यह भी पुण्य योग है।
गर्भ वाले दिन से पूर्व रात्रि को माता को 16 उत्तम स्वप्न दिखते हैं- जिन पर भगवान का अवतरण मानकर माता-पिता प्रसन्न होते हैं- इन स्वप्नों के बारे में विधानाचार्य आपको बताएँगे ही। इस कल्याणक को आपको इस प्रकार दिखाया जाएगा-
सबसे पहले मंत्रोच्चार पूर्वक उस स्थान को जल से शुद्ध किया जाएगा। यह जल घटयात्रापूर्वक शुद्धि स्थल तक लाया जाएगा।
शुद्धि के पश्चात उचित स्थल पर घटस्थापना होगी। उसके पश्चात जैन-ध्वज को लहराया जाएगा। जैन ध्वज - जैन दर्शन, ज्ञान और चरित्र की विजय पताका है। यह तीर्थंकरों की विजय पताका नहीं है- किसी राजा या राष्ट्र की विजय पताका नहीं है। यह चिन्तन-मनन, त्याग-तपस्या व अंतिम सत्य को पालने वाले मोक्षगामियों की विजय पताका है। इस भाव को ग्रहण करना आवश्यक है। दिग्‌दिगंत में लहराने वाला यह ध्वज प्रतीक है उस संदेश का जो तीर्थंकरों- आचार्यों, मुनियों के चिंतन-मनन व आचरण से परिष्कृत है। ध्वजारोहण की एकमात्र आकांक्षा यही होती है कि प्राणिमात्र को अभय देने वाले जैन धर्म की स्वर लहरी तीनों लोकों में गूँजे। इस ध्वजा के फहराने का भी अधिकार उसे ही है जिसकी पूर्ण आस्था जैन जीवन शैली पर हो। जैन ध्वज के पाँच रंग होते हैं- क्रमशः लाल, पीला, सफेद, हरा और नीला। पंडित नाथूलालजी शास्त्री के अनुसार इन रंगों को गृहस्थों के पंचाणुव्रत का सूचक भी माना गया है। इस ध्वजारोहण के साथ ही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ हो जाता है।
पंच कल्याणक में गर्भ कल्याणक के साथ संस्कारों की चर्चा अत्यंत महत्वपूर्ण है। व्यक्ति के जीवन की संपूर्ण शुभ और अशुभवृत्ति उसके संस्कारों के अधीन है जिनमें से कुछ वह पूर्भव से अपने साथ लाता है व कुछ इसी भव में संगति व शिक्षा आदि के प्रभाव से उत्पन्न करता है। इसीलिए गर्भ में आने के पूर्व से ही बालक में विशुद्ध संस्कार उत्पन्न करने के लिए विधान बताया गया है। गर्भावतरण से लेकर निर्वाण पर्यन्त यथा अवसर जिनेन्द्र पूजन व मंत्र विधान सहित 53 क्रियाओं का विधान है - जिनसे बालक के संस्कार उत्तरोत्तर विशुद्ध होते हुए एक दिन वह निर्वाण का भाजन हो जाता है- जिनेन्द्रवर्णी पंचास्तिकाय, सिद्धिविनिश्चय, मूलाचार, धवला, महापुराण आदि ग्रंथों में संस्कारों पर बहुत कुछ लिखा गया है। पंचकल्याणक के शुभ संयोग से यदि संस्कारों के बारे में अधिक गहराई से विचार करेंगे तो उन्नत जीवन का हमारा नजरिया अधिक तार्किक हो जाएगा।
हमें दो बातों पर अवश्य ध्यान रखना होगा कि परिवार मे होने वाली माताओं को लेडी डॉक्टर जो निर्देश देती हैं, उसका मूल आधार इन्हीं संस्कारों में छिपा है। पूजा मंत्र आदि पर आधारित ग्रंथों का सृजन हुआ, उसका आधार भिन्न सामाजिक परिस्थितियाँ थीं किंतु भावों की निर्मलता गर्भावस्था से ही प्रारंभ होना चाहिए। मजे की बात है कि डॉक्टर की इस बात पर तो हम ध्यान दे रहे हैं पर आचार्यों की बात को पढ़ना भी नहीं चाहते। भले ही आप आचार्यों की बात को न माने, किंतु एक बार उनको पढ़ें तो सही। अब तो अधिसंख्य जैन समाज पढ़ा-लिखा है और ग्रंथ पढ़ सकता है। हिन्दी रूपांतर भी उपलब्ध हैं। संस्कार एक ऐसी प्रकाश की किरण है जो हमेशा आदमी के साथ रहती है। उसे अपने से जोड़े रखना नितांत आवश्यक है। संस्कार कोई बंधन नहीं है, यह मनोवैज्ञानिक इलाज है। एक हानिकारक बात ऐसी हुई कि वैदिक परंपराओं से जैन समाज का जब संपर्क आया तो वैदिक रूढ़िवादिता हमारे संस्कारों में भी घुस आई। आज समय आ गया है कि हम इसका स्क्रीनिंग करें व जो अच्छा हो, उसे अपना लें।

2. जन्म कल्याणक
भगवान होने वाली आत्मा का जब सांसारिक जन्म होता है तो देवभवनों व स्वर्गों आदि में स्वयं घंटे बजने लगते हैं और इंद्रों के आसन कम्पयमान हो जाते हैं। यह सूचना होती है इस घटना की कि भगवान का सांसारिक अवतरण हो गया है। सभी इंद्र व देव भगवान का जन्मोत्सव मनाने पृथ्वी पर आते हैं।
बालक का जन्म और जन्मोत्सव आज भी घर-घर में प्रचलित है, किन्तु सुमेरु पर्वत पर भगवान का अभिषेएक अलग प्रकार की घटना बताई जाती है। तीर्थंकर के मामले में ऐसा गौरवशाली अभिषेक उनके पूर्वजन्मों के अर्जित पुण्यों का परिणाम होता है किन्तु प्रत्येक जन्म लेने वाले मानव का अभिषेक होता ही है। देवता न आते हों किन्तु घर या अस्पताल में जन्म लिए बालक के स्वास्थ्य के लिए व गर्भावास की गंदगियों को दूर करने के लिए स्नान अभिषेक आवश्यक होता है। तीर्थंकर चूँकि विशेष शक्ति संपन्न होते हैं, अतः पांडुक वन में सुमेरु पर्वत पर क्षीरसागर से लाए 1008 कलशों से उनका जन्माभिषेक शायद कभी अवास्तविक लगे। हो सकता है इसमें भावना का उद्रेक व अपने पूज्य को महिमामंडित करने का भाव हो लेकिन संस्कारों की सीमा से परे नहीं है। एक तुरंत प्रसव पाए बालक की अस्पताल में दिनचर्या को देखने पर यह काल्पनिक नहीं लगेगा।
देवों द्वारा प्रसन्नता व्यक्त करना स्वाभाविक प्रक्रिया है। पुत्र जन्म पर खुशियाँ मनाते, मिठाई बाँटते हम सभी लोगों को देखते हैं। फिर तीर्थंकर तो पुरुषार्थी आत्मा होती है।
जिन आचार्यों ने पंच कल्याणक के इस लौकिक रूप की रचना की उसको समझने में कोई त्रुटि न हो जाए, इसके लिए 2000 वर्ष पूर्व हुए आचार्य यतिवृषभ ने तिलोयपण्णत्ति की गाथा क्र. 8/595 में स्पष्ट किया है कि गर्भ और जन्मादि कल्याणकों में देवों के उत्तर शरीर जाते हैं। उनके मूल शरीर जन्म स्थानों में सुखपूर्वक स्थित रहते हैं।
यह गाथा अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि सांसारिक कार्यों में देवादि भाग नहीं लेते किन्तु तीर्थंकरत्व की आत्मा को सम्मान देने व अपना हर्ष प्रकट करने के लिए वे अपने उत्तर शरीर से उपस्थित होते हैं। इतना प्रतिभाशाली व्यक्ति जन्म ले तो सब तरफ खुशियाँ मनाना वास्तविक और तर्कसंगत है। यह आवश्यक नहीं कि तीर्थंकरों के जन्म लेते समय आम नागरिकों ने देवों को देखा हो। देवत्व एक पद है जिसका भावना से सीधा संबंध है।

3. तप कल्याणक/दीक्षा कल्याणक
अब तक के समस्त कार्य तो मनुष्य मात्र में कम-ज्यादा रूप में समान होते रहते हैं किन्तु संसार की विरक्ति का कोई कारण बने बिना मुक्ति का मार्ग प्रशस्त नहीं होता। यह भी तभी संभव है जब मनुष्य के संस्कार चिंतन को सही दिशा में ले जाने की क्षमता रखते हों। भगवान के कर्मयोगी जीवन, जिनमें सांसारिक कार्य, राज्य संचालन, परिवार संचालन आदि सम्मिलित होते हैं के बीच एक दिन उन्हें ध्यान आता है भगवान चंद्रप्रभु के जीवन चरित्र के अनुसार आयु का इतना लंबा काल मैंने केवल सांसारिकता में ही खो दिया। अब तक मैंने संसार की संपदा का भोग किया किन्तु अब मुझे आत्मिक संपदा का भोग करना है। संसार का यह रूप, सम्पदा क्षणिक है, अस्थिर है, किन्तु आत्मा का रूप आलौकिक है, आत्मा की संपदा अनंत अक्षय है। मैं अब इसी का पुरुषार्थ जगाऊँगा।
इस प्रकार जब चंद्रप्रभु अपनी आत्मा को जागृत कर रहे थे, तभी लोकान्तिक देव आए और भगवान की स्तुति करके उनके विचारों की सराहना की। जरा देखें कि यहाँ आत्मोन्नति के विचार को कोई है जो ठीक कह रहा है। उसे आचार्यों ने लोकान्तिक देव कहा और उसे हम ऐसा भी कह सकते हैं किसी गुणवान- विद्वान ने चंद्रप्रभु महाराज को प्रेरक उद्बोधन दिया। यह तो बिलकुल संभव है- इसे काल्पनिक नहीं कहा जा सकता। आज भी प्रेरणा देने वालों और मैनेजमेंट गुरुओं की मान्यता है और बनी रहेगी।
चंद्रप्रभु राजा थे- उन्होंने राज्य अपने पुत्र वरचंद्र को सौंपा और पालकी में बैठकर जिसे बड़े-बड़े लोगों ने उठाया सर्वतुर्क वन में चले गए। वहाँ उन्होंने दो दिन के उपवास का नियम लेकर जैनेन्द्री दीक्षा धारण कर ली। उन्होंने केशलुंचन किया और दिगम्बर मुद्रा में ध्यान मग्न हो गए। दो दिन के पश्चात वे नलिन नामक नगर में आहार के निमित्त पधारे। वहाँ सोमदत्त राजा ने उन्हें नवधाभक्तिपूर्वक आहार दिया। त्याग की यह प्रक्रिया स्वभाविक है। आज भी सब कुछ त्याग कर समाजसेवी लोगों की लंबी परंपरा है। क्यों वह त्यागी हुए?
- इसके भिन्न-भिन्न कारण हो सकते हैं, पर ऐसा होता है।
इसके बाद चंद्रप्रभु मुनि की तपस्या प्रारंभ होती है। समस्त घातिया कर्मों को निर्मूल करने में चंद्रप्रभु मुनि जैसी उच्च आत्मा को भी तीन माह लगे। वे पंचमहाव्रत, पंचसमिति, पंचोद्रिय निग्रह, दशधर्म आदि में सावधान रहते हुए कर्मशत्रुओं से युद्ध करने में संलग्न रहने लगे। अंत में वे दीक्षा वन में नागवृक्ष के नीचे बेला का नियम लेकर ध्यान लीन हो गए और क्रमशः शुक्ल ध्यान के बल से मोहनीय कर्म का नाश करने में सफल हो गए। फिर बारहवें गुणस्थान के अंत में द्वितीय शुक्ल ध्यान के प्रभाव में शेष तीन घातिया कर्मों का भी क्षय कर दिया। इसके साथ ही वे संयोग केवली हो गए। उनकी आत्मा अनन्त दर्शन, अनन्त ज्ञान, अनन्त सुख, अनन्त वीर्य से संपन्न हो गई। उन्हें पाँचोंलब्धियों की उपलब्धि हो गई। अब वे सर्वज्ञ- सर्वदर्शी बन गए। इंद्रों और देवों ने भगवान के केवल ज्ञान की पूजा की। उन्होंने समवशरण की रचना की और उसमें भगवान की प्रथम दिव्य ध्वनि खिरी।
भगवान समस्त देश में विहार करते हुए सम्मेद शिखर पर पहुँचे और वहाँ 1 हजार मुनियों के साथ एक माह तक प्रतिमायोग धारण करके आरूढ़ हो गए। यह मोक्ष प्राप्ति के पूर्व की परमोच्च देह स्थिति है। यह तप की श्रेष्ठतम अभिव्यक्ति है।
यहाँ यह कहना ठीक होगा कि समवशरण में दिव्य ध्वनि का गुंजन हो किंतु एक नज्ज़ारा और होना चाहिए- वह है धर्मचक्र प्रवर्तन का। पद्मपुराण, हरिवंशपुराण व महापुराण में इसका बड़ा सुन्दर वर्णन है। उसका सारांश इस प्रकार है- भगवान का विहार बड़ी धूमधाम से होता है। याचकों को किमिच्छक दान दिया जाता है। भगवान के चरणों के नीचे देवलोग सहस्त्रदल स्वर्ण कमलों की रचना करते हैं। और भगवान इनको स्पर्श न कर अधर आकाश में ही चलते हैं। आगे-आगे धर्मचक्र चलता है। बाजे-नगाड़े बजते हैं। पृथ्वी इति-भीति रहित हो जाती है। इंद्र राजाओं के साथ आगे-आगे जयकार करते चलते हैं। आगे धर्मचक्र चलता है। मार्ग में सुंदर क्रीड़ा स्थान बनाए जाते हैं। मार्ग अष्टमंगल द्रव्यों से शोभित रहता है। भामंडल, छत्र, चंवर स्वतः साथ-साथ चलते हैं। ऋषिगण पीछे-पीछे चलते हैं। इंद्र प्रतिहार बनता है। अनेकों निधियाँ साथ-साथ चलती हैं। विरोधी जीव वैर विरोध भूल जाते हैं। अंधे, बहरों को भी दिखने-सुनने लग जाते हैं।
यह दृश्य जनसमूह देखकर भाव-विह्वल हो सकता है। यह भगवान के जननायक होने का संदेश देता है।

4. मोक्ष कल्याणक
हम अक्सर एक त्रुटि करते हैं कि मोक्ष कल्याणक को अंतिम कल्याणक कहते हैं। एक तरह से चंद्रप्रभ की आत्मा के लिए मोक्षगमन के साथ यह अंतिम पड़ाव हो, किन्तु तीर्थंकरत्व की यात्रा जो एक दर्शन को समग्र रूप देती है, अंतिम कहना विचारणीय है। वास्तव में मोक्षगमन जैन दर्शन के चिंतन की चरमोत्कृष्ठ आस्था है जो प्रत्येक हृदय में फलित होना चाहिए। समस्त कल्याणक महोत्सव का यह सरताज है। मोक्षगमन को देखना इस निश्चय को दोहराना है कि जीवन के सभी कार्य तब तक सफल नहीं कहे जा सकते जब तक उसका अंतिम लक्ष्य मोक्षगमन न हो।

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  • स ह न य ज ज ल म र न द प रत म व रत र जख र ध लप र, र जस थ न क प चकल य णक म आच र य श र स मत स गरज मह र ज स स त प रत म ज ल ई 1988 अत शय श त र
  • Mattancherry त र मल Pudukottai ज न धर म क प रम ख त य ह र इस प रक र ह प चकल य णक मह व र जय त पर य षण ऋष प चम ज न धर म म द प वल ज ञ न प चम दशलक षण
  • स 10 फ रवर क 3 वर ष क ब रह मचर य व रत आच र य श र स ल य वह पर प चकल य णक भ चल रह थ यह द न थ तप कल य णक क यह स चक र श न आध य त म क स ढ य
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  • मह त सव ऐत ह स कत एव भव यत क स थ सम पन न ह आ इस आय जन म भ जन - आव स, प चकल य णक मह त सव आद क अत व प र शसन य व यवस थ रह म लन यक श र मह व रस व म
  • ऐर वत पर सव र इन द र और श च ज न ग रन थ प चकल य णक - स
  • प र स, कलकत त सहस रन म क त प ज ज ञ न दय प रक शन, जबलप र प चकल य णक व रत द य पन ज ञ न दय प रक शन, जबलप र रव व र व रत द य पन श त व र

पंचकल्याणक: पंचकल्याणक तिथियां, तीर्थंकर के कल्याणक, जैन तीर्थंकर के कल्याणक, जन्म कल्याणक का अर्थ, 24 तीर्थंकर के कल्याणक

जैन तीर्थंकर के कल्याणक.

आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पंचकल्याणक महोत्सव. जोधपुर। श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक तपागछ के तत्वाधान में आठवें दिन चारित्र पद गुणगान व पंच कल्याणक पूजन किया गया। संघ प्रवक्ता धनराज विनायकिया ने बताया कि साध्वी प्रफुल्लप्रभा व साध्वी वैराग्य पूर्णा आदि के सानिध्य. तीर्थंकर के कल्याणक. पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का हुआ समापन. सागर, 04 फरवरी वार्ता मध्यप्रदेश के सागर जिले के खुरई क्षेत्र में आने वाले बरोदिया कला में आज संपन्न पंचकल्याणक महोत्सव में पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने भी शिरकत की। जैन समाज की ओर से आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के​.

पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवम गजरथ जबलपुर दर्पण.

मुनि श्री सौरभ सागर जी महाराज के पावन सानिध्य मे छोटा बाजार शाहदरा दिल्ली मे श्री 1008 मज्जिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा. राज्यपाल जहाजपुर में पंचकल्याणक महोत्सव में. पटना पंचकल्याणक महोत्सव राजेंद्र नगर के शाखा मैदान में शुरू हो चुका है. 17 जनवरी से शुरू यह महोत्सव 24 फरवरी तक चलेगा. इस महोत्सव में बिहार से बाहर के लोग भी शामिल हो रहे हैं. पंचकल्याणक महोत्सव जैन धर्म का उत्सव है और लोग इसे. मुनिसुव्रतनाथ जिनालय का पंचकल्याणक 31 जनवरी से. वीर अर्जुन संवाददाता मड़ावरा ललितपुर । वर्णी नगर मड़ावरा 59 वर्षों के अंतराल के बाद होने जा रहे मज्जिनेन्द पंचकल्याणक पतिष्ठा महोत्सव का घटयात्रा के माध्यम से गुरुवार को भव्य आगाज होगा।. श्री ज्ञानोदय मंदिर जी पंचकल्याणक Sri Gyanoday. जयपुर। श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर प्रताप नगर सेक्टर 8 में आचार्य वसुनन्दी जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में चल रहे छः दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत शनिवार को तप कल्याणक की क्रियाएं आचार्य वसुनंदी.

जैन समाज पलवल द्वारा आयोजित पंचकल्याणक.

आचार्यश्री को आमंत्रण देने टड़ा पहुंचे गृहमंत्री सागर ​डेली हिंदी न्‍यूज़ । आचार्य विद्यासागर महाराज ने कहा कि स्मार्ट सिटी के साथ स्मार्ट विलेज बनाए जाएं। आचार्यश्री शुक्रवार को जिले के देवरी विधानसभा क्षेत्र के टड़ा में धर्मसभा. पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव – Sagar The Heart of India सागर. पंचकल्याणक में मनाया गया ज्ञान कल्याणकग्राम हथनी में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आचार्य वसुनंदी महाराज के मंगल सानिध्य में चौथे दिवस ज्ञान पंचकल्याणक में मनाया गया ज्ञान कल्याणक Damoh News,दमोह.

नेमावर में करोड़ों की लागत से निर्मित पंच बालयति.

नप्र, नई दिल्ली यमुनापार कैलाश नगर में नवनिर्मित श्वेत पाषाण के भव्य एवं विशाल भूकंप रोधी दिगंबर जैन मंदिर का भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आचार्य श्री ज्ञान सागरजी और प्रज्ञ सागरजी के सान्निध्य में रविवार को. ऐतिहासिक होगा पंचकल्याणक महोत्सव जैन Hindustan. १.१ २ पंचकल्याणक तो एकान्त में भी किये जा सकते हैं, उसके लिए इतने वृहद्स्तर पर प्रचार प्रसार करके क्यों किया जाता है? १.२ ३ वर्तमान में अनेक स्थलों पर पंचकल्याणक महोत्सव सम्पन्न होते हैं किन्तु उनका उद्देश्य सम्यक् नहीं दिखाई देता है?. गजरथ फेरी के साथ समापन हुआ पंचकल्याणक महोत्सव. पंचकल्याणक पर्व में जैन अनुयायी किस तीर्थंकर का जन्मोत्सव मनाते हैं? A महावीर B पद्मप्रभु C शांतिनाथ D … Get the answers you need, now!. पंचकल्याणक का आज होगा भव्य आगाज, तैयारियां पूर्ण. श्री ज्ञानोदय मंदिर बेंगलुरु के बहु प्रतीक्षित श्रीमद् जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत बहुत ही भव्य रूप में हुई। प्रातः ज्ञानोदय मंदिर में नित्यश्री अभिषेक और पूजन पश्चात घट यात्रा निकाली गई और भगवान श्रीपद्मप्रभ. पंचकल्याणक विधान शुरू MEERUT NYOOOZ HINDI. भुसावर: पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का हुआ समापन, अंतिम दिन मोक्षकल्यानक पूजन के साथ विश्वशांति महायज्ञ, भगवान आदिनाथ की प्रतिमा को गर्भगृह से उच्चासन पर किया विराजमान​, आचार्य वसुनंदी महाराज,मुनी युधिष्ठिर सागर के. Kalraj Mishra said Basic Principle of Ahimsa Jain Community m. मेरठ, 9 अप्रैल प्र 1008 पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर, दुर्गाबाड़ी, सदर मेरठ द्वारा श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्वशांति महायज्ञ 24 अप्रैल से शुरू होगा जो 29 अप्रैल तक चलेगा। प्रतिष्ठा स्थल.

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आचार्य श्री108 विद्या सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री108 समय सागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में 22 जनवरी से 28 जनवरी तक होने बाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह. पंचकल्याणक महोत्सव Bhaskar. श्री विहर्ष पंचकल्याणक महोत्सव समिति एवं सकल दिगम्बर जैन समाज दिल्ली के तत्वावधान तथा राष्टÑ संत श्रमण मुनि विहर्ष सागर जी के सानिध्य में. पंचकल्याणक: क्या क्यों, कैसे? ENCYCLOPEDIA. मुनिसुव्रतनाथ भगवान का 8 दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव 31 जनवरी से.,स्वस्तिधाम जहाजपुर में भगवान मुनिसुव्रतनाथ जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा.

बागपत, गुरुवार, २३ जनवरी, 25 से शुरू होगा पंचकल्याणक.

करेली में 4 नवम्बर से होगा पंचकल्याणक महोत्सव. Facebook Google Twitter LinkedIn WhatsApp. nspnews 17 10 2019 Regional. आयोजन हेतु व्यापक स्तर पर हो रही तैयारियां करेली। सर्वश्रेष्ठ साधक पूज्य आचार्यश्री 108 विद्यासागर जी महाराज के अज्ञानुवर्ती. आत्मा से परमात्मा में रमण ही पंचकल्याणक. पंचकल्याणक Panch Kalyanaka. पंचकल्याणक महोत्सव में आदि कुमार को हुआ वैराग्य. रांची रोड में सात दिवसीय प्रतिष्ठा सह पंचकल्याणक महोत्सव का भव्य आयोजन 26 मार्च से लेकर 1 अप्रैल तक होगा। सात दिनों तक मंदिर प्रांगण में आस्था और भक्ति की अविरल गंगोत्री बहेगी। जिसमें श्रद्धालु आनंद रस का पान करेंगे।.

पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव:शांतिनाथ मन्दिर.

जयपुर। राज्यपाल कलराज मिश्र शनिवार को जहाजपुर में चल रहे भव्य 1008 मुनिसुव्रतनाथ जिनबिम्ब पंचकल्याणक महोत्सव में पहुंचे और सम्बोधित किया। राज्यपाल मिश्र का स्वागत पंचकल्याणक महोत्सव समिति के अध्यक्ष विनोद जैन कोटा,. पंचकल्याणक में उमड़ेगी आस्था Patrika. पंचकल्याणक Hindi News, पंचकल्याणक Breaking News, Find all पंचकल्याणक से जुड़ी खबरें at Live Hindustan, page1. करेली में 4 नवम्बर से होगा पंचकल्याणक NSP NEWS. श्री ज्ञानोदय मंदिर जी पंचकल्याणक. मुख्य पात्रों का चयन​. पंचकल्याणक 6 11अप्रैल महोत्सव की प्रथम श्रृंखला में मुख्य पात्रों का चयन होना है ।सुप्रसिद्ध प्रतिष्ठाचार्य श्री प्रदीप जैन भैयाजी के सानिध्य में प्रथम तीर्थंकर १००८. जहाजपुर झंडारोहण के साथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा. हस्तिनापुर। जंबूद्वीप स्थल पर चल रहे भगवान शांतिनाथ जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा अंतर्गत शनिवार को सौभाग्यवती महिलाओं द्वारा अंकुरारोपण विधि संपन्न की गई। जिसमें मुख्य रूप से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के सौधर्म इंद्र एवं.

Gwalior News: पंचकल्याणक महोत्सव में 151 प्रतिमाओं.

इंदौर नेमावर में करोड़ों की लागत से निर्मित पंच बालयति मंदिर का पंचकल्याणक महोत्सव फरवरी में. नेमावर में करोड़ों की लागत से निर्मित पंच बालयति मंदिर का पंचकल्याणक महोत्सव फरवरी में. Sunil Paliwal ✍ August 19, 2019 AM IST. पंचकल्याणक news in hindi, पंचकल्याणक से जुड़ी खबरें. Delhi Samachar: श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर निरंजन पार्क, नंगली डेरी, नजफगढ़ का 13वां पंचकल्याणक प्रतिष्ठा स्मृति महोत्सव आचार्य श्रुतसागरजी महाराज के. 102 बीघा में होगा ऐतिहासिक पंचकल्याणक. जहाजपुर समाचार रवि जोशी विजय पाराशर कस्बे के शाहपुरा रोड स्थित स्वस्ति धाम में 102 बीघा में होगा ऐतिहासिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्वशांति से संत व श्रद्धालु बनेंगे साक्षी 31 जनवरी से 7 फरवरी तक होंगे कई. कैलाश नगर में भव्य पंचकल्याणक शुरू Navbharat Times. पलवल पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर आचार्य श्री 108 ज्ञाणभूषण जी मुनिराज रत्नाकर के आशीर्वाद से पलवल डोनर्स क्लब ज्योतिपुंज ने जैन यूथ क्लब पलवल और जैन नवयुवक मंडल हथीन के सहयोग सें हथीन के कुण्डा मंदिर के निकट.

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को अजब गजब.

राज्यपाल कलराज मिश्र शनिवार को जहाजपुर में चल रहे भव्य 1008 मुनिसुव्रतनाथ जिनबिम्ब पंचकल्याणक महोत्सव में पहुंचे और सम्बोधित किया। राज्यपाल मिश्र का स्वागत पंचकल्याणक महोत्सव समिति के अध्यक्ष विनोद जैन कोटा,. मुनिसुव्रतनाथ भगवान का 8 दिवसीय पंचकल्याणक. देवली. शहर में सोमवार से शुरू होने वाले पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के चलते शनिवार को विवेकानंद कॉलोनी स्थित शांतिन …. पंचकल्याणक पर्व में जैन अनुयायी किस तीर्थंकर का. पंचकल्याणक महोत्सव. महायज्ञ में इंद्र इंदिराइयो ने दी आहुतियां. नवीन जिनालय में प्रतिष्ठित मूर्तियों को किया विराजमान. बौंली शनिग्रह अरिष्ट निवारक श्री श्री 1008 मुनि सुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर रवासा में अमितभद्र संत. छोटा बाजार शाहदरा दिल्ली मे श्री 1008. पंचकल्याणक पर्व महावीर स्वामी को समर्पित जैन पर्व है। जैन मतानुसार यह पर्व आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया का पर्व है। इस पर्व में अगर कोई जातक प्रत्यक्षदर्शी ना भी हो पाए तो मात्र इस पर्व की कल्पना कर के भी वह विशेष फल का पात्र बन सकता.

घटयात्रा के साथ पंचकल्याणक महोत्सव आरंभ Uttar.

फरीदाबाद 25 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर डबुआ कालोनी में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव के तीसरे दिन शनिवार को गर्भ कल्याणक उत्तररूप आयोजित किया गया। इसके तहत आदि नाथ भगवान के नाट्य रूपांतरित माता बनी नंदा जैन की. पंचकल्याणक महोत्सव Gangapur City Portal गंगापुर. न्यूज़ एनसीआर, उदयचंद माथुर 23 जनवरी हथीन पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर उपाध्याय श्री 108 गुप्ति सागर जी गुरुवर के आशीर्वाद से पलवल डोनर्स क्लब ​ज्योतिपुंज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति. पंचकल्याणक में मनाया गया ज्ञान कल्याणक. ग्वालियर. जिनेश्वरधाम बरई में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन गर्भ कल्याणक के उत्तर रूप की क्रियाएं हुईं। इसमें माता की गोद भराई, नवीन प्रतिमाओं की आकार शुद्धि और महाराजा नाभिराय का राज दरबार आकर्षण के मुख्य केंद्र रहे। आचार्य. पंचकल्याणक महोत्सव में गूंजा धर्म एवं भक्ति का. जहाजपुर आजाद नेब धार्मिक नगरी जहाजपुर में घटयात्रा के साथ आठ दिवसीय श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्वशांति महायज्ञ का आगाज हुआ। 31 जनवरी से 7 फरवरी तक होने वाले इस ऐतिहासिक.

पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पात्रों का चयन.

शासकीय चिकित्सालय मैदान करकबेल में पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव की शुरूआत 13 नवम्बर से हो चुकी है। गजरथ महोत्सव 19 नवम्बर तक चलेगा। इस अवसर पर शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह, विधानसभा अध्यक्ष श्री नर्मदा प्रसाद. पंचकल्याणक का अर्थ आत्मा से परमात्मा बनने की. इंदौर. कनाडिय़ा स्थित उदय नगर में बने श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर का सात दिनी पंचकल्याणक और गजरथ महोत्सव का आगाज रविवार को होगा। आयोजन में देशभर के शद्धालु शामिल होंगे। समापन 23 अप्रैल को होगा, जिसमें गजरथ निकाला जाएगा।. शहादरा में आयोजित हुआ पंचकल्याणक महोत्सव. जबलपुर। आचार्य श्री विद्या सागर महाराज के आशीष से श्री योगसागर जी ससंघ के सान्निध्य में गुरुकुल में नवनिर्मित जिनालय का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवम गजरथ महोत्सव 17 फरवरी से 23 फरवरी 19 तक आयोजित होने जा रहा है। जिसका भूमि पूजन आज​. पंचकल्याणक महोत्सव ६ से तैयारियों जोरों पर. Is a leading news portal of ujjain,mahakal news,ujjain online news website,local news,ujjain events,tourist place,ujjain attraction.

पंचकल्याणक में मनाया गया ज्ञान कल्याणक – VIJAY.

केकड़ी 20 अप्रैल। पांडुक शीला स्थित नवनिर्मित मंदिर के पंचकल्याणक महोत्सव का शनिवार को मोक्ष कल्याणक के साथ समापन हो गया। इस मौके पर सुबह जिनेन्द्र भगवान का. पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव व विश्वशांति. पंचकल्याणक महोत्सव: गाजे बाजे के साथ निकली गजरथ फेरीजैन आचार्य विनिश्चय सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में देवरान गांव में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतिम Chhatarpur Madhya Pradesh News In Hindi Chhatarpur News mp. पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में 54 रक्तवीरों ने. पंचकल्याणक तीर्थकर भगवान के गर्भ में आने से लेकर मोक्ष जाने पर्यन्त विशिष्ट समारोहों के रूप में मनुष्य व देवताओं द्वारा यथासमय मनाये जाते हैं। ये कल्याणक इनके तीर्थकर नामक सर्वातिशायी पुण्य प्रकृति के उदय से ही होते हैं, क्योंकि. पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव में शामिल हुये पूर्व. कानपुर में पंचकल्याणक कल से, कानपुर में हुआ भव्य प्रवेश. उदयपुर। राष्ट्रसंत और गणिनी आर्यिका सुप्रकाशमती माताजी और मुनि आज्ञा सागर महाराज का सोमवार सुबह 7.30 बजे धार्मिक क्षेत्र एवं औद्योगिक नगरी कानपुर में पदार्पण हुआ।.