अनिर्वचनीय ख्यातिवाद

----- आदि शंकराचार्य का भ्रम विचार इस नाम से जाना जाता है, इनके अनुसार ब्रह्म अविधा अहि, अविधा तथा इन्द्रियादिदोष के कारण सीपी मॅ रजत की प्रतीति होती है उनके अनुसार अविधा के दो पक्ष है

1. सिद्धांत
1 आवरण 2 विक्षेप आवरण शक्ति वस्तु के यथार्थ स्वरूप को ढक लेती है विक्षॆप शक्ति वस्तु को किसी अन्य वस्तु रूपमें प्रकाशित करती है यह प्रक्रिय अध्यास कहलाती है अध्यासमेंअधिष्टान तथा अध्यस्त में तादात्म्य सबंध स्थापित हो जाता है
भ्रम- ज्ञानमें दोनोंमेंसे किसी एक की प्रतीति होती है, भ्रम में केवल अध्यस्त प्रतीति होती है
, ज्ञानमेंकेवल अधिष्ठान की प्रतीति होती है शकंराचार्य के अनुसार सीपी के रजत रूप ज्ञानमें सीप अधिष्ठान तथा रजत अध्यस्त है
इस भ्रांत ज्ञानमें रजत सत नही है क्यॉकि कालांत मे इसका बाध हो जाता है पुनः यह बन्ध्यापुत्र की भांति असत भी नही है क्योंकि वर्तमान मॆ इसकी प्रतीति होती है
इसे जैन मत के समान असत भी नही मान सकते है क्योंकि ऐसा मानने पर आत्म विरोधाभास की स्थिति पैदा होगी
इस प्रकार भ्रम का स्वरूप सत तथा असत से विलक्षण होने के चलते यह अनिर्वचनीय ख्यातिवाद कहलाता है
यहाँ उल्लेखनीय है कि सीपी का रजत रूप मे ज्ञान होना ही केवल भ्रम नही है अपितु सीपी कि सीपी के रूप मे वास्तविक तथा सत समझना भी भ्रम है यहाँ सीपीमें रजत का ज्ञान व्यक्तिगत भ्रम है यह प्रतिभास के स्तर पर होता है इसे तुराविधा कहते हैं दूसरी तरफ सीपी को सीपी मान लेना समष्टिगत भ्रम है यह व्यवहार का स्तर है इसे मूलाविधा कहते है ये दोनों प्रकार के भ्रम अनिर्वचनीय है यहाँ पहले भ्रम का खण्डन व्यवहार से जबकि दूसरे का परमार्थ से होता है

2. आलोचना 1 रामानुज के अनुसार भ्रम को अनिर्वचनीय कहना भी उस के निर्वचन के समान है अतः अनिर्वचनीयता की धारणा आत्म विरोधाभासी है
2 रामानुज के अनुसार कोई वस्तु या तो सत होती है या असत, अनिर्वचनीय जैसी कोई तीसरी कोटि नही होती है 3 सीपी मे रजत का ज्ञान प्रातिभासिक स्तर पे सत है, अर्थात यह कुछ क्षणो हेतु सत है ऐसी स्थिति मे इस को भ्रम नही कहा जा सकता है 4 ब्रह्म की समस्या का विवेचन करने हेतु अविधा का सहारा लेते है, सत पे आवरण डालना और असत को उस पर विक्षेपित करना ये माया के दो कार्य है परंतु अविधा की स्वयं अपनी सत्ता नही है इस स्थिति मॅ वह आवरण –विक्षॆप जैसे कार्य नही कर सकती है

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अनटाइटल्ड.

अनिर्वचनीय ख्यातिवाद. - - आदि शंकराचार्य का भ्रम विचार इस नाम से जाना जाता है, इनके अनुसार ब्रह्म अविधा अहि, अविधा तथा इन्द्रियादिदोष के कारण सीपी मॅ रजत की प्रतीति होती है उनके अनुसार अविधा के दो पक्ष है. अनिर्वचनीय ख्यातिवाद. ६ ख्यातिवाद आत्मख्याति,असत्रख्याति,अख्याति, अन्यथाख्याति. अनिर्वचनीय ख्याति। इकाई II. अ प्रामाण्य की परिभाषा एवं स्वरूप. ब प्रामाण्य का वर्गीकरण:​स्वतःप्रामाण्य,परतःप्रामाण्य. स प्रमाण का अर्थ एवं प्रकार, प्रमाण.

अनिर्वचनीय ख्यातिवाद. - - आदि शंकराचार्य का.

स ख्यातिवाद आत्मख्याति, असत् ख्याति, अन्यथाख्याति, अख्याति. और अनिर्वचनीय ख्याति। इकाई II अ प्रामाण्य का अर्थ एवं स्वरूप. ब प्रामाण्य के प्रकार स्वतः प्रामाण्य और परतः प्रामाण्य. स प्रमाण का अर्थ एवं भेद एवं प्रमाण व्यवस्था. अनटाइटल्ड BHU. भ्रम सम्बन्धी विचार को ख्याति विचार कहते है।. Page 1 बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना वर्ष 2017. गुरु शिष्य संवाद भाग ४ गुरु: अनिर्वचनीय ख्यातिवाद को समझने से पहले हम लोग अब तक के संवाद का एक संक्षिप्त पुनरावलोकन कर लें तो सातत्य बनाये रखने में सुगमता होगी और मूल विषय से विचलन की संभावनायें भी.

यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा‚ जून 2013 दर्शनशास्त्र.

अद्वैत वेदान्त की सामान्य विशेषताओं का विवेचन कीजिए। What does Advaita Vedant Mean? Discuss common characteristics of Advaita Vedant? 5. अनिर्वचनीय ख्यातिवाद की व्याख्या कीजिए। Explain Anirvachaniya Khayativada. 6. अथातोब्रह्म जिज्ञासा सूत्र में अथ शब्द. Sanskrit ख्यातिवाद सामान्य अर्थ में ख्याति से. ख्यातिवाद. प्रामाण्यवाद. अन्विताभिधानवाद एवं अभिहितान्वयवाद. शब्दग्रह. इकाई. ज्ञान की परिभाषा. ज्ञान के साधन. भ्रान्ति के सिद्धान्त. सत्य के सिद्धान्त. विश्वास अनिर्वचनीय ख्याति. विपरीतख्याति. अन्यथाख्याति. न्याय. कुमारिल. अनटाइटल्ड Bilaspur University. अ विवेक ख्यातिवाद. b Akhyativada. ब अख्यातिवाद. c Anirvachaniy Khyativada. स अनिर्वचनीय ख्यातिवाद. d Anyatha Khyativada. द अन्यथा ख्यातिवाद. 39. Sound is eternal because it is. 139​. शब्द नित्य है क्योंकि इसकी उत्पत्ति होती है, produced, this argument involves.

अनटाइटल्ड RPSC.

सूची – I को सूची II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिये गये कूटों से सही उत्तर का चयन करें: सूची – I सूची II A. रामानुज i. अनिर्वचनीय ख्यातिवाद. B. बौद्ध विज्ञानवाद ii. अन्यथा ख्यातिवाद. C. न्याय iii. आत्म ख्यातिवाद. D. अद्वैत वेदान्त iv. अनटाइटल्ड Devi Ahilya Vishwavidyalaya. सारांश. मेरे शोध का विषय है भारतीय दर्शन में ख्यातिवाद। जिसका सारांश सिद्धान्त ख्यातिवाद के नाम से प्रचलित है। इस शोध ग्रन्थ में मेरा विलक्षण होने के कारण भ्रम विषय को अनिर्वचनीय मानना ही युक्तिसंगत है। अद्वैतसिद्धिकार के​. Page 1 प्रश्नपत्र 01 हिन्दी एवं भाषा विज्ञान प्रथम. भारतीय दर्शन के ख्यातिवाद को समझेंगे। पञ्चम प्रश्नपत्र – इस प्रश्नपत्र के अन्तर्गत वैदिकवाङ्मय स्वरूप के विषय में, अविधा के स्वरूप के विषय में तथा अनिर्वचनीय ख्यादिवाद् के विषय में ज्ञान प्राप्त. करेंगे। 2. प्रस्तुत इकाई के अन्तर्गत छात्र. माइक्रोसॉफ्ट वर्ड 26 philosophy annual. ख्यातिवाद सामान्य अर्थ में ख्याति से तात्पर्य इस प्रकार भ्रामक पदार्थ की प्रतीति अनिर्वचनीय ख्याति है,.

Page 1 उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त.

व्यवहार दोनों प्रकार के भ्रम, अनिर्वचनीय और मिथ्या है। यह अद्वैत वेदान्त का. अनिर्वचनीय ख्यातिवाद है। CHE. आचार्य शंकर द्वारा प्रतिपादित अनिर्वचनीय ख्यातिवाद के उपरोक्त विवेचन. से यह प्रमाणित होता है कि शंकर मुख्य रूप से ब्रह्म की​. Summery Shodhganga. 4 मंत्रोच्चार. 51. Avidya in Yoga philosophy is 1 anirvachaniya. 2 absence of knowledge. 3 knowledge of the opposite object. 4 none of the above. योग दर्शन में अविद्या है 1 अनिर्वचनीय. 2 ज्ञान का अभाव. 3 विपरीत वस्तु का ज्ञान 4 उपर्युक्त में कोई नहीं. 17. P.T.o.