इतवार व्रत कथा

सूर्यनमस्कार लिए सूर्य नमस्कार देखें।
यह उपवास सप्ताह के प्रथम दिवस इतवार व्रत कथा को रखा जाता है। रविवार सूर्य देवता की पूजा का वार है। जीवन में सुख-समृद्धि, धन-संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए रविवार का व्रत सर्वश्रेष्ठ है। रविवार का व्रत करने व कथा सुनने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। मान-सम्मान, धन-यश तथा उत्तम स्वास्थ्य मिलता है। मुक्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है।

1. विधि
अंत में कथा सुनें
एक समय भोजन करें।
प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त हो, स्वच्छ वस्त्र धारण कर परमात्मा का स्मरण करें।
इस दिन नमकीन तेल युक्त भोजन ना करें।
भोजन इत्यादि सूर्य प्रकाश रहते ही करें।
व्रत के दिन क्या न करें
इस दिन उपासक को तेल से निर्मित नमकीन खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। सूर्य अस्त होने के बाद भोजन नहीं करना चाहिए।

1.1. विधि रविवार व्रत विधि
रविवार को सूर्योदय से पूर्व बिस्तर से उठकर शौच व स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र पहनें। तत्पश्चात घर के ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान सूर्य की स्वर्ण निर्मित मूर्ति या चित्र स्थापित करें। इसके बाद विधि-विधान से गंध-पुष्पादि से भगवान सूर्य का पूजन करें। पूजन के बाद व्रतकथा सुनें। व्रतकथा सुनने के बाद आरती करें। तत्पश्चात सूर्य भगवान का स्मरण करते हुए सूर्य को जल देकर सात्विक भोजन व फलाहार करें।
यदि किसी कारणवश सूर्य अस्त हो जाए और व्रत करने वाला भोजन न कर पाए तो अगले दिन सूर्योदय तक वह निराहार रहे तथा फिर स्नानादि से निवृत्त होकर, सूर्य भगवान को जल देकर, उनका स्मरण करने के बाद ही भोजन ग्रहण करे।
शास्त्रों के अनुसार जिन व्यक्तियों की कुण्डली में सूर्य पीडित अवस्था में हो, उन व्यक्तियों के लिये रविवार का व्रत करना विशेष रूप से लाभकारी रहता है। इसके अतिरिक्त रविवार का व्रत आत्मविश्वास में वृ्द्धि करने के लिये भी किया जाता है। इस व्रत के स्वामी सूर्य देव है Sun is the lord of Sunday fast. नवग्रहों में सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिये रविवार का व्रत किया जाता है। यह व्रत अच्छा स्वास्थय व तेजस्विता देता है। शास्त्रों में ग्रहों की शान्ति करने के लिये व्रत के अतिरिक्त पूजन, दान- स्नान व मंत्र जाप आदि कार्य किये जाते हैं। इनमें से व्रत उपाय को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। पूरे नौ ग्रहों के लिये अलग- अलग वारों का निर्धारण किया गया है। रविवार का व्रत समस्त कामनाओं की सिद्धि, नेत्र रोगों में मी, कुष्ठादि व चर्म रोगों में कमी, आयु व सौभाग्य वृ्द्धि के लिये किया जाता है।
रविवार व्रत महत्व Importance of Sunday Fast यह व्रत किसी भी मास के शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार से प्रारम्भ करके कम से कम एक वर्ष और अधिक से अधिक बारह वर्ष के लिये किया जा सकता है This fast may be started from first Sunday of Shukla Paksha of any month and should be observed for at least one year and maximum upto 12 years. रविवार क्योंकि सूर्य देवता की पूजा का दिन है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से सुख -समृ्द्धि, धन- संपति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिये इस व्रत का महत्व कहा गया है। रविवार का व्रत करने व कथा सुनने से व्यक्ति कि सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इस उपवास करने वाले व्यक्ति को मान-सम्मान, धन, यश और साथ ही उतम स्वास्थय भी प्राप होता है। रविवार के व्रत को करने से सभी पापों का नाश होता है। तथा स्त्रियों के द्वारा इस व्रत को करने से उनका बांझपन भी दूर करता है। इसके अतिरित्क यह व्रत उपवासक को मोक्ष देने वाला होता है।
रविवार व्रत विधि-विधान Procedure of Sunday Vrata रविवार के व्रत को करने वाले व्यक्ति को प्रात: काल में उठकर नित्यकर्म क्रियाओं से निवृ्त होने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। घर में किसी एकान्त स्थान में ईशान कोण में भगवान सूर्य देव की स्वर्ण निर्मित मूर्ति या चित्र स्थापित करना चाहिए। इसके बाद गंध, पुष्प, धूप, दीप आदि से भगवान सूर्य देव का पूजन करना चाहिए। पूजन से पहले व्रत का संकल्प लिया जाता है। दोपहर के समय फिर से भगवान सूर्य को अर्ध्य देकर पूजा करे और कथा करें। और व्रत के दिन केवल गेहूं कि रोटी अथवा गुड से बना दलिया, घी, शक्कर के साथ भोजन करें। भगवान सूर्य को लाल फूल बेहद प्रिय है। इसलिये इस दिन भगवान सूर्य की पूजा काल रंग के फूलों से करना और भी शुभ होता है।
रविवार व्रत कथा Sunday Vrat Katha शास्त्रों के अनुसार जिन व्यक्तियों की कुण्डली में सूर्य पीडित अवस्था में हो, उन व्यक्तियों के लिये रविवार का व्रत करना विशेष रूप से लाभकारी रहता है। इसके अतिरिक्त रविवार का व्रत आत्मविश्वास में वृ्द्धि करने के लिये भी किया जाता है। इस व्रत के स्वामी सूर्य देव है Sun is the lord of Sunday fast. नवग्रहों में सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिये रविवार का व्रत किया जाता है। यह व्रत अच्छा स्वास्थय व तेजस्विता देता है। शास्त्रों में ग्रहों की शान्ति करने के लिये व्रत के अतिरिक्त पूजन, दान- स्नान व मंत्र जाप आदि कार्य किये जाते हैं। इनमें से व्रत उपाय को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। पूरे नौ ग्रहों के लिये अलग- अलग वारों का निर्धारण किया गया है। रविवार का व्रत समस्त कामनाओं की सिद्धि, नेत्र रोगों में मी, कुष्ठादि व चर्म रोगों में कमी, आयु व सौभाग्य वृ्द्धि के लिये किया जाता है। रविवार व्रत महत्व Importance of Sunday Fast यह व्रत किसी भी मास के शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार से प्रारम्भ करके कम से कम एक वर्ष और अधिक से अधिक बारह वर्ष के लिये किया जा सकता है This fast may be started from first Sunday of Shukla Paksha of any month and should be observed for at least one year and maximum upto 12 years. रविवार क्योंकि सूर्य देवता की पूजा का दिन है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से सुख -समृ्द्धि, धन- संपति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिये इस व्रत का महत्व कहा गया है। रविवार का व्रत करने व कथा सुनने से व्यक्ति कि सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इस उपवास करने वाले व्यक्ति को मान-सम्मान, धन, यश और साथ ही उतम स्वास्थय भी प्राप होता है। रविवार के व्रत को करने से सभी पापों का नाश होता है। तथा स्त्रियों के द्वारा इस व्रत को करने से उनका बांझपन भी दूर करता है। इसके अतिरित्क यह व्रत उपवासक को मोक्ष देने वाला होता है। रविवार व्रत विधि-विधान Procedure of Sunday Vrata रविवार के व्रत को करने वाले व्यक्ति को प्रात: काल में उठकर नित्यकर्म क्रियाओं से निवृ्त होने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। घर में किसी एकान्त स्थान में ईशान कोण में भगवान सूर्य देव की स्वर्ण निर्मित मूर्ति या चित्र स्थापित करना चाहिए। इसके बाद गंध, पुष्प, धूप, दीप आदि से भगवान सूर्य देव का पूजन करना चाहिए। पूजन से पहले व्रत का संकल्प लिया जाता है। दोपहर के समय फिर से भगवान सूर्य को अर्ध्य देकर पूजा करे और कथा करें। और व्रत के दिन केवल गेहूं कि रोटी अथवा गुड से बना दलिया, घी, शक्कर के साथ भोजन करें। भगवान सूर्य को लाल फूल बेहद प्रिय है। इसलिये इस दिन भगवान सूर्य की पूजा काल रंग के फूलों से करना और भी शुभ होता है।

2. कथा
रविवार व्रत कथा Sunday Vrat Katha कथा के अनुसार एक बुढिया थी, उसके जीवन का नियम था कि व प्रत्येक रविवार के दिन प्रात: स्नान कर, घर को गोबर से लीप कर शुद्ध करती थी। इसके बाद वह भोजन तैयार करती थी, भगवान को भोग लगा कर स्वयं भोजन ग्रहण करती थी। यह क्रिया वह लम्बें समय से करती चली आ रही थी। ऎसा करने से उसका घर सभी धन - धान्य से परिपूर्ण था। वह बुढिया अपने घर को शुद्ध करने के लिये, पडौस में रहने वाली एक अन्य बुढिया की गाय का गोबर लाया करती थी। जिस घर से वह बुढिया गोबर लाती थी, वह विचार करने लगी कि यह मेरे गाय का ही गोबर क्यों लेकर आती है। इसलिये वह अपनी गाय को घर के भीतर बांधले लगी। बुढिया गोबर न मिलने से रविवार के दिन अपने घर को गोबर से लीप कर शुद्ध न कर सकी। इसके कारण न तो उसने भोजन ही बनाया और न ही भोग ही लगाया. इस प्रकार उसका उस दिन निराहार व्रत हो गया। रात्रि होने पर वह भूखी ही सो गई। रात्रि में भगवान सूर्य देव ने उसे स्वप्न में आकर इसका कारण पूछा. वृ्द्धा ने जो कारण था, वह बता दिया। तब भगवान ने कहा कि, माता तुम्हें सर्वकामना पूरक गाय देते हैं, भगवान ने उसे वरदान में गाय दी, धन और पुत्र दिया। और मोक्ष का वरदान देकर वे अन्तर्धान हो गयें. प्रात: बुढिया की आंख खुलने पर उसने आंगन में अति सुंदर गाय और बछडा पाया। वृ्द्धा अति प्रसन्न हो गई। जब उसकी पड़ोसन ने घर के बाहर गाय बछडे़ को बंधे देखा, तो द्वेष से जल उठी. साथ ही देखा, कि गाय ने सोने का गोबर किया है। उसने वह गोबर अपनी गाय्त के गोबर से बदल दिया। रोज ही ऐसा करने से बुढ़िया को इसकी खबर भी ना लगी। भगवान ने देखा, कि चालाक पड़ोसन बुढ़िया को ठग रही है, तो उन्होंने जोर की आंधी चला दी। इससे बुढ़िया ने गाय को घर के अंदर बांध लिया। सुबह होने पर उसने गाय के सोने के गोबर को देखा, तो उसके आश्चर्य की सीमा ना रही। अब वह गाय को भीतर ही बांधने लगी। उधर पड़ोसन ने ईर्ष्या से राजा को शिकायत कर दी, कि बुढ़िया के पास राजाओं के योग्य गाय है, जो सोना देती है। राजा ने यह सुन अपने दूतों से गाय मंगवा ली। बुढ़िया ने वियोग में, अखंड व्रत रखे रखा। उधर राजा का सारा महल गाय के गोबर से भर गया। राजा ने रात को उसे स्पने में गाय लौटाने को कहा. प्रातः होते ही राजा ने ऐसा ही किया। साथ ही पड़ोसन को उचित दण्ड दिया। राजा ने सभी नगर वासियों को व्रत रखने का निर्देश दिया। तब से सभी नगरवासी यह व्रत रखने लगे। और वे खुशियों को प्राप्त हुए. रविवार के व्रत के विषय में यह कहा जाता है कि इस व्रत को सूर्य अस्त के समय ही समाप्त किया जाता है। अगर किसी कारणवश सूर्य अस्त हो जाये और व्रत करने वाला भोजन न कर पाये तो अगले दिन सूर्योदय तक उसे निराहार नहीं रहना चाहिए। अगले दिन भी स्नानादि से निवृ्त होकर, सूर्य भगवान को जल देकर, उनका स्मरण करने के बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। सूर्यास्त में सूर्य देव की पूजा करने के बाद निम्न आरती का श्रवण व गायन करना चाहिए। आरती | Aarti कहुँ लगि आरती दास करेंगे, सकल जगत जाकी जोत विराजे।।। टेक।। सात समुद्र जाके चरणनि बसे, कहा भये जल कुम्भ भरे हो राम। कोटि भानु जाके नख की शोभा, कहा भयो मंदिर दीप धरे हो राम। भार अठारह रामा बलि जाके, कहा भयो शिर पुष्प धरे हो राम। छप्पन भोग जाके नितप्रति लागे, कहा गयो नैवेद्य धरे हो राम। अमित कोटि जाके बाजा बाजे, कहा भयो झनकार करे हो राम। चार वेद जाको मुख की शोभा, कहा भयो ब्रह्म वेद पढ़े हो राम। शिव सनकादि आदि ब्रह्मादिक, नारद मुनि जाको ध्यान धरे हो राम। हिम मंदार जाके पवन झकोरें, कहा भयो शिर चँवर ढुरे हो राम। लख चौरासी बंध छुड़ाए, केवल हरियश नामदेव गाए हो राम।

3. व्रत फल
इससे सभी पापों का नाश होता है। इससे मनुष्य को धन, यश, मान-सम्मान तथा आरोग्य प्राप्त होता है। इस व्रत के करने से स्त्रियों का बाँझपन दूर होता है। इस व्रत के करने से मनुष्य को मोक्ष प्राप्त होता है।

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रविवार व्रत के फायदे.

श्री रविवार व्रत कथा, व्रत विधि व आरती Hindu. Table of Content. रविवार व्रत कथा पूजन विधि Ravivar Vrat Katha. रविवार व्रत विधि Ravivar Vrat रविवार व्रत पूजन सामग्री Ravivar Vrat रविवार इतवार व्रत कथा Ravivar Vrat Katha सूर्य गायत्री मन्त्र रविवार व्रत की आरती. रविवार का व्रत करने की विधि. हिन्दू कैलेंडर 2019: सभी व्रत एवं त्यौहार hindu. Rohini Vrat 2020: रोहिणी व्रत का है ऐसा महत्व, जानिए कैसे राजा अशोक को मोक्ष की हुई थी प्राप्ति. Rohini Vrat 2020: रोहिणी व्रत के पालन से राजा Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत में शिवपूजा से मिलता है ऐसा वरदान, जानिए कथा. Pradosh Vrat: राजकुमार धर्मगुप्त को. रविवार व्रत के लाभ. रविवार का व्रत किस विधि से और कब शुरू करना चाहिए. रविवार इतवार व्रत कथा. प्राचीन काल में कंचनपुर में एक बुढ़िया रहती थी। वह नियमित रूप से रवि वार का व्रत कर रही थी। रविवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर बुढ़िया स्नानादि से निवृत्त होकर अपने घर के आंगन को गोबर से लीपकर स्वच्छ करती थी​। उसके बाद.

कार्तिक रविवार व्रत.

Vriksh Vanaspati Lok anushthano mein IGNCA. प्रेमचंद के कथा संकलन मानसरोवर 1 मानसरोवर 2 मानसरोवर 3 मानसरोवर 4 मानसरोवर करतार सिंह दुग्गल पंजाबी अलग तीलियाँ प्रभु जोशी इतवार नहीं कुणाल सिंह कमज़ोर ​अंतोन चेख़व रूसी करवा का व्रत यशपाकल कहाँ जाओगी पद्मा सचदेव. रविवार व्रत कथा सुनाइए. Amit Mishra I. Below is a list of examples for the word Itvar इतवार in Hindi निम्नलिखित हिंदी में इतवार शब्द के उदाहरण हैं: इसके बाद यह फरवरी के आखिरी इतवार के दिन मनाया जाने लगा संदर्भ Reference यह उपवास सप्ताह के प्रथम दिवस इतवार व्रत कथा को रखा जाता है ​संदर्भ. रवि प्रदोष व्रत विधि एवं कथा Ravi Shiv Amar Katha. व्रत, उपवास, तीर्थ, यज्ञ, श्राद्ध, दिन, तिथि, महीना और ॠतु, पर्व और त्यौहार प्रत्येक अवसर का एक विाष्टि विधि विधान है और २ वट वृक्ष सौभाग्य का देवता है, वटसावित्री कथा में सावित्री ने यम के विधान को बदलकर सत्यवान के लिए नया जीवन प्राप्त किया था। इतवार के दिन आँवले का नाम लेना निषिद्ध है। २५.

जानिए रविवार व्रत की कथा, महत्व और Oneindia Hindi.

सूर्य देव का व्रत सबसे श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यह व्रत सुख और शांति देता है. कैसे करें इस व्रत की पूजा और कथा आइए जानें. Ravivar Vrat Katha रविवार व्रत कथा इतवार Hindi Voidcan. साधन संगीत, नृत्य, कथा, कहानी आदि उनके अन्तःकरण की गहनतम अनुभूतियों की झलक देने के. साधन होते हैं । रोचक होगा । 9 आटे में गुड़ मिलाकर बना पदार्थ बरगद कहलाता है और व्रत के पारायण के बाद खाया जाता है । मैं बरती पाँचों इतवार. नहाय खोरि.

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इस दिन का व्रत रखने से भगवान भोले नाथ शीघ्र प्रसन्न हों, उपवासक की मनोकामना पूरी करते हैं। इस व्रत को सभी स्त्री ​पुरुष, बच्चे, युवा, वृ्द्धों के द्वारा किया जा सकता है. विधिपूर्वक व्रत रखने पर तथा शिवपूजन, शिव कथा, शिव स्तोत्रों का पाठ व उँ. बड़ा रविवापर पूजन अर्चन, रखा व्रत. ऐसे करें सूर्य देव की पूजा. यह उपवास सप्ताह के प्रथम दिवस इतवार व्रत कथा को रखा जाता है। रविवार सूर्य देवता की पूजा का वार है। जीवन में सुख समृद्धि, धन संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए रविवार का व्रत सर्वश्रेष्ठ है। रविवार का.

इतवार व्रत की पूजा कैसे करते हैं? Itvaar Vrat Ki Vokal.

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आखिर क्यों जरूरी है आमलकी एकादशी का व्रत, जानें.

जीवन में सुख समृद्धि, धन संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए रविवार का व्रत सर्वश्रेष्ठ है। रविवार का व्रत करने व कथा. Ajab Gjab Blogs Apara Ekadashi अपरा एकादशी व्रत कथा. सोमवार एक व्रत कथा 0 votes. Posted 1 year ago under Social Other Social Causes माहताब की लाली 2 votes. Posted 1 year ago under Offbeat Poetry इतवार एक लघु कथा 0 votes. Posted 1 year ago under Social Poverty. RSS Latest posts by Amit Mishra. हिस्से. मन सबसे बड़ा विद्रोही है. गंगनाथ ज्यू की कथा Kafal Tree The Story of काफल ट्री. सूर्य देव का उपवास सप्ताह के प्रथम दिवस इतवार को रखा जाता है​। रविवार सूर्य देवता की पूजा का वार है। जीवन में सुख समृद्धि, धन संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए रविवार का व्रत सर्वश्रेष्ठ है। रविवार का व्रत करने व कथा सुनने से मनुष्य की सभी.

​श्री महाशिवरात्रि और व्रत के बिधि और गुण जानिए.

वृद्धावस्था में हमारा भरण पोषण कौन करेगा और कौन इस राज्य को संभालेगा. परंतु गंगनाथ ने किसी की न मानी. उसने कहा – हे माँ! तुमने मेरे लिए न जाने कितने ही कष्ट सहे, कितना त्याग किया. माघ के मकर पूस के इतवार, शनि मंगल आदि को व्रत. इतवार व्रत कथा. सूर्यनमस्कार लिए सूर्य नमस्कार. श्री रविवार इतवार व्रत कथा रविवार व्रतविधि: विधि: सर्व मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु रविवार का व्रत श्रेष्ठ है। इस व्रत की विधि इस प्रकार है। प्रातः काल स्नानादि से निवृत्त हो स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शांतचित्त होकर परमात्मा का स्मरण करें।. आज का व्रत News, Hindi News Website India sh. मोहिनी एकादशी व्रत कथा जया एकादशी व्रत कथा रविवार इतवार व्रत कथा इंदिरा एकादशी व्रत कथा पूर्णमासी व्रत कथा करवा चौथ व्रतकथा अहोई आठें अष्टमी व्रतकथा शरद पूर्णिमा व्रत कथा भाई दूज कथा & many more. Collection of Chalisas श्री राम चालीसा. Page 1 तृतीय अध्याय साँस्कृतिक जीवन में नारी की. श्री रविवार इतवार व्रत कथा. रविवार व्रतविधि: विधि: सर्व मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु रविवार का व्रत श्रेष्ठ है। इस व्रत की विधि इस प्रकार है। प्रातः काल स्नानादि से निवृत्त हो स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शांतचित्त होकर परमात्मा का स्मरण करें.

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यह उपवास सप्ताह के प्रथम दिवस इतवार व्रत कथा को रखा जाता है। रविवार सूर्य देवता की पूजा का वार है। जीवन में सुख समृद्धि, धन संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए रविवार का व्रत सर्वश्रेष्ठ है। रविवार का व्रत करने व कथा सुनने से. Pratilipi Read Stories, Poems and Books प्रतिलिपि. Продолжительность: 1:38. How To Perform Surya Pooja At Home. Ravivar Vrat Katha Sunday. रविवार व्रत कथा इतवार व्रत कथा. प्राचीन काल में किसी नगर में एक बुढ़िया रहती थी। वह प्रत्येक रविवार को सुबह उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन को गोबर से लीपकर स्वच्छ करती थी। उसके बाद सूर्य भगवान की पूजा करने के बाद.

रविवार व्रत कथा एंड आरती.

Опубликовано: 29 апр. 2011 г. Ravivar Vrat Katha सूर्य देव व्रत कथा रविवार Astroyogi. You should first understand the Ravivar Aarti meaning in hindi to maximize its effect. Benefits of Ravivar Aarti Jul 13, 2018 Ravivar Vrat Katha, रविवार ​इतवार sunday व्रत विधि,कथा, सर्व मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु रविवार का व्रत श्रेष्ठ है, Sunday Fast Story, Dec 13, 2019 रविवार व्रत की. रविवार व्रत कथा मंदिर mymandir. रविवार व्रत की कथा इतवार व्रत की कथा. एक बुढ़िया थी। उसका नियम था कि प्रति रविवार को सवेरे ही स्नान आदि कर, पड़ोसन की गाय के गोबर से घर को लीप कर फिर भोजन तैयाकर भगवान को भोग लगा स्वयं भोजन करती थी। ऐसा व्रत करने से उसका घर धन.

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श्री गणेशाय नम: दैनिक पंचांग ☀ १९ जनवरी दिन रविवार इतवाऔर संडे भगवान सूर्य देव जी को ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का प्रणाम नमन नमस्कार है Ravivar Vrat Katha रविवार व्रत कथा सूर्य देव व्रत Sunday Fast Story Sun God Fast Story. Ravivar Vrat Katha रविवार व्रत कथा सूर्य देव Raj Flim. रविवार व्रत कथा. बहुत पुराने समय में एक बुढ़िया एक नगर में निवास करती थी उसका नित्य नियम था कि हर रविवार के दिन सुबह जल्दी उठ कर और स्नान इत्यादि से निवृत्त हो कर, वह घर के आंगन को गोबर से लीपती थी उसके बाद उसका नियम था कि पहले. 9Apps: Dharmik sangrah for Android Free Download. भाद्र मास के शुक्ल पक्ष में बड़ा इतवार को श्रद्धालुओं ने प्रात: काल स्नान ध्यान कर व्रत का अनुष्ठान किया। भगवान दिवाकर को दान दिया । मनोकामनाएं पूर्ण करने वाले और जीवन में सुख समृद्धि लाने वाले रविवार व्रत की कथा सुनी।. रविवार इतवार sunday व्रत विधि,कथा एवं Speaking Tree. हेलो दोस्तों नमस्कार देखी आप का सवाल है इतवार व्रत की पूजा कैसे करते हैं इतवार मतलब होता ह. हमें रविवार का व्रत पूजा कैसे करें और क्या क्या खाएं? फैशन है दुर्गा पूजा का पर्व क्यों मनाया जाता है दर्शन पूजन कथा के अनुसार.

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