• ह्यग्रीव उपनिषद

    ह्यग्रीव उपनिषद अथर्ववेदीय शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है। यह उपनिषद संस्कृत भाषा में लिखित है। इसके रचियता वैदिक काल के ऋषियों को माना जाता है परन्तु मुख्यतः...

  • सूर्योपनिषद

    सूर्योपनिषद अथर्ववेदीय शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है। यह उपनिषद संस्कृत भाषा में लिखित है। इसके रचियता वैदिक काल के ऋषियों को माना जाता है परन्तु मुख्यत वेदव...

  • वाजश्रवसपुत्र नचिकेता

    नचिकेता, वैदिक युग के एक तेजस्वी ऋषिबालक थे। इनकी कथा तैतरीय ब्राह्मण तथा कठोपनिषद् तथा महाभारत में उपलब्ध होती है। उन्होने भौतिक वस्तुओं का परित्याग किया तथ...

  • मुण्डकोपनिषद्

    मुंडकोपनिषद् दो-दो खंडों के तीन मुंडकों में, अथर्ववेद के मंत्रभाग के अंतर्गत आता है। इसमें पदार्थ और ब्रह्म-विद्या का विवेचन है, आत्मा-परमात्मा की तुलना और स...

  • मुख्य उपनिषद

    उपनिषदों की संख्या लगभग २०० है जिनमें से प्रायः १३ उपनिषदों को मुख्य उपनिषद् कहा जाता है। मुख्य उपनिषद, वे उपनिषद हैं जो प्राचीनतम हैं और जिनका पठन-पाठन अधिक...

  • महा उपनिषद

    महोपनिषद एक लघु उपनिषद् है। यह वैष्ण्व उपनिषद की श्रेणी में आता है। महोपनिषद सामवेदिय शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है। यह उपनिषद संस्कृत भाषा में लिखित है। इसक...

  • ऐतरेय उपनिषद

    ऐतरेय उपनिषद एक शुक्ल ऋग्वेदीय उपनिषद है। ऋग्वेदीय ऐतरेय आरण्यक के अन्तर्गत द्वितीय आरण्यक के अध्याय 4, 5 और 6. का नाम ऐतरेयोपनिषद् है। यह उपनिषद् ब्रह्मविद्...

  • अक्षमालिकोपनिषद

    अक्षमालिका उपनिषद ॠग्वेदीय शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है। इसमें प्रजापति ब्रह्मा और कुमार कार्तिकेय के प्रश्नोत्तर को गूंथा गया है। इसमें सर्वप्रथम अक्षमाला ...

उपनिषद

अक्षमालिकोपनिषद

अक्षमालिका उपनिषद ॠग्वेदीय शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है। इसमें प्रजापति ब्रह्मा और कुमार कार्तिकेय के प्रश्नोत्तर को गूंथा गया है। इसमें सर्वप्रथम अक्षमाला ...

अयम् आत्मा ब्रह्म

अयम् आत्मा ब्रह्म उपनिषद् के इस महावाक्य के अनुसार आत्मा और परब्रह्म का समीकरण है। अर्थात व्यक्ति विश्व का रहस्य, जो परब्रह्म को विदित है, जान सकता है। अयमात...

उपनिषद् सिद्धान्त

मुख्य उपनिषदों में संसार के साथ समस्त जीवों की भिन्नता को दर्शाया गया है। उपनिषदिक सिद्धान्त के अनुसार केवल एक ब्रह्म ही है। उसके अतिरिक्त और कुछ नहीं जैसा क...

उपनिषद् सूची

वेद शब्द का अर्थ ज्ञान है। वेद-पुरुष के शिरोभाग को उपनिषद् कहते हैं। उप नि षद् । किसी विषय के होने न होने का निर्णय ज्ञान से ही होता है। अज्ञान का अनुभव भी ज...

ऐतरेय उपनिषद

ऐतरेय उपनिषद एक शुक्ल ऋग्वेदीय उपनिषद है। ऋग्वेदीय ऐतरेय आरण्यक के अन्तर्गत द्वितीय आरण्यक के अध्याय 4, 5 और 6. का नाम ऐतरेयोपनिषद् है। यह उपनिषद् ब्रह्मविद्...

कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद

कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद कौषीतकि उपनिषद का पूरा नाम है। यह एक ऋग्वेदीय उपनिषद है। कौषीतकि उपनिषद ॠग्वेद के कौषीतकि ब्राह्मण का अंश है। इसमें कुल चार अध्याय हैं...

तुरीय

तुरीय अनुभव की एक अवस्था है, जिसमें मन और मस्तिष्क में कुछ भी नहीं चलता है - यह भी नहीं कि कुछ नहीं है। यह ध्यान की चौथी अवस्था है, इससे पहले की तीन अवस्थाओं...

बृहदारण्यक उपनिषद्

बृहदारण्यक उपनिषत् शुक्ल यजुर्वेद से जुड़ा एक उपनिषद है। अद्वैत वेदांत और संन्यासनिष्ठा का प्रतिपादक है। उपनिषदों में सर्वाधिक बृहदाकार इसके ६ अध्याय, ४७ ब्र...

ब्रह्मविद्या उपनिषद

ब्रह्मविद्या उपनिषद कृष्ण यजुर्वेद के अन्तर्गत आने वाले ३२ उपनिषदों में से एक है। इसमें ब्रह्मविद्या की शिक्षा है। इसमें मुख्यतः ॐ की संरचना, इसका उच्चारण, इ...

अहं ब्रह्मास्मि

उपनिषदों के चार महावाक्यों में से एक महावाक्य है - "अहं ब्रह्मास्मि"। महावाक्य पूरे अध्यामिक शास्त्रों का निचोड़ है। उपनिषद् अध्यात्मिक शास्त्र के प्रमाण ग्र...

महा उपनिषद

महोपनिषद एक लघु उपनिषद् है। यह वैष्ण्व उपनिषद की श्रेणी में आता है। महोपनिषद सामवेदिय शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है। यह उपनिषद संस्कृत भाषा में लिखित है। इसक...

मुक्तिका उपनिषद्

मुक्तिका एक उपनिषद है जिसमें १०८ उपनिषदों की सूची दी गयी है। किसी भी उपनिषद का रचनाकाल ठीक-ठीक पता नहीं है। सब्से पुराने उपनिषदों की रचना ईसा से लगभग ८०० वर्...

मुख्य उपनिषद

उपनिषदों की संख्या लगभग २०० है जिनमें से प्रायः १३ उपनिषदों को मुख्य उपनिषद् कहा जाता है। मुख्य उपनिषद, वे उपनिषद हैं जो प्राचीनतम हैं और जिनका पठन-पाठन अधिक...

मुण्डकोपनिषद्

मुंडकोपनिषद् दो-दो खंडों के तीन मुंडकों में, अथर्ववेद के मंत्रभाग के अंतर्गत आता है। इसमें पदार्थ और ब्रह्म-विद्या का विवेचन है, आत्मा-परमात्मा की तुलना और स...

वाजश्रवसपुत्र नचिकेता

नचिकेता, वैदिक युग के एक तेजस्वी ऋषिबालक थे। इनकी कथा तैतरीय ब्राह्मण तथा कठोपनिषद् तथा महाभारत में उपलब्ध होती है। उन्होने भौतिक वस्तुओं का परित्याग किया तथ...

अपरा विद्या

उपनिषद् की दृष्टि में अपरा विद्या निम्न श्रेणी का ज्ञान मानी जाती हैं। मुण्डक उपनिषद के अनुसार विद्या दो प्रकार की होती है- 1 परा विद्या श्रेष्ठ ज्ञान जिसके ...

संन्यास उपनिषद

संन्यास उपनिषद् वे उपनिषद् हैं जो संन्यास से सम्बन्धित हैं। मुक्तिका उपनिषद् में वर्णित १०८ उपनिषदों में से १९ उपनिषद सन्यास उपनिषद की श्रेणी में हैं, जो निम...

सूर्योपनिषद

सूर्योपनिषद अथर्ववेदीय शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है। यह उपनिषद संस्कृत भाषा में लिखित है। इसके रचियता वैदिक काल के ऋषियों को माना जाता है परन्तु मुख्यत वेदव...

ह्यग्रीव उपनिषद

ह्यग्रीव उपनिषद अथर्ववेदीय शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है। यह उपनिषद संस्कृत भाषा में लिखित है। इसके रचियता वैदिक काल के ऋषियों को माना जाता है परन्तु मुख्यतः...