इस्लाम

इस्लाम प्रेषित परंपरा से निकला एकेश्वरवादी मजहब है। अंतिम प्रेषित की शुरुआत 7वीं सदी के अरेबिया में हुई, जबकि मुस्लिम मानते हैं कि यह सृष्टि की रचना से ही विद्यमान है। इस्लाम अल्लाह के अंतिम रसूल हजरत मुहम्मद के द्वारा मनुष्यों तक पहुंचागई अवतरित किताब क़ुरआन की शिक्षा पर आधारित है, तथा इसमें हदीस, सीरत उन-नबी का तरीका व शरीयत धर्मग्रन्थ कुरआन हैं। इस्लाम में सुन्नी, शिया व सूफ़ी समुदाय प्रमुख हैं। इस्लामों की धार्मिक स्थल मस्जिद कहलाती हैं। इस्लाम विश्व का दूसरा सबसे बड़ा धर्म है।

1. धार्मिक ग्रन्थ
इस्लामों के लिये अल्लाह द्वारा रसूलों को प्रदान की गयी सभी धार्मिक किताबें वैध हैं। इस्लामों के अनुसार क़ुरआन ईश्वर द्वारा मनुष्य को प्रदान की गयी अन्तिम धार्मिक किताब है। क़ुरआन में चाऔर किताबों का महत्व है:-
सहूफ़ ए इब्राहीमी जो कि हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को प्रदान की गयी थी। अब यह लुप्त हो चुकी है।
इंजील जो कि हजरत ईसा अलैहिस्सलाम को प्रदान की गयी थी।मुसलमान यह मानते हैं कि यहूदियों और ईसाइयों ने अपनी क़िताबों के सन्देशों में बदलाव कर दिये हैं।
ज़बूर जो कि राजा दाउद अलैहिस्सलाम को प्रदान की गयी थी।
तोराह जो कि हजरत मूसा अलैहिस्सलाम को प्रदान की गयी थी।

2.1. इस्लामी आस्था अल्लाह की एकता
इस्लाम एक ही अल्लाह को मानते हैं, जिसे वे ईश्वर फ़ारसी: ख़ुदा कहते हैं। एकेश्वरवाद को अरबी में तौहीद कहते हैं, जो शब्द वाहिद से आता है जिसका अर्थ है एक। इस्लाम में अल्लाह को मानव की समझ से परे माना जाता है। मुसलमानों से अल्लाह की कल्पना करने के बजाय उसकी प्रार्थना और जय-जयकार करने को कहा गया है। मुसलमानों के अनुसार अल्लाह अद्वितीय है - उसके जैसा और कोई नहीं। इस्लाम में अल्लाह की एक विलक्षण अवधारणा पर बल दिया गया है और यह भी माना जाता कि उसका सम्पूर्ण विवरण करना मनुष्य से परे है। कहो:

2.2. इस्लामी आस्था नबी दूत और रसूल
इस्लाम के अनुसार ईश्वर ने धरती पर मनुष्य के मार्गदर्शन के लिये समय पर किसी व्यक्ति को अपना दूत बनाया। लगभग संसार मे 124.000 नबी दूत एक खुदा को पूजने का सन्देश देने के लिये भेजे गये थे। यह दूत भी इन्सानों में से होते थे और ईश्वर की ओर लोगों को बुलाते थे। ईश्वर इन दूतों से विभिन्न रूपों में समपर्क रखता था। इन को इस्लाम में नबी कहते हैं। जिन नबियों को ईश्वर ने स्वयं, शास्त्र या धर्म पुस्तकें प्रदान कीं उन्हें रसूल कहते हैं। मुहम्मद सल्ललाहु अलैही व सल्लम भी इसी कड़ी का भाग थे। उनको जो धार्मिक पुस्तक प्रदान की गयी उसका नाम कुरान है। कुरान में अल्लाह के 25 अन्य नबियों का वर्णन है। स्वयं कुरान के अनुसार ईश्वर ने इन नबियों के अलावा धरती पर और भी कई नबी भेजे हैं जिनका वर्णन कुरान में नहीं है।
सभी मुसलमान ईश्वर द्वारा भेजे गये सभी नबियों की वैधता स्वीकार करते हैं और मुसलमान, मुहम्मद सल्ललाहु अलैही व सल्लम को ईशवर का अन्तिम नबी मानते हैं। अहमदिय्या समुदाय मुहम्मद सल्ललाहु अलैही व सल्लम को अन्तिम नबी नहीं मानता तथापि स्वयं को इस्लाम का अनुयायी कहता है और संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वीकारा भी जाता है हालांकि कई इस्लामी राष्ट्रों में उसे मुस्लिम मानना प्रतिबंधित है। भारत के उच्चतम न्यायालय के अनुसार उनको भारत में मुसलमान माना जाता है।

2.3. इस्लामी आस्था देवदूत
मुसलमान देवदूतों अरबी में मलाइका / उर्दु मे "फ़रिश्ते" के अस्तित्व को मानते हैं। उनके अनुसार देवदूत स्वयं कोई विवेक नहीं रखते और ईश्वर की आज्ञा का यथारूप पालन ही करते हैं। वह केवल रोशनी से बनीं हूई अमूर्त और निर्दोष आकृतियाँ हैं जो कि न पुरुष हैं न स्त्री, बल्कि मनुष्य से हर दृष्टि से अलग हैं। हालांकि देवदूत अगणनीय हैं, पर कुछ देवदूत कुरान में प्रभाव रखते हैं:
इस्राफ़ील अलैहिस्सलाम जो ईश्वर के समादेश पर प्रलय के दिन के आरम्भ पर एक आवाज़ देगा।
इज़्राईल अलैहिस्सलाम जो ईश्वर के समादेश से मृत्यु का दूत जो मनुष्य की आत्मा ले जाता है।
जिब्राईल अलैहिस्सलाम जो नबीयों और रसूलों को ईश्वर का सन्देश ला कर देते थे।
मीकाईल अलैहिस्सलाम जो ईश्वर के समादेश पर मौसम बदलनेवाला देवदूत है।
किरामन कातिबीन हिंदी में "प्रतिष्ठित लेखक" जो मनुष्य के कर्मों को लिखते हैं। इस्लामिक मान्यता अनुसार प्रत्येक मनुष्य के साथ दो देवदूत लगे होते हैं जो उसके कर्मों को लिखते रहते हैंकुरआन -82-9 व 10
मुनकिर नकीर या नकीरैन - मनुष्य के मरणोपरान्त उसकी कब्र में आ कर उससे तीन प्रशन पूछने वाले।

2.4. इस्लामी आस्था क़यामत यौम अल-क़ियामा
मध्य एशिया के अन्य धर्मों ईसाई और यहूदी के समान इस्लाम में भी ब्रह्मांड का अंत प्रलय के दिन द्वारा माना जाता है। इसके अनुसार ईश्वर एक दिन संसार को समाप्त करेगा। यह दिन कब आयेगा इसकी सही जानकारी केवल ईश्वर को ही है। इस्लाम के अनुसार सभी मृत लोगों को उस दिन पुनर्जीवित किया जाएगा और अल्लाह के आदेशानुसार अपना जीवन व्यतीत करने वालों को स्वर्ग भेजा जाएगा और उसका आदेश न मनाने वालों को नर्क में जलाया जाएगा।

2.5. इस्लामी आस्था तक़दीर
मुसलमान भाग्य को मानते हैं। भाग्य का अर्थ इनके लिये यह है कि ईश्वर बीते हुए समय, वर्तमान और भविष्य के बारे में सब जानता है। कोई भी घटना उसकी अनुमति के बिना नहीं हो सकती है। मनुष्य को अपनी इच्छा से जीने की स्वतन्त्रता तो है पर इसकी अनुमति भी ईश्वर ही के द्वारा उसे दी गयी है। इस्लाम के अनुसार मनुष्य अपने कुकर्मों के लिये स्वयं उत्तरदाई इसलिए है क्योंकि उन्हें करने या न करने का निर्णय ईश्वर मनुष्य को स्वयं ही लेने देता है। उसके कुकर्मों का भी पूर्व ज्ञान ईश्वर को होता है।

3.1. मुसलमानों के कर्तव्य और शरीयत इस्लाम के ५ स्तम्भ
1 तौहीदएक इश्वर 2 नमाज़ 3 रोज़ा उपवास 4 ज़ाक़तदान करना 5 हज तीर्थ यात्रा
इस्लाम के दो प्रमुख वर्ग हैं, शिया और सुन्नी। दोनों के अपने अपने इस्लामी नियम हैं लेकिन आधारभूत सिद्धान्त मिलते-जुलते हैं। बहुत से सुन्नी, शियाओं को पूर्णत: मुसलमान नहीं मानते। सुन्नी इस्लाम में हर मुसलमान के ५ आवश्यक कर्तव्य होते हैं जिन्हें इस्लाम के ५ स्तम्भ भी कहा जाता है। शिया इस्लाम में थोड़े अलग सिद्धांतों को स्तम्भ कहा जाता है। सुन्नी इस्लाम के ५ स्तंभ हैं:-
साक्षी होना शहादत- इस का शाब्दिक अर्थ है गवाही देना। इस्लाम में इसका अर्थ में इस अरबी घोषणा से हैः
अरबी: لا اله الا الله محمد رسول الله लिप्यांतर:” ला इलाहा इलल्लाहु मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह" हिन्दी:अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और हज़रत मुहम्मद सलल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के नेक बन्दे और आखिरी रसूल प्रेषित हैं।
इस घोषणा से हर मुसलमान ईश्वर की एकेश्वरवादिता और मुहम्मद सलल्लाहु अलैहि वसल्लम के रसूल होने के अपने विश्वास की गवाही देता है। यह इस्लाम का सबसे प्रमुख सिद्धांत है। हर मुसलमान के लिये अनिवार्य है कि वह इसे स्वीकारे
प्रार्थना सलात- इसे फ़ारसी में नमाज़ भी कहते हैं। यह एक प्रकार की प्रार्थना है जो अरबी भाषा में एक विशेष नियम से पढ़ी जाती है। इस्लाम के अनुसार नमाज़ ईश्वर के प्रति मनुष्य की कृतज्ञता दर्शाती है। यह कावा मक्का की ओर मुँह कर के पढ़ी जाती है। हर मुसलमान के लिये दिन में ५ बार नमाज़ पढ़ना अनिवार्य है। विवशता और बीमारी की हालत में शरीयत में आसान नियम बताये गए हैं इसे नहीं टाला जा सकता है।
व्रत रमज़ान सौम- इस के अनुसार इस्लामी कैलेंडर के नवें महीने में सभी सक्षम मुसलमानों के लिये सूर्योदय फजर से सूर्यास्त मग़रिब तक व्रत रखनाभूखा प्यासा रहनाअनिवार्य है। इस व्रत को रोज़ा भी कहते हैं। रोज़े में हर प्रकार का खाना-पीना वर्जितमना है। अन्य व्यर्थ कर्मों से भी अपनेआप को दूर रखा जाता है। यौन गतिविधियाँ भी वर्जित हैं। विवशता में रोज़ा रखना आवश्यक नहीं होता। रोज़ा रखने के कई उद्देश्य हैं जिन में से दो प्रमुख उद्देश्य यह हैं कि दुनिया के बाकी आकर्षणों से ध्यान हटा कर ईश्वर से निकटता अनुभव की जाए और दूसरा यह कि निर्धनों, भिखारियों और भूखों की समस्याओं और परेशानियों का ज्ञान हो।
तीर्थ यात्रा हज- हज उस धार्मिक तीर्थ यात्रा का नाम है जो इस्लामी कैलेण्डर के 12वें महीने में मक्का में जाकर की जाती है। हर समर्पित मुसलमान जो हज का खर्च‍‍ उठा सकता हो और विवश न हो के लिये जीवन में एक बार इसे करना अनिवार्य है।
दान ज़कात- यह एक वार्षिक दान है जो कि हर आर्थिक रूप से सक्षम मुसलमान को निर्धन मुसलमानों में बांटना अनिवार्य है। अधिकतर मुसलमान अपनी वार्षिक आय का 2.5% दान में देते हैं। यह एक धार्मिक कर्तव्य इस लिये है क्योंकि इस्लाम के अनुसार मनुष्य की पूंजी वास्तव में ईश्वर की देन है। और दान देने से जान और माल कि सुरक्षा होती हे।

3.2. मुसलमानों के कर्तव्य और शरीयत शरीयत और इस्लामी न्यायशास्त्र
मुसलमानों के लिये इस्लाम जीवन के हर पहलू पर अपना प्रभाव रखता है। इस्लामी सिद्धान्त मुसलमानों के घरेलू जीवन, उनके राजनैतिक या आर्थिक जीवन, मुसलमान राज्यों की विदेश निति इत्यादि पर प्रभाव डालते हैं। शरीयत उस समुच्चय नीति को कहते हैं जो इस्लामी कानूनी परम्पराओं और इस्लामी व्यक्तिगत और नैतिक आचरणों पर आधारित होती है। शरीयत की नीति को नींव बना कर न्यायशास्त्र के अध्य्यन को फिक़ह कहते हैं। फिक़ह के मामले में इस्लामी विद्वानों की अलग व्याख्याओं के कारण इस्लाम में न्यायशास्त्र कई भागों में बट गया और कई अलग न्यायशास्त्र से सम्बन्धित विचारधारओं का जन्म हुआ। इन्हें पन्थ कहते हैं। सुन्नी इस्लाम में प्रमुख पन्थ हैं-
हंबली पन्थ - इसके अनुयायी सऊदी अरब में हैं।
हनफ़ी पन्थ - इसके अनुयायी दक्षिण एशिया और मध्य एशिया में हैं।
शाफ्यी पन्थ -इसके अनुयायी पूर्वी अफ़्रीका, अरब के कुछ भागों और दक्षिण पूर्व एशिया में हैं।
मालिकी पन्थ -इसके अनुयायी पश्चिम अफ्रीका और अरब के कुछ भागों में हैं।
अधिकतर मुसलमानों का मानना है कि चारों पन्थ आधारभूत रूप से सही हैं और इनमें जो मतभेद हैं वह न्यायशास्त्र की बारीक व्याख्याओं को लेकर है।

4.1. इतिहास पैगंबर मुहम्मद सल्ललाहु अलैही व सल्लम
पैगंबर मुहम्मद सल्ललाहु अलैही व सल्लम ५७०-६३२ को मक्का की पहाड़ियों में परम ज्ञान 610 के आसपास प्राप्त हुआ। जब उन्होंने उपदेश देना आरंभ किया तब मक्का के समृद्ध लोगों ने इसे अपनी सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था पर खतरा समझा और उनका विरोध किया। अंत में ६२२ में उन्हें अपने अनुयायीयों के साथ मक्का से के लिए कूच करना पड़ा। इस यात्रा को हिजरीहिजरतकहा जाता है और यहीं से इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत होती है। मदीना के लोगों की ज़िंदगी आपसी लड़ाईयों से परेशान सी थी और हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैही व सल्लम साहब के संदेशों ने उन्हें वहाँ बहुत लोकप्रिय बना दिया। मक्का में स्थित काबा को इस्लाम का पवित्र स्थल घोषित कर दिया गया। ६३२ में पैगम्बर मुहम्मद सल्ललाहु अलैही व सल्लम साहब का देहांत हो गया। पर उनकी मृत्यु तक इस्लाम के प्रभाव से अरब के सारे कबीले एक राजनीतिक और सामाजिक सभ्यता का हिस्सा बन गये थे। इस के बाद इस्लाम में खिलाफत का दौर शुरु हुआ।

4.2. इतिहास राशिदून खलीफा और गृहयुद्ध
मुहम्मद के ससुर अबु बक्र सिद्दीक़ र.अ. मुसलमानों के पहले खलीफा सरदार ६३२ में बनाये गये। कई प्रमुख मुसलमानों ने मिल के उनका खलीफा होना स्वीकार किया। सुन्नी मुसलमानों 80-90% के अनुसार अबु बक्र सिद्दीक की खिलाफ़त के सम्बंध में कोई विवाद नहीं हुआ अपितु सभी ने उन्हे खलिफ़ा स्वीकाकर लिया था, सुन्नी मान्यताओं के अनुसार हजरत मुहम्मद साहब ने स्वयं अपने स्वर्गवास से पूर्व ही अबु बक्र सिद्दीक को अपने स्थान पर इमामत करने सलात फ़ारसी में "नमाज" पढ़ाने का कार्य भार देकर अबु बक्र सिद्दीक के खलिफ़ा होने का संकेत दे दिया था । सन् ६३२ में मुहम्म्द साहब ने अपने आखिरी हज में ख़ुम्म सरोवर के निकट अपने साथियों को संबोधित किया था। शिया विश्वास के अनुसार इस ख़िताब में उन्होंने अपने दामाद अली को अपना वारिस बनाया था। सुन्नी इस घटना को हजरत अली अल्० की प्रशंसा मात्र मानते है और विश्वास रखते हैं कि उन्होंने हज़रत अली को ख़लीफ़ा नियुक्त नहीं किया। इसी बात को लेकर दोनो पक्षों में मतभेद शुरु होता है।
हज के बाद मुहम्मद साहब स्० बीमार रहने लगे। उन्होंने सभी बड़े सहाबियों को बुला कर कहा कि मुझे कलम दावात दे दो कि में तुमको एसा नविश्ता लिख दूँ कि तुम भटको नहीं तो उमर ने कहा कि ये हिजयान कह रहे हे और नहीं देने दिया देखे बुखारी, मुस्लिम। शिया इतिहास के अनुसार जब पैग़म्बर साहब की मृत्यु का समाचार मिला तो भी ये वापस न आकर सकिफा में सभा करने लगे कि अब क्या करना चाहिये। जिस समय हज़रत मुहम्मद स्० की मृत्यु हुई, अली और उनके कुछ और मित्र मुहम्मद साहब स्० को दफ़नाने में लगे थे, अबु बक़र मदीना में जाकर ख़िलाफ़त के लिए विमर्श कर रहे थे। मदीना के कई लोग मुख्यत: बनी ओमैया, बनी असद इत्यादि कबीले अबु बकर को खलीफा बनाने प‍र सहमत हो गये। ध्यान रहे कि मोहम्मद साहेब एवम अली के कबीले वाले यानि बनी हाशिम अली को ही खलीफा बनाना चाहते थे। पर इस्लाम के अब तक के सबसे बड़े साम्राज्य उस समय तक संपूर्ण अरबी प्रायद्वीप में फैला के वारिस के लिए मुसलमानों में एकजुटता नहीं रही। कई लोगों के अनुसार अली, जो मुहम्मद साहब के चचेरे भाई थे और दामाद भी क्योंकि उन्होंने मुहम्मद साहब की संतान फ़ातिमा से शादी की थी ही मुहम्मद साहब के असली वारिस थे। परन्तु अबु बक़र पहले खलीफा बनाये गये और उनके मरने के बाद उमर को ख़लीफ़ा बनाया गया। इससे अली अल्० के समर्थक लोगों में और भी रोष फैला परन्तु अली मुसलमानों की भलाई के लिये चुप रहे। परन्तु शिया मुस्लिम 10-20%के अनुसार मुहम्मद के चाचा जाद भाई, अली, जिन का मुसलमान बहुत आदर करते थे ने अबु बक्र को खलीफा मानने से इन्काकर दिया। लेकिन यह विवाद इस्लाम की तबाही को रोक्ने के लिए वास्तव में हज़रत अली की सूझ बुझ के कारण टल गया अबु बक्र के कार्यकाल में पूर्वी रोमन साम्राज्य और ईरानी साम्राज्य से मुसलमान फौजों की लड़ाई हूई। यह युद्ध मुहम्मद के ज़माने से चली आ रही दुश्मनी का हिस्सा थे। अबु बक्र के बाद उमर बिन खत्ताब को ६३४ में खलीफा बनाया गया। उनके कार्यकाल में इस्लामी साम्राज्य बहुत तेज़ी से फैला और समपूर्ण ईरानी साम्राज्य और दो तिहाई पूर्वी रोमन साम्राज्य पर मुसलमानों ने कबजा कर लिया। पूरे साम्राज्य को विभिन्न प्रदेशों में बाट दिया गया और हर प्रदेश का एक राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया जो की खलीफा का अधीन होता था।
उमर बिन खत्ताब के बाद उसमान बिन अफ्फान ६४४ में खलीफा बने। यह भी मुहम्मद के प्रमुख साथियों में से थे। उसमान बिन अफ्फान पर उनके विरोधियों ने ये आरोप लगाने शुरु किये कि वो पक्षपात से नियुक्तियाँ करते हैं और अली मुहम्मद साहिब के चाचा जाद भाई ही खलीफा होने के सही हकदार हैं। तभी मिस्र में विद्रोह की भावना जागने लगी और वहाँ से १००० लोगों का एक सशस्त्र समूह इस्लामी साम्राज्य की राजधानी मदीना आ गया। उस समय तक सभी खलीफा आम लोगों की तरह ही रहते थे। इस लिये यह समूह ६५६ में उसमान की हत्या करने में सफल हो गया। कुछ प्रमुख मुसलमानों ने अब अली को खलीफा स्वीकाकर लिया लेकिन कुछ प्रमुख मुसलमानों का दल अली के खिलाफ भी हो गया। इन मुसलमानों का मानना था की जबतक उसमान के हत्यारों को सज़ा नहीँ मिलती अली का खलीफा बनना सही नहीं है। यह इस्लाम का पहला गृहयुद्ध था। शुरु में इस दल के एक हिस्से की अगुआई आयशा, जो की मुहम्मद की पत्नी थी, कर रही थीं। अली और आश्या की सेनाओं के बीच में जंग हुई जिसे जंग-ए-जमल कहते हैं। इस जंग में अली की सेना विजय हुई। अब सीरिया के राज्यपाल मुआविया ने विद्रोह का बिगुल बजाया। मुआविया उसमान के रिश्तेदार भी थे मुआविया की सेना और अली की सेना के बीच में जंग हूई पर कोई परिणाम नहीं निकला। अली ने साम्राज्य में फैली अशांति पर काबू पाने के लिये राजधानी मदीना से कूफा में जो अभी ईराक़ में है पहले ही बदल दी थी। मुआविया की सेनाऐं अब पूरे इस्लामी साम्राज्य में फैल गयीं और जल्द ही कूफा के प्रदेश के सिवाये सारे साम्राज्य पर मुआविया का कब्जा हो गया। तभी एक कट्टरपंथी ने ६६१ में अली की हत्या कर दी।

4.3. इतिहास शिया और सुन्नी वर्गों की नींव इन्हें भी देखें: शिया इस्लाम इन्हें भी देखें: सुन्नी इस्लाम
अली के बाद हालांकि मुआविया खलीफा बन गये लेकिन मुसलमानों का एक वर्ग रह गया जिसका मानना था कि मुसलमानों का खलीफा मुहम्मद साहब के परिवार का ही हो सकता है। उनका मानना था कि यह खलीफा जिसे वह ईमाम भी कहते थे स्वयँ भगवान के द्वारा आध्यात्मिक मार्गदर्शन पाता है। इनके अनुसार अली पहले ईमाम थे। यह वर्ग शिया वर्ग के नाम से प्रसिद्ध हुआ। बाकी मुसलमान, जो की यह नहीं मानते हैं कि मुहम्मद साहब का परिवारजन ही खलीफा हो सकता है, सुन्नी कहलाये। सुन्नी पहले चारों खलीफाओं को राशिदून खलीफा कहते हैं जिसका अर्थ है सही मार्ग पे चलने वाले खलीफा।
मुआविया के खलीफा बनने के बाद खिलाफत वंशानुगत हो गयी। इससे उमय्यद ख़िलाफ़त का आरंभ हुआ। शिया इतिहास कारों के अनुसार मुआविया क बेटे यज़ीद ने खिलाफत प्राप्त करते ही इस्लाम की नीतिओ के विरुद्ध कार्य करना शुरू कर दिया, उसके कृत्य से धार्मिक मुसलमान असहज स्थिति में आ गए, अब यज़ीद को आयश्यकता थी की अपनी गलत नीतिओ को ऐसे व्यक्ति से मान्यता दिला दे जिस पर सभी मुस्लमान भरोसा करते हो, इस काम के लिए यज़ीद ने हज़रत मुहम्मद के नवासे, हज़रत अली अलैहिस सलाम और हज़रत मुहम्मद की इकलौती पुत्री फातिमा के पुत्र हज़रत हुसैन से अपनी खिलाफत पर मंजूरी करनी चाही परन्तु हज़रत हुसैन ने उसके इस्लाम की नीतिओ के विरुद्ध कार्य करने के कारण अपनी मंजूरी देने से मना कर दिया, हज़रत हुसैन के मना करने पर यज़ीद की फौजों ने हज़रत हुसैन और उनके ७२ साथियो पर पानी बंद कर दिया और बड़ी ही बेदर्दी के साथ उनका क़त्ल करके उनके घर वालो को बंधक बना लिया,कई सुन्नी इतिहास कारों ने भी अपनी पुस्तकों में यज़ीद को हुसैन के क़त्ल का ज़िम्मेदार माना है परन्तु ये सभी शिया इतिहास कारों से प्रेरित थे या इनके ज्ञान का असल केन्द्र शियाओं की गढी़ गयी बनू उमय्या के विरुद्ध झूठी कहानियां है। सुन्नी मत के बड़े विद्वानों इमाम अहमद बिन हंब्ल, इमाम गंज़ाली वगैरह ने यज़ीद को क़त्ले हुसैन करने का ज़िम्मेदार नहीं माना है। इस जंग में हुसैन को शहादत प्राप्ति हो गयी। शिया लोग १० मुहर्रम के दिन इसी का शोक मनाते हैं।

4.4. इतिहास इस्लाम का स्वर्ण युग ७५०-१२५८
उम्मयद वंश ७० साल तक सत्ता में रहा और इस दौरान उत्तरी अफ्रीका, दक्षिण यूरोप, सिन्ध और मध्य एशिया के कई हिस्सों पर उनका कब्ज़ा हो गया। उम्मयद वंश के बाद अब्बासी वंश ७५० में सत्ता में आया। शिया और अजमी मुसलमानों ने वह मुसलमान जो कि अरब नहीं थे अब्बासियों को उम्मयद वंश के खिलाफ विद्रोह करने में बहुत सहायता की। उम्मयद वंश की एक शाखा दक्षिण स्पेन और कुछ और क्षेत्रों पर सिमट कर रह गयी। केवल एक इस्लामी सम्राज्य की धारणा अब समाप्त होने लगी।
अब्बासियों के राज में इस्लाम का स्वर्ण युग शुरु हुआ। अब्बासी खलीफा ज्ञान को बहुत महत्त्व देते थे। मुस्लिम दुनिया बहुत तेज़ी से विशव में ज्ञान केन्द्र बनने लगी। कई विद्वानों ने प्राचीन युनान, भारत, चीन और फ़ारसी सभय्ताओं की साहित्य, दर्शनशास्र, विज्ञान, गणित इत्यादी से संबंधित पुस्तकों का अध्ययन किया और उनका अरबी में अनुवाद किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस के कारण बहुत बड़ा ज्ञानकोश इतिहास के पन्नों में खोने से रह गया। मुस्लिम विद्वानों ने सिर्फ अनुवाद ही नहीं किया। उन्होंने इन सभी विषयों में अपनी छाप भी छोड़ी।
चिकित्सा विज्ञान में शरीर रचना और रोगों से संबंधित कई नई खोजें भारत हूईं जैसे कि खसरा और चेचक के बीच में जो फर्क है उसे समझा गया। इबने सीना ९८०-१०३७ ने चिकित्सा विज्ञान से संबंधित कई पुस्तकें लिखीं जो कि आगे जा कर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का आधार बनीं। इस लिये इबने सीना को आधुनिक चिकित्सा का पिता भी कहा जाता है। इसी तरह से अल हैथाम को प्रकाशिकी विज्ञान का पिता और अबु मूसा जबीर को रसायन शास्त्र का पिता भी कहा जाता है। अल ख्वारिज़्मी की किताब किताब-अल-जबर-वल-मुक़ाबला से ही बीजगणित को उसका अंग्रेजी नाम मिला। अल ख्वारिज़्मी को बीजगणित की पिता कहा जाता है।
इस्लामी दर्शनशास्त्र में प्राचीन युनानी सभय्ता के दर्शनशास्र को इस्लामी रंग से विकसित किया गया। इबने सीना ने नवप्लेटोवाद, अरस्तुवाद और इस्लामी धर्मशास्त्र को जोड़ कर सिद्धांतों की एक नई प्रणाली की रचना की। इससे दर्शनशास्र में एक नई लहर पैदा हूई जिसे इबनसीनावाद कहते हैं। इसी तरह इबन रशुद ने अरस्तू के सिद्धांतों को इस्लामी सिद्धांतों से जोड़ कर इबनरशुवाद को जन्म दिया। द्वंद्ववाद की मदद से इस्लामी धर्मशास्त्र का अध्ययन करने की कला को विकसित किया गया। इसे कलाम कहते हैं। मुहम्मद साहब के उद्धरण, गतिविधियां इत्यादि के मतलब खोजना और उनसे कानून बनाना स्वयँ एक विषय बन गया। सुन्नी इस्लाम में इससे विद्वानों के बीच मतभेद हुआ और सुन्नी इस्लाम कानूनी मामलों में ४ हिस्सों में बट गया।
राजनैतिक तौपर अब्बासी सम्राज्य धीरे धीरे कमज़ोर पड़ता गया। अफ्रीका में कई मुस्लिम प्रदेशों ने ८५० तक अपने आप को लगभग स्वतंत्कर लिया। ईरान में भी यही हाल हो गया। सिर्फ कहने को यह प्रदेश अब्बासियों के अधीन थे। महमूद ग़ज़नी ९७१-१०३० ने अपने आप को तो सुल्तान भी घोषित कर दिया। सल्जूक तुरकों ने अब्बासियों की सेना शक्ति नष्ट करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने मध्य एशिया और ईरान के कई प्रदेशों पर राज किया। हालांकि यह सभी राज्य आपस में युद्ध भी करते थे पर एक ही इस्लामी संस्कृति होने के कारण आम लोगों में बुनियादी संपर्क अभी भी नहीं टूटा था। इस का कृषिविज्ञान पर बहुत असर पड़ा। कई फसलों को नई जगह ले जाकर बोया गया। यह मुस्लिम कृषि क्रांति कहलाती है।

4.5. इतिहास विभिन्न मुस्लिम सम्राज्यों की रचना और इस्लाम
फातिमिद वंश ९०९-११७१ जो कि शिया था ने उत्तरी अफ्रीका के कुछ हिस्सों पर कब्ज़ा कर के अपनी स्वतंत्र खिलाफत की स्थापना की। हालांकि इस खिलाफत को अधिकतम मुसल्मान आज अवैध मानते हैं। मिस्र में गुलाम सैनिकों से बने ममलूक वंश ने १२५० में सत्ता हासिल कर ली। मंगोलों ने जब १२५८ में अब्बासियों को बग़दाद में हरा दिया तब अब्बासी खलीफा एक नाम निहाद हस्ती की तरह मिस्र के ममलूक सम्राज्य की शरण में चले गये। एशिया में मंगोलों ने कई सम्राज्यों पर कब्ज़ा कर लिया और बोद्ध धर्म छोड़ कर इस्लाम कबूल कर लिया। मुस्लिम सम्राज्यों और इसाईयों के बीच में भी अब टकराव बढ़ने लगा। अय्यूबिद वंश के सलादीन ने ११८७ में येरुशलाईम को, जो पहली सलेबी जंग १०९६-१०९९ में इसाईयों के पास आ गया था, वापस जीत लिया। १३वीं और १४वीं सदी से उस्मानी साम्राज्य१२९९-१९२४ का असर बढ़ने लगा। उसने दक्षिणी और पूर्वी यूरोप के कई प्रदेशों को और उत्तरी अफ्रीका को अपना अधीन कर लिया। खिलाफत अब वैध रूप से उस्मानी वंश की होने लगी। ईरान में शिया सफवी वंश१५०१-१७२२ और भारत में दिल्ली सुल्तानों १२०६-१५२७ और बाद में मुग़ल साम्राज्य१५२६-१८५७ की हुकूमत हो गयी।
नवीं सदी से ही इस्लाम में अब एक धार्मिक रहस्यवाद की भावना का विकास होने लगा था जिसे सूफी मत कहते हैं। ग़ज़ाली १०५८-११११ ने सूफी मत के पष में और दर्शनशास्त्र की निरर्थकता के बारे में कुछ ऐसे तर्क दिये थे कि दर्शनशास्त्र का ज़ोर कम होने लगा। सूफी काव्यात्मकता की प्रणाली का अब जन्म हुआ। रूमी १२०७-१२७३ की मसनवी इस का प्रमुख उदाहरण है। सूफियों के कारण कई मुसलमान धर्म की ओर वापस आकर्षित होने लगे। अन्य धर्मों के कई लोगों ने भी इस्लाम कबूल कर लिया। भारत और इंडोनेशिया में सूफियों का बहुत प्रभाव हुआ। मोइनुद्दीन चिश्ती, बाबा फरीद, निज़ामुदीन जैसे भारतीय सूफी संत इसी कड़ी का हिस्सा थे।
१९२४ में तुर्की के पहले प्रथम विश्वयुद्ध में हार के बाद उस्मानी साम्राज्य समाप्त हो गया और खिलाफत का अंत हो गया। मुसल्मानों के अन्य देशों में प्रवास के कारण युरोप और अमरीका में भी इस्लाम फैल गया है। अरब दैशों में तेल के उत्पादन के कारण उनकी अर्थव्यवस्था बहुत तेज़ी से सुधर गयी। १९वीं और २०वीं सदी में इस्लाम में कई पुनर्जागरण आंदोलन हुए। इन में से सलफ़ी और देवबन्दी मुख्य हैं। एक पश्चिम विरोधी भावना का भी विकास हुआ जिससे कुछ मुसलमान कट्टरपंथ की तरफ आकर्षित होने लगे।

5.1. समुदाय जनसांख्यिकी
विश्व में आज लगभग 1.9 अरब या फिर 190 करोड़ से 2.0 अरब 200 करोड़ मुसलमान हैं। इन्में से लगभग 85% सुन्नी और लगभग 15% शिया हैं। सुन्नी और शिया के अतिरिक्त इस्लाम में कुछ अन्य वर्ग भी हैं परन्तु इन का प्रभाव बहुत कम है। सबसे अधिक मुसलमान दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिण एशिया के देशों में रहते हैं। मध्य पूर्व, अफ़्रीका और यूरोप में भी मुसलमानों के बहुत समुदाय रहते हैं। विश्व में लगभग 56 देश ऐसे हैं जहां मुसलमान बहुमत में हैं। विश्व में कई देश ऐसे भी हैं जहां की मुसलमान जनसंख्या के बारे में कोई विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं है।

5.2. समुदाय मस्जिद
मुसलमानों के उपासनास्थल को मस्जिद कहते हैं। मस्जिद इस्लाम में केवल ईश्वर की प्रार्थना का ही केंद्र नहीं होता है बल्कि यहाँ पर मुस्लिम समुदाय के लोग विचारों का आदान प्रदान और अध्ययन भी करते हैं। मस्जिदों में अक्सर इस्लामी वास्तुकला के कई अद्भुत उदाहरण देखने को मिलते हैं। विश्व की सबसे बड़ी मस्जिद मक्का की मस्जिद अल हरम है। मुसलमानों का पवित्र स्थल काबा इसी मस्जिद में है। मदीना की मस्जिद अल नबवी और जेरूसलम की मस्जिद ए अक़सा भी इस्लाम में महत्वपूर्ण हैं।

5.3. समुदाय पारिवारिक और सामाजिक जीवन
मुसलमानों का पारिवारिक और सामाजिक जीवन इस्लामी कानूनों और इस्लामी प्रथाओं से प्रभावित होता है। विवाह एक प्रकार का कानूनी और सामाजिक अनुबंध होता है जिसकी वैधता केवल पुरुष और स्त्री की मर्ज़ी और २ गवाहों से निर्धारित होती है शिया वर्ग में केवल १ गवाह चाहिए होता है। इस्लामी कानून स्त्रियों और पुरुषों को विरासत में आधा हिस्सा देता है। स्त्रियों का हिस्सा पुरुषों की तुलना में आधा होता है।
इस्लाम के दो महत्वपूर्ण त्यौहार ईद उल फितर और ईद-उल-अज़्हा हैं। रमज़ान का महीना जो कि इस्लामी कैलेण्डर का नवाँ महीना होता है बहुत पवित्र समझा जाता है। अपनी इस्लामी पहचान दिखाने के लिये मुसलमान अपने बच्चों का नाम अक्सर अरबी भाषा से लेते हैं। इसी कारण वह दाढ़ी भी रखते हैं। इस्लाम में कपड़े पहनते समय लज्जा रखने पर बहुत ज़ोर दिया गया है। इसलिये अधिकतर स्त्रियाँ बुर्का पहनती हैं और कुछ स्त्रियाँ नकाब भी पहनती हैं।

6. अन्य धर्म
अन्य धर्मों से इस्लाम का संपर्क समय और परिस्थितियों से प्रभावित रहा है। यह संपर्क मुहम्मद सलल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय से ही शुरु हो गया था। उस समय इस्लाम के अलावा अरब में ३ परम्पराओं के मानने वाले थे। एक तो अरब का पुराना धर्म जो अब लुप्त हो चुका है था जिसकी वैधता इस्लाम ने नहीं स्वीकार की। इसका कारण था कि वह धर्म ईश्वर की एकता को नहीं मानता था जो कि इस्लाम के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध था। ईसाई धर्म और यहूदी धर्म को इस्लाम ने वैध तो स्वीकाकर लिया पर इस्लाम के अनुसार इन धर्मों के अनुयायीयों और पुजारियों ने इनमें बदलाव कर दिये थे। मुहम्म्द सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने मक्का से मदीना पहुंचने के बाद वहाँ के यहूदियों के साथ एक संधि करी जिसमें यहूदियों की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वायत्तता को स्वीकारा गया। अरब बहुदेववादियों के साथ भी एक संधि हूई जिसे हुदैबा की सुलह कहते हैं।
जिहाद:
मुहम्मद सलल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद से अक्सर राजनैतिक कारण अन्य धर्मों की ओर् इस्लाम का व्यवहार निर्धारित करते आये हैं। जब राशिदून खलीफाओं ने अरब से बाहर कदम रखा तो उनका सामना पारसी धर्म से हुआ। उसको भी वैध स्वीकाकर लिया गया। इन सभी धर्मों के अनुयायीयों को धिम्मी कहा गया। मुसलमान खलीफाओं को इन्हें एक शुल्क देना होता था जिसे जिज़्या या जजिया कहते हैं। इसके बदले राज्य उन्हें हानी न पहुंचाने और सुरक्षा देने का वादा करता था। उम्मयदों के कार्यकाल में इस्लाम कबूल करने वाले को अक्सर हतोत्साहित किया जाता था। इसका कारण था कि कई लोग केवल राजनैतिक और आर्थिक लाभों के लिये ही इस्लाम कबूल करने लगे थे। इससे जिज़्या या जजिया कम होने लगा था।
भारत में इस्लाम का आगमन तो अरब व्यापारी ७वीं सदी में ही ले आये थे। लेकिन भारत में प्रारंभिक मुस्लिम सुल्तानों का आना १०वीं सदी में ही हुआ। अब तक आधिकारिक रूप से इन सुलतानों का इस्लामी खलीफाओं से कोई संबंध नहीं था। इसलिये इन सभी ने अपनी अपनी समझ के हिसाब से हिन्दू धर्म कि ओर अपना रवैया अपनाया। शुरु में कुछ मुस्लिम सुल्तानों ने हिन्दू धर्म की कम जानकारी होने के कारण उसे पुराने अरब के बहुदेववाद के साथ जोड़ा। सूफी संतों और भक्ति आंदोलन ने इस मनमुटाव को दूर करने में बहुत अहम भूमिका निभाई।

इस्लाम और हिंसा

मुख्य धारा के इस्लामी कानून में हिंसा के उपयोग का विस्तृत रूप में यह निर्धारण किया गया है, उदाहरण के लिए अपने घर-परिवार में हिंसा का प्रयोग, शारीरिक दण्ड और मृत्युदण्ड देना आदि। इतना ही नहीं, यह भी बताया गया है कि कब, कैसे और किसके विरुद्ध युद्ध करना चाहिए।

कुरान में हिंसा

कुरान की की बहुत सी आयतों के बारे में लोगों की धारणा है कि वे शत्रुओं, इस्लाम के न मानने वालों और गैर-मुसलमानों के विरुद्ध हिंसा करने की बात करतीं हैं।

सुन्नी बोहरा

सुन्नी बोहरा, इस्लाम के सुन्नी सम्प्रदाय का एक उपसम्प्रदाय है जो भारत के गुजरात में पाए जाते हैं। कुछ सुन्नी बोहरा पाकिस्तान के कराची में भी रहते हैं।

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इस्लाम: इस्लाम की असलियत, इस्लाम की कुरीतियां, इस्लाम की सच्चाई, इस्लाम धर्म का सच, इस्लाम से पहले का अरब, इस्लाम धर्म के सिद्धांत, इस्लाम से पहले अरब के धर्म, भारत से इस्लाम का अंत

इस्लाम की कुरीतियां.

इस्लाम से पहले मूर्ति पूजा होती थी काबा में BBC. यह लेख रिचर्ड ईटन की चर्चित पुस्तक द राइज ऑफ इस्लाम एंड द बंगाल फ्रंटियर से अनुदित किया गया है। यह पुस्तक एक व्यापक सवाल का अध्ययन है जनसामान्य के धार्मिक आस्थाओं में बड़े पैमाने पर परिवर्तन कैसे आता है। परिवर्तन क्यों आता है किस तरह. इस्लाम से पहले अरब के धर्म. इस्लाम विरोधी है Twitter? जानें Navodaya Times. इस्लाम का उदय. खुदा के प्रति पूर्ण समर्पण ही इस्लाम है। इस्लाम का उदय मक्का में हुआ। इसके संस्थापक मुहम्मद साहब कुरैश जनजाति के थे। उनका जन्म 570 ई० में मक्का में हुआ। उनके पिता अब्दुल्ला की मृत्यु उनके जन्म के पूर्व ही हो.

इस्लाम से पहले का अरब.

इस्लाम में महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने पर. इस्लाम में न केवल शारीरिक स्वच्छता पर बल्कि मानसिक और आचरण की शुद्धता पर भी बहुत जोर दिया गया है। क़ुरान में इसके लिए बाकायदा नियम भी बतागए हैं। व्यक्तिगत स्वच्छता के विषय में इस्लाम. इस्लाम में पवित्रता और स्वच्छता पर. इस्लाम धर्म के सिद्धांत. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा, हलाला का इस्‍लाम. इस्लाम कबूलने के बाद योराम ने कहा, ये पार्टी की पॉलीसी थी, जो कुछ भी गलत था उसे किसी न किसी तरीके से इस्लाम से जोड़ा जाना था, Dutch former anti Muslim politician Joram van Klaveren converts to Islam, Netherlands Dutch politician, once a Muslim critic,.

इस्लाम की असलियत.

इस्लाम धर्म का उदय और खलीफा सुगम ज्ञान. चीन में धार्मिेक आजादी पर अंकुश की अक्सर खबरें आती रही हैं. अब एक हैरान करने वाली खबर यह आ रही है कि चीन सरकार ने इस्लाम धर्म को अपने देश के अनुरूप ढालने के लिए एक कानून पारित किया है. इससे वहां इस्लाम को समाजवादी रंग दिया जा. इस्लाम की सच्चाई. चीन इस्लाम के चीनीकरण की पंचवर्षीय योजना जल्द. भारत में इस्लाम का आगमन और भारतीय समाज पर इसके प्रभाव: एक आलोचनात्मक अध्ययन Original Article. Anurag., in Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education Multidisciplinary Academic Research. Download PDF View PDF.

इस्लाम का उदय THE RISE OF ISLAM Gyan Academy.

नमस्कार माताओं बहनों भाइयों इस्लाम क्या है इस्लाम देखिए के शांति वाला जमात है 1 गुंडों का और पढ़ें. Likes 22 Dislikes इस्लाम क्या है तो मुसलमानों का धर्म क्या है उन्हें उसे इस्लाम कहा जाता है जो कि प्रोफेट मो और पढ़ें. Likes Dislikes. मुस्लिम लड़की से शादी के लिए बदला अपना धर्म, अब. अरब और इस्लाम दो शब्द हैं, लेकिन उन्हें अकसर एक दूसरे के मतलब के तौपर इस्तेमाल किया जाता है. क्या उनका एक ही मतलब है? क्या अरब का हर विचार इस्लामिक है? क्या इस्लाम में अरब जैसी दुनिया बनाने की बात कही गई है? ये बड़े मारके के सवाल हैं.

कुरान में रहमत की बात है, इस्लाम को हिंसा के साथ.

इस हलफनामें में AIMPLB ने कहा है कि इस्लामिक ग्रंथों और सिद्धांतों के अनुसार महिलाओं को मस्जिद के अंदर प्रवेश और नमाज अदा करने की अनुमति है. AIMPLB in supreme court women in Islam enter in mosque, इस्लाम में महिलाओं को मस्जिद. चीन में इस्लाम छोड़ने के लिए मुस्लिमों को दी. नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी Jawaharlal Nehru University के पूर्व छात्और भारत के युवा शोधार्थी डॉ. महमूद कूरिया Dr Mahmood Kooria को इस्‍लाम पर रिसर्च करने के लिए दो करोड़ रुपये की रकम दी जाएगी. ये पैसा उन्हें नीदरलैंड की. इस्लाम में मर्द और औरत के अमल की जज़ा और सज़ा में. मुसलमान औरत जो अपने बच्चों की सलामती के लिए फ़िक्रमंद है और दलित औरत जिसे पीने के लिए साफ़ पानी चाहिए. इनके लिए दिल्ली चुनाव का क्या मतलब है? और पढ़ें. Article share tools. Facebook Twitter. शेयरView more share options. Share this post. Copy this link. गुरु का इस्लाम Outlook Hindi. वाशिंग्टन में कैटो फ़ाउंडेशन नामक थिंक टैंक के अनुसंधानकर्ता मसतफ़ा अकयूल ने लिखा है कि इस्लामी पुस्तकों से कोल का कहना है कि सातंवी शताब्दी ईसवी में जब इस्लाम का उदय हुआ तो उस समय क़ुसतुन्तुनिया के ईसाई साम्राज्य. हमारा मजहब इस्लाम, हिन्दुस्तान का रहने वाला हर. पहली मजलिस को मौलाना सैयद हमीदउल हसन तकवी ने अपने बयान में इस्लाम में औरत के अधिकारों और उसकी अज़मत के बारे में लोगों को अगाह किया।मौलान ने कहा कि इस्लाम ने मर्द और औरत के अधिकारों में ज़रूर फर्क रखा है मगर उनके अमल की.

अध्याय 1 इस्लाम धमम और मुस्स्लम समाज Shodhganga.

इसी प्रकार इस्‍लाम की मान्‍यताएं भी कहती हैं कि समूची कायनात से शैतानों का खात्‍मा करने एक फरिश्‍ता आएगा। मुस्लिमों के पवित्र धर्म ग्रंथ कुरान में बताया गया है कि ​फितने दज्जाल नाम का एक राक्षस धरती पर आएगा, जिसके पास. इस्लाम धर्म में क्या है ताजिए का महत्व और Patrika. दुनिया के तीन धर्म यहूदी, ईसाई और मुस्लिम धर्म में पैदा होने वाले लोग पैगंबर के ही वशंज हैं. इब्राहिम से यहूदी और ईसाई धर्म के लोगों की उत्पत्ति हुई है और इस्माइल से इस्लाम धर्म के लोगों की उत्पत्ति हुई है. इस्लाम और स्वच्छता Schools Water Portal India Water Portal. यह बात दीगर है कि चीन के जियजियांग प्रांत में उइघर मुसलमानों की स्थिति बेहद खराब है, जहां मुसलमानों से उनके धार्मिक अधिकार तक लगभग छीन लिगए हैं, उन्हें इस्लाम धर्म भी त्यागने के लिए मजूबर करने के लिए डिटेंसेन सेंटर में रखा. Five piller of islam इस्लाम के पांच स्तंभ धर्म रफ़्तार. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एआइएमपीएलबी ने हलाला को इस्लाम से जोड़कर देखने पर एतराज जताया है. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने न्यूज एजेंसी एएनआई. इस्लाम को कोसने वाले डच सांसद खुद मुसलमान बने DW. अध्याय 1 इस्लाम धर्म और मुस्लिम समाज. 1.1 मुस्लिम सामाजिक संरचना. 1.2 मुस्लिम समाज में स्त्री. 1.3 मुस्लिम समाज की धार्मिक मान्यताएँ एवं विश्वास. 1.3.1 धार्मिक मान्यताएँ. 1.3.2 धार्मिक विश्वास. 1.4 मुस्लिम समाज के प्रमुख त्योहार. शरजिल जैसे लोग देश के साथ इस्‍लाम के भी गद्दार. दूसरे शब्दों में, इस्लाम का एकेश्वरवाद गुरु नानक की ईश्वर की अवधारणा के करीब था। ब्रह्मांड का सृजन करके ईश्वर ने अपनी कई विशेषताओं का खुलासा किया। मुसलामानों के परिचित संदर्भ में गुरु नानक कहते हैं: बाबा! अल्लाह अगम्य है.

महिलाओं को नमाज़ के लिए मस्जिदों में जाने से.

15 मार्च को क्राइस्टचर्च, न्यूजीलैंड की दो मस्जिदों में भयंकर नरसंहारों में कम से कम 49 लोग मारे गए। दो दिन बाद, सोशल मीडिया में एक दावा प्रसारित होना शुरू हुआ कि न्यूजीलैंड में क्राइस्टचर्च नरसंहार के बाद 350 लोग इस्लाम. इस्लाम में मिसाल है फातिमा का किरदार मौलाना. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि महिलाओं को नमाज़ के लिए मस्जिदों में जाने से इस्लाम नहीं रोकता और ऐसा कहने वाले किसी भी फतवे को नज़रअंदाज़ किया जाए। दरअसल, पुणे के मुस्लिम दंपति. इस्लाम को झूठ और क़ुरान को ज़हर बताने News18 Hindi. एआईएमपीएलबी के सचिव मोहम्मद फजलुर्रहीम ने दाखिल हलफनामे में कहा है कि धार्मिक पाठों और इस्लाम के अनुयायियों की धार्मिक आस्थाओं पर विचार करते हुए यह बात कही जा रही है कि मस्जिद में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति होती है।. सच्चाई की सीख देता है इस्लाम Amar Ujala. Get your 3 Day weather forecast for इस्लाम नगर, मध्य प्रदेश, भारत. Hi ​Low, RealFeel®, precip, radar, & everything you need to be ready for the day, commute, and weekend!. इस्लाम सबके लिए Islam Sabke Liye. 1994 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले मस्जिद इस्लाम का अभिन्न भाग नहीं है को पुनर्विचार के लिए पांच सदस्यीय पीठ को भेजे जाने के ख़िलाफ़ निर्णय देने वाली तीन सदस्यीय पीठ में शामिल जस्टिस एस. अब्दुल नज़ीर ने बहुमत से अलग राय दी. उन्होंने कहा.

यूं ही नहीं दी जाती है इस्लाम में कुर्बानी why.

इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब थे। इस धर्म का विकास अरब में हुआ था। इस्लाम का शाब्दिक अर्थ ईश्वर के प्रति प्रणति Submission to God । इनका जन्म 570 ईo में मक्का में हुआ था। इनके बचपन का नाम अल अमीन था। इनके पिता. क्या इस्लाम तलवार के ज़ोपर फैला? अमरीकी लेखक. सरकारों की अनदेखी और मिलिट्री द्वारा भुला दिए गए, टीएलपी जैसे संगठनों ने बरेलवी इस्लाम को कट्टरपंथी बना दिया है।. इस्लाम धर्म जानिए कुछ महत्वपूर्ण और रोचक बातें. इस्लाम खान नाम के लोगों की प्रोफ़ाइल देखें. इस्लाम खान और अपने अन्य परिचितों से जुड़ने के लिए Facebook में शामिल करें. Facebook लोगों को साझा करने की.

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प्रयागराज:असम राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद मुमीनुल ओवाल ने माघ मेला क्षेत्र स्थित स्वामी अधोक्षजानंद के शिविर में पहुंचने के बाद संगम में आस्था. पाकिस्तान का बदसूरत सच: कट्टरपंथी बरेलवी इस्लाम. मिस्बाहुल इस्लाम, पार्टी: पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया ​डेमोक्रेटिक. मिस्बाहुल इस्लाम, पार्टी: पीपुल्स पार्टी ऑफ मिस्बाहुल इस्लाम, पार्टी: पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया ​डेमोक्रेटिक, 24 06 2019, देखें 1 MB. वेबसाइट नीतियां सहायता हमसे. जानिए शांति के धर्म इस्लाम में क्या क्या हराम है. आप लोगों ने इस्लाम मजहब को उन लोगों से परिभाषित कर दिया है जिस का इस्लाम मजहब से दूर दूर तक कोई वास्ता ही नहीं है। चंद ना समझ लोगों को देख कर, आप जो समझ बैठे हैं के यही इस्लाम है तो सच में आप इस्लाम मजहब से बहुत दूर हो चुके हैं। हक़ीक़त में​. Pakistan Imran Khan, Malaysia, Turkey To Launch An English. इस्लाम धर्म के पांच प्रमुख स्तंभ। islam dharm ke paanch pillars। बहुत ही कम लोग इस बात से अवगत हैं कि इस्लाम धर्म के पांच ऐसे स्तंभ हैं जिनके आधापर इस धर्म की रूपरेखा तैयार हुई, जो आगे चलकर सामाजिक हित में साबित हुई।.

देवबंद का फतवा महिलाओं को नाखून बढ़ाना और नेल.

वर्ष 2010 के एक अध्ययन के मुताबिक, दुनिया के दूसरे सबसे बड़े धार्मिक सम्प्रदाय इस्लाम के तकरीबन 1.6 अरब अनुयायी हैं जोकि विश्व की आबादी की लगभग 23% हिस्सा हैं, जिसमें 80 90 प्रतिशत सुन्नी और 10 20 प्रतिशत शिया हैं। मध्य पूर्व, उत्तरी. पाकिस्तान में शादी के मंडप से हिंदू दुल्हन को. अक्सर इस्लाम को शांति का धर्म कहा जाता है और मुल्लॊं को ​शांतिदूत। हिन्दु धर्म तो दुनिया में ही सबसे खतरनाक धर्म है, बस एक इस्लाम है जो शांति का पाठ पढ़ाता है। सारे मुल्ले आसमान से उतरे शांतिदूत फरिश्ते हैं। हिन्दुओं को. इस्लाम का मतलब अरब नहीं है, इंडिया भी लल्लन टॉप. नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने चांद पर अज़ान की आवाज सुनकर कबूल कर लिया था इस्लाम धर्म? नई दिल्ली: नील आर्मस्ट्रॉन्ग Neil Armstrong के नाम को किसी परिचय की जरूरत नहीं क्योंकि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा NASA के महत्वाकांक्षी अपोलो 11.

इस्लाम क्या है? Islam Kya Hai Download the Vokal App.

दाउल उमूल के मुफ्ती इशरार गौरना ने फतवा जारी कर कहा था कि इस्लाम में महिलाएं नाखून में मेंहदी लगा सकती हैं. नेल पॉलिश गैर इस्लामिक है. बता दें कि सहारनपुर के दाऊल उमूद के मुफ्ती ने इससे पहले भी महिलाओं से जुड़ी आदतो को. इस्लाम नगर, मध्य प्रदेश, भारत Three Day AccuWeather. इस्लाम धर्म पांच मूलभूत सिद्धान्त होते हैं जिन्हें इस्लाम के पांच स्तंभ भी कहा जाता है। हर मुस्लिम को इन सिद्धांतों या स्तंभों के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करना होता है। मुस्लिम धर्म की नींव इन्हीं सिद्धान्तों पर ईमान लाकर यानि इनको. क्राइस्टचर्च नरसंहार के बाद लोगों के इस्लाम. खीरीबाग में शब बरात पर शनिवार की देर रात दीनी जलसे का आयोजन किया गया। इसमें धर्म गुरुओं ने इस्लाम धर्म की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस्लाम सच्चाई के रास्ते पर चलने की सीख देता है। अंत में कौम और मुल्क की तरक्की. In islam why Namaz is taught five times a day इस्लाम धर्म में. इस्लाम से निकला एकेश्वरवादी मजहब है। अंतिम प्रेषित की शुरुआत 7वीं सदी के अरेबिया में हुई, जबकि मुस्लिम मानते हैं कि यह सृष्टि की रचना से ही विद्यमान है।.

इस्लाम को अपने मुताबिक ढालेगा चीन, नमाज दाढ़ी.

इस्लाम धर्म विश्व का दूसरा सबसे विस्तृत धर्म है । इस्लाम धर्म की शुरुआत हजरत मोहम्मद साहब के जीवन के आस पास ही केंद्रित थी।. आतंक का एक मजहब है: कट्टरपंथी इस्लाम… एक ने. दरअसल, पाकिस्तान में हर रोज अल्पसंख्यकों पर जुल्म की घटनाएं बढ़ रही हैं। जानबूझकर मुस्लिम कट्टरपंथी हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों को निशाना बनाकर उनका अपहरण कर रहे हैं और उनको जबरन इस्लाम कबूल करवा रहे हैं।.

फ्रांस में इस्लाम धर्म

फ्रांस में इस्लाम धर्म कैथोलिक ईसाईयत के बाद दूसरा सबसे अधिक प्रचारित धर्म है। पश्चिमी दुनिया में मुख्य रूप से उत्तरी अफ्रीकी और मध्य पूर्वी देशों से प्रवास ...

फ़र्ज़ (इस्लाम)

फ़र्ज धार्मिक कर्तव्य या अनिवार्य कार्रवाई। इस्लाम में वो बात जिसको करना या मानना लाज़िम अनिवार्य है उसे फ़र्ज़ कहते हैं। इस्लामी शरियत में फ़र्ज़ वो आदेश है...