• जैन लाल मंदिर, दिल्ली

    दिल्ली का सबसे पुराना जैन मंदिर लाल किला और चांदनी चौक के सामने स्थित है। इसका निर्माण 1526 में हुआ था। वर्तमान में इसकी इमारत लाल पत्थरों की बनी है। इसलिए य...

  • जैन मूर्तियाँ

    जैन धर्म के अनुयाइयों द्वारा पूजनीय मूर्तियां जैन मूर्तियां कहलाती है। जैन धर्मावलम्बियों द्वारा २४ तीर्थंकरों की मूर्तियाँ या प्रतिमाएँ पूजी जाती हैं। जैन त...

  • जैन मुनि

    जैन मुनि जैन धर्म में संन्यास धर्म का पालन करने वाले व्यक्तियों के लिए किया जाता हैं। जैन मुनि के लिए निर्ग्रन्थ शब्द का प्रयोग भी किया जाता हैं। मुनि शब्द क...

  • जैन मन्दिर

    जैन मंदिर कई निर्माण शैली में बनाए जाते हैं। उत्तर भारत के जैन मंदिर दक्षिण भारत के जैन मंदिरों से काफ़ी भिन्न होते हैं। जैन मंदिर दो प्रकार के होते हैं: शिख...

  • जैन प्रतीक चिन्ह

    वर्ष १९७५ में भगवान महावीरस्वामी जी के २५००वें निर्वाण वर्ष अवसर पर समस्त जैन समुदायों ने जैन धर्म के प्रतीक चिह्न का एक स्वरूप बनाकर उस पर सहमति प्रकट की थी...

  • जैन ध्वज

    जैन ध्वज पाँच रंगो से मिलकर बना एक ध्वज है। इसके पाँच रंग है: लाल, सफ़ेद, पीला, हरा और नीला/काला। जैन ध्वज में स्वस्तिक रत्न त्रय और सिद्धशिला का उपयोग अरिहं...

  • जैन ध्यान

    जैन ध्यान, रत्नत्रय के साथ-साथ, जैन धर्म में आध्यात्मिकता की केन्द्रीय क्रिया रही हैं। जैन धर्म में ध्यान का उद्देश्य स्वयं को साकार करना, आत्ममुक्ति पाना और...

  • जैन धर्म में ॐ चिह्न

    अरहंता असरीरा आइरिया तह उवज्झया मुणिणो। पढमक्खरणिप्पणो ओंकारो पंचपरमेट्ठी।। जैनागम में अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय एवं साधु यानी मुनि रूप पाँच परमेष्ठी ह...

  • जैन धर्म में शुभ सपने

    शुभ सपनों को अक्सर जैन धर्म के ग्रंथों में वर्णित किया जाता है, जो बच्चे के गुणों की भविष्यवाणी करते है। उनकी संख्या अलग-अलग परंपराओं के अनुसार भिन्न होती है...

  • जैन धर्म का इतिहास

    जैन धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला प्राचीन धर्म और दर्शन है। जैन अर्थात् कर्मों का नाश करनेवाले जिन भगवान के अनुयायी। सिन्धु घाटी से मिले जैन अवशेष जैन ...

  • जैन धर्म

    जैन धर्म विश्व के सबसे प्राचीन दर्शन या धर्मों में से एक है। यह भारत की श्रमण परम्परा से निकला तथा इसके प्रवर्तक हैं 24 तीर्थंकर, जिनमें अंतिम व प्रमुख महावी...

  • जैन आचार्य

    जैन धर्म में आचार्य शब्द का अर्थ होता है मुनि संघ के नायक। दिगम्बर संघ के कुछ अति प्रसिद्ध आचार्य हैं- भद्रबाहु, कुन्दकुन्द स्वामी, आचार्य समन्तभद्र, आचार्य ...

  • गोपाचल पर्वत

    गोपाचल ग्वालियर में स्थित है। ग्वालियर का प्रसिद्ध किला भी इसी पर्वत पर स्थित है। इसके अतिरिक्त इस पर्वत पर हजारों जैन मूर्तियाँ स्थित हैं जो सं. 1398 से सं....

  • गुप्ति

    जैन दर्शन के अनुसार काय, वचन और मन के कर्म का ही नाम योग है तथा योग ही कर्मों के आने में कारण है। आस्रव होने से बंध होता है। बंधनमुक्त होने के लिये आस्रव का ...

  • कुलकर

    जैन धर्म में कुलकर उन बुद्धिमान पुरुषों को कहते हैं जिन्होंने लोगों को जीवन निर्वाह के श्रमसाध्य गतिविधियों को करना सिखाया। जैन ग्रन्थों में इन्हें मनु भी कह...

  • कुन्थुनाथ

    कुन्थुनाथ जी जैनधर्म के सत्रहवें तीर्थंकर हैं। इनका जन्म हस्तिनापुर में हुआ था। पिता का नाम शूरसेन और माता का नाम श्रीकांता था। बिहार में पारसनाथ पर्वत के सम...

  • काष्ठ संघ

    काष्ठा संघ दिगंबर जैन सम्प्रदाय का एक उपसम्प्रदाय था जो उत्तरी एवं पश्चिमी भारत के अनेक भागों में व्याप्त था। काष्ठा संघ मूल संघ की एक शाखा माना जाता है। कहा...

  • कर्नाटक में जैन धर्म

    कर्नाटक में इनकी आबादी ०.७४ प्रतिशत यानि ४१२६५४ है। गोमतेश्वर में ५७ फट ऊंची प्रतिमा है, जो भारत के सात अजूबों में शामिल है। ये मुख्यतः कन्नड़ बोलते हैं।

  • उमास्वामी

    आचार्य उमास्वामी, कुन्दकुन्द स्वामी के प्रमुख शिष्य थे। वह मुख्य जैन ग्रन्थ, तत्त्वार्थ सूत्र के लेखक है। वह दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों के द्वारा पूजे जाते ...

  • उत्तरपुराण

    महापुराण का उत्तरार्ध उत्तरपुराण कहलाता है। यह जिनसेन के पट्टशिष्य गुणभद्राचार्य की प्रौढ़ रचना है। इसमें लगभग 9.500 श्लोक हैं जिनमें 24 में से 23 तीर्थकरों ...

  • आदिपुराण

    आदिपुराण जैनधर्म का एक प्रख्यात पुराण है जो सातवीं शताब्दी में जिनसेन आचार्य द्वारा लिखा गया था। इसका कन्नड भाषा में अनुवाद आदिकवि पम्प ने चम्पू शैली में किय...

  • आदर्श जादुई वर्ग

    कोई n श्रेणी का वर्ग जिसमें शून्य से n ² − १ की संख्याएं होती हैं और दो अन्य अतिरिक्त गुण होते हों, आदर्शतम जादूई वर्ग कहलाता है। दो अतिरिक्त गुणों में: इंटी...

  • आगम (जैन)

    आगम शब्द का प्रयोग जैन धर्म के मूल ग्रंथों के लिए किया जाता है। केवल ज्ञान, मनपर्यव ज्ञानी, अवधि ज्ञानी, चतुर्दशपूर्व के धारक तथा दशपूर्व के धारक मुनियों को ...

  • आगम

    भारत के नाना धर्मों में आगम का साम्राज्य है। जैन धर्म में मात्रा में न्यून होने पर भी आगमपूजा का पर्याप्त समावेश है। बौद्ध धर्म का वज्रयान इसी पद्धति का प्रय...

  • अवसर्पिणी

    अवसर्पिणी, जैन दर्शन के अनुसार सांसारिक समय चक्र का आधा अवरोही भाग है जो वर्तमान में गतिशील है। जैन ग्रंथों के अनुसार इसमें अच्छे गुण या वस्तुओं में कमी आती ...

  • अग्रवाल जैन

    साहु शांति प्रसाद जैन, founder of Bharatiya Jnanpith विबुध श्रीधर, author and poet, composer of several texts साहु टोडर, supervisor of royal mint and patron ...

तमिल जैन

तमिल जैन भारत में जैन धर्म के दिगंबर संप्रदाय का हिस्सा है। वे ज्यादातर पहली शताब्दी ई.पू. के बाद से तमिलनाडु राज्य में रहते हैं। इन तमिल जैनियों ने तमिल साह...

अकंपित गौतम

अकंपित गौतम भगवान महावीर के ८ वें गणधर थे। वे गौतम गोत्रिय ब्राह्मण थे। इन्होंने अपने 300 शिष्यों के साथ 48 वर्ष की अवस्था मे भगवान महावीर से दीक्षा ग्रहण की...

अग्रवाल जैन

साहु शांति प्रसाद जैन, founder of Bharatiya Jnanpith विबुध श्रीधर, author and poet, composer of several texts साहु टोडर, supervisor of royal mint and patron ...

अचलभ्राता

अचलभ्राता भगवान महावीर के ९ वें गणधर थे। ये भी ब्राह्मण थे तथा उनके ३०० ब्राह्मण शिष्य भी भगवान महावीर के संघ में दीक्षित हो गये थे। ७२ वर्ष कि आयु मे इन्होन...

अणुव्रत

अणुव्रत का अर्थ है लघुव्रत। जैन धर्म के अनुसार श्रावक, अणुव्रतों का पालन करते हैं। महाव्रत साधुओं के लिए बनाए जाते हैं। यही अणुव्रत और महाव्रत में अंतर है, अ...

अनुयोग (जैन धर्म)

जैन धर्म में शास्त्रो की कथन पद्धति को अनुयोग कहते हैं। जैनागम चार भागों में विभक्त है, जिन्हें चार अनुयोग कहते हैं - प्रथमानुयोग, करणानुयोग, चरणानुयोग और द्...

अरिहंत

अर्हत् और अरिहंत पर्यायवाची शब्द हैं। अतिशय पूजा-सत्कार के योग्य होने से इन्हें कहा गया है। मोहरूपी शत्रु का अथवा आठ कर्मों का नाश करने के कारण ये अरिहंत कहे...

अवसर्पिणी

अवसर्पिणी, जैन दर्शन के अनुसार सांसारिक समय चक्र का आधा अवरोही भाग है जो वर्तमान में गतिशील है। जैन ग्रंथों के अनुसार इसमें अच्छे गुण या वस्तुओं में कमी आती ...

अहिंसा पुरस्कार

अहिंसा पुरस्कार उन व्यक्तियों की पहचान के लिए जैनोलॉजी संस्थान द्वारा दिया गया एक वार्षिक पुरस्कार है जो अहिंसा के सिद्धांतों को सन्निहित करते हैं और बढ़ावा ...

आगम

भारत के नाना धर्मों में आगम का साम्राज्य है। जैन धर्म में मात्रा में न्यून होने पर भी आगमपूजा का पर्याप्त समावेश है। बौद्ध धर्म का वज्रयान इसी पद्धति का प्रय...

आगम (जैन)

आगम शब्द का प्रयोग जैन धर्म के मूल ग्रंथों के लिए किया जाता है। केवल ज्ञान, मनपर्यव ज्ञानी, अवधि ज्ञानी, चतुर्दशपूर्व के धारक तथा दशपूर्व के धारक मुनियों को ...

आचार्य पुष्पदंत सागर

आचार्य पुष्पदंत सागर जैन धर्म के एक प्रमुख दिगम्बर संत हैं। उन्होंने क्षुल्लक दीक्षा आचार्य विद्यासागर से ग्रहण की। उनकी दिगम्बर दीक्षा आचार्य विमल सागर के ह...

आचार्य शय्यंभव

आचार्य शय्यंभव भगवान महावीर के चतुर्थ पट्टधर आचार्य थे।। इनका जन्म राजगृह के ब्राह्मण परिवार में हुआ था। श्वेताम्बर मान्यताओं के अनुसार इन्होनें दशवईकालिका न...

आदर्श जादुई वर्ग

कोई n श्रेणी का वर्ग जिसमें शून्य से n ² − १ की संख्याएं होती हैं और दो अन्य अतिरिक्त गुण होते हों, आदर्शतम जादूई वर्ग कहलाता है। दो अतिरिक्त गुणों में: इंटी...

आदिपुराण

आदिपुराण जैनधर्म का एक प्रख्यात पुराण है जो सातवीं शताब्दी में जिनसेन आचार्य द्वारा लिखा गया था। इसका कन्नड भाषा में अनुवाद आदिकवि पम्प ने चम्पू शैली में किय...

आस्रव

जैन दर्शन के अनुसार, आस्रव संसार का एक तत्त्व अथवा एक मूल यथार्थ हैं। यह आत्मा के कर्म करने के पीछे मन और शरीर के प्रभाव को संदर्भित करता हैं। जैन धर्म में, ...

इंद्रभूति गौतम

दिगम्बर परम्परा के अनुसार जब इंद्र ने इंद्रभूति से एक श्लोक का अर्थ पूछा था: पंचेव अत्थिकाया छज्जीव णिकाया महव्वया पंच। अट्ठयपवयण-मादा सहेउओ बंध-मोक्खो य॥ जब...

उत्तरपुराण

महापुराण का उत्तरार्ध उत्तरपुराण कहलाता है। यह जिनसेन के पट्टशिष्य गुणभद्राचार्य की प्रौढ़ रचना है। इसमें लगभग 9.500 श्लोक हैं जिनमें 24 में से 23 तीर्थकरों ...

उमास्वामी

आचार्य उमास्वामी, कुन्दकुन्द स्वामी के प्रमुख शिष्य थे। वह मुख्य जैन ग्रन्थ, तत्त्वार्थ सूत्र के लेखक है। वह दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों के द्वारा पूजे जाते ...

कर्नाटक में जैन धर्म

कर्नाटक में इनकी आबादी ०.७४ प्रतिशत यानि ४१२६५४ है। गोमतेश्वर में ५७ फट ऊंची प्रतिमा है, जो भारत के सात अजूबों में शामिल है। ये मुख्यतः कन्नड़ बोलते हैं।

कवलाहार

कवलाहार मुनि के आहार का पर्यायवाची है। आगम में किगए मुनि के आहार के छः भेद बताये गये हैं- नोकर्माहार, कर्माहार, कवलाहार, लेप्याहार, ओजाहाऔर मानसाहार। भगवतीसू...

काष्ठ संघ

काष्ठा संघ दिगंबर जैन सम्प्रदाय का एक उपसम्प्रदाय था जो उत्तरी एवं पश्चिमी भारत के अनेक भागों में व्याप्त था। काष्ठा संघ मूल संघ की एक शाखा माना जाता है। कहा...

कुण्डलपुर

कुण्डलपुर राजगृही के पास नालंदा स्टेशन से 3 मील दूरी पर है। यह भगवान महावीर का जन्म स्थान माना जाता है। यहां पर लगभग ३०० वर्ष पुराना दिगम्बर जैन मंदिर भगवान ...

कुन्थुनाथ

कुन्थुनाथ जी जैनधर्म के सत्रहवें तीर्थंकर हैं। इनका जन्म हस्तिनापुर में हुआ था। पिता का नाम शूरसेन और माता का नाम श्रीकांता था। बिहार में पारसनाथ पर्वत के सम...

कुलकर

जैन धर्म में कुलकर उन बुद्धिमान पुरुषों को कहते हैं जिन्होंने लोगों को जीवन निर्वाह के श्रमसाध्य गतिविधियों को करना सिखाया। जैन ग्रन्थों में इन्हें मनु भी कह...

कुलुआ पहाड़

कुलुआ पहाड़ यह पहाड़ जंगल में है। गया से जाया जाता है। इसकी चढ़ाई 2 मील है। इस पहाड़ पर 10वें तीर्थंकर शीतलनाथजी ने तप करके कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया था।

केश लोंच

केश लोंच जैन मुनि द्वरा कि जाने वलि एक क्रिया है। इसमें मुनि अपने हाथों से सिओर दाड़ी के बालों को खिन्च कर अलग कर देते हैं। ये क्रिया जैन साधुओं के साथ साथ आ...

क्षपणक

तपस्वी जैन श्रमणों को जैन ग्रंथों में क्षपणक, क्षपण, क्षमण अथवा खबण कहा गया है। क्षपणक अर्थात कर्मों का क्षय करने वाला। महाभारत में नग्न जैन मूर्ति को क्षपणक...

क्षुल्लक

क्षुल्लक शब्द जैन धर्म में दो वस्त्र धारण करने वाले व्रतियों के लिए प्रयोग किया जाता है। एक क्षुल्लक दो वस्त्रों को पहनता है और एक दिगम्बर साधु कोई वस्त्र नह...

खतरगच्छ

खरतरगच्छ जैन संप्रदाय का एक पंथ है। इस गच्छ की उपलब्ध पट्टावली के अनुसार महावीर के प्रथम शिष्य गौतम हुए। जिनेश्वर सूरि रचित कथाकोषप्रकरण की प्रस्तावना में इस...

खरतरगच्छ

खरतरगच्छ जैन संप्रदाय का एक पंथ है। इस गच्छ की उपलब्ध पट्टावली के अनुसार महावीर के प्रथम शिष्य गौतम हुए। जिनेश्वर सूरि रचित कथाकोषप्रकरण की प्रस्तावना में इस...

गंधकुटी

गंधकुटी बुद्ध, केवली या भगवान के विराजने का स्थान। मोह का क्षय होने से कैवल्य पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति होती है। तीर्थकर केवली के लिए इंद्र विशाल जंगन सभा समवस...

गच्छ

गच्छ, श्रीपुज्य जैन आचार्य का परिवार अथवा एक श्रीपुज्य से दीक्षित यति समुदाय। प्रत्येक गच्छ की गुरु परंपरा को गच्छावली अथवा पट्टावली कहते हैं। इस समय जैन धर्...

गणधर

गणधर जैन दर्शन में प्रचलित एक उपाधि है। जो अनुत्तर, ज्ञान और दर्शन आदि धर्म के गण को धारण करता है वह गणधर कहा जाता है। इसको तीर्थंकर के शिष्यों के अर्थ में ह...

गुप्ति

जैन दर्शन के अनुसार काय, वचन और मन के कर्म का ही नाम योग है तथा योग ही कर्मों के आने में कारण है। आस्रव होने से बंध होता है। बंधनमुक्त होने के लिये आस्रव का ...

गोपाचल पर्वत

गोपाचल ग्वालियर में स्थित है। ग्वालियर का प्रसिद्ध किला भी इसी पर्वत पर स्थित है। इसके अतिरिक्त इस पर्वत पर हजारों जैन मूर्तियाँ स्थित हैं जो सं. 1398 से सं....

चंदनबाला

चंदनबाला भगवान महावीर कि प्रथम शिष्या थी । चंदनबाला के पिता का नाम नरेश दधिवाहन था, तथा उसकी माता का नाम धारिणी था।चंदनबाला का असली नाम वसुुुुमती था ।

जय जिनेन्द्र

जय जिनेन्द्र! एक प्रख्यात अभिवादन है। यह मुख्य रूप से जैन धर्म के अनुयायियों द्वारा प्रयोग किया जाता है। इसका अर्थ होता है "जिनेन्द्र भगवान को नमस्कार"। यह द...

जैन आचार्य

जैन धर्म में आचार्य शब्द का अर्थ होता है मुनि संघ के नायक। दिगम्बर संघ के कुछ अति प्रसिद्ध आचार्य हैं- भद्रबाहु, कुन्दकुन्द स्वामी, आचार्य समन्तभद्र, आचार्य ...

जैन उपवास

जैन उपवास विभिन्न जैन व्रतों में एक है। मोटे तौपर यह भी अन्य धर्मों की तरह भोजन के त्याग पर आधारित है परन्तु इसमें किसी भी तरह का फरियाली, फल या फलारस भी निष...

जैन ग्रंथ

जैन साहित्य बहुत विशाल है। अधिकांश में वह धार्मिक साहित्य ही है। संस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं में यह साहित्य लिखा गया है। भगवान महावीरस्वामी की प्रवृत्...

जैन दर्शन

जैन दर्शन एक प्राचीन भारतीय दर्शन है। इसमें अहिंसा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। जैन धर्म की मान्यता अनुसार 24 तीर्थंकर समय-समय पर संसार चक्र में फसें जीवों...

जैन धर्म

जैन धर्म विश्व के सबसे प्राचीन दर्शन या धर्मों में से एक है। यह भारत की श्रमण परम्परा से निकला तथा इसके प्रवर्तक हैं 24 तीर्थंकर, जिनमें अंतिम व प्रमुख महावी...

जैन धर्म का इतिहास

जैन धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला प्राचीन धर्म और दर्शन है। जैन अर्थात् कर्मों का नाश करनेवाले जिन भगवान के अनुयायी। सिन्धु घाटी से मिले जैन अवशेष जैन ...

जैन धर्म की शाखाएं

जैन धर्म की दो मुख्य शाखाएँ है - दिगम्बर और श्वेतांबर। दिगम्बर संघ में साधु नग्न रहते है और श्वेतांबर संघ के साधु श्वेत वस्त्र धारण करते है। इसी मुख्य विभन्त...

जैन धर्म के घटनाक्रम

नेमिनाथ, २२ वें तीर्थंकर - जैन मान्यताओं के अनुसार, वह २३ वें तीर्थंकर, पार्श्वनाथ से ८४६५० वर्ष पहले जीवित थे। वह महाभारत युग के समय हुए और कृष्ण के चचेरे भ...

जैन धर्म में योग

जैन धर्म में योग अत्यन्त प्राचीन है। जैन धर्म के अनुसार योग के प्रवर्तक भगवान ऋषभदेव जी है, वे संसार के प्रथम योगी थे।जैन धर्म में तीर्थंकर महाप्रभु पद्मासन ...

जैन धर्म में राम

रामायण के नायक श्रीराम जैन ग्रन्थों में ६३ शलाकापुरुषों में से एक हैं। यहाँ वे विष्णु के अवतार नहीं हैं बल्कि वह वलभद्र हैं जो सिद्धक्षेत्र से मोक्ष गये।जैन ...

जैन धर्म में शुभ सपने

शुभ सपनों को अक्सर जैन धर्म के ग्रंथों में वर्णित किया जाता है, जो बच्चे के गुणों की भविष्यवाणी करते है। उनकी संख्या अलग-अलग परंपराओं के अनुसार भिन्न होती है...

जैन धर्म में ॐ चिह्न

अरहंता असरीरा आइरिया तह उवज्झया मुणिणो। पढमक्खरणिप्पणो ओंकारो पंचपरमेट्ठी।। जैनागम में अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय एवं साधु यानी मुनि रूप पाँच परमेष्ठी ह...

जैन ध्यान

जैन ध्यान, रत्नत्रय के साथ-साथ, जैन धर्म में आध्यात्मिकता की केन्द्रीय क्रिया रही हैं। जैन धर्म में ध्यान का उद्देश्य स्वयं को साकार करना, आत्ममुक्ति पाना और...

जैन ध्वज

जैन ध्वज पाँच रंगो से मिलकर बना एक ध्वज है। इसके पाँच रंग है: लाल, सफ़ेद, पीला, हरा और नीला/काला। जैन ध्वज में स्वस्तिक रत्न त्रय और सिद्धशिला का उपयोग अरिहं...

जैन प्रतीक चिन्ह

वर्ष १९७५ में भगवान महावीरस्वामी जी के २५००वें निर्वाण वर्ष अवसर पर समस्त जैन समुदायों ने जैन धर्म के प्रतीक चिह्न का एक स्वरूप बनाकर उस पर सहमति प्रकट की थी...

जैन मन्दिर

जैन मंदिर कई निर्माण शैली में बनाए जाते हैं। उत्तर भारत के जैन मंदिर दक्षिण भारत के जैन मंदिरों से काफ़ी भिन्न होते हैं। जैन मंदिर दो प्रकार के होते हैं: शिख...

जैन मुनि

जैन मुनि जैन धर्म में संन्यास धर्म का पालन करने वाले व्यक्तियों के लिए किया जाता हैं। जैन मुनि के लिए निर्ग्रन्थ शब्द का प्रयोग भी किया जाता हैं। मुनि शब्द क...

जैन मूर्तियाँ

जैन धर्म के अनुयाइयों द्वारा पूजनीय मूर्तियां जैन मूर्तियां कहलाती है। जैन धर्मावलम्बियों द्वारा २४ तीर्थंकरों की मूर्तियाँ या प्रतिमाएँ पूजी जाती हैं। जैन त...

जैन लाल मंदिर, दिल्ली

दिल्ली का सबसे पुराना जैन मंदिर लाल किला और चांदनी चौक के सामने स्थित है। इसका निर्माण 1526 में हुआ था। वर्तमान में इसकी इमारत लाल पत्थरों की बनी है। इसलिए य...

णमोकार मंत्र

णमोकार मन्त्र जैन धर्म का सर्वाधिक महत्वपूर्ण मन्त्र है। इसे नवकार मन्त्र, नमस्कार मन्त्र या पंच परमेष्ठि नमस्कार भी कहा जाता है। इस मन्त्र में अरिहन्तों, सि...