• स्वयंसिद्धों की सूची

    ये समसामयिक गणित एवं सम्मुच्चय सिद्धान्त के लिये मानक स्वयंसिद्ध हैं। Axiom of union Axiom schema of replacement Axiom schema of specification Axiom of regul...

  • अभिगृहीत

    तर्कशास्त्र में स्वयंसिद्ध या अभिगृहीत ऐसे कथनों को कहते हैं जिन्हें सिद्ध नहीं किया जाता बल्कि उन्हें अति-स्पष्ट समझा जाता है। स्वयंसिद्धों को सत्यता को बिन...

  • व्यक्ति-केन्द्रित कुतर्क

    व्यक्ति-केन्द्रित कुतर्क तर्कशास्त्र में ऐसे मिथ्या तर्क को कहते हैं जिसमें किसी दावे की निहित सच्चाई को झुठलाने की कोशिश उस दावेदार के चरित्र, विचारधारा या ...

  • विरोधाभास सूची

    यह विषयक वर्गीकृत विरोधाभासों की सूची है। वर्गीकरण लगभग है क्योंकि विरोधाभास एक से अधिक श्रेणियों के लिए योग्य हो सकते हैं। चूँकि शब्द विरोधाभास की परिभाषा प...

  • विकल्प

    विकल्प का अर्थ है- शब्द, वचन, कल्पना आदि से प्राप्त अप्रत्यक्ष ज्ञान को कहते हैं। यह ज्ञान अनुभव या प्रयोग पर आधारित नहीं होता। पतञ्जलि के योगसूत्र में विकल्...

  • प्रासंगिकता

    प्रासंगिकता का अर्थ यह है कि कोई सूचना, क्रिया या चीज किसी मामले या मुद्दे से कितना सम्बद्ध है। उदाहरण के लिये मुकद्दमों में बहस के दौरान या साक्ष्य के लिये ...

  • प्रमेय

    प्रमेय का शाब्दिक अर्थ है - ऐसा कथन जिसे प्रमाण द्वारा सिद्ध किया जा सके। इसे साध्य भी कहते हैं। गणित में और विशेषकर रेखागणित में बहुत से प्रमेय हैं। प्रमेयो...

  • न्यायवाक्य

    न्यायवाक्य या सिल्लोगिज्म एक विशेष प्रकार का तर्क करने का तरीका है जिसमें दो अन्य कथनों के आधापर तीसरा कथन निकाला जाता है। अरस्तू ने सिल्लोजिज्म को इस प्रकार...

  • तर्कशास्त्र का इतिहास

    अनेकों संस्कृतियों ने तर्क करने की सूक्ष्मतिसूक्ष्म प्रणाली अपनायी तथा मानव के सम्पूर्ण चिन्तन में तर्क उपस्थित रहा है। किन्तु तर्क करने की स्पष्ट और विधिवत ...

  • तर्कशास्त्र

    तर्कशास्त्र शब्द अंग्रेजी लॉजिक का अनुवाद है। प्राचीन भारतीय दर्शन में इस प्रकार के नामवाला कोई शास्त्र प्रसिद्ध नहीं है। भारतीय दर्शन में तर्कशास्त्र का जन्...

  • तर्क

    दर्शनशास्त्र में तर्क‍ कथनों की ऐसी शृंखला होती है जिसके द्वरा किसी व्यक्ति या समुदाय को किसी बात के लिये राज़ी किया जाता है या उन्हें किसी व्यक्तव्य को सत्य...

  • गणितीय तर्कशास्त्र

    गणितीय तर्कशास्त्र गणित की शाखा है किसका संगणक विज्ञान एवं दार्शनिक तर्कशास्त्र से निकट का सम्बन्ध है। तर्कशास्त्र का गणितीय अध्ययन तथा गणित के अन्य विधाओं म...

तर्कशास्त्र

अन्यथासिद्धि

न्याय या तर्क में, किसी अ-यथार्थ या अ-प्रत्यक्ष कारण के आधापर कोई बात सिद्ध करना अन्यथासिद्धि कहलाती है। इसे तर्कदोष माना गया है। उदाहरण के लिए, कहीं कुम्हार...

कुतर्क

कुतर्एक बुरे या अमान्य तर्क को कहते हैं। कुछ कुतर्क धोखे से यकीन दिलाने के लिए जानबूझकर किए जाते हैं, और कुछ लापरवाही या अज्ञानता के कारण अनजाने में होते हैं...

गणितीय तर्कशास्त्र

गणितीय तर्कशास्त्र गणित की शाखा है किसका संगणक विज्ञान एवं दार्शनिक तर्कशास्त्र से निकट का सम्बन्ध है। तर्कशास्त्र का गणितीय अध्ययन तथा गणित के अन्य विधाओं म...

जुआरी का कुतर्क

जुआरी का कुतर्क या मोंटे कार्लो कुतर्एक गलत धारणा है कि यदि कोई घटना अतीत में सामान्य से अधिक बार हुई है, तो वह घटना भविष्य में कम बार होगी; या यदि कोई घटना ...

ज्ञान द्योतन

ज्ञान द्योतन संगणकी की कृत्रिम बुद्धि क्षेत्र की एक शाखा है जिसमें ज्ञान को भिन्न प्रकार से संगणकों में व्यक्त करने का अध्ययन किया जाता है ताकि उसका प्रयोग क...

तन्त्रयुक्ति

तंत्रयुक्ति रचित एक भारतीय ग्रन्थ है जिसमें परिषदों एवं सभाओं में शास्त्रार्थ करने की विधि वर्णित है। वस्तुतः तंत्रयुक्ति हेतुविद्या का सबसे प्राचीन ग्रन्थ ह...

तरकशास्त्र (भारतीय दर्शन)

भारतीय दर्शन के सन्दर्भ में तर्कशास्त्र ज्ञान की प्रकृति, स्रोत तथा वैधता का विश्लेषण करने वाला विज्ञान है। तर्कशास्त्र डायलेक्टिक्स, लॉजिक, रीजनिंग और शास्त...

तर्क

दर्शनशास्त्र में तर्क‍ कथनों की ऐसी शृंखला होती है जिसके द्वरा किसी व्यक्ति या समुदाय को किसी बात के लिये राज़ी किया जाता है या उन्हें किसी व्यक्तव्य को सत्य...

तर्कशास्त्र

तर्कशास्त्र शब्द अंग्रेजी लॉजिक का अनुवाद है। प्राचीन भारतीय दर्शन में इस प्रकार के नामवाला कोई शास्त्र प्रसिद्ध नहीं है। भारतीय दर्शन में तर्कशास्त्र का जन्...

तर्कशास्त्र का इतिहास

अनेकों संस्कृतियों ने तर्क करने की सूक्ष्मतिसूक्ष्म प्रणाली अपनायी तथा मानव के सम्पूर्ण चिन्तन में तर्क उपस्थित रहा है। किन्तु तर्क करने की स्पष्ट और विधिवत ...

न्यायवाक्य

न्यायवाक्य या सिल्लोगिज्म एक विशेष प्रकार का तर्क करने का तरीका है जिसमें दो अन्य कथनों के आधापर तीसरा कथन निकाला जाता है। अरस्तू ने सिल्लोजिज्म को इस प्रकार...

प्रमेय

प्रमेय का शाब्दिक अर्थ है - ऐसा कथन जिसे प्रमाण द्वारा सिद्ध किया जा सके। इसे साध्य भी कहते हैं। गणित में और विशेषकर रेखागणित में बहुत से प्रमेय हैं। प्रमेयो...

प्रहसन कुतर्क

प्रहसन कुतर्क तर्कशास्त्र में ऐसे मिथ्या तर्क को कहते हैं जिसमें किसी दावे को उपहासजनक तरीक़े से प्रस्तुत करके उसका मज़ाक़ बनाकर या खिल्ली उड़ाकर उसे झुठा ठह...

प्रासंगिकता

प्रासंगिकता का अर्थ यह है कि कोई सूचना, क्रिया या चीज किसी मामले या मुद्दे से कितना सम्बद्ध है। उदाहरण के लिये मुकद्दमों में बहस के दौरान या साक्ष्य के लिये ...

बूलीय बीजगणित (तर्कशास्त्र)

बूलीय बीजगणित या बूली का तर्कशास्त्र, तार्किक ऑपरेशन का एक सम्पूर्ण तन्त्र है। इसे सबसे पहले जॉर्ज बूल ने उन्नीसवीं शदी के मध्य में बीजगणितीय तर्क के रूप में...

लोकप्रियता कुतर्क

लोकप्रियता कुतर्क, जिसे कभी-कभी गणतांत्रिक कुतर्क भी कहते हैं, तर्कशास्त्र में ऐसे मिथ्या तर्क को कहते हैं जिसमें किसी दावे को इस आधापर सच ठहराया जाने का प्र...

विकल्प

विकल्प का अर्थ है- शब्द, वचन, कल्पना आदि से प्राप्त अप्रत्यक्ष ज्ञान को कहते हैं। यह ज्ञान अनुभव या प्रयोग पर आधारित नहीं होता। पतञ्जलि के योगसूत्र में विकल्...

विरोधाभास सूची

यह विषयक वर्गीकृत विरोधाभासों की सूची है। वर्गीकरण लगभग है क्योंकि विरोधाभास एक से अधिक श्रेणियों के लिए योग्य हो सकते हैं। चूँकि शब्द विरोधाभास की परिभाषा प...

व्यक्ति-केन्द्रित कुतर्क

व्यक्ति-केन्द्रित कुतर्क तर्कशास्त्र में ऐसे मिथ्या तर्क को कहते हैं जिसमें किसी दावे की निहित सच्चाई को झुठलाने की कोशिश उस दावेदार के चरित्र, विचारधारा या ...

संरचनावादी आलोचना

संरचनावादी आलोचना साहित्य का संरचनावादी भाषा विज्ञान के मूल्यो के आधापर विश्लेषण करने वाली आलोचना है। रोमन जैकोबसन और क्लॉड लेवी स्ट्राउस आदि संरचनावादी आलोच...

अभिगृहीत

तर्कशास्त्र में स्वयंसिद्ध या अभिगृहीत ऐसे कथनों को कहते हैं जिन्हें सिद्ध नहीं किया जाता बल्कि उन्हें अति-स्पष्ट समझा जाता है। स्वयंसिद्धों को सत्यता को बिन...

स्वयंसिद्धों की सूची

ये समसामयिक गणित एवं सम्मुच्चय सिद्धान्त के लिये मानक स्वयंसिद्ध हैं। Axiom of union Axiom schema of replacement Axiom schema of specification Axiom of regul...

हेत्वाभास

भारतीय न्यायदर्शन में हेत्वाभाउस अवस्था को कहते हैं जिसमें वास्तविक हेतु का अभाव होने पर या किसी अवास्तविक असद् हेतु के वर्तमान रहने पर भी वास्तविक हेतु का आ...