देवशयनी एकादशी

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर २६ हो जाती है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है। कहीं-कहीं इस तिथि को पद्मनाभा भी कहते हैं। सूर्य के मिथुन राशि में आने पर ये एकादशी आती है। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ माना जाता है। इस दिन से भगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और फिर लगभग चार माह बाद तुला राशि में सूर्य के जाने पर उन्हें उठाया जाता है। उस दिन को देवोत्थानी एकादशी कहा जाता है। इस बीच के अंतराल को ही चातुर्मास कहा गया है।

1. पौराणिक संदर्भ
पुराणों में वर्णन आता है कि भगवान विष्णु इस दिन से चार मासपर्यन्त चातुर्मास पाताल में राजा बलि के द्वापर निवास करके कार्तिक शुक्ल एकादशी को लौटते हैं। इसी प्रयोजन से इस दिन को देवशयनी तथा कार्तिकशुक्ल एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी कहते हैं। इस काल में यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह, दीक्षाग्रहण, यज्ञ, गृहप्रवेश, गोदान, प्रतिष्ठा एवं जितने भी शुभ कर्म है, वे सभी त्याज्य होते हैं। भविष्य पुराण, पद्म पुराण तथा श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार हरिशयन को योगनिद्रा कहा गया है।
संस्कृत में धार्मिक साहित्यानुसार हरि शब्द सूर्य, चन्द्रमा, वायु, विष्णु आदि अनेक अर्थो में प्रयुक्त है। हरिशयन का तात्पर्य इन चार माह में बादल और वर्षा के कारण सूर्य-चन्द्रमा का तेज क्षीण हो जाना उनके शयन का ही द्योतक होता है। इस समय में पित्त स्वरूप अग्नि की गति शांत हो जाने के कारण शरीरगत शक्ति क्षीण या सो जाती है। आधुनिक युग में वैज्ञानिकों ने भी खोजा है कि कि चातुर्मास्य में मुख्यतः वर्षा ऋतु में विविध प्रकार के कीटाणु अर्थात सूक्ष्म रोग जंतु उत्पन्न हो जाते हैं, जल की बहुलता और सूर्य-तेज का भूमि पर अति अल्प प्राप्त होना ही इनका कारण है।
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष में एकादशी तिथि को शंखासुर दैत्य मारा गया। अत: उसी दिन से आरम्भ करके भगवान चार मास तक क्षीर समुद्र में शयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। पुराण के अनुसार यह भी कहा गया है कि भगवान हरि ने वामन रूप में दैत्य बलि के यज्ञ में तीन पग दान के रूप में मांगे। भगवान ने पहले पग में संपूर्ण पृथ्वी, आकाश और सभी दिशाओं को ढक लिया। अगले पग में सम्पूर्ण स्वर्ग लोक ले लिया। तीसरे पग में बलि ने अपने आप को समर्पित करते हुए सिपर पग रखने को कहा। इस प्रकार के दान से भगवान ने प्रसन्न होकर पाताल लोक का अधिपति बना दिया और कहा वर मांगो। बलि ने वर मांगते हुए कहा कि भगवान आप मेरे महल में नित्य रहें। बलि के बंधन में बंधा देख उनकी भार्या लक्ष्मी ने बलि को भाई बना लिया और भगवान से बलि को वचन से मुक्त करने का अनुरोध किया। तब इसी दिन से भगवान विष्णु जी द्वारा वर का पालन करते हुए तीनों देवता ४-४ माह सुतल में निवास करते हैं। विष्णु देवशयनी एकादशी से देवउठानी एकादशी तक, शिवजी महाशिवरात्रि तक और ब्रह्मा जी शिवरात्रि से देवशयनी एकादशी तक निवास करते हैं।

2. विधि
देवशयनी एकादशी व्रतविधि एकादशी को प्रातःकाल उठें। इसके बाद घर की साफ-सफाई तथा नित्य कर्म से निवृत्त हो जाएँ। स्नान कर पवित्र जल का घर में छिड़काव करें। घर के पूजन स्थल अथवा किसी भी पवित्र स्थल पर प्रभु श्री हरि विष्णु की सोने, चाँदी, तांबे अथवा पीतल की मूर्ति की स्थापना करें। तत्पश्चात उसका षोड्शोपचार सहित पूजन करें। इसके बाद भगवान विष्णु को पीतांबर आदि से विभूषित करें। तत्पश्चात व्रत कथा सुननी चाहिए। इसके बाद आरती कर प्रसाद वितरण करें। अंत में सफेद चादर से ढँके गद्दे-तकिए वाले पलंग पर श्री विष्णु को शयन कराना चाहिए। व्यक्ति को इन चार महीनों के लिए अपनी रुचि अथवा अभीष्ट के अनुसार नित्य व्यवहार के पदार्थों का त्याग और ग्रहण करें।
ग्रहण करें
देह शुद्धि या सुंदरता के लिए परिमित प्रमाण के पंचगव्य का। वंश वृद्धि के लिए नियमित दूध का। सर्वपापक्षयपूर्वक सकल पुण्य फल प्राप्त होने के लिए एकमुक्त, नक्तव्रत, अयाचित भोजन या सर्वथा उपवास करने का व्रत ग्रहण करें।

3. त्यागें
आज के दिन किसका त्याग करें- मधुर स्वर के लिए गुड़ का। दीर्घायु अथवा पुत्र-पौत्रादि की प्राप्ति के लिए तेल का। शत्रुनाशादि के लिए कड़वे तेल का। सौभाग्य के लिए मीठे तेल का। स्वर्ग प्राप्ति के लिए पुष्पादि भोगों का। प्रभु शयन के दिनों में सभी प्रकार के मांगलिक कार्य जहाँ तक हो सके न करें। पलंग पर सोना, भार्या का संग करना, झूठ बोलना, मांस, शहद और दूसरे का दिया दही-भात आदि का भोजन करना, मूली, पटोल एवं बैंगन आदि का भी त्याग कर देना चाहिए।

4. कथा
एक बार देवऋषि नारदजी ने ब्रह्माजी से इस एकादशी के विषय में जानने की उत्सुकता प्रकट की, तब ब्रह्माजी ने उन्हें बताया- सतयुग में मांधाता नामक एक चक्रवर्ती सम्राट राज्य करते थे। उनके राज्य में प्रजा बहुत सुखी थी। किंतु भविष्य में क्या हो जाए, यह कोई नहीं जानता। अतः वे भी इस बात से अनभिज्ञ थे कि उनके राज्य में शीघ्र ही भयंकर अकाल पड़ने वाला है।
उनके राज्य में पूरे तीन वर्ष तक वर्षा न होने के कारण भयंकर अकाल पड़ा। इस दुर्भिक्ष अकाल से चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई। धर्म पक्ष के यज्ञ, हवन, पिंडदान, कथा-व्रत आदि में कमी हो गई। जब मुसीबत पड़ी हो तो धार्मिक कार्यों में प्राणी की रुचि कहाँ रह जाती है। प्रजा ने राजा के पास जाकर अपनी वेदना की दुहाई दी।
राजा तो इस स्थिति को लेकर पहले से ही दुःखी थे। वे सोचने लगे कि आखिर मैंने ऐसा कौन- सा पाप-कर्म किया है, जिसका दंड मुझे इस रूप में मिल रहा है? फिर इस कष्ट से मुक्ति पाने का कोई साधन करने के उद्देश्य से राजा सेना को लेकर जंगल की ओर चल दिए। वहाँ विचरण करते-करते एक दिन वे ब्रह्माजी के पुत्र अंगिरा ऋषि के आश्रम में पहुँचे और उन्हें साष्टांग प्रणाम किया। ऋषिवर ने आशीर्वचनोपरांत कुशल क्षेम पूछा। फिर जंगल में विचरने व अपने आश्रम में आने का प्रयोजन जानना चाहा।
तब राजा ने हाथ जोड़कर कहा- महात्मन्‌! सभी प्रकार से धर्म का पालन करता हुआ भी मैं अपने राज्य में दुर्भिक्ष का दृश्य देख रहा हूँ। आखिर किस कारण से ऐसा हो रहा है, कृपया इसका समाधान करें। यह सुनकर महर्षि अंगिरा ने कहा- हे राजन! सब युगों से उत्तम यह सतयुग है। इसमें छोटे से पाप का भी बड़ा भयंकर दंड मिलता है।
इसमें धर्म अपने चारों चरणों में व्याप्त रहता है। ब्राह्मण के अतिरिक्त किसी अन्य जाति को तप करने का अधिकार नहीं है जबकि आपके राज्य में एक शूद्र तपस्या कर रहा है। यही कारण है कि आपके राज्य में वर्षा नहीं हो रही है। जब तक वह काल को प्राप्त नहीं होगा, तब तक यह दुर्भिक्ष शांत नहीं होगा। दुर्भिक्ष की शांति उसे मारने से ही संभव है।
किंतु राजा का हृदय एक नरपराधशूद्र तपस्वी का शमन करने को तैयार नहीं हुआ। उन्होंने कहा- हे देव मैं उस निरपराध को मार दूँ, यह बात मेरा मन स्वीकार नहीं कर रहा है। कृपा करके आप कोई और उपाय बताएँ। महर्षि अंगिरा ने बताया- आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष की एकादशी का व्रत करें। इस व्रत के प्रभाव से अवश्य ही वर्षा होगी।
राजा अपने राज्य की राजधानी लौट आए और चारों वर्णों सहित पद्मा एकादशी का विधिपूर्वक व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उनके राज्य में मूसलधार वर्षा हुई और पूरा राज्य धन-धान्य से परिपूर्ण हो गया।

5. व्रतफल
ब्रह्म वैवर्त पुराण में देवशयनी एकादशी के विशेष माहात्म्य का वर्णन किया गया है। इस व्रत से प्राणी की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। व्रती के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। यदि व्रती चातुर्मास का पालन विधिपूर्वक करे तो महाफल प्राप्त होता है।

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एकादशी व्रत.

12 जुलाई को देवशयनी एकादशी, जानिए आखिर क्यों यह. हिन्दू धरम में एकादशी का दिन अत्यधिक महत्व रखता है, हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष में 24 एकादशियाँ आती है, जब अधिक मास अथवा मल मास आता है तो इसकी संख्या बढ़कर 26. देवशयनी एकादशी 2020. देवशयनी एकादशी Archives Legend News Hindi News, Latest. देवशयनी एकादशी 2019 आषाढ़ माह की शुक्ल एकादशी देवशयनी एकादशी कहलाती है। जानें इस एकादशी का महत्व, व्रतकथा व पूजा विधि के बारे में।.

एकादशी जुलाई.

जानें देवशयनी एकादशी कब है, देवशयनी हरिभूमि. Sagar News in Hindi: देवशयनी एकादशी पर किन बातों को का हमें ध्यान रखना जरूरी है, आज हम यह बताने जा रहे है. देवशयनी एकादशी 2019. देवशयनी एकादशी: भगवान चले सोने, अगले Oneindia Hindi. Ashadi Ekadashiआज देवशयनी एकादशी है जिसका धार्मिक रूप से बड़ा महत्व है। कई जगहों पर इसे तुलसी एकादशी भी कहा जाता है।. हरिशयनी एकादशी. देवशयनी एकादशी पर इन बातों का ध्यान रखना है Patrika. देवशयनी एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि. देवशयनी एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन से भगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं। इस साल यह त्योहार शुक्रवार,12.

एकादशी की कथा.

देव शयनी एकादशी. देवशयनी एकादशी आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है 15 जुलाई 2016 इस तिथि को ​पद्मनाभा भी कहते हैं। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ माना जाता है।पुराणों में ऎसा उल्लेख है, कि इस दिन से भगवान श्री विष्णु. देवशयनी एकादशी स्टार्ट फ्रॉम 12 जुलाई. Devshayani Ekadashi 2019, Ashadhi Ekadashi 2019 Vrat Katha, Puja Vidhi: 12 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन का काफी महत्व होता है। क्योंकि पुराणों अनुसार ऐसा माना जाता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार महीनों के लिए. देवशयनी एकादशी क्या है, इसे कब, क्यों और कैसे करें. लाइव सिटीज डेस्क आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. यह 4 जुलाई से शुरू हो रहा है. कहा गया है कि सभी तरह के उपवासों में यह श्रेष्ठतम है. इसे करने से व्यक्ति की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसे.

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12 जुलाई देवशयनी एकादशी से 8 नव बर देवउठनी एकादशी तक चर्तुमास में शादियां बंद रहेगी। तुला के सूर्य होने के कारण 6 नव बर भड़ली नवमी एवं 8 नव बर देवउठनी एकादशी शादी का अबूझ मुहूर्त होने के बाद भी शादियां नहीं होगी। नवंबर 19.20.21.22. देवशयनी एकादशी DEVSHAYANI EKADASHI का महत्व और. Devshayani Ekadashi: देवशयनी एकादशी पर इस बार अनोखा संयोग, नारायण के साथ माता लक्ष्मी की भी मिलेगी कृपा. देवशयनी एकादशी 2019: इस बार देवशयनी एकादशी के मौके पर सबसे बड़ा संयोग ये बना है कि यह शुक्रवार को पड़ रहा है। शुक्रवार का. Devshayani Ekadashi 2019: आज है देवशयनी एकादशी, जानें. नई दिल्ली। देवशयनी एकादशी व्रत आज 12 जुलाई को है। इसे पद्मा एकादशी, पद्मनाभा एकादशी भी कहा जाता है। गृहस्थ आश्रम में रहने वालों के लिए चातुर्मास्य नियम इसी दिन से प्रारंभ हो जाते हैं। संन्यासियों का.

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देवशयनी एकादशी: चार माह के लिए विष्णु जी करेंगे पाताल लोक में विश्राम कल यानि 12 जुलाई को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का दिन है, जिसे देवशयनी एकादशी के नाम से बेहतर जाना जाता है। इस दिन से भगवान विष्णु चार माह के. देवशयनी एकादशी साथ अगले चार महीनों तक नहीं होंगे. भगवान विष्णु 12 जुलाई को योग निद्रा में चले जाएंगे और इसके साथ ही सभी मांगलिक कार्यक्रम वर्जित हो जाएंगे। इसके बाद 8 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी पर भगवान के वापस आने पर मांगलिक कार्यक्रम शुरू होंगे।. देवशयनी एकादशी 4 माह के लिए शुभ कार्यों पर लगेगा. आज देवशयनी एकादशी है। हिंदू धर्म में बताए सभी व्रतों में आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का Devshayani Ekadashi 2019 on July 12: Know Importance vrat Katha Muhurat And Everything, Astrology Hindi News Hindustan. देवशयनी एकादशी का महत्व, भगवान विष्णु के पूजन की. आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इसी एकादशी से चातुर्मास का आरंभ माना जाता है। देवशयनी एकादशी व्रत कथा Watch Youtube Vrat Kath Video Devshayani Ekadashi Vrat Katha hindi Main.

What is देवशयनी एकादशी Devshayani Ekadashi Poojan Vidhi.

हिंदू धर्म में बतागए सभी व्रतों में आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का व्रत सबसे उत्तम माना जाता है. देवशयनी एकादशी व्रत कथा सुनने और सुनाने Namaste. देवशयनी एकादशी के दिन से चार माह के लिए देव शयन करते हैं और देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं। इन चार माहों में शुभ कार्य को वर्जित माना जाता है, देवशयनी एकादशी को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है, इस दिन व्रत करने और कथा सुनने. देवशयनी एकादशी 12 जुलाई 2019 को है सबसे शुभ. इस साल 12 जुलाई से अगले चार महीने के लिए किसी भी शुभ कार्य पर रोक लग जाएगी। 12 जुलाई, शुक्रवार को आषाढ़ शुक्ल की एकादशी है। Ashadha Shukla Paksha Ekadashi is known as Devshayani Ekadashi. Lord Vishnu goes to sleep on this day and wakes up after four.

Know Significance Of Devshayani Ekadashi Vrat Puja Vidhi.

नई दिल्ली। आज देवशयनी एकादशी है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चार माह भगवान विष्णु का शयनकाल होता है। 31 अक्टूबर 2017 को देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान का शयनकाल समाप्त होगा। इन चार माह में विवाह,. देवशयनी एकादशी 2019: 12 जुलाई से अगले Boldsky Hindi. Devshayani ekadashi 2019 date lord vishnu poojan vidhi significance of devshayani ekadashi 3713628 आषाढ़ की शुक्ल एकादशी यानी देवशयनी एकादशी इसी सप्‍ताह 12 जुलाई, शुक्रवार को है. देवशयनी एकादशी 2019 Astro Vastu Remedies. Devshayani Ekadashi 2019, देवशयनी एकादशी 2019: हिंदू धर्म में अषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का काफी महत्व है. इसे देवशयनी एकादशी हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है. साथ ही इसके अन्य कई नाम भी हैं. आज 12 जुलाई शुक्रवार को हरिशयनी.

देवशयनी एकादशी 2019: देवशयनी एकादशी कथा मंत्र और.

देवशयनी या हरिशयनी एकादशी आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की 11वीं तिथि, 12 जुलाई को मनाई जा रही है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, इस दिन से 16 संस्कारों पर रोक लग जाएगी। हालांकि पूजन, अनुष्ठान, मरम्मत करवाए घर में गृह प्रवेश, वाहन क्रय. इस देवशयनी एकादशी पर भूलकर भी ना करें ये 6 काम नहीं. पद्म पुराण के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ​देवशयनी एकादशी कहा जाता है। देवशयनी या देवदेवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरूआत मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु सोने चले जाते हैं और कार्तिक माह में. आज है देवशयनी एकादशी 2019, अब 4 माह बाद Hindustan. देवशयनी एकादशी क्या है, इसे कब, क्यों और कैसे करें? जानिए इसकी पूरी कहानी। भारत वर्ष मे लोग देव सयानी एकादशी, योगिनी एकादशी, देव सोनी ग्यारस, देवउठनी एकादशी, हरिशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी आदि मिलते जुलते नामों से इसको.

देवशयनी एकादशी: चार माह के लिए विष्णु जी करेंगे.

देवशयनी एकादशी 2019: देवशयनी एकादशी कथा मंत्और मुहूर्त. 12 जुलाई शुक्रवार को आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इस एकादशी को शास्त्रों में देवशयनी एकदाशी कहा गया है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु चार मास के लिए पाताल लोक में. देवशयनी एकादशी 12 जुलाई को, इसका Dainik Bhaskar. देवशयनी एकादशी Devshayani Ekadashi Devshayani Ekadasi Katha. पुराणों में ऎसा उल्लेख है, कि इस दिन से भगवान श्री विष्णु चार मास की अवधि तक पाताल लोक में निवास करते है. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से श्री विष्णु उस लोक के लिये गमन करते. देवशयनी एकादशी आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की Jageshwar. पुराणों में देवशयनी एकादशी को विशेष एकादशी बताया गया है। इस देवशयनी एकादशी की पूजा के दौरान आपभगवान विष्णु से जुड़े मंत्रों का जाप करें।.

Devshayani Ekadashi 2019: देवशयनी एकादशी.

एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है।. कल है देवशयनी एकादशी, भूल से भी न करें ये पर्दाफाश. आषाढ़ महीने की शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु चार मास के लिये सो जाते हैं इसलिये इसे देवशयनी एकादशी DEVSHAYANI EKADASHI और पदमा एकादशी भी कहा जाता है। इन दिनों में विवाह​, दीक्षाग्रहण, ग्रहप्रवेश, यज्ञ आदि धर्म कर्म से जुड़े जितने भी. देवशयनी एकादशी का ये है महत्व, इस विधि से Patrika. आज देवशयनी एकादशी है। मान्यता है कि आज से भगवान सो जाते हैं और चार महीने बाद उठते हैं। इसलिए आज से अगले चार महीनों तक हिंदू धर्म में कोई भी शुभकार्य नहीं होता है।. देवशयनी एकादशी व्रत और पूजा विधि in धर्म रफ़्तार. हिन्दू धर्म में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी आती है। धार्मिक मान्यता अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान श्री विष्णु लगभग चार माह के लिए पाताल लोक में जाकर निवास करने लगते हैं और चार माह के बाद.

आज है देवशयनी एकादशी, जानें इसका महत्व Jansatta.

देवशयनी एकादशी जिसे हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है इस वर्ष 12 जुलाई यानी आज मनाया जा रहा है। इस वर्ष इस एकादशी के दिन कई शुभ और सुंदर संयोग बने हैं जो इस एकादशी के महत्व को कई गुणा बढ़ा रहे हैं। साल की 24 एकादशी में. सब प्रकार की सिद्धियां देती हैं आषाढ़ मास की. आषाढी एकादशी के मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवनीस ने अपने अाधिकारिक निवास वर्षा पर भगवान विठ्ठल की पूजा की। कुछ कारणों के वजह से सीएम पंढरपूर में दर्शन नहीं कर पाए। देवशयनी एकादशी के मौके पर वडाला के पंढरपूर.

12 जुलाई को देवशयनी एकादशी, जानें शुभ Hindi News.

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियां होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है।. देवशयनी एकादशी 2019 Times Now Hindi. इस सप्ताह 12 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। जानें जुलाई के दूसरे हफ्ते में पड़ने वाले सभी व्रत त्योहारों के बारे में.