• सत्यदेव प्रसाद

    सत्यदेव प्रसाद भारत के एक एथलीट हैं। वह तीरंदाजी में प्रतिस्पर्धा प्राप्त कर चुके है। प्रसाद जी ने 2004 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में पुरुषों की व्यक्तिगत तीरंद...

  • जैक लीच

    मैथ्यू जैक लीच एक अंग्रेजी क्रिकेटर है जो समरसेट काउंटी क्रिकेट क्लब और इंग्लैंड के लिए खेलते हैं। एक स्पिन गेंदबाज, वह बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स स्पिन गेंदबाजी...

  • विजय शंकर (क्रिकेटर)

    विजय शंकर एक भारतीय क्रिकेटर है जो भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए खेलते हैं। वह एक ऑलराउंडर है जो दाएं हाथ से बल्लेबाजी करता है और दाएं हाथ की मध्यम गति...

  • प्रियांक पांचाल

    प्रियांक किरीटभाई पांचाल एक भारतीय क्रिकेटर हैं। वह दाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के मध्यम गति के गेंदबाज हैं, जो गुजरात के लिए खेलते हैं। उनका जन्म अहमदा...

  • क्रेग ओवरटन

    क्रेग ओवरटन एक अंग्रेजी क्रिकेटर है जो समरसेट काउंटी क्रिकेट क्लब के लिए खेलते हैं। वह एक ऑल-राउंडर हैं जो दाएं हाथ के मध्यम-तेज गेंदबाजी करते हैं और दाएं हा...

  • ओलम्पिक खेल

    ओलम्पिक खेल hi प्रतियोगिताओं में अग्रणी खेल प्रतियोगिता है जिसमे हज़ारों एथेलीट कई प्रकार के खेलों में भाग लेते हैं। ओलम्पिक की शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीन प्र...

  • टेनिस

    टेनिस खेल 2 टीमों के बीच गेंद से खेले जाने वाला एक खेल है जिसमें कुल 2 खिलाडी या ४ खिलाड़ी होते हैं। टेनिस के बल्ले को टेनिस रैकट और मैदान को टेनिस कोर्ट कहत...

  • ट्रायथलन

    ट्रायथलन एक बहु-खेल प्रतिस्पर्धा हैं जिसमें तीन सतत और अनुक्रमिक सहनशक्ति की प्रतिस्पर्धाओं को पूरा करना शामिल होता है। हालांकि खेल के कई रूप मौजूद हैं, परन्...

  • तलवारबाजी

    पहले जब तलवार से लड़ाई हुआ करती थी तब सभी योद्धाओं में तलवार से लड़ सकने की योग्यता आवश्यक थी। अब तलवार की नकली लड़ाई हो रही है जो भारत में मुहर्रम आदि त्योह...

  • हैंडबॉल

    हैंडबॉल एक टीम खेल है जिसमें सात खिलाड़ियों की दो टीमें आपस में खेलती हैं। खिलाड़ियों का उद्देश्य विरोधी टीम के गोल में बॉल फ़ेकना होता है। सात खिलाड़ियों मे...

  • जिम्नास्टिक्स

    कसरती खेल या व्यायाम विद्या जिम्नास्टिक्स एक खेल है जिसमें संतुलन, शक्ति, लचीलापन, और नियन्त्रण आदि की आवश्यकता होती है। एक जिम्नास्ट एक मजबूत शरीर की जरूरत ...

  • जूडो

    जूडो डॉ कानो जिगोरो द्वारा 1882 में जापान में बनाया गया एक आधुनिक जापानी मार्शल आर्ट और लड़ाकू खेल है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता इसका प्रतिस्पर्धी तत्व है, जि...

  • घुड़सवारी

    घुड़सवारी एक प्रकार की कला है, जिसमें व्यक्ति घोड़े पर बैठ कर सवारी करता है। इसमें उसे दिशा निर्देश देना और बिना गिरे उसकी सवारी करना ही इसमें एक कला का रूप ...

  • गॉल्फ़

    गॉल्फ़ गेंद और क्लब से खेला जाने वाला एक व्यक्तिगत खेल है जिसमें खिलाड़ी तरह-तरह के क्लबों का प्रयोग करते हुए गॉल्फ़ के मैदान में दूरी पर स्थित एक छेद में गे...

  • मुक्केबाज़ी

    मुक्केबाज़ी लड़ाई का एक खेल और एक मार्शल कला है, जिसमें दो लोग अपनी मुट्ठियों का प्रयोग करके लड़ते हैं। विशिष्ट रूप से मुक्केबाज़ी का संचालन एक-से तीन-मिनटों...

  • बास्केटबॉल

    बास्केटबॉल एक टीम खेल है, जिसमें 5 सक्रिय खिलाड़ी वाली दो टीमें होती हैं, जो एक दूसरे के खिलाफ़ एक 10 फुट ऊंचे घेरे में, संगठित नियमों के तहत एक गेंद डाल कर ...

  • फुटबॉल

    एसोसिएशन फुटबॉल जिसे आमतौपर सिर्फ फुटबॉल या सॉकर कहा जाता है, दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है। यह एक सामूहिक खेल है और इसे ग्यारह खिलाड़ियों के दो...

  • राष्ट्रमण्डल खेल

    एशली कूपर वे प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने सदभावना को प्रोत्साहन देने और पूरे ब्रिटिश राज के अंदर अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए एक अखिल ब्रितानी खेल कार्यक्रम आय...

  • बेसबॉल

    बेसबॉल 1846 में इंग्लैंड में सबसे पहले खेला गया था, लेकिन इसको वास्तविक रूप कुछ परिवर्तन के साथ उत्तरी अमेरिका ने दिया। 19वीं शताब्दी के अंत में यह संयुक्त र...

धनुर्विद्या

किसी निश्चित लक्ष्य पर धनुष की सहायता से बाण चलाने की कला को धनुर्विद्या कहते हैं। विधिवत् युद्ध का यह सबसे प्राचीन तरीका माना जाता है। धनुर्विद्या का जन्मस्थान अनुमान का विषय है, लेकिन ऐतिहासिक सूत्रों से सिद्ध होता है कि इसका प्रयोग पूर्व देशों में बहुत प्राचीन काल में होता था। संभवत: भारत से ही यह विद्या ईरान होते हुए यूनान और अरब देशों में पहुँची थी।

1. इतिहास
भारतीय सैन्य विज्ञान का नाम धनुर्वेद होना सिद्ध करता है कि वैदिककाल से ही प्राचीन भारत में धनुर्विद्या प्रतिष्ठित थी। संहिताओं और ब्राह्मणों में वज्र के साथ ही धनुष बाण का भी उल्लेख मिलता है। कौशीतकि ब्राह्मण में लिखा है कि धनुर्धर की यात्रा धनुष के कारण सकुशल और निरापद होती है। जो धनुर्धर शास्त्रोक्त विधि से बाण का प्रयोग करता है, वह बड़ा यशस्वी होता है। भीष्म ने छह हाथ लंबे धनुष का प्रयोग किया था। रघुवंश में राम और लक्ष्मण के धनुषों के टंकार का वर्णन और अभिज्ञानशाकुंतलम् में दुष्यंत के युद्धकौशल का वर्णन सिद्ध करता है कि कालिदास को धनुर्विद्या की अच्छी जानकारी थी। भारत के पुराणकालीन इतिहास में धनुर्विद्या के प्रताप से अर्जित विजयों के लिए राम और अर्जुन का नाम सदा आदर से लिया जाएगा। विलसन महोदय का कथन सच है कि हिंदुओं ने बहुत ही परिश्रम और अध्यवसाय पूर्वक धनुर्विद्या का विकास किया था और वे घोड़े पर सवार होकर बाण चलाने से सिद्धहस्त थे।
धनुषबाण की एक विशेषता यह थी कि इसका उपयोग चतुरंगिणी सेना के चारों अंग कर सकते थे। भारत में धनुष की डोरी जहाँ कान तक खींची जाती थी वहाँ यूनान में सीने तक ही खींची जाती थी।
अग्निपुराण में धनुर्विद्या की तकनीकी बारीकियों का विस्तारपूर्वक वर्णन है। बाएँ हाथ में धनुष और दाएँ हाथ में बाण लेकर, बाण के पंखदार सिरे को डोरी पर रखकर ऐसा लपेटना चाहिए कि धनुष की डोरी और दंड के बीच बहुत थोड़ा अवकाश रह जाए। फिर डोरी को कान तक सीधी रेखा से अधिक खींचना चाहिए। बाण छोड़ते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। किसी वस्तु विशेष पर बाण का लक्ष्य करते समय त्रिकोणात्मक स्थिति में खड़े रहना चाहिए। धनुर्विज्ञान में इसके अतिरिक्त अन्य स्थितियों का भी उल्लेख है, जो निम्नलिखित हैं:
घ आलीढ़ स्थिति में दाईं जाँघ और घुटने को स्थिर रखकर बाएँ पैर को पीछे खींच लिया जाता है।
च स्थानम् में अंगुलियों के बराबर स्थान घेरा जाता है, अधिक नहीं।
झ संपुट में दोनो टाँगें उठी हुई और घुटने मुड़े होते हैं।
ङ प्रत्यालीढ़ उपर्युक्त स्थिति से विपरीत स्थिति है।
छ निश्चल स्थिति में बाएँ घुटने को सीधा रखा जाता है और दाएँ घुटने को मुड़ा हुआ।
ख वैशाख स्थिति में पंजों के बल खड़ा रहा जाता है, जाँघे स्थिर रहती हैं और दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी रहती है।
ग मंडल में वृत्ताकार या अर्धवृत्ताकार स्थिति में खड़ा रहा जाता है। इस स्थिति में वैशाख स्थिति की अपेक्षा पैरों में अधिक अंतर रहता है।
क समपद या खड़ी स्थिति, में पैर, हथेली, पिंडली और हाथ के अँगूठे एक दूसरे से घने सटे रहते हें।
ज विकट स्थिति में दायाँ पैर सीधा रहता है।
ञ स्वस्तिक स्थिति में दोनों टाँगें सीधी फैली होती हैं और पैर के पंजे बाहर की ओर निकले होते हैं।
बाण चलाते समय धनुष को लगभग खड़ी स्थिति में पकड़ते हैं, जैसा आज भी होता है और तदनुसार ही अंग को ऊपरी या निचला
तीर यदि टागेंट के केंद्र से नीचे बेघता है, तो लक्ष्यविंदु टार्गेट की ओर और वह यदि केद्र से ऊपर पड़ता है, तो लक्ष्यविंदु धनुर्धारी की ओर खिसकना चाहिए। धनुष के सिरों पर सींग या लकड़ी से अधिक मजबूत और टिकाऊ किसी अन्य पदार्थ को जड़कर, सिरों को दृढ़ बनाया जात हा है। डोरी को मजबूती से चढ़ाने के लिए सिरों पर खाँचा होता है। बाण को छोड़ने से पहले उस प्रत्यंचा पर रखकर साधने के लिए बाण पर भी खाँचा बना रहता है। प्रत्यंचा खींचते समय धनुष की पीठ उत्तल और पेट अवतल होता है। धनुष के मध्यभाग में, जो दृढ़ होता है और मोड़ा नहीं जा सकता, धनुष की मूठ होती है। मूठ के ठीक ऊपर एक ओर अस्थि, सीग या हाथीदाँत की बाणपट्टिका जड़ी होती है। बाण को पीछे की ओर तानने पर पट्टिका पर बाण फिसलता है और बाण को छोड़ने से पहले इसी पर उसका सिरा स्थिर होता है। प्रत्यंचा के दोनों सिरों पर फंदे होते हैं, जिनसे वह दोनों सिरों पर दृढ़ता से आबद्ध होती है। निर्मुक्त धनुष को मोड़कर, फंदे को ऊपर सरकाकर, ऊपरी खाँचे में गिराने की क्रिया को धनुष कसना कहते हैं। धनुष को प्राय: इतनी लंबी डोरी से कसते हैं कि कसने की ऊँचाई, यानी डोरी से मूठ के भीतरी भाग तक की दूरी, धनुर्धर के खुले अँगूठे सहित मुट्ठी के बराबर हो। धनुर्धर के डीलडौल पर निर्भर यह दूरी छह और सात इंच के बीच होती है। जिस समय धनुष का उपयोग नहीं करना होता है उस समय इसकी विपरीत क्रिया करके धनुष को ढीला कर देते हैं और इस प्रकार उपयोग के समय ही धनुष तनाव की स्थिति में रहता है।
नीतिप्रकाशिका में धनुष की निम्नलिखित चालों का वर्णन है:
1. लक्ष्यप्रतिसंधान, 2. आकर्षण, 3. विकर्षण, 4. पर्याकर्षण, 5. अनुकर्षण, 6. मंडलीकरण, 7. पूरण, 8. स्थारण, 9. धूनन, 10. भ्रामण, 11. आसन्नपात, 12. दूरपात, 13. पृष्ठपात तथा 14. मध्यमपात।
परशुराम इस धरती पर ऐसे महापुरुष हुए हैं जिनकी धनुर्विद्या की कोई पौराणिक मिसाल नहीं है। पितामह भीष्म, द्रोणाचार्य और खुद कर्ण ने भी परशुराम से ही धनुर्विद्या की शिक्षा ली थी। बेशक इस मामले में कर्ण थोड़े अभागे रहे थे। क्योंकि अंत में परशुराम ने उनसे ब्रह्मास्त्र ज्ञान वापस ले लिया था।
शास्त्रों के अनुसार चार वेद हैं और तरह चार उपवेद हैं। इन उपवेदों में पहला आयुर्वेद है। दूसरा शिल्प वेद है। तीसरा गंधर्व वेद और चौथा धनुर्वेद है। इस धनुर्वेद में धनुर्विद्या का सारा रहस्य मौजूद है। ये अलग बात है कि अब ये धनुर्वेद अपने मूल स्वरुप में कहीं नहीं है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि धनुर्वेद इस देश से खत्म हो गई है।

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  • व भ न न भ र और म प भ द गई ह य ग न क धन ष य च प क भ र 200 पल, धन र व द य क प रश क ष र थ क 3 पल, नरक ल क बन धन ष क भ र 440 पल, य द ध क ल ए
  • ध वज पर व नर ह ग ड क श न द र क ज तन व ल भय कर क ल र त र म धन र व द य क अभ य स करन स यह न म पड परन तप परम तप करन व ल ब भत स ज
  • प डव र जप त र ह ध ष टद य म न अत य त पर क रम थ इस द र ण च र य न धन र व द य स ख ई भ रत य य द ध म यह प डवपक ष म थ प रथम यह प डव क स न
  • ह न पर व द य - अध ययन क ल ए भ ज गए ध तर ष ट र बल व द य म प ण ड धन र व द य म तथ व द र धर म और न त म न प ण ह ए य व ह न पर ध तर ष ट र अन ध
  • उनस द व य शक त य क स थ सम प र ण धन र व द य क ज ञ न क वरद न प र प त कर ल य इस प रक र सम प र ण धन र व द य क ज ञ न प र प त करक व श व म त र बदल
  • उन ह न बत य क क वल फ र न स क ध वक क प र ह क चड म नह स न थ धन र व द य धन षब ज एथल ट क स ब स क प ल ट क र क ट क र क ट स इकल चल न घ डस व र
  • ज य त ष आद प रम ख थ इनक स थ अन य धर म क श क ष भ द ज त थ स थ ह धन र व द य एव अन य क छ क शल क श क ष भ द ज त थ - रटन क व ध पर बल द य
  • न उनक प लन - प षण क य व द आद क श क ष द और र म यण क ठस थ कर य धन र व द य आद म भ उन ह न ष ण त क य जब अश वम ध क न म त त र म न अश व छ ड
  • क न र द श, रत न द क ष व ध र म क त न त क वर णन, रत न क लक षण, धन र व द य व यवह र दर शन, द व स र स ग र म क कथ आय र व द न र पण, गज आद क च क त स
  • मह ल और एक अवध रण स र वभ म क द व य श श वत रस यन श स त र ग ढ धन र व द य धन र व द य आद म अमर प ढ य स अन त और व व ह स पर क ल ए उत पन न क य ज
  • स न बचपन स व ग ल कबड ड घ ड सव र त र क सर प क तरह र गन धन र व द य क श त और शतर ज ख लन स ख व श म क त ल क आफ सर क ष णन स अ ग र ज
  • क सम बन ध बत य ज त ह क ग र द र ण न यह रहकर अपन श ष य क धन र व द य क श क ष द थ त ल क क न र एक पक क ट ल पर ग र द र ण क एक प रत म
  • व भ न न कल ए ज स च क त स शल य, ज य त ष, नक षत र गणन क ष बह ख त धन र व द य आद सम म ल त थ ब द ध तथ ज न दर शन एव तर कश स त र भ पढ ए ज त थ
  • द व र धन र व द य क अभ य स प र रम भ कर द य ह परन त ब द म उन ह प त दशरथ स वर ण क व स तव क धन ष - ब ण द ल द त ह ब लक क धन र व द य म न प णत
  • व य य म क अभ य स करत थ इन व य य म म द ड - ब ठक, म गदर, गद न ल, धन र व द य म ष ट वज रम ष ट आसन, प र ण य म, भस त र क प र ण य म, स र यनमस क र
  • इस प रक र फ ककर म रन व ल स ध रण पत थर क व क स भ ल धन ष - ब ण य धन र व द य ग ल ल, ग ल ग ल तथ आध न क परम ण बम म ह आ आय ध क व क स और बढ त
  • सन ह झ प डमल ल सह त कई अलग - अलग य द ध ओ क उल ल ख क य गय थ ज धन र व द य क व श षज ञ थ और र जद व र उत ज एक अत लन य य द ध म न ज त थ र जध न य
  • स बन य थ तब र वण क स थ य न उसक बत य क क स न अपन अद भ त धन र व द य क प रय ग द व र ब ण स ब धकर जल क र क ह व सब आग बढ उन ह
  • धर ध र धर मकर मफलप रद धर म च र धर मस र धर ममध यन व स न धन र व द य धन र व द धन य ध र तव न श न धनध न य ध न र प धन ढ य धनद य न
  • च त र कल म भ प रव ण थ प थ व र ज र स क व य म उल ल ख ह क धन र व द य म प र गत प थ व र ज शब दभ द ब ण क चल न म भ सक षम थ प थ व र ज
  • खग लश स त र, आय र व द, दर शनश स त र, ज य त ष, न ड व ज ञ न, स ह त य, व य करण, धन र व द य तलव रब ज न श न ब ज ख ल प रश क षण, वक त त वकल न त त व प रश क षण आद

छात्र छात्राओं ने सीखा धनुष बाण चला सटीक.

Meaning of धनुर्विद्या in Hindi meaning of धनुर्विद्या ​धनुर्विद्या ka Hindi Matlab Meaning of धनुर्विद्या in Hindi. धनुष चलाने की कला धनुष चलाने की विद्या। तीरंदाजी. और भी कम. आज का मुहूर्त. muhurat. शुभ समय में शुरु किया गया कार्य अवश्य ही​. धनुर्विद्या में पारंगत हो रही बालिकाएं. एकलव्य की गुरुभक्ति आचार्य द्रोण राजकुमारों को धनुर्विद्या की विधिवत शिक्षा प्रदान करने लगे। उन राजकुमारों में अर्जुन के अत्यन्त प्रतिभावान तथा गुरुभक्त होने के कारण वे द्रोणाचार्य के प्रिय शिष्य थे। द्रोणाचार्य का. महान पौराणिक बालक एकलव्य Marathi stories Hindi Stories. रिलिजन डेस्क. महाभारत में गुरु द्रोणाचार्य अपने शिष्य अर्जुन से विशेष स्नेह करते थे और वे अर्जुन को धनुर्विद्या में सर्वश्रेष्ठ बनाना चाहते थे। उस समय एकलव्य भी द्रोणाचार्य से धनुर्विद्या सीखना चाहता था। एकलव्य हिरण्य धनु.

कोदूराम के पास हैं धनुर्विद्या का ज्ञान lifestyle.

किसी निश्चित लक्ष्य पर धनुष की सहायता से बाण चलाने की कला को धनुर्विद्या Archery कहते हैं। विधिवत् युद्ध का यह सबसे प्राचीन तरीका माना जाता है। धनुर्विद्या का जन्मस्थान अनुमान का विषय है, लेकिन ऐतिहासिक सूत्रों से सिद्ध होता है कि. Video धनुर्विद्या में ऐसे होते हैं पारंगत Patrika. एकलव्य धनुर्विद्या की उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहता था l उस समय धनुर्विद्या मेँ गुरू द्रोण की ख्याति थी l पर वे केवल ब्राह्मण तथा क्षत्रिय वर्ग को ही शिक्षा देते थे और शूद्रोँ को शिक्षा देने के कट्टर विरोधी थे l. महाराज हिरण्यधनु ने. धनुर्विद्या का अर्थ Meaning of dhanurvidya in शब्द. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने रविवार को बभनी ब्लाक के चपकी कारिडाह में धनुर्विद्या केंद्र उद्घाटन किया। दोपहर लगभग 12.30 पर म्योरपुर हवाई पट्टी पहुंचे राज्यपाल का यहाँ जिले के विधायकों व पदाधिकारियों ने स्वागत किया।. जब दुर्योधन नहीं सह पाया महावीर कर्ण का अपमान, भरी. उन्होंने केवल लिखने और पढ़ने में ही दक्षता नहीं हासिल की वरन् बहुत शीघ्र ही राजकुमारों के लिए उपयुक़्त अन्य कलाओं जैसे कुश्ती, धनुर्विद्या, तलवारबाजी एंव घुड़सवारी में भी कमाल हासिल कर लिया. 2. His son was clever and intelligent and quickly.

धनुर्वेद एक उपवेद है। इसके अन्तर्गत धनुर्विद्या या.

उज्जैन. गुरुकुल सम्मेलन के समापन पर बच्चों ने आत्मरक्षा के लिहाज से सिखाई जाने वाली शारीरिक शिक्षा का प्रदर्शन किया। धनुर्विद्या के साथ साथ उन्होंने मलखंभ आदि का भी प्रदर्शन किया। हर परिस्थिति से निपटने के लिए गुरुकुलों में बच्चों. गुरुकुल के छात्रों ने कलरीपयटू, धनुर्विद्या और. एकलव्य एक भील पुत्र था. बचपन से ही उसे धनुर्विद्या सीखने की तीव्र इच्छा थी. उस समय आचार्य द्रोण के नाम की धूम मची थी. आचार्य द्रोण. द्रोण को धनुर्विद्या का दान. चुर्क सोनभद्र धनुर्विद्या भारत की प्राचीन शस्त्र विद्या है। इसका गौरवशाली इतिहास रहा है। सोनभद्र की मूल जाति आदिवासियों का धनुष बाण आज भी प्रमु.

धनुर्विद्या HinKhoj Dictionary.

गुरुकुल के छात्रों ने कलरीपयटू, धनुर्विद्या और योग के प्रदर्शन के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी Attack News. उज्जैन 30 अप्रैल। अंतरराष्ट्रीय विराट गुरूकुल सम्मेलन के तीसरे दिन समापन के पूर्व प्रात: शारीरिक प्रस्तुतियों के. आज का एकलव्य खूबसूरत मॉम्सप्रेस्सो. आचार्य द्रोण का अपमान उनके सहपाठी पांचाल नरेश द्रुपद ने यह कह कर दिया कि एक राजा की तुम्हारे जैसे श्रीहीन और निर्धन. मेरठ के इस आश्रम में तैयार हो रहे भविष्य के अर्जुन. बभनी। आदिवासी बच्चों का जीवन संवारने में अग्रणी भूमिका निभा रहा सेवा समर्पण संस्थान सेवाकुंज चपकी कारीडांड़ एक जुलाई को धनुर्विद्या और बच ….

21वीं सदी के पृथ्वीराज जो 96 साल की उम्र में.

दूसरा शिल्प वेद है तीसरा गंधर्व वेद और चौथा धनुर्वेद है इस धनुर्वेद में धनुर्विद्या का सारा रहस्य मौजूद है. क्या तुमने धनुर्विद्या सी Quotes YourQuote. किसी निश्चित लक्ष्य पर धनुष की सहायता से बाण चलाने की कला को धनुर्विद्या कहते हैं। विधिवत् युद्ध का यह सबसे प्राचीन तरीका माना जाता है। धनुर्विद्या का जन्मस्थान अनुमान का विषय है, लेकिन ऐतिहासिक सूत्रों से सिद्ध होता. धनुर्विद्या के गुरु थे परशुराम Bhumantra. हिरण्यधनु ने लंबी सांस खींचकर कहा, बेटा, मैं तुम्हारे लिए उचित शिक्षा धनुर्विद्या के प्रबन्ध हेतु चिंतित हूं। कोई अच्छा गुरु मिल जाए, जो तुम्हें धनुर्विद्या में पारंगत कर दे, पर हम अछूत भील नाम से पुकारे जाते हैं, अतः हमें शंका है कि Следующая Войти Настройки Конфиденциальность.

Interesting story of aklavya, arjun and krishna हिरण्य धनु नाम.

द्रोणाचार्य को धनुर्विद्या का सर्वश्रेष्ठ गुरु माना जाता था। उन्होंने कहा कि वे भी यहां के लोगों को तीरंदाजी सिखाकर लोगों का मनोरंजन करने के अलावा उन्हें तीरंदाजी की कला में माहिकर रहे हैं और पिछले &0 वर्षों से इस. Full Story History of Nishad RAJ Eklavya in Hindi, Jai Nishad Raj. Examples of Dhanurvidya धनुर्विद्या धनुर्विद्या के उदाहरण: धृतराष्ट्र बल विद्या में, पाण्डु धनुर्विद्या में तथा विदुर धर्म और नीति में निपुण हुए संदर्भ Reference उन्हें वेदाभ्यास में जरा भी रुचि नहीं थी और धनुर्विद्या से उन्हें अत्यधिक. तीरंदाजी भारत में रामायण और महाभारत के समय से ही. उन्होंने थोड़े ही समय में धनुर्विद्या में महारत हासिल कर ली। इतना ही नहीं उन्होंने महान ब्रह्मास्त्र का मंत्र तक प्रभु परशुराम से सीख लिया था। कहते हैं कि उस समय में वह अर्जुन से भी बड़े धनुर्धारी बन गए थे मगर तभी उनकी किस्मत.

15 बेहतरीन Archery छवियाँ शक्ति प्रशिक्षण, तीर और.

महाभारत में वर्णित कथा के अनुसार अभिधुम्न,निषादराज हिरण्यधनु के पुत्र थे, जिनकी गुरुभक्ति और अस्त्र शस्त्रों में एकनिष्ठा के कारण एकलव्य नाम से जाना जाता है । बचपन से ही बालक एकलव्य को धनुर्विद्या में गहरी रूचि थी । उसने. एकलव्य एक प्रेरणा in Children Stories by Ashish Kumar Trivedi. इस एकलव्य की कहानी में आपको अंगूठे का जिक्र भले न मिले, लेकिन खुद से आर्चरी धनुर्विद्या सीखने का वह शानदार उदाहरण है। जनजातीय परिवार से संबंध रखने वाले गोरा ने बैंकॉक में आयोजित एशिया कप स्टेज आई आर्चरी मीट में गोल्ड.

महाभारत की कहानी एकलव्य की गुरु दक्षिणा Arohi Hindi.

एकलव्य की कथा का ज़िक्र महाभारत में मिलता है। उसके अनुसार एकलव्य निषाद राज हिरण्यधनु का पुत्र था। वह गुरु द्रोणाचार्य के पास धनुर्विद्या सीखने गया था, लेकिन राजवंश का न होने के कारण द्रोणाचार्य ने उसे धनुर्विद्या सिखाने से मना कर. जानिए किसने सीखी थी परशुराम से धनुर्विद्या की. Akanksha Sharma says, क्या तुमने धनुर्विद्या सीखी है? क्यूंकि तुम्हारे शब्द रूपी बाण सीधे निशाने दिल. Read the best original quotes, shayari, poetry & thoughts by Akanksha Sharma on Indias fastest growing writing app YourQuote. अर्जुन से सीखें लक्ष्य पाने की तरकीब ड्रूपल. वह व्यक्ति जो धनुर्विद्या जानता हो, तीरंदाज, कमनैत। ಬಿಲ್ಲುಗಾರಿಕೆಯನ್ನು ಬಲ್ಲವ. archer, bowman. धनुर्विद्या. धनुशा विदिआ. फ़न्‍ने तीर अंदाज़ी. तीर अंदॉज़ी, हुंद अलिम. धनुष विद्‍या. धनुर्विद्‍या. धनुर्विद्‍या. धणुविद्‍या. धनुर्विद्‍या. धनुर्विद्या भारत की प्राचीन कला. एकलव्य धनुर्विद्या की उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहता था। उस समय धनुर्विद्या में गुरू द्रोण की ख्याति थी। पर वे केवल ब्राह्मण तथा क्षत्रिय वर्ग को ही शिक्षा देते थे और शूद्रों को शिक्षा देने के कट्टर विरोधी थे। महाराज हिरण्यधनु ने एकलव्य.

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इसी तरह रामायण में भगवान राम ने भी धनुष बाण के जरिए राक्षसों का वध किया। यह धनुर्विद्या पहले गुरुकुलों में सिखाई जाती थी, लेकिन अब यह कुछ स्कूलों में भी अपने प्राचीन स्वरूप के साथ नए अंदाज और नाम तीरंदाजी से मशहूर हो रही है. भ्रामक झूठ है गुरु द्रोणाचार्य द्वारा DharmYatra. इसके राजा थे हिरण्यधनु। उनकी पत्नी का नाम सुलेखा था। हिरण्यधनु और सुलेखा का एक पुत्र था जिसका नाम एकलव्य था। एकलव्य बहुत ही बुद्धिमान तथा मेहनती बालक था। धनुष बाण चलाने में वह निपुण था। उसके भीतर धनुर्विद्या सीखने की तीव्र इच्छा थी।. भगवान श्री कृष्ण ने क्यों और कब किया था एकलव्य का. धनुर्वेद एक उपवेद है। इसके अन्तर्गत धनुर्विद्या या सैन्य विज्ञान आता है। दूसरे शब्दों में, धनुर्वेद, भारतीय सैन्य विज्ञान का दूसरा नाम है। शास्त्रों के अनुसार चार वेद हैं और इसी तरह चार उपवेद हैं। इन उपवेदों में पहला आयुर्वेद है। दूसरा शिल्प.

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उत्तर प्रदेश के मेरठ में स्थित प्रभात आश्रम में भविष्य के अर्जुन तैयार किए जा रहे हैं. आश्रम से धनुर्विद्या सीख चुके धनुर्धर ओलंपितक अपना परचम लहरा चुके हैं. धनुर्विद्या Archives Wish4Me Your wish may come true. एकलव्य को अपनी धनुर्विद्या से संतुष्टि न थी इस कारण उसने धनुर्विद्या की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए उस समय धनुर्विद्या में दक्ष गुरू द्रोण के पास जाने का फैसला किया। एकलव्य के पिता जानते थे कि द्रोणाचार्य केवल. धनुर्विद्या अंग्रेजी हिंदी शब्दकोश रफ़्तार. द्रोणाचार्य को धनुर्विद्या का सर्वश्रेष्ठ गुरु माना जाता था। धनुर्विद्या ही क्या, हर तरह के हथियार चलाने के तरीके उन्हें आते थे। कौरव और पांडव उनके शिष्य थे। इन 105 भाइयों में अर्जुन उनके सबसे प्रिय शिष्य थे, और इसीलिए.

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जागरण संवाददाता, मथुरा वृंदावन वात्सल्य की छांव में देश के कोने कोने से आई बेटियों को आत्मनिर्. मेले में युवाओं का धनुर्विद्या के प्रति दिखा. धनुर्विद्या धनुष चलाने की विद्या, तीरंदाज़ी की परिभाषा. धनुर्विद्या क्या है?. हिरण्यधनु ने लंबी सांस खींचकर कहा, बेटा, मैं तुम्हारे लिए उचित शिक्षा धनुर्विद्या के प्रबन्ध हेतु चिंतित हूं। कोई अच्छा गुरु मिल जाए, जो तुम्हें धनुर्विद्या में पारंगत कर दे, पर हम अछूत भील नाम से पुकारे जाते हैं, अतः हमें शंका है कि. एकलव्य Eklavya. एकलव्य धनुर्विद्या की उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहता था। उस समय धनुर्विद्या मेँ गुरू द्रोण की ख्याति थी। पर वे केवल ब्राह्मण तथा क्षत्रिय वर्ग को ही शिक्षा देते थे और शूद्रोँ को शिक्षा देने के कट्टर विरोधी थे। महाराज हिरण्यधनु ने एकलव्य. देखेंगे बाल धनुर्धरों का कौशल, करेंगे धनुर्विद्या. एकलव्य जिसे धनुर्विद्या में महारथ हासिल था। जब गुरु द्रोणाचार्य ने एकलव्य को धनुर्विद्या का ज्ञान देने से इंकाकर दिया तो उसने गुरु द्रोण की प्रतिमा के समक्ष धनुर्विद्या का अभ्यास किया और बाद में जाकर बहुत बड़े धनुर्धर.

धनुर्विद्या dhanurvidya meaning in English and AamBoli.

धनुर्विद्या dhanurvidya Meaning in English Usage. 1. अर्जुन धनुर्विद्या में निपुर्ण थे । धनुर्विद्या meaning in Hindi, Meaning of धनुर्विद्या in English Hindi Dictionary. Pioneer by www.​, helpful tool of English Hindi Dictionary. Previous Word धनुर्वात Next Word. तो इस वजह से कृष्ण जी ने किया था एकलव्य का वध. द्रोण को धनुर्विद्या का दान वत्स द्रोण! महर्षि परशुराम गंभीरता से बोले, जिस उद्देश्य से तुम मेरे पास आए हो, उसे अब मैं पूर्ण नहीं कर पाऊंगा। मैं आपका तात्पर्य नहीं समझा महर्षि! द्रोण निराशा से बोले। वत्स! तुमने आने में.

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