• सतनाम

    सतनाम= सत्नाम, सत्तनाम, परमात्मा का सच्चा--अविनाशी या अपरिवर्तनशील नाम, आदिनाद। सतनाम या सतिनाम गुरुमुखी: ਸਤਿ ਨਾਮੁ गुरु ग्रन्थ साहिब में प्रयुक्त प्रधान शब्द...

  • संत भाषा

    संत भाषा या गुरुमुखी एक पवित्र सम्पर्क भाषा है, जिसमें उत्तर भारत की भारतीय-आर्य भाषाओं की आम शब्दावली आती है। जो लोग हिंदी, उर्दू या पंजाबी भाषा जानते हैं, ...

  • वाहेगुरू

    वाहेगुरू या वाहिगुरू शब्द परमात्मा की प्रशन्सा को व्यतीत करता है। सिख एक दूसरे को नमस्कार करने लिए इस को भी इस्तेमाल करते हैं: ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖਾਲਸਾ ਯਾ ਵਾਹਿਗੁ...

  • लंगर (सिख धर्म)

    लंगर सिखों के गुरुद्वारों में प्रदान किए जाने वाले नि:शुल्क, शाकाहारी भोजन को कहते हैं। लंगर, सभी लोगों के लिये खुला होता है चाहे वे सिख हो या नहीं। लंगर शब्...

  • मास्टर तारा सिंह

    मास्टर तारा सिंह शुरूआती तथा मध्य 20वीं सदी के एक प्रमुख सिक्ख राजनीतिक और धार्मिक नेता थे। उन्होंने अंग्रेज़ सरकार के दौरान सिक्ख धर्म को बृहत् हिन्दू धर्म ...

  • महानकोश

    महानकोश या गुरु शबद रत्नाकर महानकोश पंजाबी भाषा का सार्वजनिक ज्ञानकोश है। इसके रचयिता भाई काह्न सिंह नाभा थे। इसमें पंजाबी शब्दों का कोश है जिसमें सिख धर्म क...

  • भाई मतिदास

    भाई मतिदास सिख इतिहास के सर्वश्रेष्ठ शहीदों में गिने जाते हैं। वह ब्राह्मण जाति के थे। भाई मतिदास तथा उनके छोटे भाई भाई सती दास और भाई दयाला जी नौवें गुरु गु...

  • भाई मणी सिंह

    भाई मणी सिंह १८वीं शताब्दी के सिख विद्वान तथा शहीद थे। जब उन्होने इस्लाम स्वीक करने से मना कर दिया तो मुगल शासक ने उनके शरीर के सभी जोड़ों से काट-काट कर उनकी...

  • भाई गुरदास

    भाई गुरदास पंजाबी लेखक, इतिहासकार, उपदेशक तथा धार्मिक नेता थे। गुरु ग्रन्थ साहिब का मूल लेखन उन्होने ही किया था। वे चार गुरुओं के साथी भी रहे।

  • बेबे नानकी

    बेबे नानकी सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु गुरु नानक देव की बड़ी बहन थीं। बेबे नानकी सिख धर्म की एक महत्वपूर्ण धार्मिक शख्सियत हैं, और पहले गुरसिख के रूप म...

  • फतेहगढ़ साहिब

    फतेहगढ़ साहिब पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिला का मुख्यालय है। यह जिला सिक्‍खों की श्रद्धा और विश्‍वास का प्रतीक है। पटियाला के उत्‍तर में स्थित यह स्‍थान ऐतिहासि...

  • प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध

    प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध पंजाब के सिख राज्य तथा अंग्रेजों के बीच 1845-46 के बीच लड़ा गया था। इसके परिणाम स्वरूप सिख राज्य का कुछ हिस्सा अंग्रेजी राज का हिस्सा ब...

  • पाकिस्तान में सिख धर्म

    आधुनिक पाकिस्तान के क्षेत्र में सिख धर्म की व्यापक विरासत और इतिहास है, हालांकि सिख वर्तमान रूप से पाकिस्तान में एक छोटा सा समुदाय बनाते हैं। अधिकांश सिख पंज...

  • पगड़ी

    पगड़ी सिपर बांधा जाने वाला परिधान या पहनावा है। पगड़ी धारण करना सिख लोगों के पाँच चिह्नों में से है। पगड़ी विश्व के अनेक समाजों में प्रचलित थी। भारत में भी प...

  • ननकाना साहिब

    ननकाना साहिब, पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में स्थित एक शहर है। इसका वर्तमान नाम सिखों के पहले गुरू गुरू नानक देव जी के नाम पर पड़ा है। इसका पुराना नाम राय-भोई...

  • द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध

    द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध पंजाब के सिख प्रशासित क्षेत्रों वाले राज्य तथा अंग्रेजों के ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच 1848-49 के बीच लड़ा गया था। इसके परिणाम स्वरूप स...

  • जुझार सिंह

    साहिबजादा जुझार सिंह, गुरु गोविन्द सिंह के द्वितीय पुत्र थे। वे माता जीतो के गर्भ से आनन्दपुर साहिब में जनमे थे। नानकशाही पंचांग के अनुसार उनका जन्मदिन अब ९ ...

  • गुरु हरगोबिन्द

    गुरू हरगोबिन्द सिखों के छठें गुरू थे। साहिब की सिक्ख इतिहास में गुरु अर्जुन देव जी के सुपुत्र गुरु हरगोबिन्द साहिब की दल-भंजन योद्धा कहकर प्रशंसा की गई है। ग...

  • गुरु हर किशन

    गुरू हर किशन साहिब जी का जन्म सावन वदी १० ८वां सावन बिक्रम सम्वत १७१३ ७ जुलाई १६५६ को कीरतपुर साहिब में हुआ। वे गुरू हर राय साहिब जी एवं माता किशन कौर के दूस...

  • गुरु राम दास

    राम दास या गुरू राम दास, सिखों के गुरु थे और उन्हें गुरु की उपाधि 30 अगस्त 1574 को दी गयी थी। उन दिनों जब विदेशी आक्रमणकारी एक शहर के बाद दूसरा शहर तबाह कर र...

  • गुरु अर्जुन देव

    अर्जुन देव या गुरू अर्जुन देव सिखों के ५वे गुरु थे। गुरु अर्जुन देव जी शहीदों के सरताज एवं शान्तिपुंज हैं। आध्यात्मिक जगत में गुरु जी को सर्वोच्च स्थान प्राप...

  • गुरु अंगद देव

    अंगद देव या गुरू अंगद देव सिखो के एक गुरू थे। गुरू अंगद देव महाराज जी का सृजनात्मक व्यक्तित्व था। उनमें ऐसी अध्यात्मिक क्रियाशीलता थी जिससे पहले वे एक सच्चे ...

  • ख़ालसा

    खालसा सिख धर्म के विधिवत् दीक्षाप्राप्त अनुयायियों सामूहिक रूप है। खालसा पंथ की स्थापना गुरु गोबिन्द सिंह जी ने १६९९ को बैसाखी वाले दिन आनंदपुर साहिब में की।...

  • खंडा (सिख चिन्ह)

    खंडा चिन्ह एक सिख धार्मिक, सांस्कृतिक, एवं ऐतिहासिक चिन्ह है जो कई सिख, धर्म एव वष्वदर्षण, सिद्धांतों को ज़ाहिर रूप से दर्शाता है। यह "देगो-तेगो-फ़तेह" के सि...

  • कूका

    कूका एक सिख संप्रदाय है जिसे नामधारी भी कहते हैं। इस सप्रंदाय की स्थापना रामसिंह नामक एक लुहार ने की थी जिसका जन्म 1824 ई. में लुधियाना जिले के भेणी नामक ग्र...

  • आदि ग्रन्थ

    आदि ग्रन्थ या आद ग्रन्थ सिख धर्म से सम्बंधित धार्मिक लिखाईयों का एक संकलन है जिसे पाँचवे सिख गुरु श्री गुरु अर्जन देव जी ने सन् १६०४ में पूरा करा। दसवें सिख ...

  • अरदास

    अरदास का सामान्य अर्थ परमशक्ति के आगे विनती करने से है। सिख धर्म की प्रथाओं रहत मर्यादा में अरदास का एक मानक रूप है, जो कि गुरुद्वारों में प्रतिदिन की जाती ह...

  • अमृत

    अमृत का शाब्दिक अर्थ अमरता है। भारतीय ग्रंथों में यह अमरत्व प्रदान करने वाले रसायन के अर्थ में प्रयुक्त होता है। यह शब्द सबसे पहले ऋग्वेद में आया है जहाँ यह ...

सिख धर्म

अमृत

अमृत का शाब्दिक अर्थ अमरता है। भारतीय ग्रंथों में यह अमरत्व प्रदान करने वाले रसायन के अर्थ में प्रयुक्त होता है। यह शब्द सबसे पहले ऋग्वेद में आया है जहाँ यह ...

अरदास

अरदास का सामान्य अर्थ परमशक्ति के आगे विनती करने से है। सिख धर्म की प्रथाओं रहत मर्यादा में अरदास का एक मानक रूप है, जो कि गुरुद्वारों में प्रतिदिन की जाती ह...

आदि ग्रन्थ

आदि ग्रन्थ या आद ग्रन्थ सिख धर्म से सम्बंधित धार्मिक लिखाईयों का एक संकलन है जिसे पाँचवे सिख गुरु श्री गुरु अर्जन देव जी ने सन् १६०४ में पूरा करा। दसवें सिख ...

आदि शक्ति (सिख धर्म)

सिख धर्म, या सिखी एकेश्वरवादी धर्म है और निराकार का पुजारी है। सिख धर्म में चंडी के अर्थ हैं: विवेक बुद्धी: ऐसी बुद्धि जो अदवैत है, हर वासना से दूऔर अपने मूल...

ईरान में सिख धर्म

ईरान में सिखों का एक बहुत छोटा समुदाय है। 2011 में कुछ 60 सिख परिवार देश में रह रहे थे। समुदाय के सदस्य आपस में पंजाबी और मुख्य ईरानी समुदाय के साथ फ़ारसी और...

कूका

कूका एक सिख संप्रदाय है जिसे नामधारी भी कहते हैं। इस सप्रंदाय की स्थापना रामसिंह नामक एक लुहार ने की थी जिसका जन्म 1824 ई. में लुधियाना जिले के भेणी नामक ग्र...

खंडा (सिख चिन्ह)

खंडा चिन्ह एक सिख धार्मिक, सांस्कृतिक, एवं ऐतिहासिक चिन्ह है जो कई सिख, धर्म एव वष्वदर्षण, सिद्धांतों को ज़ाहिर रूप से दर्शाता है। यह "देगो-तेगो-फ़तेह" के सि...

ख़ालसा

खालसा सिख धर्म के विधिवत् दीक्षाप्राप्त अनुयायियों सामूहिक रूप है। खालसा पंथ की स्थापना गुरु गोबिन्द सिंह जी ने १६९९ को बैसाखी वाले दिन आनंदपुर साहिब में की।...

गटका

गतका एक सिक्खों की पारंपरिक युद्धक कला है। वर्तमान में भी सिक्खों के धार्मिक उत्सवों में इस कला का शस्त्र संचालन प्रदर्शन किया जाता है। गतका शब्द के जन्मदाता...

गुरमत

गुरमत का शाब्दिक अर्थ है गुरु का मत अर्थात्: गुरु के नाम पर संकल्प। यह सिखों द्वारा किसी भी धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक मुद्दे से संबंधित गुरु के नाम पर आयो...

गुरु अंगद देव

अंगद देव या गुरू अंगद देव सिखो के एक गुरू थे। गुरू अंगद देव महाराज जी का सृजनात्मक व्यक्तित्व था। उनमें ऐसी अध्यात्मिक क्रियाशीलता थी जिससे पहले वे एक सच्चे ...

गुरु अमर दास

सवायीये महले तीजे के भले अमरदास गुण तेरे, तेरी उपमा तोहि बनि आवै॥ १॥ पृष्ठ १३९६ गुरू अमर दास जी सिख पंथ के एक महान प्रचारक थे। जिन्होंने गुरू नानक जी महाराज ...

गुरु अर्जुन देव

अर्जुन देव या गुरू अर्जुन देव सिखों के ५वे गुरु थे। गुरु अर्जुन देव जी शहीदों के सरताज एवं शान्तिपुंज हैं। आध्यात्मिक जगत में गुरु जी को सर्वोच्च स्थान प्राप...

गुरु पर्व

नानक देव या गुरू नानक देव सिखों के प्रथम गुरू थे। गुरु नानक देवजी का प्रकाश १५ अप्रैल, १४६९ ई. में तलवंडी रायभोय नामक स्थान पर हुआ। सुविधा की दृष्टि से गुरु ...

गुरु राम दास

राम दास या गुरू राम दास, सिखों के गुरु थे और उन्हें गुरु की उपाधि 30 अगस्त 1574 को दी गयी थी। उन दिनों जब विदेशी आक्रमणकारी एक शहर के बाद दूसरा शहर तबाह कर र...

गुरु हर किशन

गुरू हर किशन साहिब जी का जन्म सावन वदी १० ८वां सावन बिक्रम सम्वत १७१३ ७ जुलाई १६५६ को कीरतपुर साहिब में हुआ। वे गुरू हर राय साहिब जी एवं माता किशन कौर के दूस...

गुरु हरगोबिन्द

गुरू हरगोबिन्द सिखों के छठें गुरू थे। साहिब की सिक्ख इतिहास में गुरु अर्जुन देव जी के सुपुत्र गुरु हरगोबिन्द साहिब की दल-भंजन योद्धा कहकर प्रशंसा की गई है। ग...

चण्डी चरित्र

चण्डी चरित्र सिखों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा रचित देवी चण्डिका की एक स्तुति है। गुरु गोबिन्द सिंह एक महान योद्धा एवं kavi थे। यह स्तुति दशम ग्रंथ ...

चालीस मुक्त

गुरू गोविन्द सिंह जी ने मुगलों के विरूद्ध 1705 ई. में आखिरी लड़ाई मुक्तसर में लडी थी। इस लड़ाई के दौरान गुरू जी के चालीस शिष्य शहीद हो गए थे। गुरू जी के इन च...

चौबीस अवतार

चौबीस अवतार, दशम ग्रन्थ का एक भाग है जिसमें विष्णु के चौबीस अवतारों का वर्णन है। परम्परा से तथा ऐतिहासिक रूप से यह गुरु गोबिन्द सिंह की रचना मानी जाती है। यह...

जपजी साहिब

आदि गुरु श्री गुरुग्रंथ साहब की मूलवाणी जपुजी जगतगुरु श्री गुरुनानकदेवजी द्वारा जनकल्याण हेतु उच्चारित की गई अमृतमयी वाणी है। जपुजी एक विशुद्ध एक सूत्रमयी दा...

ज़फ़रनामा

ज़फ़रनामा अर्थात विजय पत्र गुरु गोविंद सिंह द्वारा मुग़ल शासक औरंगज़ेब को लिखा गया था। ज़फ़रनामा, दसम ग्रंथ का एक भाग है और इसकी भाषा फ़ारसी है। भारत के गौरव...

जाप साहिब

जापु साहिब या जाप साहिब सिखों का प्रातः की प्रार्थना है। इसकी रचना गुरु गोबिन्द सिंह जी ने की थी। जापु साहिब, दशम ग्रन्थ की प्रथम वाणी है। इसका संग्रह भाई मण...

जुझार सिंह

साहिबजादा जुझार सिंह, गुरु गोविन्द सिंह के द्वितीय पुत्र थे। वे माता जीतो के गर्भ से आनन्दपुर साहिब में जनमे थे। नानकशाही पंचांग के अनुसार उनका जन्मदिन अब ९ ...

थाईलैंड में सिख धर्म

सिख धर्म थाईलैंड में लगभग 70.000 अनुयायियों के साथ एक मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक धर्म है। धर्म भारत से प्रवासियों द्वारा लाया गया था जो 19वीं शताब्दी के उत्त...

दसम ग्रंथ

दसम ग्रन्थ, सिखों का धर्मग्रन्थ है जो सतगुर गोबिंद सिंह जी की पवित्र वाणी एवं रचनाओ का संग्रह है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने जीवनकाल में अनेक रचनाएँ की जिनक...

देह सिवा बरु मोहि इहै

देह सिवा बरु मोहि इहै गुरु गोविन्द सिंह द्वारा रचित दसम ग्रंथ के चण्डी चरितर में स्थित एक शबद है। इसमें गुरुजी चण्डी की स्तुति करते हुए उनसे वरदान मांगते हैं...

द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध

द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध पंजाब के सिख प्रशासित क्षेत्रों वाले राज्य तथा अंग्रेजों के ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच 1848-49 के बीच लड़ा गया था। इसके परिणाम स्वरूप स...

ननकाना साहिब

ननकाना साहिब, पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में स्थित एक शहर है। इसका वर्तमान नाम सिखों के पहले गुरू गुरू नानक देव जी के नाम पर पड़ा है। इसका पुराना नाम राय-भोई...

नानकशाही जंतरी

नानकशाही जंतरी या नानकशाही पंचांग एक सौर पंचांग है जिसे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सिख धर्म से सम्बन्धित घटनाओं की तिथियाँ दर्शाने के लिये स्वीकार क...

पंज तख्त

सिख पन्थ में पंज तख्त उन पाँच गुरुद्वारों को कहते हैं जिनका सिख धर्म में विशेष महत्व है। पाँच तख्य ये हैं- अकाल तख्त, दमदमा साहिब, केशगढ़ साहिब, पटना साहिब औ...

पगड़ी

पगड़ी सिपर बांधा जाने वाला परिधान या पहनावा है। पगड़ी धारण करना सिख लोगों के पाँच चिह्नों में से है। पगड़ी विश्व के अनेक समाजों में प्रचलित थी। भारत में भी प...

पाँच क

पाँच ककार का अर्थ क शब्द से नाम प्रारंभ होने वाली उन ५ चीजों से है जिन्हें सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह द्वारा रखे गये सिद्धांतों के अनुसार सभी खालस...

पाँच ककार

अंतिम सिख गुरु गोविन्दसिंहजी ने सिखों को एकजुट करके एक नई शक्ति को जन्म दिया। उन्होंने खालसा पंथ की नींव रखी। सिख सैनिकों को सैनिक वेश में दीक्षित किया। प्रत...

पाकिस्तान में सिख धर्म

आधुनिक पाकिस्तान के क्षेत्र में सिख धर्म की व्यापक विरासत और इतिहास है, हालांकि सिख वर्तमान रूप से पाकिस्तान में एक छोटा सा समुदाय बनाते हैं। अधिकांश सिख पंज...

पीपाजी

पीपाजी गागरोन के शाक्त राजा एवं सन्त कवि थे। वे भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में से एक थे। गुरु ग्रंथ साहिब के अलावा २७ पद, १५४ साखियां, चितावणि व क-कहारा जो...

प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध

प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध पंजाब के सिख राज्य तथा अंग्रेजों के बीच 1845-46 के बीच लड़ा गया था। इसके परिणाम स्वरूप सिख राज्य का कुछ हिस्सा अंग्रेजी राज का हिस्सा ब...

फतेहगढ़ साहिब

फतेहगढ़ साहिब पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिला का मुख्यालय है। यह जिला सिक्‍खों की श्रद्धा और विश्‍वास का प्रतीक है। पटियाला के उत्‍तर में स्थित यह स्‍थान ऐतिहासि...

बाबा गुरदिता

बाबा गुरदिता, गुरु हरगोविन्द के ज्येष्ट पुत्र थे। सिखों के गुरु हर राय उनके ही पुत्र थे। बाबा गुरदिता की स्मृति में पंजाब के कीरतपुर साहिब में एक गुरुद्वारा है।

बिचित्र नाटक

बचित्तर नाटक या बिचित्तर नाटक गुरु गोबिन्द सिंह द्वारा रचित दशम ग्रन्थ का एक भाग है। वास्तव में इसमें कोई नाटक का वर्णन नहीं है बल्कि गुरुजी ने इसमें उस समय ...

बेबे नानकी

बेबे नानकी सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु गुरु नानक देव की बड़ी बहन थीं। बेबे नानकी सिख धर्म की एक महत्वपूर्ण धार्मिक शख्सियत हैं, और पहले गुरसिख के रूप म...

भक्ति आन्दोलन

भक्ति आन्दोलन मध्‍यकालीन भारत का सांस्‍कृतिक इतिहास में एक महत्‍वपूर्ण पड़ाव था। इस काल में सामाजिक-धार्मिक सुधारकों की धारा द्वारा समाज विभिन्न तरह से भगवान...

भाई गुरदास

भाई गुरदास पंजाबी लेखक, इतिहासकार, उपदेशक तथा धार्मिक नेता थे। गुरु ग्रन्थ साहिब का मूल लेखन उन्होने ही किया था। वे चार गुरुओं के साथी भी रहे।

भाई मणी सिंह

भाई मणी सिंह १८वीं शताब्दी के सिख विद्वान तथा शहीद थे। जब उन्होने इस्लाम स्वीक करने से मना कर दिया तो मुगल शासक ने उनके शरीर के सभी जोड़ों से काट-काट कर उनकी...

भाई मतिदास

भाई मतिदास सिख इतिहास के सर्वश्रेष्ठ शहीदों में गिने जाते हैं। वह ब्राह्मण जाति के थे। भाई मतिदास तथा उनके छोटे भाई भाई सती दास और भाई दयाला जी नौवें गुरु गु...

भाई संतोख सिंह

भाई संतोख सिंह वेदांत और सिक्ख दर्शन के विद्वान् और ज्ञानी संप्रदाय के विचारक थे। आपके पूर्वज छिंवा या छिब्बर नाम के मोह्याल ब्राह्मण थे। आपका जन्म अमृतसर मे...

महानकोश

महानकोश या गुरु शबद रत्नाकर महानकोश पंजाबी भाषा का सार्वजनिक ज्ञानकोश है। इसके रचयिता भाई काह्न सिंह नाभा थे। इसमें पंजाबी शब्दों का कोश है जिसमें सिख धर्म क...

माता साहिब कौर

माता साहिब कौर, सिखों के दशम गुरु गोविन्द सिह जी की पत्नी थीं।। उनका विवाह से पहले नाम जीतो था। उनके सुन्दर रूप के कारण उनको सभी सुन्दरी बुलाने लगे। उनके विव...

मास्टर तारा सिंह

मास्टर तारा सिंह शुरूआती तथा मध्य 20वीं सदी के एक प्रमुख सिक्ख राजनीतिक और धार्मिक नेता थे। उन्होंने अंग्रेज़ सरकार के दौरान सिक्ख धर्म को बृहत् हिन्दू धर्म ...

रहरास साहिब

रहरास साहिब सिखों द्वारा शाम के समय की जाने वाली प्रार्थना है। इस प्रार्थना को पाँच गुरुओं गुरु नानक देव जी, गुरु अमरदास जी, गुरु रामदास जी, गुरु अर्जन देव ज...

राष्ट्रीय सिख संगत

राष्ट्रीय सिख संगत एक सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था है जो गुरू ग्रन्थ साहब के सन्देशों को पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में प्रसारित करने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है...

लंगर (सिख धर्म)

लंगर सिखों के गुरुद्वारों में प्रदान किए जाने वाले नि:शुल्क, शाकाहारी भोजन को कहते हैं। लंगर, सभी लोगों के लिये खुला होता है चाहे वे सिख हो या नहीं। लंगर शब्...

वाहेगुरू

वाहेगुरू या वाहिगुरू शब्द परमात्मा की प्रशन्सा को व्यतीत करता है। सिख एक दूसरे को नमस्कार करने लिए इस को भी इस्तेमाल करते हैं: ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖਾਲਸਾ ਯਾ ਵਾਹਿਗੁ...

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी भारत में मौजूद संस्था है जो गुरुद्वारों के रख-रखाव के लिये उत्तरदायी है। इसका अधिकार क्षेत्र तीन राज्यों पंजाब, हरियाणा और ह...

संत भाषा

संत भाषा या गुरुमुखी एक पवित्र सम्पर्क भाषा है, जिसमें उत्तर भारत की भारतीय-आर्य भाषाओं की आम शब्दावली आती है। जो लोग हिंदी, उर्दू या पंजाबी भाषा जानते हैं, ...

सतनाम

सतनाम= सत्नाम, सत्तनाम, परमात्मा का सच्चा--अविनाशी या अपरिवर्तनशील नाम, आदिनाद। सतनाम या सतिनाम गुरुमुखी: ਸਤਿ ਨਾਮੁ गुरु ग्रन्थ साहिब में प्रयुक्त प्रधान शब्द...

सनातन सिख

सनातन सिख वे हैं जो सिख धर्म को हिन्दू धर्म का अंग मानते हैं। उन्होने तत खालसा का विरोध किया था, विशेषतः सिंह सभा आन्दोलन के समय। १८७३ में सनातन सिखों ने खेम...

सन्त सिपाही

सिख दर्शन में सन्त सिपाही उस व्यक्ति के लिये प्रयुक्त होता है जो मूलतः सन्त हो और धर्म एवं न्याय की रक्षा के लिये सिपाही भी बन जाये। गुरू गोबिन्द सिंह एवं बन...