सामाजिक परिवर्तन

सामाजिक परिवर्तन, समाज के आधारभूत परिवर्तनों पर प्रकाश डालने वाला एक विस्तृत एवं कठिन विषय है। इस प्रक्रिया में समाज की संरचना एवं कार्यप्रणाली का एक नया जन्म होता है। इसके अन्तर्गत मूलतः प्रस्थिति, वर्ग, स्तर तथा व्यवहार के अनेकानेक प्रतिमान बनते एवं बिगड़ते हैं। समाज गतिशील है और समय के साथ परिवर्तन अवश्यंभावी है।
आधुनिक संसार में प्रत्येक क्षेत्र में विकास हुआ है तथा विभिन्न समाजों ने अपने तरीके से इन विकासों को समाहित किया है, उनका उत्तर दिया है, जो कि सामाजिक परिवर्तनों में परिलक्षित होता है। इन परिवर्तनों की गति कभी तीव्र रही है कभी मन्द। कभी-कभी ये परिवर्तन अति महत्वपूर्ण रहे हैं तो कभी बिल्कुल महत्वहीन। कुछ परिवर्तन आकस्मिक होते हैं, हमारी कल्पना से परे और कुछ ऐसे होते हैं जिसकी भविष्यवाणी संभव थी। कुछ से तालमेल बिठाना सरल है जब कि कुछ को सहज ही स्वीकारना कठिन है। कुछ सामाजिक परिवर्तन स्पष्ट है एवं दृष्टिगत हैं जब कि कुछ देखे नहीं जा सकते, उनका केवल अनुभव किया जा सकता है। हम अधिकतर परिवर्तनों की प्रक्रिया और परिणामों को जाने समझे बिना अवचेतन रूप से इनमें शामिल रहे हैं। जब कि कई बार इन परिवर्तनों को हमारी इच्छा के विरुद्ध हम पर थोपा गया है। कई बार हम परिवर्तनों के मूक साक्षी भी बने हैं। व्यवस्था के प्रति लगाव के कारण मानव मस्तिष्क इन परिवर्तनों के प्रति प्रारंभ में शंकालु रहता है परन्तु शनैः उन्हें स्वीकाकर लेता है। वध दल

1. सामाजिक परिवर्तन का अर्थ
सामाजिक परिवर्तन के अन्तर्गत हम मुख्य रूप से तीन तथ्यों का अध्ययन करते हैं-
क सामाजिक संरचना में परिवर्तन,
ख संस्कृति में परिवर्तन एवं
ग परिवर्तन के कारक।
सामाजिक परिवर्तन के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए कुछ प्रमुख परिभाषाओं पर विचार करेंगे।
मकीवर एवं पेज R.M. MacIver and C.H. Page ने अपनी पुस्तक सोसायटी society में सामाजिक परिवर्तन को स्पष्ट करते हुए बताया है कि समाजशास्त्री होने के नाते हमारा प्रत्यक्ष संबंध सामाजिक संबंधों से है और उसमें आए हुए परिवर्तन को हम सामाजिक परिवर्तन कहेंगे।
डेविस K. Davis के अनुसार सामाजिक परिवर्तन का तात्पर्य सामाजिक संगठन अर्थात् समाज की संरचना एवं प्रकार्यों में परिवर्तन है।
एच0 एम0 जॉनसन H.M. Johnson ने सामाजिक परिवर्तन को बहुत ही संक्षिप्त एवं अर्थपूर्ण शब्दों में स्पष्ट करते हुए बताया कि मूल अर्थों में सामाजिक परिवर्तन का अर्थ संरचनात्मक परिवर्तन है। जॉनसन की तरह गिडेन्स ने बताया है कि सामाजिक परिवर्तन का अर्थ बुनियादी संरचना Underlying Structure या बुनियादी संस्था Basic Institutions में परिवर्तन से है।
ऊपर की परिभाषाओं के संबंध में यह कहा जा सकता है कि परिवर्तन एक व्यापक प्रक्रिया है। समाज के किसी भी क्षेत्र में विचलन को सामाजिक परिवर्तन कहा जा सकता है। विचलन का अर्थ यहाँ खराब या असामाजिक नहीं है। सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक, नैतिक, भौतिक आदि सभी क्षेत्रों में होने वाले किसी भी प्रकार के परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन कहा जा सकता है। यह विचलन स्वयं प्रकृति के द्वारा या मानव समाज द्वारा योजनाबद्ध रूप में हो सकता है। परिवर्तन या तो समाज के समस्त ढाँचे में आ सकता है अथवा समाज के किसी विशेक्ष पक्ष तक ही सीमित हो सकता है। परिवर्तन एक सर्वकालिक घटना है। यह किसी-न-किसी रूप में हमेशा चलने वाली प्रक्रिया है। परिवर्तन क्यों और कैसे होता है, इस प्रश्न पर समाजशास्त्री अभी तक एकमत नहीं हैं। इसलिए परिवर्तन जैसी महत्वपूर्ण किन्तु जटिल प्रक्रिया का अर्थ आज भी विवाद का एक विषय है। किसी भी समाज में परिवर्तन की क्या गति होगी, यह उस समाज में विद्यमान परिवर्तन के कारणों तथा उन कारणों का समाज में सापेक्षिक महत्व क्या है, इस पर निर्भर करता है। सामाजिक परिवर्तन के स्वरूप को स्पष्ट करने के लिए यहाँ इसकी प्रमुख विशेषताओं की चर्चा अपेक्षित है।

2. सामाजिक परिवर्तन की विशेषताएँ
विशेषतायें निम्नलिखित हैं।
1 सामाजिक परिवर्तन एक विश्वव्यापी प्रक्रिया Universal Process है। अर्थात् सामाजिक परिवर्तन दुनिया के हर समाज में घटित होता है। दुनिया में ऐसा कोई भी समाज नजर नहीं आता, जो लम्बे समय तक स्थिर रहा हो या स्थिर है। यह संभव है कि परिवर्तन की रफ्तार कभी धीमी और कभी तीव्र हो, लेकिन परिवर्तन समाज में चलने वाली एक अनवरत प्रक्रिया है।
2 सामुदायिक परिवर्तन ही वस्तुतः सामाजिक परिवर्तन है। इस कथन का मतलब यह है कि सामाजिक परिवर्तन का नाता किसी विशेष व्यक्ति या समूह के विशेष भाग तक नहीं होता है। वे ही परिवर्तन सामाजिक परिवर्तन कहे जाते हैं जिनका प्रभाव समस्त समाज में अनुभव किया जाता है।
3 सामाजिक परिवर्तन के विविध स्वरूप होते हैं। प्रत्येक समाज में सहयोग, समायोजन, संघर्ष या प्रतियोगिता की प्रक्रियाएँ चलती रहती हैं जिनसे सामाजिक परिवर्तन विभिन्न रूपों में प्रकट होता है। परिवर्तन कभी एकरेखीय Unilinear तो कभी बहुरेखीय Multilinear होता है। उसी तरह परिवर्तन कभी समस्यामूलक होता है तो कभी कल्याणकारी। परिवर्तन कभी चक्रीय होता है तो कभी उद्विकासीय। कभी-कभी सामाजिक परिवर्तन क्रांतिकारी भी हो सकता है। परिवर्तन कभी अल्प अवधि के लिए होता है तो कभी दीर्घकालीन।
4 सामाजिक परिवर्तन की गति असमान तथा सापेक्षिक Irregular and Relative होती है। समाज की विभिन्न इकाइयों के बीच परिवर्तन की गति समान नहीं होती है।
5 सामाजिक परिवर्तन के अनेक कारण होते हैं। समाजशास्त्री मुख्य रूप से सामाजिक परिवर्तन के जनसांख्यिकीय Demographic, प्रौद्योगिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक कारकों की चर्चा करते हैं। इसके अलावा सामाजिक परिवर्तन के अन्य कारक भी होते हैं, क्योंकि मानव-समूह की भौतिक Material एवं अभौतिक Non-material आवश्यकताएँ अनन्त हैं और वे बदलती रहती हैं।
6 सामाजिक परिवर्तन की कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। इसका मुख्य कारण यह है कि अनेक आकस्मिक कारक भी सामाजिक परिवर्तन की स्थिति पैदा करते हैं।
विलबर्ट इ॰ मोर Wilbert E. Moore, 1974 ने आधुनिक समाज को ध्यान में रखते हुए सामाजिक परिवर्तन की विशेषताओं की चर्चा अपने ढंग से की है, वे हैं-
1 सामाजिक परिवर्तन निश्चित रूप से घटित होते रहते हैं। सामाजिक पुनरुत्थान के समय में परिवर्तन की गति बहुत तीव्र होती है।
2 बीते समय की अपेक्षा वर्तमान में परिवर्तन की प्रक्रिया अत्यधिक तीव्र होती है। आज परिवर्तनों का अवलोकन हम अधिक स्पष्ट रूप में कर सकते हैं।
3 परिवर्तन का विस्तार सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों में देख सकते हैं। भौतिक वस्तुओं के क्षेत्र में, विचारों एवं संस्थाओं की तुलना में, परिवर्तन अधिक तीव्र गति से होता है।
4 हमारे विचारों एवं सामाजिक संरचना पर स्वाभाविक ढंग और सामान्य गति के परिवर्तन का प्रभाव अधिक पड़ता है।
5 सामाजिक परिवर्तन का अनुमान तो हम लगा सकते हैं, लेकिन निश्चित रूप से हम इसकी भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं।
6 सामाजिक परिवर्तन गुणात्मक Qualitative होता है। समाज की एक इकाई दूसरी इकाई को परिवर्तित करती है। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है, जब तक पूरा समाज उसके अच्छे या बुरे प्रभावों से परिचित नहीं हो जाता।
7 आधुनिक समाज में सामाजिक परिवर्तन न तो मनचाहे ढंग से किया जा सकता है और न ही इसे पूर्णतः स्वतंत्और असंगठित छोड़ दिया जा सकता है। आज हर समाज में नियोजन Planning के द्वारा सामाजिक परिवर्तन को नियंत्रित कर वांछित लक्ष्यों की दिशा में क्रियाशील किया जा सकता है।

3. सामाजिक परिवर्तन के मुख्य स्रोत
कुछ समाजशास्त्रियों का कहना है कि सामाजिक परिवर्तन के कुछ मुख्य स्रोत हैं। ये इस प्रकार हैं-
1 खोज Discovery: मनुष्य ने अपने ज्ञान एवं अनुभवों के आधापर अपनी समस्याओं को सुलझाने और एक बेहतर जीवन व्यतीत करने के लिए बहुत तरह की खोज की है। जैसे शरीर में रक्त संचालन, बहुत सारी बीमारियों के कारणों, खनिजों, खाद्य पदार्थों, पृथ्वी गोल है एवं वह सूर्य की परिक्रमा करती है आदि हजारों किस्म के तथ्यों की मानव ने खोज की, जिनसे उनके भौतिक एवं अभौतिक जीवन में काफी परिवर्तन आया।
2 अविष्कार Invention: विज्ञान और प्रौद्यागिकी के जगत में मनुष्य के आविष्कार इतने अधिक हैं कि उनकी गिनती करना मुश्किल है। आविष्कारों ने मानव समाज में एक युगान्तकारी एवं क्रान्तिकारी परिवर्तन ला दिया है।
3 प्रसार Diffusion: सांस्कृतिक जगत के परिवर्तन में प्रसार का प्रमुख योगदान रहा है। पश्चिमीकरण, आधुनिकीकरण, एवं भूमंडलीकरण जैसी प्रक्रियाओं का मुख्य आधार प्रसार ही रहा है। आधुनिक युग में प्रौद्योगिकी का इतना अधिक विकास हुआ है कि प्रसार की गति बहुत तेज हो गयी है।
4 आन्तरिक विभेदीकरण Internal Differentiation: जब हम सामाजिक परिवर्तन के सिद्धान्तों को ध्यान में रखते हैं, तो ऐसा लगता है कि परिवर्तन का एक चौथा स्रोत भी संभव है- वह है आन्तरिक विभेदीकरण। इस तथ्य की पुष्टि उद्विकासीय सिद्धान्त Evolutionary Theory के प्रवर्तकों के विचारों से होती है। उन लोगों का मानना है कि समाज में परिवर्तन समाज के स्वाभाविक उद्विकासीय प्रक्रिया से ही होता है। हरेक समाज अपनी आवश्यकताओं के अनुसार धीरे-धीरे विशेष स्थिति में परिवर्तित होता रहता है। समाजशास्त्रियों एवं मानवशास्त्रियों ने अपने उद्विकासीय सिद्धान्त में स्वतः चलने वाली आन्तरिक विभेदीकरण की प्रक्रिया पर काफी बल दिया है।

4. सामाजिक परिवर्तन से सम्बद्ध कुछ अवधारणाएँ
सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया कई रूपों में प्रकट होती हैं, जैसे- उद्विकास, प्रगति, विकास, सामाजिक आन्दोलन, क्रांति इत्यादि। चूँकि इन सामाजिक प्रक्रियाओं का सामाजिक परिवर्तन से सीधा संबंध है या कभी-कभी इन संबंधों को सामाजिक परिवर्तन का पर्यायवाची माना जाता है, इसलिए इन शब्दों के अर्थ के संबंध में काफी उलझनें हैं। इनका स्पष्टीकरण निम्नलिखित हैं।

4.1. सामाजिक परिवर्तन से सम्बद्ध कुछ अवधारणाएँ उद्विकास
‘उद्विकास’ Evolution शब्द का प्रयोग सबसे पहले जीवविज्ञान के क्षेत्र में चार्ल्स डार्विन ने किया था। डार्विन के अनुसार उद्विकास की प्रक्रिया में जीव की संरचना सरलता से जटिलता Simple to Complex की ओर बढ़ती है। यह प्रक्रिया प्राकृतिक चयन Natural Selection के सिद्धान्त पर आधारित है। आरंभिक समाजशास्त्री हरबर्ट स्पेन्सर ने जैविक परिवर्तन Biological Changes की भाँति ही सामाजिक परिवर्तन को भी कुछ आन्तरिक शक्तियों के कारण संभव माना है और कहा है कि उद्विकास की प्रक्रिया धीरे-धीरे निश्चित स्तरों से गुजरती हुई पूरी होती है।
उद्विकास की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए मकीवर एवं पेज ने लिखा है कि उद्विकास एक किस्म का विकास है। पर प्रत्येक विकास उद्विकास नहीं है क्योंकि विकास की एक निश्चित दिशा होती है, पर उद्विकास की कोई निश्चित दिशा नहीं होती है। किसी भी क्षेत्र में विकास करना उद्विकास कहा जाएगा। मकीवर एवं पेज ने बताया है कि उद्विकास सिर्फ आकार में नहीं बल्कि संरचना में भी विकास है। यदि समाज के आकार में वृद्धि नहीं होती है और वह पहले से ज्यादा आन्तरिक रूप से जटिल हो जाता है तो उसे उद्विकास कहेंगे।

4.2. सामाजिक परिवर्तन से सम्बद्ध कुछ अवधारणाएँ प्रगति
परिवर्तन जब अच्छाई की दिशा में होता है तो उसे हम प्रगति Progress कहते हैं। प्रगति सामाजिक परिवर्तन की एक निश्चित दिशा को दर्शाता है। प्रगति में समाज-कल्याण और सामूहिक-हित की भावना छिपी होती है। ऑगबर्न एवं निमकॉफ ने बताया है कि प्रगति का अर्थ अच्छाई के निमित्त परिवर्तन है। इसलिए प्रगति इच्छित परिवर्तन है। इसके माध्यम से हम पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों को पाना चाहते हैं। मकीवर एवं पेज आगाह करते हुए कहा है कि हम लोगों को उद्विकास और प्रगति को एक ही अर्थ में प्रयोग नहीं करना चाहिए। दोनों बिल्कुल अलग-अलग अवधारणाएँ हैं।

4.3. सामाजिक परिवर्तन से सम्बद्ध कुछ अवधारणाएँ विकास
जिस प्रकार उद्विकास के अर्थ बहुत स्पष्ट एवं निश्चित नहीं हैं, विकास Development की अवधारणा भी बहुत स्पष्ट नहीं है। समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य में विकास का अर्थ सामाजिक विकास से है। प्रारंभिक समाजशास्त्रियों विशेषकर कौंत, स्पेन्सर एवं हॉबहाउस ने सामाजिक उद्विकास, प्रगति, एवं सामाजिक विकास को एक ही अर्थ में प्रयोग किया था। आधुनिक समाजशास्त्री इन शब्दों को कुछ विशेष अर्थ में ही इस्तेमाल करते हैं।
आज समाजशास्त्र के क्षे त्र में विकास से हमारा तात्पर्य मुख्यतः सामाजिक विकास से है। इसका प्रयोग विशेषकर उद्योगीकरण एवं आधुनिकीकरण के चलते विकसित एवं विकासशील देशों के बीच अन्तर स्पष्ट करने के लिए होता है। सामाजिक विकास में आर्थिक विकास का भी भाव छिपा होता है और उसी के तहत हम परम्परागत समाज Traditional Society, संक्रमणशील समाज Transitional Society एवं आधुनिक समाज Modern Society की चर्चा करते हैं। आधुनिक शिक्षा का विकास भी एक प्रकार का सामाजिक विकास है। उसी तरह से कृषि पर आधारित सामाजिक व्यवस्था से उद्योग पर आधारित सामाजिक व्यवस्था की ओर अग्रसर होना भी सामाजिक विकास कहा जाएगा। दूसरे शब्दों में, सामन्तवाद Feudalism से पूँजीवाद Capitalism की ओर जाना भी एक प्रकार का विकास है।

4.4. सामाजिक परिवर्तन से सम्बद्ध कुछ अवधारणाएँ सामाजिक आन्दोलन
सामाजिक आन्दोलन सामाजिक परिवर्तन का एक बहुत प्रमुख कारक रहा है। विशेषकर दकियानूसी समाज में सामाजिक आन्दोलनों के द्वारा काफी परिवर्तन आए हैं। गिडेन्स के अनुसार सामूहिक आन्दोलन व्यक्तियों का ऐसा प्रयास है जिसका एक सामान्य उद्देश्य होता है और उद्देश्य की पूर्ति के लिए संस्थागत सामाजिक नियमों का सहारा न लेकर लोग अपने ढंग से व्यवस्थित होकर किसी परम्परागत व्यवस्था को बदलने का प्रयास करते हैं।
गिडेन्स ने कहा है कि कभी-कभी ऐसा लगता है कि सामाजिक आन्दोलन और औपचारिक संगठन Formal Organization एक ही तरह की चीजें हैं, पर दोनों बिल्कुल भिन्न हैं। सामाजिक आन्दोलन के अन्तर्गत नौकरशाही व्यवस्था जैसे नियम नहीं होते, जबकि औपचारिक व्यवस्था के अन्तर्गत नौकरशाही नियम-कानून की अधिकता होती है। इतना ही नहीं दोनों के बीच उद्देश्यों का भी फर्क होता है। उसी तरह से कबीर पंथ, आर्य समाज, बह्मो समाज या हाल का पिछड़ा वर्ग आन्दोलन Backward Class Movement को सामाजिक आन्दोलन कहा जा सकता है। औपचारिक व्यवस्था नहीं।

4.5. सामाजिक परिवर्तन से सम्बद्ध कुछ अवधारणाएँ क्रांति
सामाजिक आन्दोलन से भी ज्यादा सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम क्रांति Revolution है। क्रांति के द्वारा सामाजिक परिवर्तन के अनगिनत उदाहरण मौजूद हैं। लेकिन पिछली दो-तीन शताब्दियों में मानव इतिहास में काफी, बड़ी-बड़ी क्रांतियाँ आई हैं, जिससे कुछ राष्ट्रों में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में युगान्तकारी परिवर्तन हुए हैं। इस संदर्भ में 1775-83 की अमेरिकी क्रांति एवं 1789 की फ्रांसीसी क्रांति विशेष रूप से उललेखनीय हैं। इन क्रांतियों के चलते आज समस्त विश्व में स्वतंत्रता Liberty, सामाजिक समानता और प्रजातंत्र की बात की जाती है। उसी तरह से रूसी क्रांति और चीनी क्रांति का विश्व स्तर पर अपना ही महत्व है। अब्राम्स Abrams, 1982 ने बताया है कि विश्व में अधिकांश क्रांतियाँ मौलिक सामाजिक पुनर्निमाण के लिए हुई हैं। अरेंड Nannah Arendt, 1963 के अनुसार क्रांतियों का मुख्य उद्देश्य परम्परागत व्यवस्था से अपने-आपको अलग करना एवं नये समाज का निर्माण करना है। इतिहास में कभी-कभी इसका अपवाद भी देखने को मिलता है। कुछ ऐसी भी क्रांतियाँ हुई हैं, जिनके द्वारा हम समाज को और भी पुरातन समय में ले जाने की कोशिश करते हैं।

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शिक्षा सामाजिक परिवर्तन के कारक के रूप में.

भारत में एक सामाजिक परिवर्तन समय की माँग है कहती. स्वच्छता की संस्कृति ओर सामाजिक परिवर्तन। प्रास्ताविक. स्वच्छता प्रत्येक की अनिवार्यता व आवश्यकता है। उनके उपयोग व महत्त्व को निर्विकल्प कह सकते है। स्वच्छता की ओर विध विध द्रष्टिकोण स्थित होते हैं। स्वच्छता की विविध. सामाजिक परिवर्तन के रेखीय सिद्धांत. Chhatarpur News: सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक Naidunia. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन ने ये बातें आल इंडिया लॉयर्स यू्िनयन द्वारा आयोजित सामाजिक परिवर्तन में अधिवक्ताओं की भूमिका पर आयोजित सेमिनार में कहीं। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता की भूमिका समाज में नेतृत्वकारी की. सामाजिक परिवर्तन के विभिन्न सिद्धांतों पर चर्चा. भारत के राष्ट्रपति का सामाजिक परिवर्तन के लिए. सामाजिक परिवर्तन के चक्रीय सिध्दांन्त को किसने दिया है: 1​, पैरटो. 2, कूले. 3, दुर्खीम. 4 सामाजिक परिवर्तन के चक्रीय सिध्दांन्त को किसने दिया है, निम्न में सें किस मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है किसने कहा है, निम्नलिखित में सें.

सामाजिक परिवर्तन में शिक्षा का महत्व.

Download आधुनिक भारत में सामाजिक परिवर्तन by सिंह. व्यभिचार या विवाह में बेवफाई अपराध है या सामाजिक कुरीति? यह बहस पुरानी है। इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि सामाजिक सम्बन्धों में जबर्दस्त परिवर्तन आया है। आज यह व्यक्ति प्रधान हो गए हैं। महिलाएं अब पहले से कहीं अधिक. सामाजिक परिवर्तन का निष्कर्ष. सामाजिक परिवर्तन की जरूरत Sarita Magazine. होता है, ये प्रश्न आज भी पूरी तरह हल नहीं हो पाये हैं। अंग्रेज कवि लार्ड टेनिसन का मत है. कि प्राचीन क्रम में नये को स्थान देने के लिए परिवर्तन होता है। प्रो. ग्रीन लिखते हैं. सामाजिक परिवर्तन इसलिए होता है क्योंकि प्रत्येक समाज संतुलन के. शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का एक अभिन्न अंग. सामाजिक परिवर्तन और विकास Navbharat अपना ब्लॉग. सामाजिक परिवर्तन की सैद्धान्तिमक व्याख्या पहले समाजशास्त्र के जनक विचारकों ने की थी। शायद सबसे पहले ई. 1893 में उन्होंने सामाजिक परिवर्तन की व्याख्या द्वन्द्वात्मक भौतिकवादी के संदर्भ में की है। इनके अनुसार उत्पादन. आधुनिक भारत में सामाजिक परिवर्तन pdf. सामाजिक समास्याएं और सामाजिक परिवर्तन Samajik. सामाजिक व्यवस्था और सामाजिक ढांचे के सिद्धांतों सामाजिक विज्ञान और सामाजिक अनुसंधान की तकनीक की क्रियाविधि केंद्र ने आधुनिकीकरण, पोस्ट आधुनिकता, वैश्वीकरण, विकास, सामाजिक परिवर्तन, सामाजिक आंदोलनों, व्यवसायों की.

Buy विजय विक्रम सिंह भारत में विधि एवं सामाजिक.

भारत मे सामाजिक परिवर्तन एवं विकास: कक्षा 12 के लिए समाजशास्त्र की पाठ्यपुस्तक Bharat mein samajik parivartan evam vikas: Kaksha 12 ke liye Samajshastra ki pathyapustak समाजशास्त्र कक्षा 12. by एनसीईआरटी NCERT. Series: Sociology Published by NCERT New Delhi. राजनीतिक बनाम सामाजिक परिवर्तन BBC. राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद आज माउंट आबू, राजस्‍थान में ब्रह्मकुमारी के मुख्यालय में सामाजिक परिवर्तन के लिए महिलाओं के सशक्तिकरण पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हुए और उसे संबोधित किया। इस अवसर पर. सीएसएसएस एमफिल कार्यक्रम Welcome to Jawaharlal Nehru. सामाजिक परिवर्तन संस्था नाम के लोगों की प्रोफ़ाइल देखें. सामाजिक परिवर्तन संस्था और अपने अन्य परिचितों से जुड़ने के लिए Facebook में शामिल करें. Facebook.

समूह और सामाजिक परिवर्तन में छोटे समूहों का महत्व.

शराब पर पूर्ण रोक का अभियान सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई है. वर्तमान सामाजिक विद्रूप को दूकर बेहतर समाज स्थापित करना बड़ी चुनौती है. परिवर्तन की लड़ाई में आर्थिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है, लेकिन शराब की आय को त्यज्य माना जाना चाहिए. सामाजिक परिवर्तन का उपकरण है संविधान अमर उजाला. सामाजिक परिवर्तन Социальные изменения. राष्‍ट्रपति ने माउंट आबू में सामाजिक परिवर्तन के. डिजिटल भारत ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक प्रगति एवं सामाजिक परिवर्तन हेतु एक प्लेटफॉर्म पर सेमिनार. Location: Raipur, Chhattisgarh. Local Contact: Name: आलोक श्रीवास्तव. Phone no: 0755 2575502 to 06. Email: sro2in. Related.

सामाजिक परिवर्तन का नया दर्शन है हमारा संविधान.

सामाजिक परिवर्तन में आर्थिक निर्धारणवाद की अवधारणा किससे जुड़ी है? सामाजिक परिवर्तन में आर्थिक राजनीतिक तथा सामाजिक परिवर्तन अभियान से जुड़ी हुई है. सामाजिक परिवर्तन जो होता है जिस समाज में हो रहे हैं किसी तरह के बदलाव. सामाजिक परिवर्तन की अवधारणा, परिभाषा और Scotbuzz. आधुनिक भारत में सामाजिक परिवर्तन Adhunik Bharat mein samajik parivartan J.P. Singh. By: सिंह, जे. पी. Singh, J.P. Material type: materialTypeLabel BookPublisher: New Delhi PHI learning private limited, 2012​Description: 349p. 22cm.ISBN: 9788120328303.Subject s Social change India​DDC. आधुनिक भारत में सामाजिक परिवर्तन Adhunik Bharat. भारत में एक सामाजिक परिवर्तन समय की माँग है कहती है अमृता गंगोत्रा डायरेक्टर टेक्नोलॉजी,वोडाफ़ोन हंगरी. Date 11 10 ​2018 Read: 7 mins. Read in English. टुमॉरो मेकर्स के साथ बातचीत में अमृता गंगोत्रा, डायरेक्टर टेक्नोलॉजी,वोडाफ़ोन हंगरी​. सामाजिक परिवर्तन में शिक्षा का महत्व gk question. Title: Unit 13 सामाजिक परिवर्तन अवधारणा और सामाजिक परिवर्तन में सम्बद्ध कारक. Issue Date: 2017. Publisher: IGNOU. URI.​ 123456789 29097. Appears in Collections: BSWE 001 Vol. I समाज कार्य परिचय. स्वच्छता की संस्कृति और सामाजिक परिवर्तन Hindi. Buy विजय विक्रम सिंह भारत में विधि एवं सामाजिक परिवर्तन Law and Social Transformation in India book online at best prices in India on. Read विजय विक्रम सिंह भारत में विधि एवं सामाजिक परिवर्तन Law and Social Transformation in India book reviews. सामाजिक परिवर्तन news in hindi, सामाजिक परिवर्तन से. आधुनिक भारत में सामाजिक परिवर्तन. आधुनिक भारत में सामाजिक परिवर्तन. 33% Off. 7198. views. View Snapshot i. Selling Price ₹​371.25. ₹412.50. MRP ₹550.00. You will save ₹178.75 after 33% Discount. Save extra with 3 Offers. Get ₹ 50. Instant Cashback on the purchase of ₹ 400 or above.

बिहार में पूर्ण शराबबंदी से सामाजिक परिवर्तन की.

अध्याय 2. ग्रामीण तथा नगरीय समाज में सामाजिक परिवर्तन. तथा सामाजिक व्यवस्था. ऐसा अकसर कहा जाता है कि परिवर्तन ही का पृथ्वी पर अस्तित्व तकरीबन 5.00.000 पाँच. समाज का अपिरवर्तनीय पक्ष है। आधुनिक समाज लाख वर्षों से है, परंतु उनकी सभ्यता. अवधारणा और सामाजिक परिवर्तन में eGyanKosh. साहित्य और सामाजिक परिवर्तन जन्म 5 अक्टूबर 1965, भोजपुर, बिहार भाषा हिंदी, अंग्रेजी विधाएँ कविता, सामाजिक इतिहास मुख्य कृतियाँ कविता संग्रह सच सुने कई दिन हुए, शब्दपदीयम, खुदाई में हिंसा संपादन दलित वैचारिकी की दिशाएँ, प्रयाग. Buy आधुनिक भारत में सामाजिक परिवर्तन: २१वीं सदी. कठिन है। कुछ सामाजिक परिवर्तन स्पष्ट है एवं दृष्टिगत हैं जब कि कुछ देखे नहीं जा. सकते, उनका केवल अनुभव किया जा सकता है। हम अधिकतर परिवर्तनों की प्रक्रिया. 2. Page 3. और परिणामों को जाने समझे बिना अवचेतन रूप से इनमें शामिल रहे हैं। जब कि कई.

सामाजिक परिवर्तन और विकास में महिलाओं का रोल.

सामाजिक परिवर्तन एक दिन बल्ब ने पुकारा, मै हूं एक निर्जीव सहारा। फिर भी अंधकार मिटाता हूं, भूले भटकोंं को राह दिखाता हूं। अंधकार में प्रकाश लाता हूं, निराशा में उम्मीद जगाता हूं। तुम सजीव. सामाजिक परिवर्तन की ताज़ा ख़बर, सामाजिक. श्रीनगर। संविधान दिवस के अवसर पर गढ़वाल विवि में गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि संविधान सामाजिक परिवर्तन का उपकरण है। वक्ताओं ने संविधान दिवस को प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों.

File सामाजिक परिवर्तन में आई.सी.टी. भाग 04 NROER.

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी ने इंसान को सशक्त बनाया है। इंटरनेट ने इस ज्ञान को असंख्य लोगों की पहुंच में ला दिया है​। और सोशल मीडिया ने लोगों के बीच की दूरी को कम कर दिया है। इसका असर सामाजिक न्याय के क्षेत्र में भी पड़ा है।. Page 1 चतुर्थ अध्याय सामाजिक परिवर्तन से तात्पर्य. उन्होंने कहा कि बसपा ने हमेशा सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति के लिए प्रयास कि ए हैं, ये प्रयास आगे भी बराबर जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि हमें सर्वसमाज के लोगों को पार्टी के उददेश्य समझाएं और पार्टी से जोड़कर समाज में. नवाचार युक्‍त शिक्षा न केवल सामाजिक, आर्थिक. शहर में सामाजिक परिवर्तन. औद्योगिक शहर में जीवन के रुप रंग ने परिवार की उपादेयता और स्वरुप को पूरी तरह बदल डाला। परिवार के सदस्यों के बीच अब तक जो बंधन थे वे ढीले पड़ने लगे। मज़दूर वर्ग में विवाह संस्था टूटने की कगापर पहुँच गर्इ। दूसरी ओर.

डिटेल्स Details: Vani Prakashan.

कक्षा 12 समाज शास्त्र के नोट्स भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास Page 1. कक्षा 12 समाज शास्त्र के नोट्स भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास Page 2. कक्षा 12 समाज शास्त्र के नोट्स भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास Page 3. कक्षा. कक्षा 12 समाज शास्त्र के नोट्स भारत में Aglasem. अररिया! बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यहां बुधवार को कहा कि राज्य में पूर्ण शराबबंदी से सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद पड़ गई है। शराबबंदी की भावना बिहार की सीमा से निकलकर अब दूसरे राज्यों की ओर जाने लगी है।.

9788120352322 आधुनिक PHI Learning.

हमारा संविधान कोरी कल्पना का दस्तावेज नहीं, बल्कि इसमें सामाजिक परिवर्तन का नया दर्शन है। हमारे राष्ट्र निर्माण की आधारशिला और हमारे राष्ट्र का भविष्य भी इसमें है, इसी से नई समाज व्यवस्था निर्मित होगी। यह बात कबीर संत. सामाजिक परिवर्तन Social Change in hindi परिवर्तन की. सामाजिक परिवर्तन के अनेकों कारण हो सकते हैं और यही कारण सामाजिक परिवर्तन को अन्य परिवर्तनों से भिन्न बनाते हैं। परिवर्तन चाहे किसी भी प्रकार को हो वह समाज पर प्रभाव अवश्य डालता है और इसी लिए यह कहा जा सकता है की सामाजिक. निरौपचारिक शिक्षा के सामाजिक परिवर्तन OurHindi. निरौपचारिक शिक्षा के सामाजिक परिवर्तन में योगदान का आलोचनात्मक अध्ययन Niroupcharik Shiksha Ke Samajik Parivartan Me Yogdan Ka Alochnatmak Adhyayan के बारे में अधिक जानकारी इस पुस्तक का नाम निरौपचारिक शिक्षा के सामाजिक परिवर्तन में.

अनटाइटल्ड Shodhganga.

अध्यात्म पर आधारित व्यक्तिगत परिवर्तन द्वारा मानवता के नव ​निर्माण में संलग्न यह संस्थान आज विश्व पटल पर प्रभावी भूमिका निभा रहा है।. सामाजिक परिवर्तन को अन्य परिवर्तनों से किस. सामाजिक परिवर्तन का तात्पर्य सामाजिक संरचना में होने वाले परिवर्तन से है चूँकि सामाजिक संरचना वर्तमान संबंधों का ताना बाना है, अतः संबंधों में होने वाले परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन कहते हैं सामाजिक संबंधों में यह. डिजिटल भारत ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक. आधुनिक भारत में सामाजिक परिवर्तन २१वीं सदी में भारत ​ADHUNIK BHARAT MEI. विश्वविधालयों द्धारा पाठ्यक्रमों में जो परिवर्तन किगए हैं, उन्हें ध्यान में रखकर इस पुस्तक में कई नये अध्यायों को शामिल किया गया है एवं पुराने अध्यायों में. अनटाइटल्ड uprtou. Chapter 06: भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन of Bharat me Samajik Parivartan aur Vikas book chap6 भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास आज इक्कीसवीं शताब्दी में सामाजिक परिवर्तन पर कोई चर्चा भूमंडलीकरण के संदर्भ पर कुछ विचार किए बिना हो ही नहीं​. सामाजिक परिवर्तन के आख्यान के रूप में डॉ. आंबेडकर. सामाजिक परिवर्तन, समाज के आधारभूत परिवर्तनों पर प्रकाश डालने वाला एक विस्तृत एवं कठिन विषय है। इस प्रक्रिया में समाज की संरचना एवं कार्यप्रणाली का एक नया जन्म होता है। इसके अन्तर्गत मूलतः प्रस्थिति, वर्ग, स्तर तथा व्यवहार के अनेकानेक प्रतिमान बनते.

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रहती है। आज हम एक ऐसे समाज में रह रहे है। जो बहुत तीव्और विशाल रूप. से परिवर्तित हो रहा है। जीवन का कोई भी स्तर ऐसा नहीं है जिसमें परिवर्तन न. दिखाई देता हो। राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय, सामाजिक ढंगों, रूपों आदर्शों और. 62. ग्रामीण समुदाय में सामाजिक परिवर्तन Bisht ASIAN. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि 125 गौरवशाली साल पूरे करने वाला उत्तर प्रदेश का विधानमंडल सामाजिक परिवर्तन का सूत्रधार रहा है. इसके शानदार इतिहास व गरिमा को कायम रखना हम सबकी जिम्मेदारी है. Hindi social poem सामाजिक परिवर्तन प्रतिलिपि Pratilipi. इस भाग में पंचायती राज व्यवस्था में प्रशिक्षकों के लिए उपलब्ध कराई गयी मार्गदर्शिका में समूह और सामाजिक परिवर्तन में छोटे समूहों के महत्व की विस्तृत जानकारी दी गयी है।. Page 1 1.0 प्रस्तावना 1.1 उद्देश्य 1.2 सामाजिक. सामाजिक प्रक्रिया विशेषताएं. परिवर्तन प्रक्रिया के विभिन्न प्रतिमान. क्रान्ति का अर्थ एवं परिभाषा. परिवर्तन प्रक्रिया के कारण. 1 प्राकतिक या भौगोलिक कारणान. 2. प्राणीशास्त्रीय जैविकीय कारण. 3. सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया के. शिक्षा से ही सामाजिक परिवर्तन संभव. संस्कारयुक्त एवं सकारात्मक शिक्षा से ही सामाजिक परिवेश में परिवर्तन होना संभव है। सामाजिक परिवर्तन व विकास में वैदिक काल से ही महिलाओं का रोल अहम रहा है। ये बातें नरगा स्थित गणपतराय सलारपुरिया विद्या मंदिर में शुक्रवार को.