गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है किन्तु महाराष्ट्र में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन गणेश का जन्म हुआ था।गणेश चतुर्थी पर हिन्दू भगवान गणेशजी की पूजा की जाती है। कई प्रमुख जगहों पर भगवान गणेश की बड़ी प्रतिमा स्थापित की जाती है। इस प्रतिमा का नौ दिन तक पूजन किया जाता है.
नो दिन बाद गाजे बाजे से श्री गणेश प्रतिमा को किसी तालाब इत्यादि जल में विसर्जित किया जाता है।

1. गणेश उत्सव क्यों मनाते है?
श्रस्टि के आरम्भ में जब यह प्रश्न उठा की प्रथम पूज्य किसे माना जाय! तो देवता भगवान् शिव के पास पहुंचे! तब शिव जी ने कहा संपूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा जो सबसे पहले कर लेगा! उसे ही प्रथम पूज्य माना जायगा!
इस प्रकार सभी देवता अपने-अपने वाहन में बैठ कर पृथ्वी की परिक्रमा करने निकल पड़े।चुकी गणेश भगवान् का वाहन चूहा है! और उनका शरीर स्थूल है! तो भगवान् गणेश कैसे परिक्रमा कर पाते!
तब भगवान् गणेश जी ने अपनी बुद्धि और चतुराई से! अपने पिता भगवान् शिवऔर माता पार्वती की तीन परिक्रमा पूरी की और हाथ जोड़ कर खड़े हो गए!
तब भगवान् शिव ने कहा की तुमसे बड़ा और बुद्धिमान इस पूरे संसार में और कोई नहीं है! माता और पिता की तीन परिक्रमा करने से तुमने तीनो लोको की परिक्रमा पूरी कर ली है! और इसका पुण्य तुम्हे मिल गया जो पृथ्वी की परिक्रमा से भी बड़ा है।
इसलिए जो मनुष्य किसी भी कार्य को आरम्भ करने से पहले तुम्हारा पूजन करेगा! उसे किसी भी प्रकार की कठनाईयो का सामना नहीं करना पड़ेगा।
बस तभी से भगवान् गणेश अग्र पूज्य हो गये! और उनकी पूजा सभी देवी और देवताओ से पहले की जाने लगी! और फिर भगवान् गणेश की पूजा के बाद बाकी सभी देवताओ की पूजा की जाती है।
इसलिए गणेश चतुर्थी में गणेश भगवान् की पूजा की जाती है! गणेश चतुर्थी को मनाने वाले सभी श्रद्धालु! इस दिन स्थापित की गयी भगवान् गणेश की प्रतिमा को ग्यारहवे दिन अनन्त चतुर्दशी के दिन विसर्जित करते है! और इस प्रकार गणेश उत्सव का समापन किया जाता है।

2. पुराणानुसार
शिवपुराण में भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को मंगलमूर्ति गणेश की अवतरण-तिथि बताया गया है जबकि गणेशपुराण के मत से यह गणेशावतार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुआ था। गण + पति = गणपति। संस्कृतकोशानुसार ‘गण’ अर्थात पवित्रक। ‘पति’ अर्थात स्वामी, ‘गणपति’ अर्थात पवित्रकों के स्वामी।

3. गणेश उत्सव 10 दिनों तक क्यों मनाते है
धार्मिक ग्रंथो के अनुशार जब वेदव्यास जी ने महाभारत की कथा भगवन गणेश जी को दश दिनों तक सुनाई थी! तब उन्होंने अपने नेत्र बंद कर लिए थे! और जब दस दिन बाद आँखे खोली तो पाया की भगवान् गणेश जी का तापमान बहुत अधिक हो गया था।
फिर उसी समय वेदव्यास जी निकट स्थित कुंड में स्नान करवाया था! जिससे उनके शरीर का तापमान कम हुआ! इसलिए गणपति स्थापना के अगले दस दिन तक गणेश जी की पूजा की जाती है! और फिर ग्यारहवे भगवान् गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है।
गणेश विसर्जन इस बात का भी प्रतीक है! की यह शरीर मिटटी का बना है.और अंत में मिटटी में ही मिल जाना है।
अब जानते है की गणेश उत्सव कबसे मनाया जाता है! यह उत्सव वैसे तो कई वर्षो से मनाया जा रहा है! लेकिन संन 1893 से पूर्व यह केवल घरो तक ही सीमित था! उस समय सामूहिक उत्सव नहीं मनाया जाता था! और न ही बड़े पैमानों पर पंडालों में इस तरह मनाया जाता था!
सन 1893 में बाल गंगा धर तिलक ने! अंग्रजो के विरुद्ध एक जुट करने के लिए एक पैमाने पर इस उत्सव का आयोजन किया! जिसमे बड़े पैमाने पर लोगो ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया! और इस प्रकार पूरे राष्ट्र में गणेश चतुर्थी मनाया जाने लगा।
बालगंगाधर तिलक ने यह आयोजन महाराष्ट्र में किया था! इसलिए यह पर्व पूरे महाराष्ट्र में बढ़ चढ़ कर मनाया जाने लगा!तिलक उस समय स्वराज्य के लिए संघर्ष कर रहे थे!
और उन्हें एक ऐसा मंच चाहिए था जिसमे माध्यम से उनकी आवाज अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचे! और तब उन्होंने गणपति उत्सव का चयन किया और इसे एक भव्य रूप दिया! जिसकी छवि आज तक पूरे महाराष्ट्र में देखने को मिलता है।

4. कथा
शिवपुराणके अन्तर्गत रुद्रसंहिताके चतुर्थ कुमार खण्ड में यह वर्णन है कि माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक बालक को उत्पन्न करके उसे अपना द्वारपालबना दिया। शिवजी ने जब प्रवेश करना चाहा तब बालक ने उन्हें रोक दिया। इस पर शिवगणोंने बालक से भयंकर युद्ध किया परंतु संग्राम में उसे कोई पराजित नहीं कर सका। अन्ततोगत्वा भगवान शंकर ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से उस बालक का सर काट दिया। इससे भगवती शिवा क्रुद्ध हो उठीं और उन्होंने प्रलय करने की ठान ली। भयभीत देवताओं ने देवर्षिनारद की सलाह पर जगदम्बा की स्तुति करके उन्हें शांत किया। शिवजी के निर्देश पर विष्णुजीउत्तर दिशा में सबसे पहले मिले जीव हाथी का सिर काटकर ले आए। मृत्युंजय रुद्र ने गज के उस मस्तक को बालक के धड पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया। माता पार्वती ने हर्षातिरेक से उस गजमुखबालक को अपने हृदय से लगा लिया और देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद दिया। ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उस बालक को सर्वाध्यक्ष घोषित करके अग्रपूज्यहोने का वरदान दिया। भगवान शंकर ने बालक से कहा-गिरिजानन्दन! विघ्न नाश करने में तेरा नाम सर्वोपरि होगा। तू सबका पूज्य बनकर मेरे समस्त गणों का अध्यक्ष हो जा। गणेश्वर!तू भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा के उदित होने पर उत्पन्न हुआ है। इस तिथि में व्रत करने वाले के सभी विघ्नों का नाश हो जाएगा और उसे सब सिद्धियां प्राप्त होंगी। कृष्णपक्ष की चतुर्थी की रात्रि में चंद्रोदय के समय गणेश तुम्हारी पूजा करने के पश्चात् व्रती चंद्रमा को अ‌र्घ्यदेकर ब्राह्मण को मिष्ठान खिलाए। तदोपरांत स्वयं भी मीठा भोजन करे। वर्षपर्यन्तश्रीगणेश चतुर्थी का व्रत करने वाले की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

4.1. कथा अन्य कथा
एक बार महादेवजी पार्वती सहित नर्मदा के तट पर गए। वहाँ एक सुंदर स्थान पर पार्वती जी ने महादेवजी के साथ चौपड़ खेलने की इच्छा व्यक्त की। तब शिवजी ने कहा- हमारी हार-जीत का साक्षी कौन होगा? पार्वती ने तत्काल वहाँ की घास के तिनके बटोरकर एक पुतला बनाया और उसमें प्राण-प्रतिष्ठा करके उससे कहा- बेटा! हम चौपड़ खेलना चाहते हैं, किन्तु यहाँ हार-जीत का साक्षी कोई नहीं है। अतः खेल के अन्त में तुम हमारी हार-जीत के साक्षी होकर बताना कि हममें से कौन जीता, कौन हारा?
खेल आरंभ हुआ। दैवयोग से तीनों बार पार्वती जी ही जीतीं। जब अंत में बालक से हार-जीत का निर्णय कराया गया तो उसने महादेवजी को विजयी बताया। परिणामतः पार्वती जी ने क्रुद्ध होकर उसे एक पाँव से लंगड़ा होने और वहाँ के कीचड़ में पड़ा रहकर दुःख भोगने का शाप दे दिया।
बालक ने विनम्रतापूर्वक कहा- माँ! मुझसे अज्ञानवश ऐसा हो गया है। मैंने किसी कुटिलता या द्वेष के कारण ऐसा नहीं किया। मुझे क्षमा करें तथा शाप से मुक्ति का उपाय बताएँ। तब ममतारूपी माँ को उस पर दया आ गई और वे बोलीं- यहाँ नाग-कन्याएँ गणेश-पूजन करने आएँगी। उनके उपदेश से तुम गणेश व्रत करके मुझे प्राप्त करोगे। इतना कहकर वे कैलाश पर्वत चली गईं।
एक वर्ष बाद वहाँ श्रावण में नाग-कन्याएँ गणेश पूजन के लिए आईं। नाग-कन्याओं ने गणेश व्रत करके उस बालक को भी व्रत की विधि बताई। तत्पश्चात बालक ने 12 दिन तक श्रीगणेशजी का व्रत किया। तब गणेशजी ने उसे दर्शन देकर कहा- मैं तुम्हारे व्रत से प्रसन्न हूँ। मनोवांछित वर माँगो। बालक बोला- भगवन! मेरे पाँव में इतनी शक्ति दे दो कि मैं कैलाश पर्वत पर अपने माता-पिता के पास पहुँच सकूं और वे मुझ पर प्रसन्न हो जाएँ।
गणेशजी तथास्तु कहकर अंतर्धान हो गए। बालक भगवान शिव के चरणों में पहुँच गया। शिवजी ने उससे वहाँ तक पहुँचने के साधन के बारे में पूछा।
तब बालक ने सारी कथा शिवजी को सुना दी। उधर उसी दिन से अप्रसन्न होकर पार्वती शिवजी से भी विमुख हो गई थीं। तदुपरांत भगवान शंकर ने भी बालक की तरह २१ दिन पर्यन्त श्रीगणेश का व्रत किया, जिसके प्रभाव से पार्वती के मन में स्वयं महादेवजी से मिलने की इच्छा जाग्रत हुई।
वे शीघ्र ही कैलाश पर्वत पर आ पहुँची। वहाँ पहुँचकर पार्वतीजी ने शिवजी से पूछा- भगवन! आपने ऐसा कौन-सा उपाय किया जिसके फलस्वरूप मैं आपके पास भागी-भागी आ गई हूँ। शिवजी ने गणेश व्रत का इतिहास उनसे कह दिया।
तब पार्वतीजी ने अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने की इच्छा से 21 दिन पर्यन्त 21-21 की संख्या में दूर्वा, पुष्प तथा लड्डुओं से गणेशजी का पूजन किया। 21वें दिन कार्तिकेय स्वयं ही पार्वतीजी से आ मिले। उन्होंने भी माँ के मुख से इस व्रत का माहात्म्य सुनकर व्रत किया।
कार्तिकेय ने यही व्रत विश्वामित्रजी को बताया। विश्वामित्रजी ने व्रत करके गणेशजी से जन्म से मुक्त होकर ब्रह्म-ऋषि होने का वर माँगा। गणेशजी ने उनकी मनोकामना पूर्ण की। ऐसे हैं श्री गणेशजी, जो सबकी कामनाएँ पूर्ण करते हैं।

4.2. कथा तीसरी कथा
एक बार महादेवजी स्नान करने के लिए भोगावती गए। उनके जाने के पश्चात पार्वती ने अपने तन के मैल से एक पुतला बनाया और उसका नाम गणेश रखा। पार्वती ने उससे कहा- हे पुत्र! तुम एक मुगदल लेकर द्वापर बैठ जाओ। मैं भीतर जाकर स्नान कर रही हूँ। जब तक मैं स्नान कर लूं, तब तक तुम किसी भी पुरुष को भीतर मत आने देना।
भोगावती में स्नान करने के बाद जब भगवान शिवजी आए तो गणेशजी ने उन्हें द्वापर रोक लिया। इसे शिवजी ने अपना अपमान समझा और क्रोधित होकर उनका सिर धड़ से अलग करके भीतर चले गए। पार्वती ने उन्हें नाराज देखकर समझा कि भोजन में विलंब होने के कारण महादेवजी नाराज हैं। इसलिए उन्होंने तत्काल दो थालियों में भोजन परोसकर शिवजी को बुलाया।
तब दूसरा थाल देखकर तनिक आश्चर्यचकित होकर शिवजी ने पूछा- यह दूसरा थाल किसके लिए हैं? पार्वती जी बोलीं- पुत्र गणेश के लिए हैं, जो बाहर द्वापर पहरा दे रहा है।
यह सुनकर शिवजी और अधिक आश्चर्यचकित हुए। तुम्हारा पुत्र पहरा दे रहा है? हाँ नाथ! क्या आपने उसे देखा नहीं? देखा तो था, किन्तु मैंने तो अपने रोके जाने पर उसे कोई उद्दण्ड बालक समझकर उसका सिर काट दिया। यह सुनकर पार्वती जी बहुत दुःखी हुईं। वे विलाप करने लगीं। तब पार्वती जी को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर बालक के धड़ से जोड़ दिया। पार्वती जी इस प्रकार पुत्र गणेश को पाकर बहुत प्रसन्न हुई। उन्होंने पति तथा पुत्र को प्रीतिपूर्वक भोजन कराकर बाद में स्वयं भोजन किया।
यह घटना भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुई थी। इसीलिए यह तिथि पुण्य पर्व के रूप में मनाई जाती है।गणेश जो भि पुजन करता है उसै गणेश इच्छा पुरि करता है

5. व्रत
भाद्रपद-कृष्ण-चतुर्थी से प्रारंभ करके प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चंद्रोदयव्यापिनीचतुर्थी के दिन व्रत करने पर विघ्नेश्वरगणेश प्रसन्न होकर समस्त विघ्न और संकट दूकर देते हैं।

6. चंद्र दर्शन दोष से बचाव
प्रत्येक शुक्ल पक्ष चतुर्थी को चन्द्रदर्शन के पश्चात्‌ व्रती को आहार लेने का निर्देश है, इसके पूर्व नहीं। किंतु भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को रात्रि में चन्द्र-दर्शन चन्द्रमा देखने को निषिद्ध किया गया है।
जो व्यक्ति इस रात्रि को चन्द्रमा को देखते हैं उन्हें झूठा-कलंक प्राप्त होता है। ऐसा शास्त्रों का निर्देश है। यह अनुभूत भी है। इस गणेश चतुर्थी को चन्द्र-दर्शन करने वाले व्यक्तियों को उक्त परिणाम अनुभूत हुए, इसमें संशय नहीं है। यदि जाने-अनजाने में चन्द्रमा दिख भी जाए तो निम्न मंत्र का पाठ अवश्य कर लेना चाहिए-
सिहः प्रसेनम्‌ अवधीत्‌, सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्वमन्तकः॥

  • त र न त र गण श क श ग र भ व श ष ट प रक र स क य ज त ह भगव न गण श क श ग र स म न य द न म च द क वरक स क य ज त ह ल क न गण श चत र थ पर भगव न
  • स धन ज वन म प रय ग क य ज त व सभ गण श ह अक ल श कर प र वत क प त र और द वत ह नह गण श चत र थ श र गण श द व दश न म स त त र ह द ल ख गण शज क
  • क चत र थ स चत र दश च र त र ख स च दह त र ख तक तक दस द न तक चलत ह भ द रपद म स क श क ल पक ष क चत र थ क गण श चत र थ भ कहत ह गण श क
  • करन द श - व द श स ल ग आत ह गण श चत र थ पर त इस म द र म ख स भ ड द ख ज सकत ह द ल क स क न द न व ल यह गण श प रत म सभ क च त ओ क हरण
  • एक त य ह र ह ज भ द मह न क श क ल चत र थ क मन य ज त ह भ रत क अन य भ ग म जब ल ग इस द न भगव न गण श क प ज करत ह ब ह र क ज य द तर ह स स
  • क 246व ल प वर ष म 247 व द न ह स ल म अभ और 119 द न ब क ह गण श चत र थ ह न द धर म, 2008 कतर क स वध नत द वस. आस ट र ल य क झ ड द वस.
  • ह ज एग तब श र क ष ण क आज ञ स ह य ध ष ठ रज न गण श चत र थ क व रत करक मह भ रत क य द ध ज त थ यह चत र थ गण श चत र थ न म स प रस द ध ह
  • मह ल ए करत ह चत र थ - गण श य व न यक चत र थ सर वत र व ख य त ह यह इसल ए चत र थ क ह ह त ह क य क चत र थ क द वत गण श ह प चम - प चम
  • तभ स भगव न गण श क आ ख म च द क न त र लग ए गए ह इस द र न व श ल यज ञ क आय जन क य तथ जन - जन म उनक प रत आस थ बढ चत र थ पर लगत ह भव य
  • स च प त और ब द म गण श चत र थ क समय क न त य क करत ह और ज त ज त ह प रभ द व - व ष ण क क म नन - जह ग र ख न गण श आच र य - ग प सलम न य स फ
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  • प च ग क भ द रपद मह न म श क ल पक ष प चम क मन य ज त ह यह त य ह र गण श चत र थ क अगल द न ह त ह इस त य ह र म सप त ऋष य क प रत श रद ध भ व
  • मन द र म म बई स थ त एक प रस द ध गण शमन द र ह स द घ व न यक, गण श ज क सबस ल कप र य र प ह गण श ज ज न प रत म ओ क स ड द ई तरह म ड ह त ह व स द घप ठ
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  • जनस ख य क क आध र पर क ष त र य त य ह र भ ह त ह ह न द धर म क द प वल गण श चत र थ ह ल एव नवर त र इस ल म म ईद उल - फ त र एव ईद - उल - अज ह ब द ध धर म
  • ह नवर त र क समय व वर षभर क च र बड चत र थ य करव च थ, व श ख च थ, भ द रपद चत र थ एव म घ चत र थ पर म त ज क व श ल म ल भरत ह ज नम
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  • त र थस थल नह ह ज न त र थकर प र श वन थ ज न ई. प र व म च त र क ष ण - चत र थ क यह क म हल ल भ ल प र म जन म ग रहण क य थ ज न धर म क ह ग व रहव
  • शहर क वल यमल क ष त र म स थ त ह इसक स थ पन स तम बर क गण श चत र थ क प वन अवसर पर ह ई थ भ रत क प र व र ष ट रपत एव मह न व ज ञ न क ड
  • जन म 1320 म श र अप प र ज और स मत स रम क स थ भ द रपद स ध च व थ गण श चत र थ क द न प त प रम आ ध र प रद श, भ रत म ह आ थ अप पल र ज और स मत
  • जन म द न त ज रथय त र न गप चम जन म ष टम स वत त रत द वस ख रद द स ल गण श चत र थ र ख - प र ण म ओणम पर य षण पट ट प रस दशहर द र ग प ज नवर त र शरद
  • म ह क गण श चत र थ क प र त क ल और स य क ल अभ ष क ह त ह स ध रणत यह स य क ल क अभ ष क म बह त भ ड ह त ह ऐस म न यत ह क इस गण श म र त
  • एव आम र महल तथ न कटवर त जनस ध रण क म ख य जलस र त ह जयप र म गण श चत र थ क अवसर पर स थ प त ह ई गणपत प रत म ओ क व सर जन इस झ ल म ह आ करत
  • स न क द व र ज क अ गरक षक थ उन ह न रघ न थ र व क भत ज न र यणर व क गण श चत र थ क द न 1773 म रघ न थ र व न अपन स न क द व र मरव द य न र यण र व
  • ह त ह मह र ष ट र म एक प रचल त ध रण ह क गण श क च र द श ओ म एक बहन ह और वह गण श चत र थ क अवसर पर प रत वर ष उनम स प रत य क स म लन
  • र व न स म र स ह गर द न मक एक ग र ड क क छ और ल ग क स थ म म लकर गण श चत र थ व ल द न न र यण र व क म रन क स ज श रच उन ह न 30 अगस त सन 1773 क
  • ह द त य ह र ज स वस त प चम र मनवम हन म न जय त श र वण म ह और गण श चत र थ मन त ह मह श वर त र क त य ह र क द र न लगभग स अध क भ व क

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2019 में गणेश चतुर्थी कब है.

आज की तिथि Aaj Ki Tithi माघ शुक्ला एकादशी विक्रम. गणेश चतुर्थी 2020 गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। आइये जानतें हैं हिंदी एस्ट्रोयोगी पर कब है 2020 मे गणेश चतुर्थी की तिथि और गणेश चतुर्थी की पूजा का शुभ महूर्त. गणेश चतुर्थी 2019 तारीख. गणेश चतुर्थी, प्रथम पूज्यदेव का पूजन in Speaking Tree. गणेश चतुर्थी पर देश के अलग हिस्सों में लोग धूमधाम से इस पर्व को मना रहे हैं। इतना ही नहीं लोगों ने गाजे बाजे और आनंद के साथ गणपति का अपने घरों में स्वागत किया. 2020 में गणेश चतुर्थी कब है. Religion News, Kundali News, Hindu Religion News, Astrology News. भगवान गणेश की प्रतिमा लेने जा रहे हैं तो उनके सूंड़ का रखें ध्‍यान, नहीं तो होगी. इंडिया इमोशंस न्यूज नई दिल्‍ली: रोशनी चाहिए चांद के दर्शन! जानिए क्या है. इंडिया इमोशंस न्यूज गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi 2019 को सिर्फ एक ही दिन शेष बचा है.

गणेश चतुर्थी 2020.

गणेश चतुर्थी पर निबंध – Essay on Ganesh Chaturthi in Hindi. विनायक चतुर्थी गणेश चतुर्थी, 22 अगस्त. ओणम या थिरु ओणम दिवस, 31 अगस्त. दशहरा महासप्तमी एडिशनल, 22 अक्टूबर. दशहरा ​महाअष्टमी एडिशनल, 23 अक्टूबर. दशहरा महानवमी, 24 अक्टूबर. महर्षि वाल्मीकि जन्मदिन, 13 अक्टूबर. करका चतुर्थी या करवा चौथ. गणेश चतुर्थी २०१९. Ganesh Chaturthi 2019 गणेश चतुर्थी कब है 2019 हरिभूमि. भारतवर्ष में गणेश चतुर्थी का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। दुनिया में गणपति बप्पा को घर में लाने की तैयारियां खूब जोरो शोरों से चल रही हैं।.

संकष्ठी चतुर्थी का क्या महत्व है? भगवान गणेश की.

साल, तारीख, दिन, छुट्टियां, राज्य केन्द्र शासित प्रदेश. 2020​, 22 अगस्त, शनिवार, गणेश चतुर्थी, AP, DD, DN, GA, GJ, KA, MH, OR, PY, TG & TN. 23 अगस्त, रविवार, गणेश चतुर्थी छुट्टियां, GA. 2021, 10 सितंबर, शुक्रवार, गणेश चतुर्थी, AP, DD, DN, GA, GJ, KA, MH, OR, PY,. श्री गणेश चतुर्थी सनातन संस्था. गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। भगवान गणेश को गजानन, गजदंत, गजमुख जैसे नामों से भी जाना जाता है। हर साल गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान. गणेश चतुर्थी: सेंसेक्स टुडे शेयर बाजार: गणेश. Here weve large list Lord Ganpati Sms in Hindi, Happy Ganesh Chaturthi Sms, गणेश चतुर्थी शायरी मैसेज or विशेष, गणपति इमेज, गणेश जी फोटो​, Vinayagar Chaturthi Images, Ganesh Chaturthi Wishes In Marathi, Hindi & English, Sankashti Chaturthi Images, Ganesh Chaturthi Quotes Status In Marathi.

गणेश चतुर्थी क्यूँ मनाया जाता है श्री गणेश जी.

गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन कलंक निवारण के उपाय ganesh chaturthi par chandra darshan kalank nivaran ke upay, chandra darshna dhosha nivaran upaya, ganesh chaturthi par chandra darshan dosha nivaran mantra गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन कलंक निवारण के उपाय भारतीय शास्त्रों. दतिया 05 मध्य प्रदेश डिस्ट्रिक्ट न्यूज़ पोर्टल. गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है किन्तु महाराष्ट्र में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन गणेश का जन्म हुआ था।गणेश चतुर्थी पर हिन्दू भगवान गणेशजी की पूजा की जाती. गणेश चतुर्थी की कहानी Ganesh Chaturthi Katha Voidcan. गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है? क्या आपको गणेश चतुर्थी की कहानी पता है? यहाँ आपको गणेशजी की पूजा बिधि, मंत्र, सुभ मुहूर्त हिंदी में जानने को मिलेगा. गणेश चतुर्थी Dharm रफ़्तार. सोमवार को गणेश चतुर्थी के मौके पर भारतीय शेयर बाजारों में छुट्टी रहेगी. कमोडिटी, करेंसी और बॉन्ड मार्केट भी नहीं खुलेंगे. विशिष्ट अवसरों पर बंद रहेंगे पशुवध गृह एवं मांस. गणेश चतुर्थी 2 सितंबर को है, तो छोटी गणपति का आगमन 1 या 2 सितंबर को होगा जबकि बड़ी बड़ी गणपति का आगमन 15 अगस्त से ही शुरू हो जायेगा। मुश्किल बड़ी गणपति को लाने में हैं क्योंकि मेट्रो का काम, सड़क पर हुए गड्ढे, रूट डाइवर्ट, बंद.

गणेश चतुर्थी का क्या है महत्व, कैसे करें गजानन की.

इस वर्ष गणेश चतुर्थी 2 सितंबर,2019 सोमवार को मनाया जाएगा। भारतीय पुराणों में गणेश जी को विद्या बुद्धि का प्रदाता, विघ्न विनाशक और मंगलकारी बताया गया है। हर माह के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत किया. Ganesh Chaturthi Pujan Muhurat: गणेश पूजन Navbharat Times. माघ मास की चतुर्थी तिथि को संकष्ठी चतुर्थी कहा जाता है. इस तिथि को तिल चतुर्थी या माघी चतुर्थी भी कहा जाता है. इस दिन भगवान गणेश की और चन्द्र देव की उपासना करने का विधान है. जो कोई भी इस दिन श्री गणपति की उपासना करता है.

संकष्टी गणेश चतुर्थी के अवसर पर गणेश टेकड़ी मंदिर.

नागपुर: गणेश टेकड़ी मंदिर में आज संकष्टी तिल चतुर्थी को लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे हैं.इस मौके पर श्री गणेश का विशेष श्रृंगार किया गया, साथ ही विशेष आरती भी भगवान गणेश की की गई जिसे देखने के लिए श्रद्धालु. गणेश चतुर्थी Ganesh chaturthi 2019:जाने किस मुहूर्त. Sankashti Ganesh Chaturthi 2020 आज सकट चौथ या संकष्टी गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता गणेश जी की आराधना करने से सभी संकटों का निवारण होता है मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।. सिद्धिविनायक मुंबई को गुप्त दान दाता ने चढ़ाया. गणेश चतुर्थी से जुड़ी पौराणिक कथा. भगवान गणेश देव समाज में सर्वोपरि स्थान रखते है। इन्हे विघ्न विनायक भी कहा जता है। हिंदू पुराण के मुताबिक भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय हुआ था। इस दिन को देशभर में धूम धाम. गणेश चतुर्थी Dainik Bhaskar. डोल ग्यारस, पर्यूषण पर्व का प्रथम दिन, पर्यूषण पर्व का अंतिम दिन, अनंत चतुर्दशी, जन्माष्टमी, संत श्री जिन तरूण तारण जयंती, पर्यूषण पर्व में सवस्तरी श्वेताम्बर जैन, भगवान महावीर के 2500वें निर्वाण, चेतीचांद, गणेश चतुर्थी शामिल.

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यहां हम आपके साथ साझा कर रहे हैं गणेश चतुर्थी के पर्व पर भेजे जाने वाले बधाई संदेश और कोट्स, जिन्हें आप अपने दोस्तों, रिश्तेदारों, परिवारवालों और करीबियों को भेजकर उन्हें इस पर्व की शुभकामनाएं दे सकते हैं।. गणेश चतुर्थी की रेसिपी, Ganesh Chaturthi Tarla Dalal. गणेश चतुर्थी, प्रथम पूज्यदेव का पूजन प्रत्येक शुभ कार्य से पूर्व अनिवार्यतः पूज्य गणेश सभी का शुभ करें, कल्याण करें! ​हर चन्द्र महीने में हिन्दू कैलेंडर में दो चतुर्थी तिथियाँ होती हैं। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार चतुर्थी. संकष्टी गणेश चतुर्थी 2020 डेट मुहूर्त पूजा विधि. हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल चतुर्थी को हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार गणेश चतुर्थी मनाया जाता है। गणेश पुराण में वर्णित कथाओं के अनुसार इसी दिन समस्त विघ्न बाधाओं को दूर करने वाले, कृपा के सागर तथा भगवान. धर्म संसार Indiaemotions hindi news portal, Breaking Hindi. आज आश्वनी कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि पर श्री गणेश चतुर्थी व्रत का पर्व मनाया जा रहा है। बप्पा के विसर्जन उपरांत आज गणेश जी का प्रिय दिन पुन: आया है। वैसे तो आज के दिन सुबह स्नान आदि से.

श्री गणेश चतुर्थी व्रत: इन तीन श्लोकों का पाठ करने.

भगवान श्री गणेश सर्व हिंदुओंके आराध्य देवता हैं । इसके साथ ही. बहते पानी में करें! गणेशभक्तो, गणेश चतुर्थी के काल में आपने श्री गणेश की भक्तिभाव एवं. गणेश मूर्ति विसर्जन से प्रदूषण होता है, ऐसा शोर मचानेवालों, अपशिष्ट जल महाराष्ट्र. 13 जनवरी को महिलाएं रखेंगी गणेश चतुर्थी Inext Live. कल 28 जनवरी को वरद चतुर्थी है, इस चतुर्थी पर सभी भगवान गणेश जी की पूजा और व्रत करेंगे। हर साल माघ महीने की शुक्लपक्ष की चतुर्थी को वरद, विनायक और तिलकुंद चतुर्थी कहा जाता है। इसके साथ ही वरद चतुर्थी व्रत करने से सुख समृद्धि की. गणेश चतुर्थी और अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान की. देशभर में आज गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है. वैसे तो ये त्‍योहार देश के कई राज्यों में मनाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र में लोग इसे सामूहिक रूप से बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं. इस खास मौके पर भक्त घरों में गणपति की स्थापना करते हैं.

देश भर में धूमधाम से मनायी जाती है गणेश चतुर्थी.

गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, यह भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि यह प्रथम पूज्य गजानन भगवान का पर्व है, इस दिन बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में गणेश जी. Ganesh Chaturthi 2019 जानिए, कब है गणेश चतुर्थी, शुभ. Опубликовано: 2 сент. 2019 г. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए कैलेंडर 2020 के. 2 सितंबर को भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इसे गणेश चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। पुराणों के अनुसार इस दिन गजमुख भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इस दिन को कलंक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन. गणेश चतुर्थी 2019 Ganesh Chaturthi 2019 News18 Hindi. इन दिनों में सिद्धिविनायक भगवान की प्रति मूर्ति के दर्शन करवाए जाते थे. अब 29 जनवरी यानी गणेश चतुर्थी पर श्री विनायक का जन्मोत्सव मनाया जाएगा. श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशी की बात है कि 20 जनवरी से श्री सिद्धिविनायक दरबार.

Sakat 2020 Date, Katha, Significance, Muhurat: When Is Sankashti.

Продолжительность: 3:36. जानिए गणेश चतुर्थी 2019 की तारीख, पूजा Quint Hindi. 13 जनवरी को महिलाएं रखेंगी गणेश चतुर्थी व्रत. संकट दूर करता है संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत. चंद्रमा का अ‌र्घ्य देकर परिवार के लिए करेंगी मंगल कामना. Bejan Daruwalla weekly Horoscope 2 to 8 February: इस हफ्ते आपको काफी मेहनत करनी पड़ेगी,.

माघी गणेश जयंती आज, क्या है इस गणेश चतुर्थी का.

माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी भी कहते हैं। इस दिन तिल चतुर्थी का व्रत किया जाता है। यह व्रत करने से घर परिवार में आ रही विपदा दूर होती है, कई दिनों से रुके मांगलिक कार्य संपन्न होते है। इस साल संकष्टी. कल वरद चतुर्थी पर भगवान गणेश जी की करें पूजा, जानिए. गणेश चतुर्थी Ганеша чатуртхи. गणेश चतुर्थी पर इस शुभ मुहूर्त में ही Times Now Hindi. भगवान गणेश का आह्वान किए बिना कोई उत्सव पूर्ण नहीं माना जाता। चूंकि उन्हें सभी बाधाओं का निवारक माना जाता है इसलिए, हमारे विकास में बाधा बनने वाली सभी बाधाओं से छुटकारा पाने के. गणेश चतुर्थी विस्तृत पूजन विधि Religion World. गणेश चतुर्थी पर छोटा व बड़ा निबंध कक्षा 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 के विद्यार्थियों के लिए। Short and Long Essay on Ganesh Chaturthi in Hindi Language. गणेश चतुर्थी India Public Holidays. गणेश चतुर्थी FOLLOW. हिन्दू धर्म में गणेश चतुर्थी एक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। हमारे शास्त्रों में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय कहा गया है। कोई भी शुभ काम हो या किसी तरह की विपत्ति आन पड़ी हो तो सबसे पहले विघ्न हर्ता. भोपाल 05 मध्य प्रदेश डिस्ट्रिक्ट न्यूज़ पोर्टल. रामनवमी, डोल ग्यारस, पर्यूषण पर्व का प्रथम दिन, पर्यूषण पर्व का अंतिम दिन, अनंत चतुर्दशी, जन्माष्टमी, संत श्री जिन तरूण तारण जयंती, पर्यूषण पर्व में सवस्तरी श्वेताम्बर जैन, भगवान महावीर के 2500वें निर्वाण, चौतीचांद, गणेश चतुर्थी शामिल है​।.

इस तरह से गणेश चतुर्थी के मौके पर घर में ऐसे करें.

Продолжительность: 0:58. गणेश चतुर्थी पर भूल से भी कर दिया ये 5 Catch Hindi. भगवान गणेश के जन्म दिन के उत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष के दौरान भगवान गणेश का जन्म. Ganesh Chaturthi 2019: देशभर में दिखी गणेश चतुर्थी की. Ganesh Chaturthi Shubh Muhurat: इस साल गणेश चतुर्थी 2 सितंबर यानी सोमवार को मनाया जाएगा। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और राहुकाल के बार में.