छठ पूजा

छठ पर्व, छठ या षष्‍ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। कहा जाता है यह पर्व बिहारीयों का सबसे बड़ा पर्व है ये उनकी संस्कृति है। छठ पर्व बिहार मे बड़े धुम धाम से मनाया जाता है। ये एक मात्र ही बिहार या पूरे भारत का ऐसा पर्व है जो वैदिक काल से चला आ रहा है और ये बिहार कि संस्कृति बन चुका हैं। यहा पर्व बिहार कि वैदिक आर्य संस्कृति कि एक छोटी सी झलक दिखाता हैं। ये पर्व मुख्यः रुप से ॠषियो द्वारा लिखी गई ऋग्वेद मे सूर्य पूजन, उषा पूजन और आर्य परंपरा के अनुसार बिहार मे यहा पर्व मनाया जाता हैं।
बिहार मे हिन्दुओं द्वारा मनाये जाने वाले इस पर्व को इस्लाम सहित अन्य धर्मावलम्बी भी मनाते देखे जाते हैं। धीरे-धीरे यह त्योहार प्रवासी भारतीयों के साथ-साथ विश्वभर में प्रचलित हो गया है। छठ पूजा सूर्य, उषा, प्रकृति,जल, वायु और उनकी बहन छठी म‌इया को समर्पित है ताकि उन्हें पृथ्वी पर जीवन की देवतायों को बहाल करने के लिए धन्यवाद और कुछ शुभकामनाएं देने का अनुरोध किया जाए। छठ में कोई मूर्तिपूजा शामिल नहीं है।
त्यौहार के अनुष्ठान कठोर हैं और चार दिनों की अवधि में मनाए जाते हैं। इनमें पवित्र स्नान, उपवास और पीने के पानी वृत्ता से दूर रहना, लंबे समय तक पानी में खड़ा होना, और प्रसाद प्रार्थना प्रसाद और अर्घ्य देना शामिल है। परवातिन नामक मुख्य उपासक संस्कृत पार्व से, जिसका मतलब अवसर या त्यौहार आमतौपर महिलाएं होती हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में पुरुष इस उत्सव का भी पालन करते हैं क्योंकि छठ लिंग-विशिष्ट त्यौहार नहीं है। छठ महापर्व के व्रत को स्त्री - पुरुष - बुढ़े - जवान सभी लोग करते हैं। कुछ भक्त नदी के किनारों के लिए सिर के रूप में एक प्रोस्टेशन मार्च भी करते हैं।
पर्यावरणविदों का दावा है कि छठ सबसे पर्यावरण-अनुकूल हिंदू त्यौहार है। यह त्यौहार नेपाली और भारतीय लोगों द्वारा अपने डायस्पोरा के साथ मनाया जाता है।

1. शुरुआत
मान्यता है की देव माता अदिति ने की थी छठ पूजा। एक कथा के अनुसार प्रथम देवासुर संग्राम में जब असुरों के हाथों देवता हार गये थे, तब देव माता अदिति ने तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति के लिए देवारण्य के देव सूर्य मंदिर में छठी मैया की आराधना की थी। तब प्रसन्न होकर छठी मैया ने उन्हें सर्वगुण संपन्न तेजस्वी पुत्र होने का वरदान दिया था। इसके बाद अदिति के पुत्र हुए त्रिदेव रूप आदित्य भगवान, जिन्होंने असुरों पर देवताओं को विजय दिलायी। कहते हैं कि उसी समय से देव सेना षष्ठी देवी के नाम पर इस धाम का नाम देव हो गया और छठ का चलन भी शुरू हो गया।

2. नामकरण
छठ, षष्ठी का अपभ्रंश है। कार्तिक मास की अमावस्या को दीवाली मनाने के बाद मनाये जाने वाले इस चार दिवसीय व्रत की सबसे कठिन और महत्त्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल षष्ठी की होती है। कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को यह व्रत मनाये जाने के कारण इसका नामकरण छठ व्रत पड़ा।
छठ पूजा साल में दो बार होती है एक चैत मास में और दुसरा कार्तिक मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि, पंचमी तिथि, षष्ठी तिथि और सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है. षष्ठी देवी माता को कात्यायनी माता के नाम से भी जाना जाता है नवरात्रि के दिन में हम षष्ठी माता की पूजा करते हैं षष्ठी माता कि पुजा घर परिवार के सदस्यों के सभी सदस्यों के सुरक्षा एवं स्वास्थ्य लाभ के लिए करते हैं षष्ठी माता की पूजा, सुरज भगवान और मां गंगा की पुजा देश समाज कि जाने वाली बहुत बड़ी पुजा है । प्राकृतिक सौंदर्य और परिवार के कल्याण के लिए कि जाने वाली महत्वपूर्ण पुजा है । छठ पूजा यानी सुर्य षष्ठी व्रत पुजा पुरा परिवार के स्वास्थ्य के मंगल कामना एवं प्राकृतिक के रक्षा हेतु की जाने वाली महत्वपूर्ण पुजा है । इस पुजा में गंगा स्थान या नदी तालाब जैसे जगह होना अनिवार्य हैं यही कारण है कि छठ पूजा के लिए सभी नदी तालाब कि साफ सफाई किया जाता है और नदी तालाब को सजाया जाता है प्राकृतिक सौंदर्य में गंगा मैया या नदी तालाब मुख्य स्थान है

3. लोक आस्था का पर्व
भारत में छठ सूर्योपासना के लिए प्रसिद्ध पर्व है। मूलत: सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है। यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाये जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाये जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है। पारिवारिक सुख-समृद्धी तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है। स्त्री और पुरुष समान रूप से इस पर्व को मनाते हैं। छठ व्रत के सम्बन्ध में अनेक कथाएँ प्रचलित हैं; उनमें से एक कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गये, तब श्री कृष्ण द्वारा बताये जाने पर द्रौपदी ने छठ व्रत रखा। तब उनकी मनोकामनाएँ पूरी हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिला। लोक परम्परा के अनुसार सूर्यदेव और छठी मइया का सम्बन्ध भाई-बहन का है। लोक मातृका षष्ठी की पहली पूजा सूर्य ने ही की थी। छठ पर्व को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो षष्ठी तिथि छठ को एक विशेष खगोलीय परिवर्तन होता है, इस समय सूर्य की पराबैगनी किरणें Ultra Violet Rays पृथ्वी की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्र हो जाती हैं इस कारण इसके सम्भावित कुप्रभावों से मानव की यथासम्भव रक्षा करने का सामर्थ्य प्राप्त होता है। पर्व पालन से सूर्य तारा प्रकाश पराबैगनी किरण के हानिकारक प्रभाव से जीवों की रक्षा सम्भव है। पृथ्वी के जीवों को इससे बहुत लाभ मिलता है। सूर्य के प्रकाश के साथ उसकी पराबैगनी किरण भी चंद्रमा और पृथ्वी पर आती हैं। सूर्य का प्रकाश जब पृथ्वी पर पहुँचता है, तो पहले वायुमंडल मिलता है। वायुमंडल में प्रवेश करने पर उसे आयन मंडल मिलता है। पराबैगनी किरणों का उपयोग कर वायुमंडल अपने ऑक्सीजन तत्त्व को संश्लेषित कर उसे उसके एलोट्रोप ओजोन में बदल देता है। इस क्रिया द्वारा सूर्य की पराबैगनी किरणों का अधिकांश भाग पृथ्वी के वायुमंडल में ही अवशोषित हो जाता है। पृथ्वी की सतह पर केवल उसका नगण्य भाग ही पहुँच पाता है। सामान्य अवस्था में पृथ्वी की सतह पर पहुँचने वाली पराबैगनी किरण की मात्रा मनुष्यों या जीवों के सहन करने की सीमा में होती है। अत: सामान्य अवस्था में मनुष्यों पर उसका कोई विशेष हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि उस धूप द्वारा हानिकारक कीटाणु मर जाते हैं, जिससे मनुष्य या जीवन को लाभ होता है। छठ जैसी खगोलीय स्थिति चंद्रमा और पृथ्वी के भ्रमण तलों की सम रेखा के दोनों छोरों पर सूर्य की पराबैगनी किरणें कुछ चंद्र सतह से परावर्तित तथा कुछ गोलीय अपवर्तित होती हुई, पृथ्वी पर पुन: सामान्य से अधिक मात्रा में पहुँच जाती हैं। वायुमंडल के स्तरों से आवर्तित होती हुई, सूर्यास्त तथा सूर्योदय को यह और भी सघन हो जाती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह घटना कार्तिक तथा चैत्र मास की अमावस्या के छ: दिन उपरान्त आती है। ज्योतिषीय गणना पर आधारित होने के कारण इसका नाम और कुछ नहीं, बल्कि छठ पर्व ही रखा गया है।

4. छठ पर्व किस प्रकार मनाते हैं?
यह पर्व चार दिनों का है। भैयादूज के तीसरे दिन से यह आरम्भ होता है। पहले दिन सेन्धा नमक, घी से बना हुआ अरवा चावल और कद्दू की सब्जी प्रसाद के रूप में ली जाती है। अगले दिन से उपवास आरम्भ होता है। व्रति दिनभर अन्न-जल त्याग कर शाम करीब ७ बजे से खीर बनाकर, पूजा करने के उपरान्त प्रसाद ग्रहण करते हैं, जिसे खरना कहते हैं। तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य यानी दूध अर्पण करते हैं। अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाते हैं। पूजा में पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है; लहसून, प्याज वर्जित होता है। जिन घरों में यह पूजा होती है, वहाँ भक्तिगीत गाये जाते हैं।अंत में लोगो को पूजा का प्रसाद दिया जाता हैं।

5. उत्सव का स्वरूप
छठ पूजा चार दिवसीय उत्सव है। इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को तथा समाप्ति कार्तिक शुक्ल सप्तमी को होती है। इस दौरान व्रतधारी लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं। इस दौरान वे पानी भी ग्रहण नहीं करते।

5.1. उत्सव का स्वरूप नहाय खाय
छठ पर्व का पहला दिन जिसे ‘नहाय-खाय’ के नाम से जाना जाता है,उसकी शुरुआत चैत्र या कार्तिक महीने के चतुर्थी कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होता है ।सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र किया जाता है। उसके बाद व्रती अपने नजदीक में स्थित गंगा नदी,गंगा की सहायक नदी या तालाब में जाकर स्नान करते है। व्रती इस दिन नाखनू वगैरह को अच्छी तरह काटकर, स्वच्छ जल से अच्छी तरह बालों को धोते हुए स्नान करते हैं। लौटते समय वो अपने साथ गंगाजल लेकर आते है जिसका उपयोग वे खाना बनाने में करते है । वे अपने घर के आस पास को साफ सुथरा रखते है । व्रती इस दिन सिर्फ एक बार ही खाना खाते है । खाना में व्रती कद्दू की सब्जी,मुंग चना दाल, चावल का उपयोग करते है.तली हुई पूरियाँ पराठे सब्जियाँ आदि वर्जित हैं. यह खाना कांसे या मिटटी के बर्तन में पकाया जाता है। खाना पकाने के लिए आम की लकड़ी और मिटटी के चूल्हे का इस्तेमाल किया जाता है। जब खाना बन जाता है तो सर्वप्रथम व्रती खाना खाते है उसके बाद ही परिवार के अन्य सदस्य खाना खाते है ।

5.2. उत्सव का स्वरूप खरना और लोहंडा
छठ पर्व का दूसरा दिन जिसे खरना या लोहंडा के नाम से जाना जाता है,चैत्र या कार्तिक महीने के पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन व्रती पुरे दिन उपवास रखते है. इस दिन व्रती अन्न तो दूर की बात है सूर्यास्त से पहले पानी की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करते है। शाम को चावल गुड़ और गन्ने के रस का प्रयोग कर खीर बनाया जाता है। खाना बनाने में नमक और चीनी का प्रयोग नहीं किया जाता है। इन्हीं दो चीजों को पुन: सूर्यदेव को नैवैद्य देकर उसी घर में ‘एकान्त करते हैं अर्थात् एकान्त रहकर उसे ग्रहण करते हैं। परिवार के सभी सदस्य उस समय घर से बाहर चले जाते हैं ताकी कोई शोर न हो सके। एकान्त से खाते समय व्रती हेतु किसी तरह की आवाज सुनना पर्व के नियमों के विरुद्ध है।
पुन: व्रती खाकर अपने सभी परिवार जनों एवं मित्रों-रिश्तेदारों को वही ‘खीर-रोटी का प्रसाद खिलाते हैं। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को खरना कहते हैं। चावल का पिठ्ठा व घी लगी रोटी भी प्रसाद के रूप में वितरीत की जाती है। इसके बाद अगले 36 घंटों के लिए व्रती निर्जला व्रत रखते है। मध्य रात्रि को व्रती छठ पूजा के लिए विशेष प्रसाद ठेकुआ बनाती है ।

5.3. उत्सव का स्वरूप संध्या अर्घ्य
छठ पर्व का तीसरा दिन जिसे संध्या अर्घ्य के नाम से जाना जाता है,चैत्र या कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है। पुरे दिन सभी लोग मिलकर पूजा की तैयारिया करते है। छठ पूजा के लिए विशेष प्रसाद जैसे ठेकुआ, चावल के लड्डू जिसे कचवनिया भी कहा जाता है, बनाया जाता है । छठ पूजा के लिए एक बांस की बनी हुयी टोकरी जिसे दउरा कहते है में पूजा के प्रसाद,फल डालकर देवकारी में रख दिया जाता है। वहां पूजा अर्चना करने के बाद शाम को एक सूप में नारियल,पांच प्रकार के फल,और पूजा का अन्य सामान लेकर दउरा में रख कर घर का पुरुष अपने हाथो से उठाकर छठ घाट पर ले जाता है। यह अपवित्र न हो इसलिए इसे सर के ऊपर की तरफ रखते है। छठ घाट की तरफ जाते हुए रास्ते में प्रायः महिलाये छठ का गीत गाते हुए जाती है
नदी या तालाब के किनारे जाकर महिलाये घर के किसी सदस्य द्वारा बनाये गए चबूतरे पर बैठती है। नदी से मिटटी निकाल कर छठ माता का जो चौरा बना रहता है उस पर पूजा का सारा सामान रखकर नारियल चढाते है और दीप जलाते है। सूर्यास्त से कुछ समय पहले सूर्य देव की पूजा का सारा सामान लेकर घुटने भर पानी में जाकर खड़े हो जाते है और डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देकर पांच बार परिक्रमा करते है।
सामग्रियों में, व्रतियों द्वारा स्वनिर्मित गेहूं के आटे से निर्मित ठेकुआ सम्मिलित होते हैं। यह ठेकुआ इसलिए कहलाता है क्योंकि इसे काठ के एक विशेष प्रकार के डिजाइनदार फर्म पर आटे की लुगधी को ठोकर बनाया जाता है। उपरोक्त पकवान के अतिरिक्त कार्तिक मास में खेतों में उपजे सभी नए कन्द-मूल, फलसब्जी, मसाले व अन्नादि यथा गन्ना, ओल, हल्दी, नारियल, नींबूबड़ा, पके केले आदि चढ़ाए जाते हैं। ये सभी वस्तुएं साबूत बिना कटे टूटे ही अर्पित होते हैं। इसके अतिरिक्त दीप जलाने हेतु,नए दीपक,नई बत्तियाँ व घी ले जाकर घाट पर दीपक जलाते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण अन्न जो है वह है कुसही केराव के दानें हल्का हरा काला, मटर से थोड़ा छोटा दाना हैं जो टोकरे में लाए तो जाते हैं पर सांध्य अर्घ्य में सूरजदेव को अर्पित नहीं किए जाते। इन्हें टोकरे में कल सुबह उगते सूर्य को अर्पण करने हेतु सुरक्षित रख दिया जाता है। बहुत सारे लोग घाट पर रात भर ठहरते है वही कुछ लोग छठ का गीत गाते हुए सारा सामान लेकर घर आ जाते है और उसे देवकरी में रख देते है ।

5.4. उत्सव का स्वरूप उषा अर्घ्य
चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उदियमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। सूर्योदय से पहले ही व्रती लोग घाट पर उगते सूर्यदेव की पूजा हेतु पहुंच जाते हैं और शाम की ही तरह उनके पुरजन-परिजन उपस्थित रहते हैं। संध्या अर्घ्य में अर्पित पकवानों को नए पकवानों से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है परन्तु कन्द, मूल, फलादि वही रहते हैं। सभी नियम-विधान सांध्य अर्घ्य की तरह ही होते हैं। सिर्फ व्रती लोग इस समय पूरब की ओर मुंहकर पानी में खड़े होते हैं व सूर्योपासना करते हैं। पूजा-अर्चना समाप्तोपरान्त घाट का पूजन होता है। वहाँ उपस्थित लोगों में प्रसाद वितरण करके व्रती घर आ जाते हैं और घर पर भी अपने परिवार आदि को प्रसाद वितरण करते हैं। व्रति घर वापस आकर गाँव के पीपल के पेड़ जिसको ब्रह्म बाबा कहते हैं वहाँ जाकर पूजा करते हैं। पूजा के पश्चात् व्रति कच्चे दूध का शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करते हैं जिसे पारण या परना कहते हैं। व्रती लोग खरना दिन से आज तक निर्जला उपवासोपरान्त आज सुबह ही नमकयुक्त भोजन करते हैं।

6. व्रत
छठ उत्सव के केंद्र में छठ व्रत है जो एक कठिन तपस्या की तरह है। यह छठ व्रत अधिकतर महिलाओं द्वारा किया जाता है; कुछ पुरुष भी इस व्रत रखते हैं। व्रत रखने वाली महिलाओं को परवैतिन कहा जाता है। चार दिनों के इस व्रत में व्रति को लगातार उपवास करना होता है। भोजन के साथ ही सुखद शैय्या का भी त्याग किया जाता है। पर्व के लिए बनाये गये कमरे में व्रति फर्श पर एक कम्बल या चादर के सहारे ही रात बिताती हैं। इस उत्सव में शामिल होने वाले लोग नये कपड़े पहनते हैं। जिनमें किसी प्रकार की सिलाई नहीं की गयी होती है व्रति को ऐसे कपड़े पहनना अनिवार्य होता है। महिलाएँ साड़ी और पुरुष धोती पहनकर छठ करते हैं। ‘छठ पर्व को शुरू करने के बाद सालों साल तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित महिला इसके लिए तैयार न हो जाए। घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता है।’
ऐसी मान्यता है कि छठ पर्व पर व्रत करने वाली महिलाओं को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। पुत्र की चाहत रखने वाली और पुत्र की कुशलता के लिए सामान्य तौपर महिलाएँ यह व्रत रखती हैं। पुरुष भी पूरी निष्ठा से अपने मनोवांछित कार्य को सफल होने के लिए व्रत रखते हैं।

7. सूर्य पूजा का संदर्भ
छठ पर्व मूलतः सूर्य की आराधना का पर्व है, जिसे हिन्दू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। हिन्दू धर्म के देवताओं में सूर्य ऐसे देवता हैं जिन्हें मूर्त रूप में देखा जा सकता है।
सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण ऊषा और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर दोनों का नमन किया जाता है।

8. सूर्योपासना की परम्परा
भारत में सूर्योपासना ऋगवेद काल से होती आ रही है। सूर्य और इसकी उपासना की चर्चा विष्णु पुराण, भगवत पुराण, ब्रह्मा वैवर्त पुराण आदि में विस्तार से की गयी है। मध्य काल तक छठ सूर्योपासना के व्यवस्थित पर्व के रूप में प्रतिष्ठित हो गया, जो अभी तक चला आ रहा है।

8.1. सूर्योपासना की परम्परा देवता के रूप में
सृष्टि और पालन शक्ति के कारण सूर्य की उपासना सभ्यता के विकास के साथ विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग रूप में प्रारम्भ हो गयी, लेकिन देवता के रूप में सूर्य की वन्दना का उल्लेख पहली बार ऋगवेद में मिलता है। इसके बाद अन्य सभी वेदों के साथ ही उपनिषद् आदि वैदिक ग्रन्थों में इसकी चर्चा प्रमुखता से हुई है। निरुक्त के रचियता यास्क ने द्युस्थानीय देवताओं में सूर्य को पहले स्थान पर रखा है।

8.2. सूर्योपासना की परम्परा मानवीय रूप की कल्पना
उत्तर वैदिक काल के अन्तिम कालखण्ड में सूर्य के मानवीय रूप की कल्पना होने लगी। इसने कालान्तर में सूर्य की मूर्ति पूजा का रूप ले लिया। पौराणिक काल आते-आते सूर्य पूजा का प्रचलन और अधिक हो गया। अनेक स्थानों पर सूर्यदेव के मंदिर भी बनाये गये।

8.3. सूर्योपासना की परम्परा आरोग्य देवता के रूप में
पौराणिक काल में सूर्य को आरोग्य देवता भी माना जाने लगा था। सूर्य की किरणों में कई रोगों को नष्ट करने की क्षमता पायी गयी। ऋषि-मुनियों ने अपने अनुसन्धान के क्रम में किसी खास दिन इसका प्रभाव विशेष पाया। सम्भवत: यही छठ पर्व के उद्भव की बेला रही हो। भगवान कृष्ण के पौत्र शाम्ब को कुष्ठ रोग हो गया था। इस रोग से मुक्ति के लिए विशेष सूर्योपासना की गयी, जिसके लिए शाक्य द्वीप से ब्राह्मणों को बुलाया गया था।

9.1. पौराणिक और लोक कथाएँ रामायण से
एक मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की आराधना की। सप्तमी को सूर्योदय के समय पुनः अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था।

9.2. पौराणिक और लोक कथाएँ महाभारत से
एक अन्य मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्यदेव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे। वह प्रतिदिन घण्टों कमर तक पानी में ख़ड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देते थे। सूर्यदेव की कृपा से ही वे महान योद्धा बने थे। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है।
कुछ कथाओं में पांडवों की पत्नी द्रौपदी द्वारा भी सूर्य की पूजा करने का उल्लेख है। वे अपने परिजनों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना और लम्बी उम्र के लिए नियमित सूर्य पूजा करती थीं।

9.3. पौराणिक और लोक कथाएँ पुराणों से
एक कथा के अनुसार राजा प्रियवद को कोई संतान नहीं थी, तब महर्षि कश्यप ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराकर उनकी पत्नी मालिनी को यज्ञाहुति के लिए बनायी गयी खीर दी। इसके प्रभाव से उन्हें पुत्र हुआ परन्तु वह मृत पैदा हुआ। प्रियवद पुत्र को लेकर श्मशान गये और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे। उसी वक्त ब्रह्माजी की मानस कन्या देवसेना प्रकट हुई और कहा कि सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं षष्ठी कहलाती हूँ। हे! राजन् आप मेरी पूजा करें तथा लोगों को भी पूजा के प्रति प्रेरित करें। राजा ने पुत्र इच्छा से देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी।

10. सामाजिक/सांस्कृतिक महत्त्व
छठ पूजा का सबसे महत्त्वपूर्ण पक्ष इसकी सादगी पवित्रता और लोकपक्ष है। भक्ति और आध्यात्म से परिपूर्ण इस पर्व में बाँस निर्मित सूप, टोकरी, मिट्टी के बर्त्तनों, गन्ने का रस, गुड़, चावल और गेहूँ से निर्मित प्रसाद और सुमधुर लोकगीतों से युक्त होकर लोक जीवन की भरपूर मिठास का प्रसार करता है।
शास्त्रों से अलग यह जन सामान्य द्वारा अपने रीति-रिवाजों के रंगों में गढ़ी गयी उपासना पद्धति है। इसके केंद्र में वेद, पुराण जैसे धर्मग्रन्थ न होकर किसान और ग्रामीण जीवन है। इस व्रत के लिए न विशेष धन की आवश्यकता है न पुरोहित या गुरु के अभ्यर्थना की। जरूरत पड़ती है तो पास-पड़ोस के सहयोग की जो अपनी सेवा के लिए सहर्ष और कृतज्ञतापूर्वक प्रस्तुत रहता है। इस उत्सव के लिए जनता स्वयं अपने सामूहिक अभियान संगठित करती है। नगरों की सफाई, व्रतियों के गुजरने वाले रास्तों का प्रबन्धन, तालाब या नदी किनारे अर्घ्य दान की उपयुक्त व्यवस्था के लिए समाज सरकार के सहायता की राह नहीं देखता। इस उत्सव में खरना के उत्सव से लेकर अर्ध्यदान तक समाज की अनिवार्य उपस्थिति बनी रहती है। यह सामान्य और गरीब जनता के अपने दैनिक जीवन की मुश्किलों को भुलाकर सेवा-भाव और भक्ति-भाव से किये गये सामूहिक कर्म का विराट और भव्य प्रदर्शन है।

11. छठ गीत
लोकपर्व छठ के विभिन्न अवसरों पर जैसे प्रसाद बनाते समय, खरना के समय, अर्घ्य देने के लिए जाते हुए, अर्घ्य दान के समय और घाट से घर लौटते समय अनेकों सुमधुऔर भक्ति-भाव से पूर्ण लोकगीत गाये जाते हैं।
केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय
उगु न सुरुज देव भइलो अरग के बेर।
सेविले चरन तोहार हे छठी मइया। महिमा तोहर अपार।
निंदिया के मातल सुरुज अँखियो न खोले हे।
चार कोना के पोखरवा
हम करेली छठ बरतिया से उनखे लागी।
काँच ही बाँस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए
इस गीत में एक ऐसे तोते का जिक्र है जो केले के ऐसे ही एक गुच्छे के पास मंडरा रहा है। तोते को डराया जाता है कि अगर तुम इस पर चोंच मारोगे तो तुम्हारी शिकायत भगवान सूर्य से कर दी जाएगी जो तुम्हें नहीं माफ करेंगे, पर फिर भी तोता केले को जूठा कर देता है और सूर्य के कोप का भागी बनता है। पर उसकी भार्या सुगनी अब क्या करे बेचारी? कैसे सहे इस वियोग को? अब तो सूर्यदेव उसकी कोई सहायता नहीं कर सकते, उसने आखिर पूजा की पवित्रता जो नष्ट की है।
केरवा जे फरेला घवद से ओह पर सुगा मेड़राय
उ जे खबरी जनइबो अदिक सूरज से सुगा देले जुठियाए
उ जे मरबो रे सुगवा धनुक से सुगा गिरे मुरछाये
उ जे सुगनी जे रोये ले वियोग से आदित होइ ना सहाय देव होइ ना सहाय
काँच ही बाँस के बहँगिया, बहँगी लचकति जाए. बहँगी लचकति जाए. बात जे पुछेले बटोहिया बहँगी केकरा के जाए? बहँगी केकरा के जाए? तू त आन्हर हउवे रे बटोहिया, बहँगी छठी माई के जाए. बहँगी छठी माई के जाए. काँच ही बाँस के बहँगिया, बहँगी लचकति जाए. बहँगी लचकति जाए.
केरवा जे फरेला घवद से ओह पर सुगा मेंड़राय. ओह पर सुगा मेंड़राय. खबरी जनइबो अदित से सुगा देले जूठियाय सुगा देले जूठियाय. ऊ जे मरबो रे सुगवा धनुष से सुगा गिरे मुरछाय. सुगा गिरे मुरछाय. केरवा जे फरेला घवद से ओह पर सुगा मेंड़राय. ओह पर सुगा मेंड़राय.
पटना के घाट पर नारियर नारियर किनबे जरूर. नारियर किनबो जरूर. हाजीपुर से केरवा मँगाई के अरघ देबे जरूर. अरघ देबे जरुर. आदित मनायेब छठ परबिया वर मँगबे जरूर. वर मँगबे जरूर. पटना के घाट पर नारियर नारियर किनबे जरूर. नारियर किनबो जरूर. पाँच पुतर, अन, धन, लछमी, लछमी मँगबे जरूर. लछमी मँगबे जरूर. पान, सुपारी, कचवनिया छठ पूजबे जरूर. छठ पूजबे जरूर. हियरा के करबो रे कंचन वर मँगबे जरूर. वर मँगबे जरूर. पाँच पुतर, अन, धन, लछमी, लछमी मँगबे जरूर. लछमी मँगबे जरूर. पुआ पकवान कचवनिया सूपवा भरबे जरूर. सूपवा भरबे जरूर. फल-फूल भरबे दउरिया सेनूरा टिकबे जरूर. सेनूरा टिकबे जरुर. उहवें जे बाड़ी छठी मईया आदित रिझबे जरूर. आदित रिझबे जरूर. काँच ही बाँस के बहँगिया, बहँगी लचकति जाए. बहँगी लचकति जाए. बात जे पुछेले बटोहिया बहँगी केकरा के जाए? बहँगी केकरा के जाए? तू त आन्हर हउवे रे बटोहिया, बहँगी छठी माई के जाए. बहँगी छठी माई के जाए.

12. तिथि
दीपावली के छठे दिन से शुरू होने वाला छठ का पर्व चार दिनों तक चलता है। इन चारों दिन श्रद्धालु भगवान सूर्य की आराधना करके वर्षभर सुखी, स्वस्थ और निरोगी होने की कामना करते हैं। चार दिनों के इस पर्व के पहले दिन घर की साफ-सफाई की जाती है।

13. छठ पूजा और बिहारवासियों की पहचान
छठ पूजा को देश के कई हिस्सों में बिहाऔर उत्तर प्रदेश से आये उत्तर भारतीय आर्य लोगों की पहचान के रूप में देखा जाता रहा है। यही कारण है कि महाराष्ट्र में शिवसेना और उससे टूटकर अलग हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता कई बार इसका विरोध कर चुके हैं और इस पर्व को एक प्रकार के शक्ति प्रदर्शन का नाम दे चुके हैं।

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क्या आप जानते हैं कि छठ पूजा का प्रसाद सिर्फ.

छठ का महापर्व 31 अक्टूबर यानी आज से शुरू हो गया है। कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से प्रारम्भ होकर सप्तमी तक चलने वाली चार दिवसीय छठ पूजा मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार,झारखण्ड,​पूर्वी उत्तरप्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में. छठ पूजा: कबहुँ ना छूटी छठि मइया Bh. उगते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा का अनुष्ठान संपन्न.आज उगते हुए सूर्य देवता को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पूजा का चार दिन का अनुष्ठान संपन्न हो गया.गंगा घाटों पर एकसाथ सुबह 6बजकर 34 मिनट पर लाखों व्रतियों द्वारा. छठ पूजा जानें कब और कैसे हुई इस पर्व की शुरुआत in. NW Desk: चार दिनों तक मनाये जाने वाला छठ महापर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक चलता है. इसमें पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य की पूजा और फिर अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अर्ध्य. छठ पूजा 2019 Chhath Puja in Hindi निबंध. Jabalpur News in Hindi: छठ पूजा में शरीऔर मन को पूरी तरह साधना पड़ता है, इसलिए इस पर्व को हठयोग भी कहा जाता है.

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डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे रोगियों को प्रदूषण बढ़ने से सांस लेने में तकलीफ, अस्थमा अटैक के लक्षण बढ़ जाते हैं. ये भी पढ़ें: VIDEO: छठ पूजा के दौरान कानपुर में लगे बार बालाओं के ठुमके. News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए. इन भोजपुरी गानों के बिना अधूरी है छठ पूजा, सुनिए. वहीं हमारे देश हर पर्व को बड़े ही उल्लासपूर्वक तकीके से मनाया जाता है। ऐसे में दिवाली diwali के बाद अब लोग छठ पूजा ​chhath की तैयारी में जुटे हुए हैं। हालांकि ये पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है लेकिन बिहार में इस पर्व का महत्तव. Chhat puja:जानिए चार दिवसीय छठ पूजा के बारे में खास. प्रार्थना तथा धार्मिक अनुष्ठान, पूजा और प्रसाद सहित, गंगा में स्नान और उपवास. जानिए छठ पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक Amar Ujala. डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे रोगियों को प्रदूषण बढ़ने से सांस लेने में तकलीफ, अस्थमा अटैक के लक्षण बढ़ जाते हैं. ये भी पढ़ें: VIDEO: छठ पूजा के दौरान कानपुर में लगे बार बालाओं के ठुमके. News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए Следующая Войти Настройки.

छठ पूजा में चढ़ाये जाने वाले प्रसाद का वैज्ञानिक.

छठ पूजा – संयुक्त आदेश 2019. शीर्षक, दिनांक, View Download. छठ पूजा – संयुक्त आदेश 2019, 30 10 2019, देखें 7 MB. वेबसाइट नीतियां मदद हमसे संपर्क करें फ़ीडबैक. Content Owned by District Administration. © लखीसराय, रास्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र,. छठ पूजा Jagran Josh. के क्रिकेट वर्ल्ड कप के मैचों की पूरी कहानी जरूर देखे: छपरा के कलाकारों का जबरदस्त छठ पूजा गीत और कहानी. November 4, 2018 0 जरूर देखे: छपरा के कलाकारों का जबरदस्त छठ पूजा गीत और कहानी Bhojpuri Folk Song: भोजपुरी लोकगीत में जीवन. इसलिए की जाती है छठ पूजा, आप भी जानें महत्व Patrika. धर्म न्यूज़:सूर्य और छठी मैया को समर्पित त्योहार छठ पूजा ​Chhath Puja को बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में लोग उपवास और पूजा कर सूर्य देव का. शेख खालिद बिन खलीफा को हाल ही में किस देश का. छठ पूजा भगवान सूर्य को समर्पित है। बिहाऔर पूर्वांचल के निवासी इस दिन को विशेष श्रद्धाभाव से मनाते हैं। छठ पर्व पर वे जहां भी होते हैं, सूर्य भगवान की पूजा करना नहीं भूलते। चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व बड़ा ही कठिन है। Chhath. Trends Medhaj News. लोक आस्था के महापर्व छठ का हिंदू धर्म में अलग महत्व है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें ना केवल उदयाचल सूर्य की पूजा की जाती है बल्कि अस्ताचलगामी सूर्य को भी पूजा जाता है। महापर्व के दौरान हिंदू धर्मावलंबी भगवान सूर्य देव को जल अर्पित कर.

Chhath Puja 2019 Date: छठ पूजा आज से हुई शुरू Jansatta.

कैमूर बिहार । बिहार सहित पूरे देश में महापर्व छठ व्रत की शुरुआत हो चुकी है। शहर हो या गांव कोई भी इस व्रत से अछूता नहीं है। इस पर्व को लेकर लोगों के अंदर काफी उत्‍साह नजर आ रहा है। लोगों ने अपने आसपा. छठ पूजा Chhath Puja in Hindi A. छठ पूजा की सामग्री बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। जिसकी पहले से ही लिस्ट बनाना जरूरी होता है ताकि व्रत के समय किसी परेशानी का सामना ना करना पड़े। देख लें पूरी लिस्ट।. कब है छठ पूजा, नहाय खाय से लेकर Navbharat Times. छठ पूजा FOLLOW. हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि यानी दिवाली से ठीक 6 दिन बाद छठ पूजा का पर्व मनाया जाता है। हर साल अक्टूबर से नवंबर महीने के बीच यह पर्व पड़ता है। छठ पूजा को मुख्य रूप से बिहार के लोग ही.

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Опубликовано: 2 нояб. 2019 г. छठ पूजा 2019: नहीं किया पूजा में इनका इस्तेमाल तो. छठ पर्व, छठ या षष्‍ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। कहा जाता है यह पर्व. B BrandBharat Brand Bharat BrandBihar Brand. चार दिनों तक चलने वाला महापर्व छठ पूजा की धूम हर तरफ मची हुई है। भगवान सूर्य की पूजा का महापर्व छठ पूजा के लिए अर्घ्य का आज पहला दिन था और कल सुबह सुबह भगवान सूर्य को अर्घ्य के साथ इस महापर्व का समापन हो जाएगा।.

बिहार Catch Hindi.

प्रत्येक वर्ष दिवाली के पूरे 6 दिन बाद छठ पर्व मनाया जाता है जिस दौरान भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। इस बार छठ का यह भव्य त्यौहार 31 अक्टूबर से शुरू हो रहा है जिसका समापन 2 नवंबर को होगा।. Delhi Assembly election 2020 Home Minister Amit Shah Target to. छठ पूजा करने वाली महिलाओं के लिए स्थायी घाट बनवाएंगे. शाह ने पूर्वांचल कार्ड खेलते हुए कहा, केजरीवाल ने पूर्वांचल के लोगों का काफी अपमान किया है. वो कहते हैं पांच सौ रूपये का टिकट लेकर आये हैं. यह अपमान हैं. हमारे गुजरात के. छठ पूजा का दूसरा दिन, जानिए क्या है खरना का. छठ पूजा एक प्राचीन महोत्सव है जिसे दिवाली के बाद छठे दिन मनाया जाता है। छठ पूजा को सूर्य छठ या डाला छठ के नाम से भी संबोधित किया जाता है। छठ पूजा को बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत देश के विभिन्न महानगरों.

छठ पूजा – संयुक्त आदेश 2019 जिला लखीसराय की.

सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित छठ पूजा का त्यौहार 2 नवंबर 2019 को है। आइए इस ख़बर के माध्यम से जानते हैं कि छठ पूजा 2019 का मुहूर्त और इसकी पूजा विधि है। Read latest hindi news ताजा हिन्दी समाचार on छठ पूजा 2019, chhath puja, chhath 2019. छठ पूजा पर अनमोल विचार. छठ पूजा हिन्दू धर्म का प्रसिद्द त्यौहार है जो की भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है यह छठ पूजा भगवान सूर्य और माँ छठी के आराधना का पर्व है जो की उगते हुए सूर्य और डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता. छठ पूजा 2019: जानें छठ पूजा, नहाय खाय से लेकर. Wednesday, February 5, 2020. Video: सरस्‍वती पूजा के लिए महिला को नहीं मिले पंडित, तो राह चलते पुजारी को ऐसे जबरन खींचकर ले जाने लगी. Thursday उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चार दिवसीय छठ महापर्व संपन्न. गोवर्धन अन्नकूट पूजा विधि.

Puja: Latest Puja News and Updates, Videos, Photos, Images and.

जानिए छठ पूजा के बारे में, 2019 में छठ पूजा की तारीख, इतिहास, उत्पत्ति, छठ पूजा कथा, परंपरा, रीति रिवाज, पूजा के लाभ तथा छठ पूजा का महत्व। Chhath Puja in Hindi. Top 10 Bhojpuri Holi Song 2020 Bihar feed. छठ पूजा हिन्दू धर्म में छठ पर्व का अत्यंत महत्व है और पुरुष एवं स्त्री एक सामान रूप से इस पर्व को मनाते हैं। आइये जानते हैं छठ व्रत की पूजा व व्रत विधि।.

क्यों मनाया जाता है छठ पर्व, कैसे होती है पूजा?.

Продолжительность: 6:51. भगवान इंद्र के लिए यज्ञ करवाए सरकार, वह सब ठीक कर. Продолжительность: 0:47. छठ पूजा की तिथि, विधि और शुभ मुहूर्त madhya pradesh. Chhath Puja 2019: Puja Timing, Puja Vidhi, Subh Muhurat, Significance, Chhathi Maiya Geet and Katha: छठ पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है. इस खास त्योहार की शुरूआत नहाय खाय से होती है.

छठ पूजा लेटेस्ट न्यूज़, इनफार्मेशन, आर्टिकल्स.

छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं! On the auspicious occasion of Chhath Puja, I convey my heartiest greetings and best wishes to all my brothers and sisters. May the Sun God shower blessings on one and all to usher peace, prosperity, good health, brotherhood and lots of positive energy. Happy Chhath Puja!. मुंबई विभिन्न संस्कृतियों, त्यौहारों, परंपराओं. छठ पूजा Chhath Puja 2019: छठ पर्व 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक चलेगा। छठी मइया Chhathi Maiya को अर्घ्य देने के लिए भक्त 2 नवंबर की शाम पानी में उतरेंगे। इसके बाद 3 नवंबर की सुबह उगते हुए सूरज को अर्घ्य देकर छठ पूजा Chhath Puja का समापन किया. छठ पूजा 2019: शुभ मुहूर्त, नहाय खाय और पकवानगली. Happy Chhath Puja 2019 पर जानिए क्यों मनाया जाता है छठ पर्व. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए कैलेंडर 2020 के. छठ पूजा 2019 – नवरात्रि, दिवाली की तरह ही छठ पूजा भी हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। खासकर, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई वाले क्षेत्रों में छठ पूजा की अनूठी छठा देखने को मिलती है। छठ पूजा मुख्य रूप से.

महापर्व छठ पूजा का है विशेष महत्व, जानें Amar Ujala.

Chhath Puja 2019 Know All The Details About Chhath Puja Rituals And Puja Date: दिवाली पर्व के ठीक छठवें दिन सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा का त्योहार मनाया जाता है। इस पूजा की तैयारी जोरो ​शोरो से चल रही है। Read latest hindi news ताजा हिन्दी. छठ पूजा Lokmat News Hindi. Jitiya Vrat 2019: जिउतिया पूजा की जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा. Sep 22, 2019, 7:00 PM IST. आज से पितृ पक्ष शुरु, न करें यह काम छठ पूजा दूसरा दिन: व्रतियों ने विधि विधान से किया खरना. Nov 12, 2018, 8:25 PM IST. हाथों से बनाया किला. Nov 12, 2018.

Chhath Pooja छठ पूजा व्रत विधि और शुभ Astroyogi.

हम आपको बता रहे हैं कि छठ पूजा में किन किन चीजों की जरूरत होती है. व्रत से पहले ही इन सामग्रियों का प्रबंध करने से पूजा करने में आसानी होगी. छठ पूजा से पहले जुटा लें ये सामग्री, व्रत Aaj Tak. अन्य रोचक प्रश्न. इन्वेस्ट इंडिया क्या है? केन्द्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री ने हाल ही में किस सरकारी कंपनी के कर्मचारियों के लिए SERVICE नामक स्वैच्छिक योजना लांच की है? भारत में छठ पूजा पर्व कब मनाया जाता है?. Chhath Puja Kab Hai 2019 छठ पूजा कब है, महत्व हरिभूमि. दिल्ली: छठ पूजा के अवसर पर आज पब्लिक और प्राइवेट स्कूल बंद रहेंगे अगर आप के पास पैसे कम हो तो सस्ते में घूमें ये देश Dhanteras 2018: सिर्फ 5 रुपए में बरसेगी आप पर माँ लक्ष्मी की कृपा FSSAI ने कहा मूंग मसूर दाल में है जहरीले केमिकल, दाल नहीं जहर. छठ पूजा शुरू होने से पहले ही घर ले आएं ये Hindi News. राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने छठ पूजा Chhath Puja की पूर्व संध्या पर बधाई दी है। अपने संदेश में उन्होंने कहा है छठ पूजा Chhath Puja के शुभ अवसर पर, मैं भारत और विदेश में रह रहे देशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। छठ पूजा.