करोना : फुटबॉलर “ मोनी “ की खस्ताहाल जिंदगी यूं तो प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती किन्तु बिहार ...

करोना : फुटबॉलर “ मोनी “ की खस्ताहाल जिंदगी
यूं तो प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती किन्तु बिहार प्रदेश के पश्चिमी चम्पारण जिला अंतर्गत नरकटियागंज अनुमंडल मुख्यालय स्थित हरदिया चौक की राज्यस्तरीय महिला फुटबॉल खिलाड़ी मोनी कुमारी की जिंदगी खस्ताहाल है । वैश्विक महामारी में जब चारों तरफ राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय स्तर के सभी खेलकूद बंद है ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों के लिए जिवन यापन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गयी है । ऐसे में परिवार को आर्थिक तंगी से उबारने के लिए लोगों के कपड़े धोकर एवं इस्त्री कर जिवन यापन करती यह राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी । पांच भाई बहनों में तिसरे स्थान की संतान मोनी के पिता प्रमोद बैठा धोबी समाज से आते हैं और लोगों के कपड़े धोना एवं इस्त्री कर रोजमर्रा की जिंदगी चलती है किन्तु इस करोना काल में हाट बाजार बंद रहने से काम काज भी प्रभावित रहा जिससे मोनी के पिता को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा । तब मोनी ने पापा के कामकाज में हाथ बंटाने का फैसला किया । मोनी के अनुसार इस पुशतैनी धंधे से परिवार को आर्थिक मदद मिलती है । किन्तु खेल भावना को जिवंत रखते हुए मोनी अपनी प्रैक्टिस घर पर ही नियमित रूप से जारी रखी । इस राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी को वर्ष 2018 में आसाम एवं डिब्रुगढ़ में खेलने का मौका मिला जबकि 2019 में उड़िसा एवं कटक में आयोजित अखिल भारतीय महिला फुटबॉल प्रतियोगिता में बिहार यूनिवर्सिटी के तरफ से हिस्सा लेने का मौका मिल चुका है । हलॉकि 2015 से मोनी राज्य स्तरीय फुटबॉल टूर्नामेंट में निरंतर खेलती रही है और अनगिनत ट्रैफी अपने टीम के लिए हासिल कर चुकी है । वर्तमान में मोनी आर्थिक तंगी के वावजूद हिन्दी से स्नातक की पढ़ाई जारी रखी हुई हैं । आर्थिक सहायता के बाबत मोनी के पिता बताते हैं कि सरकारी स्तर पर अभी कुछ भी हासिल नहीं हुआ है किन्तु स्थानीय स्तर पर अवश्य मदद मिलती रही है । मोनी का कहना है कि करोना जैसे वैश्विक महामारी में आय के जब सभी स्रोत बंद हो गये ऐसे में “स्वर्ग” के सचिव प्रेम कुमार दास द्वारा अवश्य आर्थिक मदद मिली । मोनी के कोच सुनील वर्मा बताते है कि बतौर खिलाड़ी मोनी काफी प्रतिभावान है । अपने उम्र के लड़कियों के बीच यह रोल मॉडल है । किन्तु अब तक सरकारी स्तर पर किसी प्रकार की सहायता प्राप्त नहीं हो सकी है । आवश्यकता है सरकारी स्तर पर इसे प्रोत्साहित कर नये मुकाम तक पहुंचाने की ताकी महिला सशक्तिकरण को बल मिल सके ।
आलेख संग्रहण : मुनेश कुमार सिन्हा उप संपादक,लोकचिंतन हिन्दी मासिक पत्रिका