Session Court या सत्र न्यायालय क्या है ?

आज के इस पोस्ट में आप विस्तारपूर्वक जानेंगे कि Session Court या सत्र न्यायालय क्या है ? इसके साथ ही यह कैसे काम करता है और आपको कब इस कोर्ट का दरवाजा खड़खड़ाना चाहिए ? इन सभी प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए आपको यह पोस्ट अंत तक पढ़नी चाहिए । Session Court meaning in Hindi का यह डिटेल गाइड अगर आपको पसंद आए तो शेयर अवश्य करें ।
जैसा कि आप जानते हैं कि हर देश की अपनी एक न्याय व्यवस्था होती है । इसमें court या न्यायालय अपनी प्रमुख भूमिका निभाते हैं । जब व्यक्ति हर जगह से निराश हो जाता है तो वह Court की ओर रुख करता है जहां उसे न्याय अवश्य मिलता है । हमारे देश में न्यायालयों को कुछ इस तरह बांटा गया है –
1. सुप्रीम कोर्ट2. हाई कोर्ट3. डिस्ट्रिक्ट कोर्ट4. लोअर कोर्ट5. ट्रिब्यूनल
इनमें ही District Level पर मौजूद सबसे बड़े Criminal Court को ही सत्र न्यायालय कहते हैं । तो चलिए जानते हैं session court meaning in Hindi के बारे में –

Session Court या सत्र न्यायालय क्या है ?

भारत में Session Court जिसे आमतौर पर सत्र न्यायालय के रूप में जाना जाता है । इसकी अध्यक्षता सत्र न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा की जाती है । न्यायाधीश की नियुक्ति राज्य के उच्च न्यायालय द्वारा की जाती है । यह आमतौर पर आपराधिक मामलों से संबंधित होता है । इसके न्यायाधीश किसी को मौत की सजा भी दे सकते हैं ।
सेशन कोर्ट जिला स्तर की सबसे बड़ी आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाला कोर्ट है । इन कोर्ट में ज्यादातर उन्हीं मामलों में सजा सुनाई जाती है जिनमें अपराधी को 7 साल या उससे अधिक की सजा दी जा सकती है । अधीनस्थ न्यायालय जिसे Subordinate Court भी कहते हैं , के पास Session Court से कम शक्तियां होती हैं और वे किसी अपराधी को मात्र 3 साल तक कि सजा सुना सकती हैं ।

Civil Court और Session Court में क्या अंतर है ?

एक सिविल कोर्ट सिविल कानून से संबंधित विवादों से निपटता है, जबकि एक सत्र न्यायालय आमतौर पर आपराधिक मामलों से संबंधित होता है । 366 (i) सीआरपीसी के अनुसार, सत्र न्यायालय किसी व्यक्ति को मृत्यु या उम्र कैद की सजा सुना सकते हैं । जबकि सिविल कोर्ट इतनी सजा नहीं दे सकते हैं ।
घरेलू कोर्ट जिसे Civil Court भी कहते हैं , सिर्फ घरेलू मामलों और Civil लॉ से जुड़े विवादों का निपटारा करता है तो वहीं Session Court आपराधिक मामलों जैसे हत्या , बलात्कार जैसे मामलों को देखता है । इस तरह आप difference between civil court and session court in Hindi समझ गए होंगे ।

जिला या सत्र न्यायालय का जज कैसे बनें ?

अगर आप जिला या सत्र न्यायालय का जज बनना चाहते हैं तो eligibility criteria है –

  1. आप कम से कम 7 साल तक लगातार वकील के रूप में कार्यरत रहे हों
  2. आप किसी भी राज्य या केंद्र सरकार में किसी भी नौकरशाही के पद पर न हों
  3. आपको हाईकोर्ट का जज recommendation दे

अगर आप ऊपर दिए तीनों Criterias को पूरा करते हैं तो आप जिला या सत्र न्यायालय के जज बन सकते हैं ।