गोलेंद्र पटेल की कविताएं

गोलेंद्र पटेल की कविताएं

1.
"जोंक"

रोपनी जब करते हैं कर्षित किसान ;

तब रक्त चूसते हैं जोंक!

चूहे फसल नहीं चरते

फसल चरते हैं

साँड और नीलगाय.....

चूहे तो बस संग्रह करते हैं

गहरे गोदामीय बिल में!

टिड्डे पत्तियों के साथ

पुरुषार्थ को चाट जाते हैं

आपस में युद्ध कर

काले कौए मक्का बाजरा बांट खाते हैं!

प्यासी धूप

पसीना पीती है खेत में

जोंक की भाँति!

अंत में अक्सर ही

कर्ज के कच्चे खट्टे कायफल दिख जाते हैं

सिवान के हरे पेड़ पर लटके हुए!

इसे ही कभी कभी ढोता है एक किसान

सड़क से संसद तक की अपनी उड़ान में!

2.

सावधान!

हे कृषक!

तुम्हारे केंचुओं को

काट रहे हैं - "केकड़े"

सावधान!

ग्रामीण योजनाओं के "गोजरे"

चिपक रहे हैं -

गाँधी के 'अंतिम गले'

सावधान!

विकास के "बिच्छुएँ"

डंक मार रहे हैं - 'पैरों तले'

सावधान!

श्रमिक!

विश्राम के बिस्तर पर मत सोना

डस रहे हैं - "साँप"

सावधान!

हे कृषका!

सुख की छाती पर

गिर रही हैं - "छिपकलियाँ"

सावधान!

श्रम के रस

चूस रहे हैं - "भौंरें"

सावधान!

फिलहाल बदलाव में

बदल रहे हैं - "गिरगिट नेतागण"

सावधान!

3.

किसान है क्रोध

निंदा की नज़र

तेज है

इच्छा के विरुद्ध भिनभिना रही हैं

बाज़ार की मक्खियाँ

अभिमान की आवाज़ है

एक दिन स्पर्द्धा के साथ

चरित्र चखती है

इमली और इमरती का स्वाद

द्वेष के दुकान पर

और घृणा के घड़े से पीती है पानी

गर्व के गिलास में

ईर्ष्या अपने

इब्न के लिए लेकर खड़ी है

राजनीति का रस

प्रतिद्वन्द्विता के पथ पर

कुढ़न की खेती का

किसान है क्रोध !

©गोलेन्द्र पटेल

गोलेन्द्र पटेल

जन्म स्थान : ग्राम-खजूरगाँव , पोस्ट-साहुपुरी , जिला-चंदौली , उत्तर प्रदेश , भारत , 221009,शिक्षा : काशी हिंदू विश्वविद्यालय का छात्र(हिंदी आनर्स),माता-उत्तम देवी ,पिता-नंदलाल , मो.नं. : 8429249326,ईमेल : corojivi@gmail.com