अहीर ( अभीर ) , यादव और गोप कौन है

गोपाभीरयादवा एकैव वंशजातीनाम् त्रतये। विशेषणा: वृत्तिभिश्च प्रवृत्तिभिर्वंशानां प्रकारा:सन्ति। अर्थ : गोप, अहीर , यादव ये सब एक ही वंश के सजातीय है। ये इनकी वृत्ति, जीवन जीने कि शैली और प्रवित्ति के अनुसार एक ही वंश के लोगों के विभिन्न विशेषण हैं। अहीर जाति क्या है? अर्थ : गोप, ( अभीर ) अहीर , यादव ये सब एक ही वंश के सजातीय है। ये इनकी वृत्ति, जीवन जीने कि शैली और प्रवित्ति के अनुसार एक ही वंश के लोगों के विभिन्न विशेषण हैं। क्या श्री कृष्ण अहीर थे? हां कृष्ण शुद्ध अहीर थे । वासुदेव और नन्द जी सगे चचेरे भाई थे । राजा देवामीढ़ जी के पुत्र थे पर्जन्य जी और शूरसेन जी - शूरसेन जी के पुत्र थे वासुदेव और पर्जन्य जी के पुत्र थे नन्द राय जी अर्थ : गोप, अहीर , यादव ये सब एक ही वंश के सजातीय है। ये इनकी वृत्ति, जीवन जीने कि शैली और प्रवित्ति के अनुसार एक ही वंश के लोगों के विभिन्न विशेषण हैं गोपाभीरयादवा एकैव वंशजातीनाम् त्रतये। विशेषणा: वृत्तिभिश्च प्रवृत्तिभिर्वंशानां प्रकारा:सन्ति। यादवों को गो पालक होनो से ही गोप कहा गया है | भागवत पुराण के दशम स्कन्ध के अध्याय प्रथम के श्लोक संख्या बासठ ( 10/1/62) पर वर्णित है| ______ नन्दाद्या ये व्रजे गोपा याश्चामीषां च योषितः । वृष्णयो वसुदेवाद्या देवक्याद्या यदुस्त्रियः ॥ ६२ ॥ ●☆ नन्द आदि यदुवंशीयों की वृष्णि की शाखा के व्रज में रहने वाले गोप और उनकी देवकी आदि स्त्रीयाँ |62| सर्वे वै देवताप्राया उभयोरपि भारत | ज्ञातयो बन्धुसुहृदो ये च कंसमनुव्ररता:।63|| हे भरत के वंशज जनमेजय ! ये सब यदुवंशी नन्द आदि गोप दौनों ही नन्द और वसुदेव सजातीय (सगे-सम्बन्धी)भाई और परस्पर सुहृदय (मित्र) हैं ! जो तुम्हारे सेवा में हैं| 63|| ( गोरखपुर गीताप्रेस संस्करण पृष्ठ संख्या 109).. ____________________ गर्गसंहिता में भी नीचे देखेें कि अहीरों या गोपों को यादव कहा है तं द्वारकेशं पश्यन्ति मनुजा ये कलौ युगे । सर्वे कृतार्थतां यान्ति तत्र गत्वा नृपेश्वर:| 40|| य: श्रृणोति चरित्रं वै गोलोक आरोहणं हरे: | मुक्तिं यदुनां गोपानां सर्व पापै: प्रमुच्यते | अन्वयार्थ ● हे राजन् (नृपेश्वर)जो (ये) मनुष्य (मनुजा) कलियुग में (कलौयुगे ) वहाँ जाकर ( गत्वा) उन द्वारकेश को (तं द्वारकेशं) कृष्ण को देखते हैं (पश्यन्ति) वे सभी कृतार्थों को प्राप्त होते हैं (सर्वे कृतार्थतां यान्ति)।40।। य: श्रृणोति चरित्रं वै गोलोक आरोहणं हरे: | मुक्तिं यदुनां गोपानां सर्व पापै: प्रमुच्यते | 41|| अन्वयार्थ ● जो (य:) हरि के (हरे: ) ● यादव गोपों के (यदुनां गोपानां )गोलोक गमन (गोलोकारोहणं ) चरित्र को (चरित्रं ) निश्चय ही (वै ) सुनता है (श्रृणोति ) वह मुक्ति को पाकर (मुक्तिं गत्वा) सभी पापों से (सर्व पापै: ) मुक्त होता है ( प्रमुच्यते ) इति श्रीगर्गसंहितायाम् अश्वमेधखण्डे राधाकृष्णयोर्गोलोकरोहणं नाम षष्टितमो८ध्याय | ( इस प्रकार गर्गसंहिता में अश्वमेधखण्ड का राधाकृष्णगोलोक आरोहणं नामक साठवाँ अध्याय ) | श्रीश्री राधाकृष्णगणोद्देश्य दीपिका " रचियता श्रीश्रीलरूपगोस्वामी ने भी अहीरों को यादव और गोप कहा जैसा कि राधा जी के सन्दर्भ में है ⬇ _____________________________________ आभीरसुतां (सुभ्रुवां) श्रेष्ठा राधा वृन्दावनेश्वरी | अस्या : शख्यश्च ललिता विशाखाद्या: सुविश्रुता: |83 |। _____________________________________ अहीरों की कन्यायों में राधा श्रेष्ठा है ; जो वृन्दावन की स्वामिनी है और ललिता , विशाखा आदि जिसकी सखीयाँ हैं |83|| क्या अहीर शूद्र है? नहीं , अहीर शूद्र नहीं है, पुराणों में वर्णित यदुवंशी क्षत्रिय, गोपालक वैश्य यहीं है। परन्तु यदुवंशी वर्ण व्यवस्था का पालन नहीं स्वीकारते । अहीर जाति में कर्म प्रधान होता है। यदुवंशी भागवत धर्म को मानने वाले लोग थे जिसे बाद मे वैष्णव सम्प्रदाय बना कर हिन्दू धर्म में मिला लिया गया। भागवत धर्म में वर्ण व्यवस्था का खण्डन किया गया था। इसीलिए यादव ( अहीर ) वर्ण व्यवस्था की किसी श्रेणी का पालन नहीं करते इनमें कर्म प्रधान होता है। अहीर / यादव / गोप भगवतेय हैं। अहीर जाति क्या है? क्या श्री कृष्ण अहीर थे? असली क्षत्रिय कौन है? क्या कृष्ण यादव थे? अहीर कितने प्रकार के होते हैं? यादवों के कितने गोत्र हैं? कृष्ण की जाति क्या है? यादवों का इतिहास क्या है? यादव का जन्म कब हुआ था? यादव के कुल गुरु कौन है? राजपूत का इतिहास क्या है? इतिहास में राजपूत शब्द पहली बार कब आया? राजपूत वंश का संस्थापक कौन था? राजपूत में कितनी जाति होती है?